अक्षत यौवना का कौमार्य भंग

हर भारतीय स्त्री और पुरुष की तरह मेरे मन में कौमार्य भंग को लेकर एक अजीब सी उत्तेजना थी. बावजूद इसके कि मैं काफी समय से एक जिगोलो की तरह काम कर रहा था. मुझे बमुश्किल से सिर्फ एक अक्षत चूत मिली थी. और संयोग से फिर उसी के सहयोग से मुझे एक और कौमार्य भंग का अवसर मिला………

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार!! मेरा नाम नमित है और मैं मुंबई में रहता हूँ. ऊपर वाले  ने कद काठी और रूप रंगत ऐसी दी है की मेरे लिंगराज को सम्भोग के लिए कभी भी चूतों की कमी नहीं रही. कॉलेज के समय से ही मैंने इस बात का फायदा उठाते हुए अपनी पॉकेट मनी का इंतजाम खुद से ही करना शुरू कर दिया था. कॉलेज की दो महिला प्रोफेसर आज भी मेरी सेवा का नियमित रूप से उपयोग करती हैं.

आज उन्ही पैसों से मैंने एक साइबर कैफ़े कम-ओपन रेस्टोरेंट खोल लिया है. अब तो मुझे कॉल बॉय की सर्विस के लिए ऑन लाइन रिक्वेस्ट भी आने लगी हैं. होता यूँ है की मेरी कुछ कस्टमर जिनमे ज्यादातर आंटी होती हैं वही मुझे नयी कस्टमर से मिलवा देती हैं. ये तरीका मुझे कुछ सुरक्षित भी लगता है. इन्ही में से मेरी एक कस्टमर का नाम निरंजना है. निरंजना मेरे ही कॉलेज से पढ़ी थी. वो पहली और अब तक की एकमात्र लड़की थी जिसका कौमार्य भंग करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था. बाकि सब तो पहले से ही खेली खायी हुयी थीं.

तकरीबन ६ महीनो के अन्तराल के बाद निरंजना का फ़ोन मेरे पास आया. हाय हेल्लो के बाद निरंजना ने बताया की उसकी एक शादीशुदा दोस्त निहारिका को मेरी सेवाओं की जरूरत है. रविवार की सुबह वो मिंग गार्डन रेस्टोरेंट में सुबह १० बजे मेरा इंतजार करेगी. नियत समय से १० मिनट पहले ही मैं वहां पहुँच गया. थोड़ी ही देर में मैंने देखा की निरंजना अकेले ही कार से उतारकर रेस्टोरेंट में प्रवेश कर रही है. मैंने जब उसे पूछा तो निरंजना ने कहा – अरे भाई!! बेसब्र न बनो. वो कार में ही है और यहाँ से सीधा अपने फार्म हाउस पे तुम्हे लेकर जाएगी. मैंने तुम्हारी फीस २५०० है, ये उसे पहले से ही बता दिया है. लेकिन एक बात का तुम्हे खासा ख्याल रखना होगा की वो अभी तक कुंवारी ही है.

ये सुनकर मैं चौंका और बोला- तुमने तो कहा था की वो शादी शुदा है?

निरंजना – हाँ! वो शादीशुदा ही है, लेकिन उसका पति नामर्द है और आज तक उसे यौन सुख नहीं दे पाया है. लेकिन वो बहुत अमीर है और इसी वजह से निहारिका उसे तलाक  भी नहीं देना चाहती है.

मैं – लेकिन तुमने उसे बता तो दिया है न की मेरी सर्विस 2 घंटे की है, इससे ज्यादा समय के अलग  से पैसे लगेंगे. एक बात और कि, मैं बिना कंडोम के कोई चुदाई नहीं करूँगा.

निरंजना – तुम पैसों की कोई फिक्र मत करो. मेरी ओर से फुल गारन्टी है.

अब हम दोनों रेस्टोरेंट से निकलकर कार की ओर बढ़े. प्लान ये था की निरंजना को उसके घर ड्राप करते हुए मैं और निहारिका उसके फार्म हाउस चले जायेंगे. कार का दरवाजा खोलते ही अन्दर बैठी निहारिका को देखते ही मेरी आखें खुली की खुली रह गयीं. क्या अनुपम सौंदर्य था. गहरे लाल रंग की टी शर्ट और ब्लैक जीन्स में वो गजब की लग रही थी. निहारिका सचमुच में निहारने लायक थी. इसकी चुदाई बल्कि पहली बार चुदाई का सुख तो मैं बिना पैसों के भी भोगने को तैयार हो जाता.

बहरहाल निरंजना को उसके घर ड्राप करते हुए निहारिका ने कार अपने फार्म हाउस की ओर दौड़ा दी. फार्म हाउस पे कोई नहीं था. अन्दर पहुच कर हम दोनों सीधा उसके बेड रूम में ही चले गए. बेडरूम का ए सी ऑन करते हुए निहारिका ने मुझे पानी पिलाया और जूस के लिए ऑफर किया तो मैंने मना कर दिया. मैंने निहारिका से कहा – तुमने पैसों के लिए सेक्स के सुख को छोड़ दिया?

निहारिका- तुम ये काम क्यों करते हो?

मैं – पैसे और सेक्स दोनों के लिए?

निहारिका- फिर तो मुझमे और तुममे कोई ज्यादा फर्क नहीं है? और जो फर्क होगा भी आज मिट जायेगा. इसलिए आज तुम मुझे खुश करो और मैं तुम्हे खुश करूंगी.

वास्तव में मेरे पास उसकी बात का कोई जवाब नहीं था. मैं उसकी ओर बढ़ता उसके पहले ही निहारिका ने अपनी टी शर्ट को उतार कर एक ओर रख दिया. काली ब्रा में उसका दूधिया शरीर क़यामत ढा रहा था. मैंने उसे अपने आगोश में लेकर उसके अधरों को चूसना शुरू किया. निहारिका पे वासना का ज्वर हावी होने लगा और वो भी मुझे बेतहाशा चूमने लगी.

मैंने अपनी शर्ट और जीन्स को उतारने के बाद निहारिका की जीन्स भी उतार दी. इसके बाद मैंने निहारिका को सफ़ेद चादर वाले बेड पे लिटा दिया. काली ब्रा पैंटी में निहारिका का यौवन मेरी आखों को चौधियां रहा था. ऊपर से उसके अक्षत यौवना होने का एहसास मेरे लंड में कुछ ज्यादा ही जोश भर रहा था.

बिस्तर पे जाकर मैंने स्वर्ग की अप्सरा की मानिन्द उस निहारिका के गालों पे चुम्बन लिया और उसकी पीठ के नीचे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल कर उसके स्तनों को आजाद कर दिया. उन गुलाबी पर्वतों पे चमकते भूरे निप्पल को देखकर एक नामर्द का भी लिंग खड़ा हो जाता फिर ये अभी तक चुदी क्यों नहीं? ये प्रश्न मेरे जहन में कौंध रहा था.

खैर मैंने निहारिका के चूचकों को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया. निहारिका का यौवन उन्माद और प्रखर हो रहा था. उसने अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को टटोलना शुरू कर दिया. मैंने भी उसे ज्यादा न तडपाते हुए अपना अंडरवियर उतार दिया. फिर उसकी पैंटी को भी उस संगमरमरी काया से विलग कर दिया. उस चिकनी गुलाबी चूत पे एक भी बाल नहीं थे. प्रथम सम्भोग के पूर्व की उसकी ये तैयारी मुझे पसंद आई. 69 की अवस्था में होकर मैंने उसकी चूत को चूसना शुरू किया. मेरी जीभ का स्पर्श पाते ही उसका रोम रोम कांप उठा. सिहरन से उसने मुझे जकड लिया और फिर मेरे लिंगराज को अपने होठों से लगा लिया.

निहारिका की चूत मेरी चुसाई से पूरी गीली हो चुकी थी और उसकी लंड चुसाई से मेरा लंड भी पर्याप्त कड़क हो चुका था. अब सम्भोग की वास्तविक प्रक्रिया की बारी थी.

निहारिका की दोनों टांगो को खोलते हुए मैंने उसके भगनाशे को अपनी उँगलियों से रगड़ना शुरू किया. निहारिका की उत्तेजना अपने शिखर पे पहुँच गयी थी. मैंने भी निहारिका की चूत के द्वार पे अपने बड़े लंड को रखा. होने वाले हमले की आशंका में निहारिका ने सर के नीचे पड़े तकिये को जोर से पकड़ लिया और होठों को भींच लिया. एक झटके में लंड का आधा हिस्सा चूत में घुस गया. गुलाबी चूत से लाल रक्त की बूंदे बाहर आ गयीं.

निहारिका ने भरसक प्रयत्न किया की उसकी चीख न निकले और कुछ हद तक वो अपनी चीख को दबा भी ले गयी, परन्तु उसकी आखों में आसूँ तैर गए. कुछ देर न हिलते हुए मैं वैसे ही पड़ा रहा. फिर जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने दूसरा धक्का लगाया. लंड चूत की गहराइयों तक पहुच गया, लेकिन इस बार निहारिका की चीख कानो को चीर गयी.

अब मैंने धीरे धीरे धक्कों को गति देना शुरू किया. कुछ ही देर में निहारिका भी संयत हो गयी. उसे भी वो आनंद आने लगा जिसके लिए वो तरस रही थी. कुल्हे उचका-उचका कर वो मेरा साथ देने लगी. 15 मिनट की चुदाई के दौरान मैं ये बिलकुल भूल गया की कंडोम तो मैंने पहना ही नहीं था. मैंने लंड को बाहर निकाला और उसपे कंडोम चढ़ा कर दुबारा चुदाई शुरू कर दी. अब तक निहारिका चरमोत्कर्ष पे पहुँच चुकी थी. अपना पानी झाड़ते समय उसने मुझे कस कर जकड लिया. मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और खुद भी उसके साथ ही झड़ गया.

निहारिका के चेहरे पे संतुष्टि के भाव आसानी से पढ़े जा सकते थे. आख़िरकार उसकी सुहागरात मन चुकी थी.

इसके बाद बाथरूम जाकर हम फ्रेश हुए. निहारिका ने मुझे मेरी फीस दी और अगले सप्ताहांत की रात उसके साथ ही गुजारने का वादा भी लिया. निहारिका का कौमार्य भंग करके मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैंने भी आज ही अपनी सुहागरात मनाई है……

 

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