आंटी ने ब्रा का हुक बन्द करवाया

फिर आंटी मुझको किस करने लगी. अब मैंने आंटी को गोद में लिया और बेड पर लेटा दिया. फिर मैं आंटी की पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत मसलने लगा और उनके बूब्स को चूसने लगा. आंटी मस्त हो गईं और मदमस्त आवाज़ निकालने लगीं…

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम करन है और मैं 22 साल का एक गबरू जवान लड़का हूँ. मैं दो साल से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ. आज मैं आप सब के सामने अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ, उम्मीद है कि आप लोगों को यह कहानी पसंद आएगी और इस कहानी के अन्त में आप लोग अपना पानी निकालने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

दोस्तों, मेरी यह कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाली एक आन्टी को मैंने किस तरह चोदा उस पर आधारित है. दरअसल हमने कुछ समय पहले ही अपना मकान बदला था. वहां पर कुछ ही समय में मेरी माँ की एक नई सहेली बन गई थी. उनका नाम सुनीता आंटी थी. फिर वो अक्सर मेरे घर आने लगी. आंटी हमेशा साड़ी ही पहनती थीं. मैंने उनके बारे में कभी कुछ गलत नहीं सोचा था.

मेरी माँ ने अपनी सहेली यानि कि आन्टी को बोल रखा था कि आप कोई भी काम हो तो बिना संकोच करन को बोल दिया करो, ये कर देगा. फिर क्या था सुनीता आंटी मुझसे हर एक – दो दिन में कुछ ना कुछ समान मंगाती रहती थी और इसी बहाने मैं भी उनके घर जाता रहता लेकिन मैं कभी भी उनके घर के अंदर नहीं जाता था, बाहर से उनको समान दे कर वापस चला आता था.

एक दिन आंटी ने मुझे कॉल किया और बोला, “करन, मेरे साथ तुम मार्केट चलो मुझको कुछ समान लेना है”. उन दिनों बारिश हो रही थी. मैं आंटी के घर के बाहर आया और उनको कॉल करके बताया कि आंटी मैं आ गया हूँ. आंटी बाहर आईं. उन्होंने लाल रंग की सिल्की साड़ी पहन रखी थी. लेकिन मैंने उन पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैंने आंटी के बारे में कभी भी गलत नहीं सोचा था.

फिर मैं आंटी को बाइक से लेकर मार्केट आया. आंटी ने कुछ घर का समान लिया और फिर आंटी एक शॉप में गयी. उस शॉप में पैंटी और ब्रा मिलता था. तो मैं शॉप के बाहर ही रुक गया.

यह देख आंटी बोली, “करन, क्या हुआ, बाहर क्यों खड़े हो?” मैं बोला, “आंटी, आप ही जाइए”. तो आंटी ने बोला, “चलो ना, कोई दिक्कत नही है”. फिर मैं आंटी के साथ अंदर चला गया. आंटी ने दुकानदार से कुछ पैंटी और ब्रा मंगवाई. आंटी का साइज़ 42 था. आंटी ने 3 पैंटी और ब्रा पसंद कर ली और हम घर जाने लगे.

तभी बारिश होने लगी. बारिश में आंटी और मैं थोड़ा भीग गये. फिर हम जैसे ही आंटी के घर पहुंचे वैसे ही बारिश तेज़ हो गयी. तो आंटी बोली, “करन, जल्दी अंदर चलो”. तो मैंने बाइक लगा दी और आंटी के पीछे – पीछे चला गया.

आंटी ने अपने घर का दरवाजा खोला और हम अंदर गये. उस दिन मैं पहली बार आंटी के घर के अंदर गया था. अंदर जाकर आंटी ने कहा, “करन, ये लो टॉवल और जल्दी से कपड़े उतार लो नहीं तो ठंड लग जायगी”.

तो मैं बोला, “कोई बात नहीं आंटी जी, मैं बारिश कम होते ही चला जाऊंगा”. तो आंटी ने कहा, “अरे करन, तुम्हारे कपड़े पूरी भीगे हुए हैं, ऐसे में तुम बीमार हो जाओगे”. अब मैंने आंटी की बात मान ली और कपड़े उतार कर टॉवल को पहन लिया. फिर आंटी भी अपनी ड्रेस चेंज करने अपने रूम में चली गयी.

आंटी जब वापस आई तो बहुत ही मस्त लग रही थीं. वे पिंक कलर की नाइटी में आईं और मेरे सामने आ कर बैठ गईं. फिर आंटी मुझसे बोली, “करन, तुम रुको तब तक मैं चाय बना कर लाती हूँ”. उस टाइम तक मेरे मन में आंटी के लिए कोई ग़लत विचार नहीं था.

फिर आंटी चाय लेकर आई और मेरे सामने आकर फिर से बैठ गयी. अब हम दोनों चाय पीने लगे. इसी बीच आंटी इधर – उधर की बातें करने लगी. जैसे उन्होंने पूछा कि करन, तुम क्या करते और क्या करना चाहते हो? जब चाय खत्म हो गई तो फिर आंटी कहने लगी, “करन, तुम रुको मैं ब्रा चेक कर लूं कि साइज़ सही है या नहीं, अगर सही नहीं होगा तो तुम चेंज कर लाना”.

फिर आंटी अंदर चली गयी और थोड़ी देर बाद आंटी ने मुझको आवाज़ लगाई, “करन, ज़रा अंदर आना”. तो मैं टॉवल में ही अंदर चला गया. अंदर जाते ही मेरी आँखे खुली की खुली रह गईं. अंदर आंटी सिर्फ पैंटी में थीं और ब्रा पहनने की कोशिश कर रही थीं.

मुझे देख आंटी बोली, “अंदर आ जाओ”. तो मैं हिम्मत करके अंदर गया तो आंटी बोली, “करन, ज़रा इसको पहनाना तो, मुझसे हुक नहीं लग रहा है”. तो मैं बोला, “आंटी में…” तो आंटी बोली, “तो क्या हुआ”! फिर मैं आंटी की ब्रा का हुक लगाने लगा. इस दौरान मैं चुपके – चुपके उनके मोटे बूब्स भी देख रहा था.

तभी आंटी ने मुझसे पूछा, “करन तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?” मैंने उनका कोई जवाब नहीं दिया और चुप रहा. तो आंटी फिर बोली, “बताओ ना करन, मैं किसी को नही बोलूंगी”. तो मैं बोला, “आंटी, ऐसी कोई बात नहीं है, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है”. तो आंटी बोलीं, “क्यों झूठ बोल रहा है”?

मैं बोला, “नहीं आंटी सच में कोई नहीं है, या यूं कहिए कि कोई मिली ही नही”. तो आंटी बोली, “तुमको किस तरह की लड़की चाहिए?” मैं बोला, “जो मुझको प्यार करे”. तो आंटी बोली, “हां, बिल्कुल सही है”. तब तक मैंने आंटी के ब्रा का हुक लगा दिया था.

अब आंटी मेरे सामने सीधी हो कर खड़ी हो गयी. उनके मोटे – मोटे बूब्स देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और टॉवल के ऊपर से साफ दिखने लगा. जिसे आंटी ने देख लिया. फिर आंटी एक दूसरी ब्रा की तरफ इशारा करते हुए मुझसे बोली, “करन, ज़रा वो वाली लाना जो बाद में है”. मैं उस दूसरी ब्रा को लेने चला गया. तब तक आंटी ने अपनी वो वाली ब्रा उतार दी और मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी में खड़ी हो गईं.

जब मैं ब्रा को उठा कर उनको देने के लिए मुड़ा तो उनको ऐसे देख कर मेरे दिमाग़ ने काम करना ही बन्द कर दिया था. और मैं वहीं का वहीं खड़ा रह गया.

यह देख आंटी बोली, “लाओ”. तो मैं उस ब्रा को लेकर आंटी के पास गया. अब आंटी बोली, “क्या हुआ करन? कभी किसी औरत को ऐसे नही देखा क्या”? तो मैं कहा, “नहीं आंटी”. फिर वो मेरे लंड की तरफ़ देख कर बोली, “ये क्या है”? मैं बोला, “आंटी कुछ नहीं”.

अब आंटी मेरे पास आ गईं और मेरे लंड को छूने लगी. उनके छूने से मैं पागल सा हो रहा था. फिर आंटी ने खींच कर मेरा टॉवल निकाल दिया. अब मैं सिर्फ अपने अंडर वियर में था. तो आंटी मेरे लंड को अंडर वियर के बाहर से ही हिलाने लगी. अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और किस करने लगा.

तो आंटी बोली, “करन, काफ़ी टाइम से तेरे अंकल ने मुझको प्यार नहीं किया है, इसलिए मैंने ये सब किया क्योंकि अगर मैं तुझसे बोलती तो तू मुझसे बात भी नहीं करता क्योंकि तुमको मुझमें क्या मिलेगा?

तो मैं बोला – नहीं आंटी, ऐसी बात नहीं है. मैं आपको आज से बहुत प्यार करुगा.

फिर आंटी मुझको किस करने लगी. अब मैंने आंटी को गोद में लिया और बेड पर लेटा दिया. फिर मैं आंटी की पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत मसलने लगा और उनके बूब्स को चूसने लगा. आंटी मस्त हो गईं और मदमस्त आवाज़ निकालने लगीं.

अब मैंने आंटी की पैंटी भी उतार दी. मैंने देखा कि आंटी की चूत में एक भी बाल नहीं हैं और उनकी चूत पूरी लाल थी.
तभी आंटी बोली, “मैंने आज ही साफ किया है, मुझे आज तुझसे जो मिलना था”. यह सुन कर मैंने कहा, “क्या बात है साली तुम तो बहुत होशियार हो”.

यह सुन कर वो हँसने लगी और मेरे लंड को आगे – पीछे करने लगी. उसके बूब्स चूसते – चूसते मैं उसकी नाभि को किस करने और चाटने लगा. उसने कहा, “अब अपनी आंटी को मत तड़पाओ, प्लीज़ अपना लंड डाल दो”.

फिर मैंने आंटी के पैरों को फैलाया और उनकी चूत में अपना लंड रख कर धीरे से अंदर डालना शुरू किया. इस दौरान मैंने एक झटका दिया. उस झटके की वजह से आंटी की चीख निकल गयी और फिर मैंने अपनी स्पीड बड़ा ली.

आंटी लगातार आहें भर रही थी और मैं लन्ड को फुल स्पीड से उनकी चूत में अंदर – बाहर करता रहा. तभी आंटी ने अपना पानी छोड़ दिया लेकिन मेरी स्पीड चल रही थी. 10 मिनट के बाद अब मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने पूछा, “आंटी, कहां निकालूँ?” तो वो बोली, “बाहर निकाल दो”.

फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और अपना सारा माल आंटी के ऊपर ही निकाल दिया. तो आंटी बोली, “अरे तूने अपनी आंटी को गन्दा कर दिया”. फिर मैंने कहा, “आंटी लो इसको चूसो ना”. तो आंटी बोली, “ये सब अच्छा नही होता”. तो मैंने थोड़ी ज़िद की लेकिन वो नहीं मानी. फिर मैंने अपने लंड को जबरदस्ती उसके मुंह के अंदर डाल दिया और उनको चूसने को कहा. लेकिन वो फिर भी मना करने लगी. तो मैंने कहा, “मतलब आंटी आप मुझसे प्यार नहीं करती?”

तब आंटी ने कहा, “नहीं ऐसा नहीं है, चलो अच्छा मैं तुम्हारा लंड चूसती हूँ”. और फिर वो मेरे लंड को चूसने लगी. फिर उन्होंने चाट – चाट कर मेरे लन्ड को पूरा साफ कर दिया और कहने लगी, “तुम सबको इस में क्या मज़ा आता है?”

अब थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर से तैयार होने लगा और आंटी अपने आपको साफ करने बाथरूम में चली गईं. जब आंटी साफ होकर बाहर आई तो मैंने कहा, “आंटी, अभी और करें?” तो आंटी ने कहा, “हाँ, क्यों नहीं?”

अब मैं फिर से आंटी को किस करने लगा और उनके बूब्स को चूसने लगा. फिर मैने आंटी की चूत में एक बार फिर से अपने लंड को रखा और फिर से एक झटका मारा और अपना लंड पूरा अंदर डाल दिया और अंदर – बाहर करने लगा. इस बार आंटी को ज्यादा मज़ा आ रहा रहा था तो वो अपनी कमर ऊपर – नीचे करने लगी और मैं झटके मारता रहा.

फिर मैंने आंटी को अपने ऊपर बैठाया और वो मेरे लंड पर बैठ कर ऊपर – नीचे होने लगी. ये सब करीब 15 मिनट तक चलता रहा. फिर मैंने आंटी को एक टेबल के ऊपर बैठाया और उन की चूत मैं अपना लंड डाल कर शॉट मारने लगा. इसमें हमें काफी मज़ा आ रहा था.

करीब 30 मिनट के बाद मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने आंटी के अंदर ही छोड़ दिया. यह देख आंटी बोली, “करन, ये क्या किया तूने?” तो मैंने कहा, “आंटी, इसका असली मज़ा अंदर ही है”. तो वो बोली, “तू बहुत बदमाश है, अच्छा चल हट मेरे उपर से”. फिर मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया और बोला, “आंटी, रूको ना ज़रा किस तो करने दो”.

फिर मैं आंटी के बूब्स चूसता रहा और आंटी के साथ ही थोड़ी देर के लिए सो गया. जब मैं उठा तो उस समय शाम के 5 बज गये थे पर मेरा मन घर जाने को नहीं कर रहा था. तो आंटी बोली, “घर नहीं जाना क्या?” तो मैं बोला, “आंटी आप को छोड़ कर जाने का मन ही नहीं कर रहा है”.

अब आंटी बोली, “मन नहीं कर रहा है तो रुक जा अपनी आंटी के पास और उसे पूरी रात प्यार कर”. यह सुन कर मैं खुश हो गया. उसके बाद फिर रात भर मैंने आन्टी को कई अलग – अलग पोजीशन में चोदा लेकिन उसकी कहानी अगली बार.

तो दोस्तों मेरी यह पहली कहानी आप लोगों को कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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