अरहर के खेत में सील तोड़ चुदाई

ये कहानी मेरे दोस्त की है. जिसने मुझे बताया कि कैसे उसने अपनी गर्लफ्रेंड को अरहर के खेत में ले जाकर चोदा था और उसकी सील तोड़ी थी…

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम चीकू मौर्या है और मैं उत्तर प्रदेश के एक गांव का रहने वाला हूं. अभी मेरी उम्र 25 साल है और ये कहानी तब की है जब मैं 12वीं में पढ़ रहा था.

दोस्तों, 10वीं तक तो मुझे प्यार – व्यार का कोई शौक ही नहीं था. आप ये भी कह सकते हैं कि मुझे इन सब के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी ही नहीं थी. लेकिन जैसे ही मैं 12वीं कक्षा में गया मेरी तो किस्मत ही बदल गई.

12वीं के दौरान मुझे एक लड़का मिला और फिर मैं अपना ज्यादातर वक्त उसी के साथ गुजारने लगा. धीरे – धीरे कुछ दिन बाद हम अच्छे दोस्त बन गए. पहले तो हम सिर्फ अपनी पढ़ाई के बारे में बातें करते थे लेकिन कुछ दिन बाद हम दोनों काफी खुल गए और अपनी सारी बातें एक – दूसरे को बताने लगे. हमें एक – दूसरे से कोई भी बात बताने में झिझक नहीं होती थी.

ऐसे ही एक दिन हम आपस में बात कर रहे थे, तभी उसने बातों ही बातों बताया कि उसकी एक गर्लफ्रेंड थी, जिसे वह पहले कई बार चोद चुका था लेकिन अब उसने उसे धोखा दे दिया है.

दोस्तों उस समय मैं 21-22 साल का नौजवान लौंडा था. उसके मुंह से ऐसी बातें सुन कर मेरे अन्दर की भी वासना जाग गई और मैं उससे पूछने लगा कि उसने कैसे उस लड़की पटाया था? वह भी बताने लगा.

उसने मुझे बताया कि पहली बार जब मैंने उसको देखा तो वो मुझे काफी अच्छा लगी. फिर मैं उसको कई दिन ऐसे ही देखता रहा. लेकिन अभी तक हमारी कोई भी बात नहीं हुई थी. फिर एक दिन वह मेरे पास आकर अचानक मुझसे पूछने लगी कि तुम मुझे ऐसे क्यों देखते रहते हो? उसका सवाल सुन कर मैं डर गया लेकिन फिर मैंने हिम्मत करके कहा कि कुछ नहीं बस ऐसे ही, आपको देखना मुझे अच्छा लगता है इसलिए देखता रहता हूं.

मेरी बात सुन कर वह नाराज़ होने की बजाय मुस्कुरा के चली गई और जाते टाइम वह भी मुड़ – मुड़ के मुझे देख रही थी और साथ में हंस भी रही थी. अब मेरी हिम्मत बढ़ गई थी, अगले दिन जब फिर वह मुझे नजर आई तो मैं फिर उसे देखने लगा. उस दिन जब उसकी नज़रें मुझसे टकरातीं तो भी मैं अपनी नज़रें हटाता नहीं था.

एक बात और उस दिन मैंने ये नोटिस किया कि अब वो भी मुझे देखने लगी थी. उसने मुझे बताया कि कुछ दिन ऐसे ही गुजरे, फिर ऐसे ही देखते देखते हम दोनों धीरे – धीरे एक दूसरे से बात करने लगे. वह भी मुझसे बहुत अच्छे से बात करती थी.

धीरे – धीरे हमारे बीच और नज़दीकी बढ़ीं. अब हम दोनों रोज़ एक – दूसरे से अकेले में मिलने भी लगे थे. जैसे ही हम मिलते तो एक – दूसरे को आंख मर कर बगीचे या ऐसी ही किसी जगह पर बैठ जाते और खूब ढेर सारी बातें करते.

ऐसे ही एक दिन मैं उससे मिलने गया. वह काफी पहले से मेरा इंतजार कर रही थी. उसे देख के मैं एक पेड़ के पीछे छिप गया. आखिर काफी देर तक मेरा इंतज़ार करने के बाद जब मैं सामने नहीं आया तो वह वापस जाने की तैयारी करने लगी.

फिर मैं इधर – उधर देखा जब मुझे कोई आता – जाता नहीं दिखा तो मैंने धीरे से जाकर उसे पीछे से पकड़ लिया. मेरा लंड खड़ा था, इस वजह से वो उसकी गांड में चुभने लगा. पहले तो वह भी के पल तक ऐसे ही खड़ी रही लेकिन फिर जब समझ आया तो पूछी कि कौन है? इस पर मैंने धीरे से आवाज बदल कर कहा कि पहचान लो.

अब मेरे खड़े लंड से शायद उसे भी मज़ा आने लगा था तो वो भी मस्ती में अपनी गांड हिला कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी. थोड़ी देर बाद वह फिर बोली, “कौन हो, प्लीज बताओ न?” मेरे दोस्त ने बताया कि उसके इस तरह गांड रगड़ने के कारण अब मैं और भी गरम हो रहा था, मुझे लगा शायद वह पहचान गई है तभी तो ऐसे रगड़ रही है! इसलिए मैंने उससे उसी आवाज में कहा कि पहचान तो गई? वह बोली, “नहीं मुझे नहीं मालूम कौन हो!”

उसके इतना कहने के बाद फिर मैंने अच्छे से अपनी आवाज में कहा, “कुछ चुभ तो नहीं न रहा है?” इस पर वह मुझे धक्का देते हुए बोली, “क्यों कुछ चुभा रहे हो?” इस पर मैंने कहा, “क्या?” तो वो कुछ नहीं बोली. फिर थोड़ी देर बाद बोली, “अच्छा अब तो छोड़ो मैं पहचान गई”. फिर मैंने भी उसे छोड़ दिया.

मुझसे छूटने के बाद वह थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गई और गुस्सा करते हुए कहने लगी, “मुझसे बात मत करो, तुमने मुझे बहुत इंतजार करवाया”. मैंने बहुत मनाया लेकिन नहीं मान रही थी. मैंने कहा कि मान जाओ मैं तुम्हें चॉकलेट दूंगा, इस पर भी नहीं मानी तो मैंने कहा कि अच्छा किस ले लो और मान जाओ. वह फिर भी नहीं मानी.

तब मैंने कहा, “अच्छा मानने के लिए फिर क्या लोगी? केला?” मेरा इतना बोलना था कि वह मुस्कुरा के बोली, “हां, केला ही लूंगी”. इस पर मैंने कहा, “ठीक है, ले लेना, कल ला दूंगा”. उसने भी सहमति में सिर हिला दिया.

फिर हम दोनों वापस घर चले गए. अगले दिन मैं केला लेकर गया और उससे बोला कि ये लो केला और अब मान जाओ. उसने कहा, “ठीक है, खिलाओ, अपना केला आने हाथ से खिलाओ” मेरे दोस्त ने बताया कि उस दिन भी उधर कोई आता – जाता नहीं दिख रहा था.

फिर मैं भी उसे अपने हाथ से केला खिलने लगा. वह केले को खूब चूस – चूस के खाने लगी और बोलने लगी, “वाह बहुत टेस्टी है तुम्हारा केला.” मैं भी इसके इन द्विअर्थी बातों को समझ रहा था और केला खाने के दौरान वो जैसी हरक़त कर रही थी ये मुझे गर्म करने के लिए काफी थी.

फिर उसकी बातों को सुन कर मैंने कहा कि आओ न मेरी गोद में बैठो मैं तुम्हें खूब प्यार से केला खिलाऊंगा. मेरे इतना कहते ही वह भी झट से आकर मेरी गोद में बैठ गई. मेरा लंड तो कब का खड़ा हो चुका था. वह इस तरह बैठी कि लंड उसकी गांड में अच्छे से सेट हो गया.

फिर मैं उसे केला खिलाने लगा और वह भी मज़े में बैठ कर खाने लगी. थोड़ी देर बाद वो बोली कि बहुत मस्त है तुम्हारा केला. इस पर मैंने मुस्कुरा भर दिया, फिर वह धीरे – धीरे आगे – पीछे होने लगी. मेरा लंड उसकी गांड में चुभ रहा था तो वो कहने लगी कि क्या छुपा कर रखे हो पैंट में बहुत चुभ रहा है. मैंने कुछ नहीं कहा सिरफेक स्माइल पास कर दी.

दोस्तों, मेरा लंड अब एक दम कड़क हो चुका था और ऐसा लग रहा था जैसे अभी पैंट फाड़ के बहार आ जाएगा. थोड़ी देर शांत रहने के बाद वो बोली, “दिखाओगे कि अन्दर क्या छुपा रखा है?” फिर इतना कह के वह अपना हाथ नीचे ले गई और मेरे लंड को पकड़ के बोली, “सब केले दे दिए हो तो ये एक यहां किसके लिए क्यों छुपाये हो?”

मैंने कहा कि तुम्हारे लिए ही ये भी रखा हूं लेकिन सोचा कि तुम इतने में ही न थक जाओ. इतना सुनते ही वह बोली, “नहीं ऐसी बात नहीं है, मुझे ये केला भी चाहिए”. इस पर मैंने कहा, “ठीक है ले लो, आखिर है तो तुम्हारे लिए ही न”.

फिर वह मुझसे बोली, “मैं तुम्हारे लिए दो आम लाई हूं”. मैं समझ गया कि कौन सा आम है. मैंने कहा, “कब खिलाओगी?” वह बोली, “मुझे बहुत तेज़ भूख लगी है, अब जल्दी से ये केला भी मुझे दो”. फिर हम दोनों ने चारों तरफ देखा. पास में ही एक अरहर का खेत था. हम दोनों एक – एक करके उसी में घुस गए.

खेत में जाते ही उसने आव देखा न ताव, जल्दी से मेरा पैंट खोला और बोली, “जल्दी से अपना केला खिलाओ, बहुत भूख लगा है”. अब तक मेरा लंड पैंट के बाहर आ चुका था, जिसे उसने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. लंड उसके मुंह में जाते ही मुझे पता नहीं क्या हो गया था! इतना अच्छा लग रहा था कि क्या बताऊं!

लगभग दो मिनट तक लंड चूसने के बाद वो बोली, “अब लो तुम भी आम चूस लो, तुम्हें भी तो भूख लगी होगी!” उसके इतना कहते ही मैं भी उसके मम्मों पर टूट पड़ा और उन्हें चूसने लगा. बड़ा मज़ा आ रहा था. वह भी एक दम मस्त होकर मेरा सर अपने मम्मों पर दबाने लगी थी.

फिर थोड़ी देर बाद वह लेट गई और बोली, “प्लीज, अब मेरी बुर में अपना लंड डालो.” मैं भी पूरी तरह गरम हो गया था. फिर मैंने अपना लंड उसके बुर के ऊपर रखा तो उसके मुंह से ‘आह’ की आवाज निकल गई. मैंने पूछा कि क्या हुआ तो वह बोली कुछ नहीं, प्लीज मुझे चोदो न जल्दी से.

इतना सुनते ही मैंने एक धक्का दिया लेकिन मेरा लंड अंदर नहीं घुसा, इसके बावजूद वह चिल्लाने और कहने लगी कि बहुत दर्द हो रहा है, अब रहने दो. लेकिन अब तो तीर कमान से निकल चुका था, मेरा लंड अब रुकने वाला नहीं था. इसलिए मैं जबरदस्ती उसके बुर में अपना लन डालने लगा. वह चिल्ला रही थी.

तभी मैंने एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड करीब आधा उसकी चूत में घुस गया. उसकी चूत से खून आने लगा, जिसे मैंने उसकी अंडर वियर से साफ किया और कहा कि चिल्लाओ मत नहीं तो कोई सुन लेगा तो दिक्कत हो जाएगी.

फिर उसने भी धीरे – धीरे करके चिल्लाना बंद कर दिया. अब उसका दर्द कम हो रहा था उसे भी मज़ा आने लगा था. वह मस्त होकर कहने लगी कि और तेजी से चोदो, आज फाड़ दो मेरी चूत को, बुझा दो मेरी प्यास! बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसे ही थोड़ा और तेज ऐसे ही करते रहो”.

उसकी ये मादक बातें सुन कर मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और फिर तेजी से चोदने लगा. करीब 15-20 मिनट की चुदाई के बाद फिर मैंने अपना माल उसके बुर में ही गिरा दिया. इसके बाद हम काफी देर तक वहीं लेटे रहे. वह काफी खुश थी बोली, “तुम्हारा ये वाला केला तो बहुत अच्छा था.” इस पर मैंने कहा, “कर तुम्हारा आम भी”. इसके बाद हमने एक बाए और चुदाई की और फिर वापस अपने घर आ गए.

बस इतनी ही थी मेरे दोस्त की कहानी. आगे क्या हुआ, ये सब मैं कहानी के अगले भाग में बताऊंगा. तब तक के लिए नमस्कार!

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