भाभी के दुख का साथी बन कर चोदा दिया

अब मुझे उनका इशारा समझ में आ गया और मैंने उनके होंठों को मुंह मे लेकर चूसने लगा और हाथों से उनके पूरे शरीर को टटोलने लगा. इसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था. अब जब उन्होंने मेरा कोई विरोध नहीं किया तो मैंने धीरे – धीरे उनके कपड़ों के अंदर हाथ डाल कर उनकी चूंचियों को सहलाना चालू कर दिया और उनके निप्पलों के साथ खेलने लगा. बीच – बीच में मैं उनके निपल्स को कस कर दबा भी देता था जिससे वो सिहर जाती और मुझे कस कर पकड़ लेती…

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मेरा नाम अमोल है. मैं मुंबई का रहने वाला हूँ और अभी एमबीए की पढ़ाई कर रहा हूँ. मेरी उम्र 26 साल है और मैंने अब तक बहुत सारी लड़कियों और भाभियों की चुदाई की है.

अन्तर्वासना पर ये मेरी दूसरी कहानी है इसके पहले मैंने एक और कहानी भेजी थी जो अभी तक यानि कि मेरे इस कहानी लिखने प्रकाशित नहीं हुई. अब अगर ये भी कहानी जल्दी प्रकाशित नहीं हुई तो मैं अब आगे और कोई कहानी नहीं लिखूँगा.

ये जो कहानी मैं लिखने जा रहा हूँ यह चार – पाँच दिन पहले की है. मेरी पड़ोस में एक भाभी रहती है जिनकी उम्र लगभग मेरे जितनी ही है और वो दो बच्चो की माँ है फिर भी उन्होंने अपने आपको बहुत अच्छे से मेंटेन किया हुआ है. उन्हें देख कर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि वो दो बच्चों की माँ है.

उनका फिगर भी ठीक – ठाक है. उनकी चूचियाँ और उनकी गांड भी ज्यादा बड़े नहीं हैं. कुल मिला कर दोस्तों वो एक औसत महिला हैं लेकिन उनका व्यवहार बहुत ही मिलनसार है और वह हमेशा दूसरों की बहुत मदद करती रहती हैं. उनकी आवाज़ बहुत ही मीठी है. अगर कोई उनकी सेक्सी आवाज़ सुन ले तो उसका लौंड़ा जरूर सलामी देने लगेगा.

उस दिन हुआ यूं कि उनके पापा का पुणे में एक्सिडेंट हो गया और उनसे मिल कर आने के बाद वो बहुत दुखी रहने लगी थी. बच्चों के स्कूल और पति के काम पर चले जाने के बाद वो अकेली उदास बैठी रहती थी. मैं तो बहुत दिनों
से उनको चोदने के फिराक में लगा था.

उनको इस तरह उदास देख कर मैंने सोचा यही सही मौका है, सहानुभूति दिखा कर उनको चोदा जा सकता है. इसलिए फिर मैं उनके पास जाकर उनके साथ घंटों तक यहां – वहां की बात करने लगा और वो भी फ़्रेंडली होकर बात करती रहती थी.

लेकिन उनको चोदना इतना आसान नहीं था. वो अपने पति से बहुत प्यार करती हैं और उनके प्रति बहुत वफादार हैं.
उनसे बात करते अब एक हफ्ता हो चुका था. अब हम दोनों खूब अच्छे दोस्त बन गए थे और खुल कर हर विषय पर बात करते थे. एक दिन मैं जब उनके घर गया तो देखा कि वो रो रही थीं. उन्हें रट देख कर मैं उनके पास जाकर पूछा – क्या हुआ भाभी?

तो उन्होंने रोते हुए कहा कि पापा की तबियत में कोई सुधार नहीं हो रहा है. फिर मैंने उनको हिम्मत बंधाया और चुप करा दिया. वो कहने लगी “रो – रो कर मेरा सिर दुखने लगा है, मैं बाम लगा लेती हूँ.” तो मैंने कहा – लाइये, मैं लगा देता हूँ.

फिर मैंने उनके हाथ से बाम ले लिया और उनके सिर पर लगाने लगा और वो मेरी गोद में सिर रख कर लेट गयी. ऐसा करने से ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया था. जिससे मैं बड़ा असहज महसूस करने लगा. मालिश करते – करते उन्होंने अपनी आँख बंद कर ली तो मुझे लगा कि वो सो गयी है.

फिर मैंने उनके सिर को नीचे कर दिया और जाने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा – तुम बहुत अच्छे हो. आज मेरे दुख में मेरे साथ खड़े हो. तुमसे बात कर के मुझे बड़ा अपनापन लगता है.

यह कह कर उन्होंने मेरे हाथों को चूम लिया. उनकी गरम – गरम साँसों से मेरा लन्ड पूरे उफान पर आ गया और फिर मैं उनके पास बैठ गया और उनके गाल पर एक किस कर दिया. तो उन्होंने हंस कर अपनी आंखें बंद कर ली.

अब मुझे उनका इशारा समझ में आ गया और मैंने उनके होंठों को मुंह मे लेकर चूसने लगा और हाथों से उनके पूरे शरीर को टटोलने लगा. इसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था. अब जब उन्होंने मेरा कोई विरोध नहीं किया तो मैंने धीरे – धीरे उनके कपड़ों के अंदर हाथ डाल कर उनकी चूंचियों को सहलाना चालू कर दिया और उनके निप्पलों के साथ खेलने लगा. बीच – बीच में मैं उनके निपल्स को कस कर दबा भी देता था जिससे वो सिहर जाती और मुझे कस कर पकड़ लेती.

किस करते – करते मैंने उनको पूरा नंगा कर दिया और उनकी बुर को सहलाने लगा. फिर धीरे – धीरे मैंने उनकी फुद्दी में उंगली डाल कर जी-स्पॉट ढूंढने लगा और जैसे ही उनके जी स्पॉट को टच किया वो सिहर गयी और पूरी तरह से मेरे ऊपर टूट पड़ी और मुझे कस कर अपने में भींच लिया.

अब मैंने उनको किस करना छोड़ दिया और उनकी चूत के पास आ गया और उनकी चूत को चौड़ा करके देखा तो अंदर पूरा लाल दिख रहा था. फिर मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा. जिससे वह ज़ोर – ज़ोर से हांफने लगी और मेरे सिर को अपनी चूत में दबाने लगी. मैं उनकी प्यारी चूत को चाटता रहा, जिससे फिर उनका पानी निकाल गया.

अब मैंने उन्हें अपना 6 इंच का लन्ड चूसने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया और कहा आज नहीं यार फिर कभी करवा लेना तो मैंने भी उनको फोर्स नहीं किया. फिर मैंने उनको उठाया और जाकर बेड पर ले जाकर लिटा दिया और फिर धीरे से अपने लन्ड को उनकी चूत में डालने लगा.

जिससे वह सिसकारी लेने लगीं और मेरे लन्ड को अंदर लेने के लिए अपने आपको एडजस्ट कर लिया. अब मेरा लन्ड धीरे – धीरे उनकी चूत में सरकता चला गया और अब मैं जन्नत का मजा लेने लगा. मैं बहुत धीरे – धीरे धक्का लगाने लगा और हर धक्के के साथ भाभी की कराह निकल जाती. जिसे सुन कर मुझे बड़ा मजा आता और मैं उनको बार – बार किस करता जाता और कभी मैं उनकी चूचियों को चूसता.

फिर मैंने उनसे पलट कर कुतिया बनने को कहा और वो मान गयी. अब मैं उनको कुतिया बना कर चोदने लगा. तभी मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ और मैंने अपने लन्ड को बाहर निकाल लिया और उनको किस करने लगा. मैं उनके होंठों को बीच – बीच में अपने दाँतों से काट लेता और वो मुझे इसके बदले में चिकोटी काट लेती थी.

कुछ देर ऐसा करने के बाद फिर मैंने उनको दीवार के सहारे खड़ा कराया और उनकी एक टांग को अपने हाथ में लेकर अपना लन्ड उनकी चूत में डाल कर चोदने लगा. फिर मैंने उनका मुंह दीवार की तरफ करके पीछे से उनकी चूत मारी.

भाभी किसी मंझी हुई चुदक्कड़ की तरह चुदाई का मजा ले रही थी और अपने मुंह से हल्की – हल्की कराह निकाल रही थी जो मुझे और मजा दे रहा था. मैं भी उनको मजे से चोद रहा था. चूंकि हमें किसी के आने का डर नहीं था इसलिए आधे घंटे तक हमारा चुदाई का काम चलता रहा.

अब मैं और भाभी बहुत थक गये थे तो मैंने भाभी को लिटा दिया और खुद उनके ऊपर जाकर लेट गया. फिर उन्होंने अपने हाथों से मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी चूत का रास्ता दिखा दिया. मैं भी उनकी चूत में समाता चला गया और फिर कुछ देर बाद भाभी ने कहा – अब बस कर यार.

चूँकि मैं भी थक चुका था तो मैंने कहा – ठीक है.

फिर मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और पूरे तूफान की तरह चोदने लगा. भाभी की चूत के पानी की वजह से पूरे रूम में पच्च – पच्च की आवाज़ आ रही थी और फिर लगभग 5 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने उनसे पूछा – कहां निकालूँ?

इस पर उन्होंने मुझे कस कर जकड़ लिया और अपने से चिपका लिया. अब मैं हिल भी नहीं पा रहा था तो मैं समझ गया कि भाभी अंदर ही लेना चाहती हैं. इसलिए मैंने भी अपने आपको छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की और उनकी चूत में ही झड़ गया. मेरे साथ ही भाभी भी झड़ गयी. झड़ते समय उन्होंने मुझे ज़ोर से काटा. जिससे मेरी सीत्कार निकल गयी.

फिर हम बहुत देर तक ऐसे ही लेटे रहे और यहां – वहां की बात करते रहे. भाभी फिर मेरे ऊपर आ गयी और मुझे यहां – वहां चूमे जा रही थी. फिर थोड़ा रुक कर उन्होंने कहा – तुझसे चुद कर आज बहुत मजा आ गया यार. बड़े मजे से चोदता है तू और आज तो तूने मुझे पूरा संतुष्ट कर दिया. तूने मेरा इतना साथ दिया है कि अब मैं तेरी हूँ, तू जब चाहे मुझे चोद सकता है.

फिर मैंने उनको एक लंबा सा किस किया और कहा – मैं हमेशा आपके साथ हूँ.

दोस्तों, मैंने उनको दूसरी बार फिर चोदा और इस बार उन्होंने मेरे लन्ड को जम कर चूसा. लेकिन ये सब मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगा.

मुझे आपके सुझावों का इंतजार रहेगा. अपने सुझाव मुझे मेरे मेल [email protected] पर दें.

नोट- अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियां आप लोग भेजते रहते हैं. ऐसी स्थिति में तत्काल ही आपकी कहानियों को प्रकाशित कर पाना हमारे लिए संभव नहीं हो पाता है. कृपया कहानी भेजने के बाद थोड़ा इंतजार करें और हां अपनी कहानियां भेजना चालू रखें.

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