भतीजी को आम के बगीचे में चोदा

एक बार मैं अपने गांव गया था. वहां मैंने मेरी बचपन की दोस्त, जो रिश्ते में मेरी भतीजी लगती थी, उसके साथ आम के बगीचे गया. हम बगीचे में थे, तभी बारिश होने लगी. इस बारिश में हमने कैसे मस्ती की ये जानने के लिए आपको इस कहानी को पढ़ना होगा…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम गगन है और ये जो कहानी मैं आप लोगों के सामने पेश करने जा रहा हूं ये उस समय की है जब 12वीं का पेपर देकर मैं अपने गांव गया था. गांव में हमारी जॉइंट फैमिली है, इसलिए हमारे परिवार के सभी एलपीजी साथ रहते हैं.

मेरे पिता जी अपने सभी भाईयों में छोटे हैं और मैं भी अपने सभी चचेरे भाई – बहनों में छोटा हूं. इस वजह से वहां मुझे सबसे ज्यादा लाड – प्यार मिलता है.

ज्यादा टाइम वेस्ट न करते हुए अब सीधा मैं अपना एक्सपीरियंस आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं. हमारे पड़ोस में एक लड़की रहती थी. वह मुझसे एक साल छोटी थी. रिलेशन में वह मेरी भतीजी लगती थी. उसका नाम नेहा था. मैं उसके हमउम्र था वो हम बचपन में साथ ही खेलते थे. हमारे बीच ऐसा – वैसा कुछ नहीं था.

लेकिन इस बार जब मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया. वो बहुत स्मार्ट और खूबसूरत लग रही थी. उसकी छोटी – छोटी संतरे जैसी चूचियां अब मुझे आकर्षित करने लगी थीं. मेरा मन उसके कोमल और गुलाबी होंठों का रसपान करने को बेताब हो गया.

फिर जब बो मेरे पास आई तो मैं उसे देखता ही रह गया. वो भी पास आते ही मेरे गले लग गई, ठीक वैसे ही जैसे हम बचपन में गले मिलते थे. हालांकि, अब पहले के मुकाबले बहुत बदलाव आ गया था. गले लगते ही जब उसके मुलायम चूचे मेरे सीने से टच हुए तो मुझे करंट का झटका सा लगा.

खैर, फिर हम अलग हुए और एक – दूसरे का हाल पूछा. फिर वो मुझसे कहने लगी कि तुम्हें मेरी याद नहीं आती! तब मैंने उससे कहा कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं, याद करता हूं मैं तुम्हें.

इतना कह के मैंने उसे एक की-रिंग गिफ्ट किया, जिसे देख के वो बहुत खुश हुई. दोस्तों, वो दिन ऐसे ही बातों में निकल गया. रात हुई तो मेरे दिमाग में फिर वो हावी हो गई. मैं बस यही सोच रहा था कि किस तरह उसे प्रपोज़ करूं?

कुछ समझ नहीं आ रहा था. फिर मैंने उसके नाम की मुठ मारी और सो गया. अगले दिन जब मैं उससे मिला तो उस टाइम वो बगीचे जा रही थी. दोस्तों, मैं आपको बताना भूल गया था कि हमारे गांव में आम के बहुत से बाग हैं. वो जा रही थी तो मुझे भी चलने को कहा.

तब मैं भी उसके साथ वहां चला गया. दोस्तों, रास्ते में जब भी मैं किसी लड़की को देखता तो वो मुझसे थोड़ी नाराज सी हो जाती थी. यह देख मुझे लगा कि शायद वो भी मुझसे प्यार करती है.

खैर, हम बगीचे पहुंचे. वहां पेड़ों पर आम के फल काफी कम लगे थे. फिर हम वहीं बैठ कर इधर – उधर की बात करने लगे. थोड़ी देर बाद उसने एक पेड़ की तरफ इशारा करते हुए मुझसे कहा कि उस पेड़ पर पके आम हैं, चलो उनको तोड़ते हैं.

वो आम ज्यादा ऊंचाई पर नहीं थे, इसलिए हम नीचे से ही उन्हें तोड़ने की कोशिश करने लगे. हम उछल – उछल के आम तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन वो हमारी पहुंच से थोड़ा दूर रह जाता. काफी कोशिश के बाद भी जब हम आम न तोड़ सके तो मैंने उससे कहा कि आओ मैं तुम्हें उठा लेता हूं, इससे तुम्हारे हाथ आसानी से आम तक पहुंच जाएंगे.

नेहा मान गई. फिर मैंने उसे उठा लिया. इस स्थिति में उसके बूब्स मेरे मुंह के पास आ गए थे. दिल तो कर रहा था कि उन्हें मुंह में भर के चूस लूं. लेकिन मैंने खुद पर कंट्रोल

नेहा के बूब्स देखने की वजह से मेरा लन्ड खड़ा हो गया और शायद नेहा ने भी मेरा उठा हुआ पजामा देख लिया था. फिर उसने मेरी तरफ देख के एक छोटी सी स्माइल पास कर दी. मैंने भी मुस्कुरा दिया.

दोस्तों, मैं चाहता तो था कि नेहा को प्रपोज कर दूं लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी. हम वहां एक घण्टे तक साथ में बैठे रहे और एक – दूसरे से मज़ाक करते रहे. इसी बीच आसमान में काले – काले बादल आ गए और फिर थोड़ी देर में बारिश होने लगी.

बारिश तेज हो रही थी. इस वजह से हम भीगने लगे. दोस्तों, वहां बगीचे में एक झोपड़ी थी तो हम बारिश से बचने के लिए उस तरफ गए लेकिन बारिश इतनी तेज थी कि वहां तक पहुंचते – पहुंचते हम भीग गए. बादलों की वजह से अंधेरा हो गया था और बिजली भी कड़क रही थी. और चूंकि हम भीग गए थे इसलिए हल्की – हल्की ठंड भी लग रही थी.

नेहा मुझसे चिपक के खड़ी थी. उसके कपड़े भीग गए थे इसलिए मम्मे कपड़ों के ऊपर से साफ दिखाई देने लगे थे. तभी अचानक बहुत तेज बिजली कड़की और नेहा डर के मुझसे लिपट गई.

तब मैंने मज़ाक करते हुए नेहा से कहा कि ऐसे मत लिपटो, मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है. यह सुन कर नेहा की आंखें नशीली हो गईं और वह बोली कि यही तो मैं भी चाहती हूं कि हमसे कंट्रोल न हो. इस पर मैंने नेहा से कहा कि मतलब? तो वो नागिन की तरह मुझसे लिपटते हुए बोली – आई लव यू, मैं तुम्हें बचपन से प्यार करती हूं.

ये सुनते ही मैंने नेहा के होंठों पर होंठ रख दिए और उसके होंठ ऐसे चूस रहा था जैसे प्यासे को पानी मिल गया हो. उसके भीगे होंठ चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. फिर मैं अपना हाथ नीचे ले गया और उसके मम्मों पर रख के उन्हें दबाने लगा. मेरे ऐसा करने से वो मस्त होने लगी.

फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसकी पतले कपड़े वाली कमीज उतार दी. नीचे उसने सफेद बनियान पहन रखी थी. जिसमें से उसके उभरे हुए बूब्स दिख रहे थे. उसके मम्मों को देख के मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ फिर मैंने झट से उसकी बनियान उतार दी.

अब उसके संतरे जैसे नंगे मम्मे मेरे सामने आ गए. उन्हें देखते ही मैंने उसके मम्मों को पकड़ के अपने मुंह में भर लिया. इससे वो सिसकियां लेने लगी. साथ ही मेरे बालों को भी सहला रही थी.

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया और वो सरकता हुआ नीचे चला गया. अंदर उसने अंडर वियर पहन रखी थी. मैंने उसे भी खींच के निकाल दी. फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा. अब तक उसकी बहुत गीली और गर्म हो चुकी थी.

तभी मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में सरका दी. चूत गीली होने की वजह से उंगली आराम से अंदर चली गई. अब उसकी सिसकियां बढ़ने लगीं. थोड़ी देर बाद फिर मैंने उसको वहीं झोपड़ी के अंदर जमीन पर लिटाया और अपने गीले कपड़े उतार कर उसके ऊपर आ गया.

वह चूत में लन्ड लेने के लिए मचल रही थी. फिर उसने मुझसे कहा कि गगन अब देर न करो, लन्ड अंदर डाल कर पहली बार मुझे यौन सुख का अनुभव कराओ. इसके बाद मैंने उसकी चूत पर अपना लन्ड टिकाया और हल्के – हल्के दबाव बनाने लगा.

थोड़ा दबाव देने पर मेरे लन्ड का टोपा उसकी चूत में घुस गया. दोस्तों, वह पहली बार चुद रही थी, इस वजह से उसकी चूत काफी टाइट थी. लन्ड का टोपा अंदर जाने पर उसे हल्का सा दर्द भी हुआ तो उसने कहा कि प्लीज गगन धीरे – धीरे करना दर्द हो रहा है.

मैंने उसे सांत्वना दी और फिर धीरे – धीरे लन्ड अंदर करने लगा. थोड़ा और अंदर जाने पर मेरे लन्ड में कुछ अवरोध सा महसूस हुआ. मैं समझ गया कि हाइमन झिल्ली है. मैंने थोड़ा सा धक्का दिया तो लन्ड उसकी झिल्ली फाड़ता हुआ पूरा अंदर चला गया. झिल्ली फटने की वजह से उसकी चूत से हल्का सा खून बाहर आया. शायद उसे कुछ दर्द भी हुआ हो लेकिन उसने कहा कुछ नहीं.

तब मैंने उसे एक किस किया और कहा कि नेहा, आज से तुम पूरी औरत बन गई हो. इस पर उसने बस मुस्कुरा दिया. फिर मैं धक्के लगाने लगा. अब तक उसकी चूत में मेरा लन्ड सेट हो गया था और चूत पानी छोड़ने लगी थी, जिससे लन्ड आसानी से अंदर – बाहर हो रहा था. नेहा को भी मज़ा आ रहा था और वह सिसकियां लेती हुई चुद रही थी.

बारिश अभी भी हो रही थी. करीब 25 मिनट की मस्त भीगती हुई चुदाई के बाद मैंने उसकी चूत में ही पानी छोड़ दिया. मेरा गर्म – गर्म वीर्य अंदर जाते ही उसकी चूत ने भी अपना रस छोड़ दिया. फिर हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे. करीब आधे घण्टे बाद जब बारिश बंद हुई तो हम अपने कपड़े पहन के घर चले आए. मेरी यह कहानी कैसी लगी, कमेंट करके जरूर बताएं.

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