आंटी को चोदने का सपना हक़ीक़त बना

इस काम क्रीड़ा में मैं और आंटी थक गए थे. फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं आंटी के ऊपर आकार उनको चोदने की तैयारी करने लगा. तो आंटी ने कहा, “मोनू, तेरा पहली बार है फिर भी तुझे बहुत अनुभव है. तूने जैसे मुझे झड़ा दिया उसी तरह अब लंड को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करा के मेरी अंदर की आग भी शांत कर दे मेरे राजा”…

नमस्कार दोस्तों, अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली कहानी है. इसको लिखने में मुझसे अगर कुछ गलती हो जाए तो माफ़ कर देना. दोस्तों, मेरा नाम मोनू है और मेरी उम्र 25 साल है.

बात ज्यादा पुरानी नहीं बस 2 साल ही पुरानी है. मेरे घर के सामने एक आंटी रहती थी. जिसका नाम मानसी था. वह हमारे कालोनी में नई आई थी. उसके पति का नाम धामू है और वह किसी फैक्ट्री में काम करता था.

जब से आंटी हमारी कालोनी में आई हैं तब से मैं उसे ही घूरता रहता था. जब कभी वो छत पर या बालकनी में या घर के बाहर होती मैं उसे तड़ता रहता था. ये बात आंटी ने नोटिस करना शुरू कर दिया.

एक बार मैं किसी काम से बाजार गया था तो रास्ते में आंटी दिख गई. उनके हाथ में सामान से भरा भारी बैग था. मैंने सोचा यही एक रास्ता है आंटी से बात करने का. यह सोच कर मैं उनके पीछे चलने लगा. कुछ आगे बढ़ कर आगे चलते हुए आंटी ने पीछे मुड़ कर देखा तो मुझे देख कर एक स्माइल दी तो मैंने उनके पास जाकर पूछा कि मैं कुछ हेल्प करूं क्या?

तो उन्होंने कहा कि आप का नाम क्या है? तो मैंने उन्हें अपना नाम मोनू बताया. फिर उन्होंने कहा, “ठीक है, यदि आप मेरी हेल्प करना चाहते हो तो ये सामान घर पर रखवा दो”. तो मैंने कहा, “ठीक है”. और फिर मैंने सारा सामान उनके घर पर रखवा दिया और जैसे ही जाने लगा तो आंटी ने कहा, “मोनू, चाय पीके जाना”. लेकिन मैंने मना कर दिया. तो आंटी ने कहा, “मैं चाय में मिर्ची नहीं डालती”.

मैं उनकी बात समझ गया और उनके दूधू की तरफ देख कर कहा, “मैं चाय नहीं सिर्फ दूध पीता हूँ”. तो आंटी ने कहा, “अच्छा मैं दूध गर्म करके लाती हूं”. तो मैंने आगे बढ़ते हुए कहा, “दूध तो गर्म है बस पीना बाकी है”. अब आंटी बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए रसोई में चली गयी और थोड़ी देर में मेरे लिये दूध और अपने लिए कॉफी लेकर आईं और मेरे पास में वहीं सोफे पर बैठ गईं.

फिर आंटी ने कहा, “मोनू, एक बात बता तू मुझे हमेशा घूरता क्यों रहता है? क्या मैं तुझे भूतनी लगती हूँ?” तो मैंने आंटी से कहा, “नहीं आंटी, मैं आप को कहां घूरता हूँ? मैं तो बस…” इसके बाद मेरी जुबान एक दम से रुक गई और मैं आगे कुछ बोल न सका.

तो आंटी बोलीं, “बता न क्यों घूरता रहता है?” तो मैंने कहा, “ऐसे ही”. फिर आंटी ने मुझे डरा कर कहा, “बताता है कि तेरे घर पर तेरी शिकायत करूं”. अब मैं डर गया था और डरते हुए मैंने कहा, “आंटी, आप बहुत सुंदर हो?” तो आंटी ने कहा, “मैं कैसे सुन्दर लगी? जरा खुल के बोल न मोनू”.

अब मैं बोला, “आंटी, आप के मुलायम कोमल होंठ से लेकर 32 के दूधू, 30 की कमर, 32 के हिप. कुल मिलाकर आप तो ऊपर से लेकर पूरी कयामत हो आंटी!” यह सुन कर आंटी ने कहा, “मोनू, तू मेरा एक काम करेगा?” मैंने कहा, “जी बोलिये”.

तो आंटी ने कहा, “आज अपनी इस आंटी की प्यास बुझा दे”. और इतना कह कर आंटी ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया. जिसे मैं पाने का सपना देख रहा था आज वो हकीकत में मेरे साथ हो रहा था.

फिर मैं भी आंटी को चूमने लगा और थीरे से अपने हाथ को उनके दूध पर रख कर दबाने लगा. अब आंटी पर प्यार की खुमारी चढ़नी शुरू हो चुकी थी. अब आंटी ने कहा, “मोनू, यहाँ नहीं, रूम में चलते हैं”. और फिर मैं उनके पीछे – पीछे उनके हिलते – डुलते हिप का मजा लेते मैं उनके रूम में चला गया.

अंदर रूम जाते ही आंटी ने फिर मुझे किस करना शुरू कर दिया. और मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उनके दूध को दबाने लगा. फिर धीरे – धीरे मैंने आंटी का ब्लाउज उतारा. उन्होंने क्रीम कलर की ब्रा पहन रखी थी. वह उनके दुध पर बहुत खूबसूरत लग रहे थे.

फिर मैंने उनकी ब्रा को उतार दिया और उसके एक दूध को पीने लगा. आंटी बार – बार मेरे सर को पकड़ कर अपने दूध पर दबा रही थी. मैं कभी एक दूध को पीता और काटता तो कभी दूसरे को. मेरे ऐसा करने से आंटी के मुंह से ‘आआआ हहहहहह ऊऊऊऊऊ ज्ज्ज्ज्ज्ज’ जैसी आवाज निकाल रही थी.

फिर मैंने उनकी साड़ी भी उतार दी. उन्होंने ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी. जिसके पीछे उनकी हसीन चूत थी. जिसके लिए मैं तड़प रहा था. फिर मैं उनकी पैंटी को अलग कर के उनकी चूत को चाटने लगा. जिससे आंटी आहें भर रही थी. मेरी जीभ आंटी की चूत में जितना अंदर तक जा सकती थी मैं उतनी अंदर कर के उनको मजा दे रहा था.

तभी आंटी बोली, “मोनू, ये क्या कर दिया तूने! मुझे आज तक तो मेरे पति भी ऐसा मजा नहीं दे पाए हैं”. फिर थोड़ी देर रुक कर वो बोली, “और अंदर मोनू हहहहह और अंदर तक”. अब मैं और जोर से आंटी की चूत चाटने लगा. जिससे आंटी बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपना पूरा पानी मेरे मुँह पर गिरा दिया.

इस काम क्रीड़ा में मैं और आंटी थक गए थे. फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं आंटी के ऊपर आकार उनको चोदने की तैयारी करने लगा. तो आंटी ने कहा, “मोनू, तेरा पहली बार है फिर भी तुझे बहुत अनुभव है. तूने जैसे मुझे झड़ा दिया उसी तरह अब लंड को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करा के मेरी अंदर की आग भी शांत कर दे मेरे राजा”.

तो मैंने कहा, “आंटी, आज तो मैं तेरी चूत का भुर्ता ही बनाऊँगा. आज तुझे मालूम होगा कि चुदाई क्या होती है!” और फिर इतना बोल कर मैं उनकी चूत में लंड डालने लगा. मगर साला लंड अंदर जा ही नहीं रहा था. यह देख आंटी हँस रही थी. फिर बोली, “मेरे बुद्धू बालम, पहले अपने लंड पर क्रीम लगा ले फिर अंदर डालेगा तब जायेगा”.

अब मैंने अपने लन्ड पर अच्छी तरह से क्रीम लगाई और आंटी ने लंड को अपने हाथ से पकड़ के अपनी चूत के मुँह पर रख दिया और कहा, “अब धक्के लगा मोनू”. फिर मैंने एक जोर से धक्का लगाया. जिससे आंटी और मेरी दोनों की चीख निकल गई. मुझे ऐसा लग रहा कि जैसे किसी ने जलता हुआ कोयला मेरे लन्ड पर रख दिया हो.

अब आंटी ने कहा, “मोनू, पहली बार में हर किसी को थोड़ा दर्द होता है लेकिन फिर मजा ही मजा है. अब तू धीरे – धीरे लंड को आगे – पीछे कर”. मैं आंटी की बात मानते हुए चूत में लंड आगे – पीछे करने लगा. आंटी सिसकियां लेती हुई मुझे उकसा रही थीं.

मैं भी कहां पीछे था. चुदाई करते हुए मैं आंटी के दूधू को जोर से दबा देता था. जिससे आंटी मस्त हो जाती. और अब मस्त होकर वो मेरी पीठ पर नाख़ून चुभाने लगी थी. तभी मुझे भी अपने लंड पर कुछ गर्म और गीला सा अहसास हुआ तो मैं समझ गया.

फिर मैं भी आंटी को गाड़ी की ही तरह तेज धक्के लगाने लगा. आंटी मुझे किस करते हुए कह रही थी, “मोनू, तेरे साथ आज जो मजा आया है मेरे लिए वो सबसे हसीन पल है”. अब मैं आंटी की चूत में कसकर धक्के लगा रहा था.

इतने में मेरे अंदर हलचल हुई और मैंने आंटी की चूत में ही पानी निकाल दिया और उनके ऊपर लेट गया. फिर थोड़ी देर बाद मैं उठा और अपने कपड़े पहन कर घर आ गया.

इसके बाद जब तक आंटी हमारी कालोनी में रही तब तक मैंने उनकी चूत को खूब बजाया.

दोस्तों, मेरी यह स्टोरी आप लोगों को कैसी लगी. मुझे अपने विचार जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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