आंटी की रसीली चूत

भरे पूरे गदराये बदन वाली आंटियाँ किसे नहीं आकर्षित करतीं. सो मैं भी हो गया.  हाय! उठी हुयी गांड की ठुमकन तो ऐसी लगती है की मन करता है की बीच की दरार में अपना लंड अभी के अभी घुसा दूं. मेरी बहुप्रतीक्षित इच्छा कैसे पूरी हुयी उसका वर्णन इस कहानी में है.

हाय दोस्तों! मैं विवेक हूँ. अन्तर्वासना पे ये मेरी पहली कहानी है. मेरी उम्र 23 साल है. मेरी हाईट 5’6” फीट है. बदन सामान्य है. मेरा लंड 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है. मैं अपनी वास्तविक कहानी आपको बताने जा रहा हूँ.

मेरे घर से थोड़ी दूर एक रेखा आंटी रहती हैं. काफी मस्त!. उनका रंग गोरा और फिगर 39-30-42 है. उनकी उम्र ३६ वर्ष है. उनके पति की शिफ्ट ड्यूटी लगती रहती है. उनका घर थोड़े सुनसान एरिया में है इसलिए एक बार जब उनकी रात की शिफ्ट ड्यूटी लगी तो अंकल ने घर आकर मुझे रात में उनके घर रुकने को कहा. मेरे माता-पिता ने भी मुझे जाने के लिए कहा तो मैं रात में सोने के लिए रेखा आंटी के घर चला गया. मैं जब घर पहुंचा अंकल बस ड्यूटी के लिए निकलने वाले थे. उनसे दो मिनट बात हुयी फिर वो ऑफिस के लिए निकल पड़े. आंटी ने भी गेट बंद कर दिया. आज उन्होंने ग्रे कलर की साड़ी पहन रखी थी और काफी सुन्दर भी लग रहीं थी.

आंटी बिलकुल मुझसे दोस्त की तरह बातें करती हैं. बातें करते-करते मुझे नींद आने लगी तो मैंने कहा- आंटी! मुझे सोना है.

आंटी-अरे! इतनी जल्दी?

तो मैंने कहा- आज मैं काफी थक गया हूँ और पैरों में भी थोड़ा दर्द है, इसलिए सोना चाहता हूँ.

आंटी बोली- अच्छा ठीक है, चलो मैं तुम्हारे पैर दबा देती हूँ. वैसे भी तुम मेरे बॉडीगार्ड बनके आये हो.

मैंने काफी मन किया लेकिन वो नहीं मानी. उन्होंने मुझे बेड पे लिटा दिया. तब तक मैं अपनी जीन्स उतारकर हाफ पैन्ट में आ चुका था. अब आंटी एक कटोरी में थोड़ा तेल लेकर आयीं और मेरे पैरों की मालिश करने लगीं. उनके स्पर्श मात्र से ही मेरे लंड में हलचल होने लगी और मैं उठकर उसे छुपाने की कोशिश करने लगा. ईस कोशिश में तेल की कटोरी नीचे गिर गयी. मैंने सॉरी कहा तो आंटी ने कहा – कोई बात नहीं.

और कहकर तेल साफ़ करने के लिए बेड से नीचे उतरने लगीं. लेकिन उनका पैर तेल पे पड़ा और वो फिसल कर गिर पड़ीं. उनके घुटने में थोड़ी चोट आ गयी. मैंने तुरंत से उन्हें उठाया और बेड पे लिटा दिया. उनके घुटने में दर्द हो रहा था तो मैं आंटी से पूछकर मूव ले आया. मैंने उनकी साड़ी घुटनों तक उठा दी. और मूव लगाने लगा. अचानक मेरा ध्यान उनकी गोरी जाँघों पे गया जो साड़ी के बीच से दिख रही थी. मैं जानबूझ कर अपना हाथ उन्की जांघों पे फिराने लगा. आंटी मेरी तरफ देखी जरूर , लेकिन कुछ नहीं कहा. अब मैंने साड़ी थोड़ी और उपर कर दी. अब मुझे साड़ी के बीच में से उनकी पैंटी दिखाई पड़ रही थी. पैंटी की एक झलक ही मुझे पागल बना रही थी. मुझे अपनी पैंटी की ओर घूरता देख आंटी ने टोका- विवेक क्या कर रहे हो?

मैं डर गया लेकिन फिर आंटी ने बोला- कोई बात नहीं. होता है. मैं कब से तेरी हालत देख रही हूँ. वैसे भी तेरा लंड तेरे हाफ पैन्ट से बहार निकलने को बेताब हो रहा है.

मैं तो हतप्रभ रह गया. लेकिन फिर उन्होंने पूछा- कभी सेक्स किया है?

मैंने कहा- नहीं.

उन्होंने कहा- करेगा आज?

ये सुनना था की मैं तो बल्लियों उछल पड़ा. मूव फेक कर मैं उनके होठों पे ही टूट पड़ा. ऐसा लगा जैसे जन्नत में गोते लगा रहा हूँ. लेकिन जोश में मैंने आंटी के होठों को थोड़ा ज्यादा ही जोर से काट लिया.

पहले तो वो चिल्लाई फिर बोली- आराम से कर! आज की रात मैं तेरी ही हूँ. जो करना है कर. लेकिन आराम से.

हरी झंडी पाकर अब मैं आंटी की साड़ी उतारने लगा और उन्हें सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में कर दिया. फिर पेटीकोट को तो मैंने आराम से उतारा लेकिन उनकी पैंटी को देखते ही मुझे जोश आ गया और उनके ब्लाउज को फाड़ दिया. अब आंटी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं. पैंटी के ऊपर से ही मैंने एक चांटा उनकी फूली हुयी पावरोटी जैसी चूत पे मारा. वो चिल्लाई- अरे मैंने कहा न! आराम से कर.

मैंने रेखा आंटी की ब्रा और पैंटी भी बारी-बारी उनके जिस्म से अलग कर दी. क्या लग रहीं थी आंटी? उनकी बिना बालों वाली चिकनी चूत काफी कसावट भरी लग रही थी. मैंने कारण पुछा तो उन्होंने कहा- तेरे अंकल काम से लौटने के बाद काफी थक जाते हैं. इसलिए हम दोनों आपस में काफी कम सेक्स करते हैं. मुझे तो अपनी प्यास चूत में ऊँगली करके बुझानी पड़ती है.

ये कहकर आंटी ने भी मेरे सारे कपड़े उतारकर मुझे बिलकुल नंगा कर दिया. मेरे लंड को देखते ही उनकी आखें फटी की फटी रह गयीं. बोलीं- कितना बड़ा है तेरा??? फाड़ेगा क्या मेरी चूत को?

मैंने कहा- मुझे आपका काल्पनिक रेप करना है.

आंटी बोली- मैंने तो पहले ही कहा- जो करना है कर.

मैंने अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया. उनके गले से गूं-गूं की आवाज आने लगी. लेकिन मैंने परवाह न करते हुए उनका मुखचोदन जारी रखा. लेकिन अति उत्साह की वजह से मेरे लंड ने बड़ी जल्दी ही अपना पानी उनके मुँह में ही छोड़ दिया. आंटी ने सारा पानी थूक दिया. मैंने उनके गालों पे एक चांटा मार दिया. और उनके गोल चूचियों पे उभरे हुए निप्पलों को काटने लगा. आंटी ने कहा- प्लीज धीरे करो.

लेकिन मैं तो रेप कर रहा था. मैं नहीं माना. उनकी चूचियों को चूसने की वजह से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. अब तक आंटी भी अपनी चूत चुदाई के लिए बुरी तरह तड़प रही थीं. मैंने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए उनसे पूछा- पूरा ठोंक दूं तुम्हारी चूत में?

आंटी मुस्कुरा दी. फिर क्या था? मैंने लंड को चूत पे टिकाया और एक जोरदार धक्के में पूरा लंड उनकी चूत में प्रविष्ट करा दिया. एक शादीशुदा और पहले से चुदी हुयी चूत की मालकिन रेखा आंटी भी चीखने लगी और बाहर निकलने के लिए कहने लगी. अब मुझे लगने लगा था मानो मैं सचमुच रेप कर रहा हूँ. फिर मैंने आराम से उन्हें चोदना शुरू किया और तकरीबन आधे घंटे तक उन्हें चोदता रहा. फिर हम दोनों साथ-साथ झड़ गए.

कुछ ही देर बाद फिर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैं आंटी से उनकी गांड चुदाई करने के लिए जिद करने लगा. थोड़ी ना नुकुर के बाद वो डरते-डरते मान गयीं और घोड़ी बन गयी. मुझे क्या चाहिए था? मैंने उस दिन जम के उनकी गांड मारी और फिर उनकी गांड में ही अपना सारा वीर्य निकाल दिया.

बाद मर आंटी ने बताया की अंकल थके होने कारण उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाते. खैर अब मैं अक्सर उन्हें संतुष्ट करता रहता हूँ. अगर किसी आंटी को भी संतुष्ट होना है तो मुझे मेल करें.

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