अपनी अय्यासी के लिए भैया को पटाया भाग – 3

मैं काफी खूबसूरत थी और मेरा फिगर भी जबरदस्त था. इसी कारण मेरे भैया मुझ पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देते थे. वे मेरे हर काम में रोक – टोक करते रहते थे. इससे बचने के लिए मैं उन्हें पटाने लगी. एक दिन एग्जाम देने जाते समय मैंने उनकी पीठ पर अपने मम्मों को जम कर रगड़ा. इससे उन्हें मेरी नियत का अंदाज़ा हो गया था. लेकिन फिर भी मेरा काम नहीं हो पा रहा था…

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अब आगे…

ऐसे ही कुछ दिन बीते. फिर एक दिन मैंने पापा से ज़िद की और अपने लिए एक स्मार्टफोन ले लिया. शायद भैया अब मेरे ऊपर मेहरबान थे, इसलिए उन्होंने इसके लिए मुझे मना नहीं किया.

होली खत्म होने के बाद भैया वापस अपनी तैयारी के लिए इलाहाबाद चले गए. पापा भी ड्यूटी पर चले गए थे. अब घर पर मुझे कोई रोक – टोक नहीं थी. मैं मम्मी से बच कर दिन भर वासना में डूबी रहती. मैं ब्लू फ़िल्म देखती, अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ती. सारा दिन यही सब करती रहती.

मम्मी ज्यादा पढ़ी – लिखी थीं नहीं इसलिए उनसे झूठ बोलना आसान था. मैं उनसे कहती की पढ़ाई कर रही हूँ. कभी – कभी कहानी पढ़ते समय वासना इतनी बढ़ जाती कि मैं अपनी छत पर नंगी होकर घूमने लगती थी. मैं सोचती कि कोई मुझे नंगी देख ले और मेरे लिए लन्ड का जुगाड़ हो जाए.

दोस्तों, घर पर केवल मम्मी के होने के बावजूद मुझे बाहर नहीं निकलने दिया जाता. मैं इतनी कामुक थी कि मम्मी जानती थीं कि अगर मैं बाहर गई तो लड़के मुझ पर कमेंट करेंगे और चोदना चाहेंगे. अब रोज रात को छत पर नंगी घूमना और चूत में फिंगरिंग करना मेरा नियम बन गया था. लेकिन मेरी किस्मत इतनी खराब थी कि किसी का मेरे ऊपर ध्यान ही नहीं गया.

कुछ दिन बाद मेरा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा का एडमिट कार्ड आ गया. प्रवेश परीक्षा का सेंटर इलाहाबाद ही दिया गया था. यह देख मैं खुश हो गई. फिर जब मैंने भैया को बताया कि मैं आपके पास आ रही हूँ तो वो बहुत खुश हुए और बोले – आओ, मैं तुम्हें एग्जाम भी दिलवा दूंगा और इलाहाबाद भी घुमा दूंगा.

एग्जाम के दो दिन पहले ही मैं भैया के चली गई. दोस्तों, वहां उन्होंने एक सिंगल रूम ले रखा था. नीचे मकान मालिक रहते थे. ऊपर भैया अकेले रहते थे. उनका कोई पार्टनर नहीं था.

गर्मी का समय था. उस दिन खाना वगैरह खाने के बाद मैं भैया से बोली – मैं नीचे सो जाती हूँ आप ऊपर बेड पर सो जाओ. तब भैया बोले कि रात में नीचे चूहे बहुत घूमते हैं. अगर तुम नीचे सोना चाहती हो तो अपने रिस्क पर सोना.

यह सुन के मैं हंस पड़ी और बोली – भैया, अगर मेरे कपड़ों में चूहा घुस गया तो क्या होगा, मुझे डर लग रहा है. तब भैया बोले – मैं नीचे सो जाता हूँ. इस पर मैंने उन्हें नीचे सोने से मना किया और बोली कि चूहे आप के ऊपर भी तो आ सकते हैं. आखिर में मजबूर होकर (या कहने की मजबूरी मान सकते हैं) हम दोनों ने एक ही बेड पर सोने का निश्चय किया.

इसके बाद एक तरफ मुंह करके भैया सो गए और एक तरफ मुंह करके मैं लेट गई. गर्मी अधिक होने के कारण नींद नहीं आ रही थी. गर्मी की वजह से भैया भी परेशान हो रहे थे. तभी वे उठे और अपना शॉर्ट उतार कर तौलिया लपेट लिया.

फिर उन्होंने मुझसे कहा – कंचन गर्मी बहुत हो रही है तुम अपनी सलवार उतार कर ये मेरी शार्ट पहन लो. मैं भी गर्मी से तंग हो चुकी थी. फिर उठी और बाथरूम में जाकर शॉर्ट पहन लिया और बाहर आ गई.

मेरी गोरी टांगें देख कर अब भैया की हालात खराब होने लगी. मैं मन ही मन सोच रही थी कि अभी इनको और तरसाउंगी लेकिन भैया मुझसे भी तेज़ निकले. उन्होंने मुझसे कहा – कंचन, मेरा एक टी-शर्ट है तुम चाहो तो उसे पहन सकती हो. वो काफी ढीला है इसलिए गर्मी से राहत दिलाएगा. इसके बाद मैं बाथरूम में जाकर उसे भी पहन लिया.

दोस्तों, टी-शर्ट वी-गले की वाली थी और उसमें से मुझे मेरी क्लीवेज साफ दिख रही थी. जब मैं उसे पहन के बाहर आई तो भैया मुझे देख के मुस्कुरा दिए. मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो उन्होंने कहा कि टी-शर्ट में खूबसूरत लग रही हो.

इस पर मैंने भैया को तारीफ के लिए शुक्रिया कहा. दोस्तों, मेरे बूब्स काफी बड़े हैं और टी-शर्ट में आ नहीं पा रहे थे. इस वजह से मैं और भी ज्यादा हॉट दिख रही थी. अरे हां, एक बात तो मैं बताना ही भूल गई थी. शॉर्ट और टी-शर्ट पहनते समय मैंने अपनी ब्रा और पैंटी उतार कर बाहर रख दी थी.

इसके बाद हम फिर से जैसे ही सोने चले वैसे ही लाइट चली गई. इलाहाबाद जैसे शहरों में रात में लाइट कटना आम बात है. खैर, लाइट जाने के बाद हम दोनों भाई – बहन बालकॉनी में आ गए. वहां थोड़ी हवा लग रही थी. बालकॉनी में खड़े होकर मैं भैया को देख रही थी. वो भी मेरी तरफ देख रहे थे लेकिन उनकी नज़रें मेरी चूचियों पर टिकी थीं.

वे लगातार मेरे बूब्स को घूर रहे थे. बीच – बीच में जब हमारी नज़रें मिलतीं तो मैं स्माइल दे देती थी. भैया के टॉवल के ऊपर अब मुझे उनके लन्ड का उभार स्पष्ट नज़र आ रहा था. थोड़ी देर बाद लाइट आ गई और हम फिर सोने चले गए.

इस बार मैं शॉर्ट और टी-शर्ट में थोड़ा रिलैक्स फील कर रही थी. शॉर्ट ढीला होने के कारण नीचे के साइड से भैया को थोड़ा – थोड़ा मेरी चूत के दर्शन भी हो जा रहा था. अब मैं आंख बन्द करके लेटी थी लेकिन चुदाई के खयाल से मुझे नींद नहीं आ रही थी.

फिर मैंने भैया की ओर देखा वो अपनी आंखें बन्द किए लेटे थे लेकिन उनका टॉवल अब खुल चुका था. अब वो सिर्फ अंडर वियर में थे. पता नहीं मेरे आंख बंद करने पर उन्होंने खोला था या खुद से खुल गया था. कुछ देर बाद करवट लेने के दौरान मेरी गांड भैया टच हो गई. मुझे बहुत अजीब सा फील हुआ. लेकिन जो भी था मुझे अच्छा लगा था. मेरे मन में लड्डू फुट रहे थे. लेकिन मैं वैसे ही सोने का बहाना किये रही.

मुझे पता था कि भैया जाग रहे हैं लेकिन शायद वह डरते हैं इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. चूंकि उनसे ज्यादा जरूरत मुझे थी उनके लन्ड की. अगर उन्हें मुझे चोदना रहता तो जिस दिन बाइक पर पीछे बैठ के मैंने उनकी पीठ पर अपनी चूचियां खूब रगड़ी थी वे उसी दिन चोद दिए होते.

दोस्तों, भैया मेरे थोड़े फट्टू किस्म के हैं क्योंकि दूसरा कोई लड़का होता तो अब तक कब का मुझ जैसी कुंवारी लड़की को चोद के मेरी सील तोड़ चुका होता. चूंकि चुदाई की तड़प मुझे ही ज्यादा थी इसलिए पहल भी मुझे ही करनी थी. यही सोच के मैं धीरे – धीरे आगे बढ़ने लगी.

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