भाभी ने प्यार करना सिखाया

मैंने अपना लंड उसके मुँह से बाहर निकाला और उसकी चूत में घुसेड़ दिया. चूत गीली होने के कारण लौड़ा झट से चूत में पूरा जड़ तक समा गया.

दोस्तों मेरा नाम सोनू है और मैं महाराष्ट्र के नागपुर का रहने वाला हूँ. मैं आपके सामने एक अच्छी और सच्ची कहानी लेकर फिर से हाजिर हुआ हूँ. मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको मेरी यह कहानी पसंद आएगी.

पहले मैं अपने बारे में कुछ बता देना चाहता हूँ. मैं साधारण सा दिखने वाला एक इंसान हूँ और मुझे सेक्स करना बहुत ज्यादा पसंद है. मेरा कद 5’10” और शरीर एकदम चुस्त-दुरुस्त है. मेरा लंड भी लड़कियों के लिए एकदम सही है.

मुझे शुरू से ही आंटियाँ और भाभियाँ बेहद पसंद हैं और मैं हमेशा से इनका दीवाना रहा हूँ.

यह बात 2 साल पुरानी है. मेरे घर के बगल में एक भाभी रहा करती थीं. उनका नाम महजबीं (बदला हुआ नाम) है. वह अक्सर मुझे देखा करती थीं, पर मैंने उन पर कभी ध्यान नहीं दिया.

ऐसे ही वक्त गुज़रता गया. फिर एक दिन अचानक मैंने उनसे पूछ ही लिया- भाभीजान, आप मुझे ऐसे क्यों देखते रहते हो?

उसने बड़े ही कातिलाना अंदाज़ में जवाब दिया- क्यों! आपको अच्छा नहीं लगता क्या?

मैंने कहा- ऐसी बात नहीं है, पर फिर भी आप शादीशुदा हो. किसी ने आपको ऐसे मुझे देखते हुए देख लिया तो आपको परेशानी हो सकती है.

उसने कहा- मुझे दुनिया की परवाह नहीं है. तुम मुझे सिर्फ़ इतना बताओ कि तुम मुझे पसंद करते हो या नहीं?

मैंने मन में सोचा कोई पागल ही होगा जो इतनी खूबसूरत भाभी को हाथ से जाने देगा.

मैंने कहा- मैं तो आपकी खूबसूरती का दीवाना हूँ और यह तो मेरा नसीब है, जो एक अप्सरा खुद चल कर मेरे पास आई है.

इसी तरह उनसे कुछ देर बात-चीत हुई. इसके बाद मैंने अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया और उससे मुझे फोन करने को कहा.

जवाब में वह मुस्करा कर अपने चूतड़ों को मटकाती हुई चली गई और मैं बेसब्री से उसके फोन का इन्तजार करने लगा. उसने मुझे दूसरे दिन फोन किया. जैसे ही मैंने फोन उठाया, वहाँ से एकदम से एक प्यारी आवाज़ में मुझे सुनाई दिया- हैलो!
मैं- हाँ हैलो, जी कहिए कौन?

फोन करने वाले ने कहा- मैं महजबीं.
मैं- जहे नसीब.

महजबीं- कैसे हो आप?
मैं- आपकी दुआ है.

महजबीं- आज मैं बहुत खुश हूँ.
मैं- क्यों?

महजबीं- आपसे बात जो कर रही हूँ.
मैं- ओके, लेकिन मुझे खुशी तब होगी जब तुम मुझसे मिलोगी.

महजबीं- मुझे भी तुमसे मिलना है और बहुत जल्द मैं तुमसे मिलूँगी.
मैं- ओके, मुझे तुम्हारे फोन का इंतज़ार रहेगा.

फिर थोड़ी देर बात करने के बाद उसने फोन काट दिया. कुछ दिन ऐसे ही गुजरे. एक दिन मैं ऑफिस में काम कर रहा था. तभी अचानक उसका फोन आया.

उसने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ, घर पर कोई नहीं है. जल्दी से आ जाओ.

मैं तुरन्त ऑफिस से छुट्टी लेकर उसके घर पहुँच गया. उसके घर पहुंचकर मैंने डोरबेल बजाई. उसने जैसे ही दरवाज़ा खोला, मैं तो उसे देखता ही रह गया. वह नीले लिबास में गजब की माल लग रही थी. उसे देखते ही मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसे चूमने लगा. उसने कहा- ‘अरे! आराम से, मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ. फिक्र मत करो सब बाहर गए हैं. रात तक कोई नहीं आएगा.’

इसके बाद वह मेरे लिए चाय-नाश्ता लेकर आई. हमने साथ में चाय नाश्ता किया और बातें करने लगे. बातों ही बातों में मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और उसे चूमने लगा. वह भी मेरा साथ दे रही थी. मैं चूमते-चूमते उसकी गर्दन पर आ गया, फिर धीरे-धीरे उसकी नाभि पर चूमने लगा.

अब वो भी पूरी गरम हो चुकी थी और बहुत ही कामुक आवाजें निकाल रही थी- आहह… अहा… आ आह… हहा हहा आप और चूमो… चूसो.. और और आआअहहाह…
मैं भी जोश में आ गया और चूमते-चूमते उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया.

क्या बताऊँ दोस्तों, उसकी चूत जैसे कोई पपीता कटा हुआ मेरे सामने रखा हो और मुझे उसे खाना है. मैं भी भूखे शेर की तरह उस पर टूट पड़ा और चूमते-चूमते हम 69 पोज़िशन में आ गए.

वह चुदास से मदहोश होती जा रही थी. वह कामातुर हो कर कहने लगी- अब सब्र नहीं हो रहा है. जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में ठोक दो.

मैंने अपना लंड उसके मुँह से बाहर निकाला और उसकी चूत में घुसेड़ दिया. चूत गीली होने के कारण लौड़ा झट से चूत में पूरा जड़ तक समा गया. वह भी चुदी चुदाई थी, सो उसको भी बहुत मजा आ रहा था. अब कमरे में उसकी आहों की गूँज सुनाई देने लगी, आअहहाहह… आ… हज्ज… हाँ… और ज़ोर से वह ऐसी कामुक आवाजें निकाल रही थी. मैं अब पूरे जोश में था और तेज़ी के साथ झटके लगा रहा था.

धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों साथ ही कब झड़ गए, मुझे पता ही नहीं चला. अब हम दोनों थक कर बिस्तर पर अगल-बगल लेट गए.

थोड़ी देर के बाद फिर से उसने मेरे लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया और मुंह में लेकर चूसने लगी. उसके चूसने से मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया. इस बार मैंने उससे कहा- मुझे तुम्हारी गांड भी मारनी है. पहले तो वो मना करने लगी, पर मेरे ज्यादा ज़ोर देने पर वह मान गई.

मैंने टेबल पर रखी तेल की शीशी से थोड़ा सा तेल लेकर उसकी गांड के छेद पर लगाया. जिसकी वजह से उसकी गाण्ड चिकनी हो गई. फिर मैंने लण्ड को उसके गांड के छेद पर सेट किया. तेल और उसकी चूत से टपकते पानी की वजह से लण्ड को अन्दर जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई. एक-दो झटकों में ही पूरा लण्ड आसानी से अन्दर चला गया.

मेरा मोटा लौड़ा अन्दर जाने से दर्द के मारे उसकी चीख निकल गई. लेकिन मैं उसकी परवाह न करते हुए उसके मुँह पर हाथ रख कर तेज़ी से धक्के मारता चला गया. थोड़ी देर बाद जब लौड़ा सैट हो गया तो उसे भी मजा आने लगा.

जैसे-जैसे वह ‘आह… आअहहाहह… आह… अहाहाहा…’ की कामुक आवाजें निकालती, मैं उतनी तेज़ी से झटके लगाता. तकरीबन 25 मिनट की गाण्ड चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था. मैंने उससे कहा, तो उसने कहा- ‘मेरे मुंह में झड़ना. मैं तुम्हारा पानी पीना चाहती हूँ.’

मैंने अपना लंड उसकी गाण्ड से निकालकर उसके मुंह में दे दिया और वो पूरा पानी गटक गई. फिर उसने मेरा लौड़ा अच्छी तरह से चाट-चाट कर साफ किया और हम थककर बिस्तर पर लेट गए. थोड़ी देर बाद वह मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाथरूम ले गई और फिर हम साथ में ही नहाए.

नहाते-नहाते वह फिर से मेरे करीब आ गई और मेरे लण्ड को पकड़ कर मुँह में भर लिया. वो मेरे लण्ड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. उसके चूसने से मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया. अब मैंने उसे दीवार के सहारे खड़ा किया और पीछे से उसकी चूत में लण्ड पेल दिया. वह भी ब्लू-फिल्म की अदाकारा के जैसे मेरा साथ दे रही थी और आख़िर में मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.

अब वक्त बहुत ज्यादा हो गया था, तो महजबीं ने कहा- सोनू, अब बस करो मेरे घर वाले अब आते ही होंगे. फिर मैं उसे लम्बा सा एक चुम्मा देकर वहाँ से चला गया. हमें 2 साल हो गए हैं, लेकिन अब भी जब उसे मौका मिलता है, वह मुझे फोन कर के बुला लेती है और मैं भी भागता हुआ उसके पास पहुँच जाता हूँ.

तो दोस्तों, यह कहानी थी मेरी और महजबीं भाभी की. मुझे उम्मीद है आपको मेरी कहानी जरूर पसंद आएगी. मुझे ईमेल कीजिएगा[email protected]

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