भीड़ का फायदा उठा कच्ची कली को ट्रेन के बाथरूम में चोदा भाग – 3

इस कहानी में अभी तक आपने पढ़ा कि मुझे ट्रेन में एक लड़की मिली. जिसकी मैंने टॉयलेट जाने में मदद की और इस बहाने उसके नाजुक बदन का भोग किया. वह मुझसे पट चुकी थी. फिर वापसी में वह मुझे अपनी सहेली के घर ले गई. शायद उसकी सहेली भी मुझसे मज़ा लेना चाहती थी. जब वह हमें छोड़ने आ रही थी तो मैंने उसके साथ भी मज़े किये…

इस कहानी का पिछला भाग – भीड़ का फायदा उठा कच्ची कली को ट्रेन के बाथरूम में चोदा भाग – 2

अब आगे…

मैंने वहाँ बैठे – बैठे उन लोगों से काफी सारी बातें की. बात करते – करते साढ़े पांच बज गए. तब मैंने रश्मि को चलने के लिए कहा. मैंने रश्मि से कहा – ऐसा करते हैं बड़े स्टेशन चलते हैं आज भीड़ – भाड़ ज्यादा है तो चढ़ने में दिक्कत आएगी. ट्रेन वहीं स्व चलती है तो वहां आसानी से सीट भी मिल जाएगी.

रश्मि बोली – हाँ ये ठीक रहेगा. बड़े स्टेशन ही चलते हैं. लेकिन वहाँ जाने में टाइम ज्यादा लगेगा.

आराधना – ऐसे कैसे चलते हैं. चलो मैं छोड़ देती हूँ.

फिर अपनी मम्मी की तरफ देखते हुए आराधना ने कहा – मम्मी, मैं दोनों को स्टेशन छोड़ के आती हूँ. टाइम कम है. अगर गाड़ी निकल गयी तो परेशानी होगी. फिर अभी जाकर टिकट भी लेना है.

आंटी बोलीं – ठीक है, बेटा तुम छोड़ आओ. लेकिन संभल के जाना. काफी ट्रैफिक रहता है उधर.

आराधना ने हाँ में सिर हिलाया और गाड़ी निकालने लगी. फिर हम आंटी से नमस्ते करके बाहर आ गए. तभी रश्मि बोली – आराधना, मैं स्कूटी ड्राइव करती हूँ. तुम दोनों बैठो. काफी दिन हो गए मैंने स्कूटी नहीं चलाई है.

मैंने देखा कि रश्मि की बात सुन कर आराधना खुश हो गयी लेकिन फिर दिखावा करते हुए बोली – तुम रहने दो. तीन लोगों के साथ ड्राइव नहीं कर पाओगी.

लेकिन रश्मि नहीं मानी और फिर हम तीनों स्कूटी पर बैठ गए. रश्मि ड्राइव कर रही थी. उसके पीछे आराधना और फिर मैं बैठा था. आप लोग तो जानते ही हो कि स्कूटी में तीन लोगों के बैठने पर क्या हालत होती है! मैं आराधना से बिलकुल चिपक कर बैठा था. उसने कोई डिओ लगाया हुआ था. बहुत ही अच्छी स्मेल आ रही थी.

धीरे – धीरे मेरी भावनाएं भड़कने लगीं और लंड खड़ा होने लगा. क्योंकि ट्रैफिक वाला रास्ता था और जगह – जगह ब्रेकर लगे हुए थे तो हम बार – बार उछल रहे थे. इस धक्कमधक्का में मेरा लंड बुरी तरह टाइट हो गया था. जैसे ही अगला ब्रेकर आया तो आराधना के उछलने पर मेरा लंड उसके चूतड़ों के नीचे आ गया.

दोस्तों, मेरी तो हालत तो पहले से ही खराब थी. उसके बदन से उठती खुशबू और लंड पर बार – बार उछलती उसकी गांड से टकरा कर मेरा लंड पूरी तरह तन गया था. अब मेरे लंड को उसके बदन की गर्मी भी महसूस हो रही थी. इस वजह से वो और भी फड़कता जा रहा था.

रश्मि शॉर्टकट के चक्कर में एक सुनसान रास्ते से ड्राइव कर रही थी. आगे रास्ता खराब था तो मैंने सँभलने के लिए आराधना को पकड़ना चाहा मगर तभी एक झटका लगा और मैंने पीछे से उसके बूब्स पकड़ लिए. तभी उसने बगल में मेरे हाथों को दबा लिया.

दोस्तों, मेरी उत्तेजना लगातार बढ़ती ही जा रही थी. मौके की नजाकत को देखते हुए मैंने उसके बूब्स को हल्के – हल्के दबाना शुरू कर दिया. दोस्तों, उसके बूब्स कितने नर्म बूब्स थे बता नहीं सकता! बस मैं यही सोच रहा था कि स्टेशन कभी न आए और मैं ऐसे ही उसके बूब्स मसलता रहूँ.

करीब 15 मिनट में हम स्टेशन पहुँच गए. दोस्तों, थोड़ी देर और हो जाती तो मेरा लंड पानी छोड़ देता. स्टेशन पर उतार कर मैंने अपने दायें हाथ को पेंट की जेब डाला और अन्दर से लंड को दबा लिया ताकि रश्मि को शक ना हो. फिर आराधना ने कल मिलेंगे कह कर विदा ली और होंठों पर रहस्यमयी मुस्कान बिखेरती चली गयी.

थोड़ी देर में मेरा लंड नार्मल हुआ. हम टिकट लेकर ट्रेन में बैठ गए. स्टेशन पर बहुत भीड़ थी पर ट्रेन ज्यादा लोग नहीं थी. शायद आने वाले लोग ज्यादा थे. हम एक बोगी में बैठ गए. उसमें कुल 8-10 लोग ही थे. हमारे कंपार्टमेंट में कोई नहीं बैठा था.

तभी मैंने रश्मि से कहा – तुम काफी अच्छा ड्राइव कर लेती हो और तुम्हें तो यहाँ के रास्तों का भी पता है. बहुत ज़ल्दी तुमने स्टेशन पहुंचा दिया.

यह सुन कर रश्मि पहले तो कुछ सकपकाई फिर खुद को सँभालते हुए बोली – मैं अक्सर ड्राइव करती रहती हूँ तो चलाना आता है. वैसे ड्राइविंग मुझे आराधना ने ही सिखाया है. फिर हम इधर – उधर की बातें करने लगे. थोड़ी देर बाद रश्मि उठी तो मैंने पूछ लिया – कहाँ जा रही हो? कुछ चाहिए तो मैं ले आता हूँ.

रश्मि बोली – जी नहीं, मैं टॉयलेट जा रही हूँ और अब आप यहीं बैठे रहिए.

दोस्तों, मैं तो कब से ऐसे ही मौके के तलाश में था. मुझे भी टॉयलेट लगी है, कहते हुए मैं भी उसके पीछे हो लिया. वो हंसती हुई टॉयलेट की तरफ चल दी. रश्मि जैसे ही टॉयलेट का दरवाजा खोलकर अन्दर जाने लगी वैसे ही मैं भी दरवाजे को धकेलता हुए उसके पीछे से अन्दर घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया.

यह देख रश्मि (फुफुसाते हुए) बोली – प्लीज सूरज यहाँ नहीं. किसी को पता चल जाएगा. आप जाओ ना.

मगर मैं कहाँ सुनने वाला था. मैंने उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया. एक हाथ मैंने उसकी कमर में डालकर उसे अपने बदन से चिपका रखा था और दूसरे हाथ से उसके सर को पकड़े रखा था ताकि होंठों को छुड़ाने की कोशिश ना करे.

पांच मिनट तक मैं उसके होंठों को चूमता रहा. इस दौरान कभी मैं ऊपर के होंठ को चूसता तो कभी नीचे के. फिर धीरे – धीरे रश्मि की सांसे गर्म होने लगीं और उनकी लम्बाई भी बढ़ गई.

अब वो भी मेरे होंठों को चूस रही थी. फिर मैंने उसे छोड़ दिया और अलग होकर खड़ा हो गया. पहले तो वो कुछ समझ नहीं पायी. लेकिन फिर उसने मेरी शर्ट पकड़ कर खींच लिया और खुद दीवार से सट गयी. अब वो फिर मेरे होंठों को चूमने लगी और फिर मेरे गालों पर किस करने लगी.

उसके तन बदन में आग लग चुकी थी. वो पागलों की तरह मुझे चूम रही थी. फिर वो मेरी गर्दन पर किस करने लगी और मेरी शर्ट के बदन खोल दिए. दोस्तों, मैं नीचे बनियान और अंडर वियर वगैरह नहीं पहनता हूँ. ऐसे में बटन खुलने के बाद मैं ऊपर से नंगा हो गया.

फिर उसने दोनों हाथों का इस्तेमाल कर मुझे पीछे से कंधों से पकड़ लिया और मेरे सीने पर किस करने लगी. यह देख मैंने भी अपने हाथ उसके बूब्स रखे और उनका मर्दन करने लगा. अब उसके मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं और वो मेरे निप्पल को चाटने लगी.

मेरा लंड खड़ा हो चुका था और शिकार के लिए तैयार था. पर मैं अभी शिकार को और तड़पाना चाहता था. मैं चाहता था कि रश्मि खुद मेरे लोड़े को अपने हाथों से निकाले, प्यार करे और खुद अपनी चूत में घुसाए.

वो मेरे निप्पल को दांतों से काट रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं उसकी चूत में लंड डालकर उसे चोदने को बेचैन होने लगा था. पर मैंने खुद को कंट्रोल किया और एक हाथ से उसके बूब्स दबाते हुए कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा.

वो पूरी गर्म हो चुकी थी और शायद उसकी चूत भी गीली हो गई थी. वो अपनी गांड हिलाने लगी. उसने मुझे जकड़ लिया और अपने आप से भींच लिया. फिर मैंने उसका एक हाथ अपनी कमर से हटाकर अपने फुफकारते लंड पर रख दिया. वह लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी.

इसी बीच मैंने उसकी चूत पर उंगलियों का दबाव बढ़ा दिया तो वो जोर – जोर से गांड हिलाते हुए मेरे लंड को दबाने लगी. फिर मैंने उसका हाथ पैंट की ज़िप पर रखकर खोलने का इशारा किया. उसने ज़िप खोलकर हाथ अन्दर डाल दिया और लंड मुठ्ठी में पकड़ लिया.

अब वह मस्त होकर बेतहाशा उसे मुठ्ठी में दबा रही थी और हिला रही थी. इधर मैंने भी अपनी उंगलियाँ उसकी चूत की दरार में जमा दी. फिर वो लंड को पैंट से बाहर निकालकर अपने जांघ से रगड़ने लगी. अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. इसलिए मैं उसकी सलवार ऊपर करके पाजामी का नाडा खोलने की कोशिश करने लगा. पर जब नाडा मुझसे नहीं खुला तो कमीज के अन्दर हाथ डालकर उसके निप्पल को मसलने लगा.

निप्पल्स मसलते हुए मैंने उसके कान में धीरे से पजामी खोलने को कहा और उसके गाल और गर्दन को किस करने लगा. मेरे कहते ही उसने अपनी पजामी को खोलकर नीचे गिरा दिया. अब मेरा लंड उसकी मखमली जांघ को छू रहा रहा और ख़ुशी के मारे फूलता जा रहा था.

तभी उसने वापस मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ने लगी. मुझे उसकी पैंटी का गीलापन लंड पर महसूस हो रहा था, जिससे मेरी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी. मैं उत्तेजना में उसकी गर्दन पर दांत काट लिया और साथ में चूत पर धक्के भी मारने लगा. रश्मि भी गांड हिलाकर बराबर धक्के लगा रही थी.

लोहा गर्म था और चोट करने का टाइम हो गया था. मेरा लंड भी लोहे की रोड की तरह सख्त हो गया था. मैंने उसके कान धीरे से कहा – रश्मि, मेरी जान अब बच्चे को तड़पाओ मत और इसे चूम कर तुम्हारे अन्दर जाने के लिए कहो.

यह सुन कर रश्मि नीचे झुक कर घुटनों पर बैठ गयी और लंड को दोनों हाथों से पकड़ कर टोपे की खाल को खींच कर पीछे कर दिया. फिर वह अपने नाजुक होंठों से टोपे को चूमने लगी. थोड़ी देर बाद उसने टोपे को मुंह में ले लिया और जीभ से सहलाने लगी. मुझे ऐसा लग रहा था कि उत्तेजना की वजह से लंड की नसें फट जायेंगी.

तभी जोश में आकर मैंने लंड उसके मुह में ठेल दिया. लंड का टोपा जैसे ही उसके गले में टकराया वैसे ही रश्मि ने उसे बाहर निकाल दिया और छाती पर हाथ रख कर खांसने लगी.

फिर मैंने रश्मि को उठाया और दीवार से लगा कर उसके होंठों पर किस करने लगा. साथ में मैं उसके दोनों बूब्स भी दबा रहा था. इस दौरान हमारी लंबाई एक सी होने के कारण मेरा लंड से रश्मि की जांघो के बीच में आ गया और मैं उसकी पैंटी के ऊपर से ही ताबड़तोड़ झटके देने लगा.

तब रश्मि ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ों पर रख लिए और मुझे खींचने लगी. मैं धक्के मारता जा रहा था और रश्मि के होंठों, गालों और उसकी गर्दन को चूम रहा था.

तभी ट्रेन ने हॉर्न बजाया और धीरे – धीरे रेंगने लगी. ट्रेन चल पड़ी थी लेकिन कोच में कोई गहमा गहमी नहीं थी. मतलब साफ था भीड़ ज्यादा नहीं थी. इसलिए मैंने अपना ध्यान चुदाई पर लगा दिया.

मैं ऐसे ही पैंटी के ऊपर से धक्के मारता रहा. फिर थोड़ी देर बाद रश्मि ने खुद ही अपनी पैंटी नीचे खिसका दी. अब मेरा लंड रश्मि की चूत से टकरा रहा था. उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी और टकराने की वजह से मेरा लंड गीला हो गया.

अब मैं जोर लगा रहा था लेकिन चिकनाहट की वजह से लंड बार – बार फिसल कर कभी चूत के नीचे से गांड की तरफ निकल जाता और कभी ऊपर नाभि तक चला जाता. मुझे कुछ होश नहीं था. मैं बस रश्मि चूत पर दनादन चोट मारने की कोशिश कर रहा था. इसके बावजूद लंड अंदर नहीं गया था.

फिर रश्मि ने खुद ही लंड को हाथ से पकड़ कर चूत के द्वार पर टिका दिया. तब मैंने रश्मि को अपनी बाँहों में भर कर थोड़ा सा नीचे होकर लंड को चूत के सीध में कर लिया और धीरे – धीरे छेद में पेलने लगा. अब लंड हौले – हौले उसकी चूत में सरक रहा था.

रश्मि ने अभी भी मेरा लंड पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ से मेरे बालों को खींच रही थी. जैसे – जैसे लंड चूत की गहराइयों में समाने लगा वैसे – वैसे रश्मि मेरे बालों को छोड़ कर मेरे कंधे पर हाथ से दबाव देती जा रही थी. जब लड़ आधा चूत में घुस गया तो उसने लंड छोड़ कर हाथ मेरे पेट पर लगा दिया और पीछे की तरफ धक्का देने लगी.

मैं समझ गया कि उसे दर्द हो रहा है. इसलिए फिर मैं रुक गया और दोनों हाथों से रश्मि की गांड दबाने लगा. फिर धीरे – धीरे उसी धक्के लगाने शुरू कर दिए. कुछ देर बाद रश्मि अपने हाथों से मेरे चूतड़ों को दबाने लगी. अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस चुका था और रश्मि अपनी गांड हिला – हिला कर लंड चूत में ले रही थी.

मैं लंड को आधा बाहर खींचता और फिर जड़ तक चूत में पेल देता. ट्रेन के चलने के कारण हिलने से चुदाई में और मज़ा आ रहा था. करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद रश्मि झड़ने लगी और उसने मेरे चूतड़ों को अपनी ओर दबा लिया. मैं समझ गया. फिर मैंने लंड उसकी चूत में जड़ तक पलते हुए दो – तीन जोरदार झटके दिए तो वो झड़ गयी और मुंह से आहें भरने लगी. पर अभी मेरा लंड झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.

फिर मैंने उसे कमर से पकड़ कर घुमा दिया और झुका कर घोड़ी बना लिया. इसके बाद मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल कर दनादन चोट करने लगा. थोड़ी देर में रश्मि पीछे हाथ कर मेरी जांघों को सहलाने लगी. वो फिर से गर्म हो गयी थी और मुझे उकसा रही थी.

अब मैं अपने एक अंगूठें को उसकी गांड के छेद पर घुमाने लगा और दूसरे से उसकी कमर पकड़ कर जोर – जोर से धक्के देता रहा. अब मेरी उत्तेजना चरम पर थी और मैं झड़ने वाला था. लेकिन फिर मैंने लम्बी – लम्बी साँसें ली और खुद को कंट्रोल करने लगा. मैं एक बार फिर रश्मि का पानी छुड़ाना चाहता था.

तभी रश्मि जोर – जोर से गांड को मेरी कमर पर चलाने लगी. मैं समझ गया की वो फिर झड़ने वाली है. मैं भी साँस खींच कर लंड को तानते हुए उसकी चूत पर वार करने लगा. 8-10 चोट में ही मेरा पानी छूटने को होने लगा.

तब मैंने दोनों हाथों से रश्मि की कमर को पकड़ा और पूरी ताकत से पेलने लगा. रश्मि ने दोनों हाथ सामने दीवार से भिड़ा दिए क्योंकि मेरे धक्कों से उसका सर बार – बार दीवार से टकराने लगा था. फिर मेरे शरीर में उत्तेजना भर गयी और जीवन रस लंड से फब्बारों की शक्ल में रश्मि की चूत में छूटने लगा.

मैं धक्के लगाता जा रहा था और लंड से पानी निकल कर उसकी चूत में भरता जा रहा था. उधर रश्मि भी मेरे वीर्य की गर्मी से झड़ने लगी और उसने दोनों हाथों से पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया.

हम दोनों फारिग हो चुके थे. फिर मैंने रश्मि की चूत में लंड डाले ; डाले ही रश्मि को खड़ा किया और पीछे से ही उसके बूब्स को मुठ्ठी में भरकर उसकी गर्दन, गालों और होंठों पर किस करने लगा. हम दोनों तृप्त हो चुके थे. और एक दूसरे की बाहों में सिमट रहे थे.

अब ट्रेन की स्पीड कम होने लगी. मेरा स्टेशन आने वाला था. मैंने रश्मि को छोड़ा और उसकी पजामी बांधने लगा. फिर रश्मि ने मेरे गालों पर किस किया और आई लव यू बोला. तब मैंने भी उसकी आँखों में देख कर मुस्कुरा दिया. फिर हम दोनों अपने अपने कपड़े सही करके बाथरूम से बाहर आ गए. गैलरी में कोई नहीं था. रश्मि ने मेरा नम्बर लिया और कल मिलने का वादा किया. मेरा स्टेशन आ चुका था फिर मैं उतर गया.

कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं. आगे की कहानी में मैं आप सबको बताऊंगा कि कैसे मैंने आराधना और उसकी माँ की चुदाई की. तब तक के लिए आप सभी को मेरा नमस्कार!

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