भीड़ का फायदा उठा कच्ची कली को ट्रेन के बाथरूम में चोदा भाग – 2

इस कहानी के पिछले भाग में अभी तक अपने पढ़ा कि ट्रेन में मुझे एक लड़की मिली जो भीड़ की वजह से टॉयलेट नहीं जा पा रही थी. मैंने उसे टॉयलेट तक जाने में मदद की और फिर भीड़ का फायदा उठा कर रास्ते भर उसके नाज़ुक बदन से खेलता रहा और वह भी मेरा साथ देती रही…

इस कहानी का पिछला भाग – भीड़ का फायदा उठा कच्ची कली को ट्रेन के बाथरूम में चोदा भाग – 1

अब आगे…

पूरे दिन उसका नाजुक सा बदन और वो एहसास मेरी आँखों के सामने घूमता रहा. फ्री होने के बाद 4.30 बजे मैं स्टेशन आ गया. करीब 20 मिनट बाद वो अपनी एक सहेली के साथ आती हुई दिखी तो मैं उठकर उसकी तरफ चल पड़ा.

उसकी सहेली शायद जाने वाली थी. तभी रश्मि की नज़र मुझ पर पड़ी और उसने अपनी सहेली से कुछ कहा. हालाँकि दूर होने के कारण मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया. जब मैं उसके पास पहुंचा तो ट्रेन वाला सीन फिर से मेरे दिमाग में घूमने लगा और मेरे लंड में अकड़न शुरू हो गई. जिसे मैं बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था. खैर, फिर पास पहुंच कर मैंने रश्मि को हाय कहा तो मुझसे अपनी सहेली का परिचय कराया.

रश्मि बोली – ये मेरी सहेली अराधना है. यहीं पास में ही रहती है.

फिर आराधना की तरफ मुखातिब होकर मैं बोला – हेलो आराधना, मेरा नाम सूरज है और मैं यहाँ कंप्यूटर सीख रहा हूँ.

आराधना (मेरे लंड की तरफ देखते हुए जो बहुत कोशिशों के बाद भी पैंट में से उभरता हुआ दिख रहा था) बोली – आपके बारे रश्मि बता रही थी. काफी मदद की थी आपने सुबह ट्रेन में रश्मि की.

मैं (नजरें चुराते हुए) – हाँ, वो ट्रेन में काफी भीड़ थी बस और कुछ नहीं.

यह सुन कर वो दोनों हंसने लगीं और उन्हें देख कर मैं भी हंसने लगा.

तभी आराधना फिर बोली – अभी ट्रेन में काफी टाइम है आप चाहो तो घर चलो, ट्रेन के टाइम पर आ जाना. यहीं पास ही 5 मिनट की दूरी पर मेरा घर है.

यह सुन कर मैंने रश्मि की तारफ देखा. तब रश्मि बोली – एक घंटा है अभी ट्रेन में ऐसे में यहाँ पर बोर होने से तो अच्छा ही है.

अब मैं भी तैयार हो गया. बोला – ठीक है चलो.

आराधना के पास स्कूटी थी, जिसमें बैठ कर हम तीनों उसके घर पहुँच गए. बातों ही बातों में पता चला कि उसके पर इस टाइम कोई नहीं है. हम लोग आराधना के घर पहुँचे तो वह हमें अपने बेडरूम में बिठा कर चाय बनाने चली गयी. रश्मि मुझसे थोड़ी दूर बैठी हुई थी.

यह देख मैंने अपने बगल में बैठने का इशारा करते हुए कहा – रश्मि, यहाँ आ जाओ.

रश्मि बोली – नहीं, मैं यहीं ठीक हूँ. ट्रेन में तुमने जो किया वो काफी है आज के लिए.

मैं – तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या? मुझे लगा था तुम्हें भी अच्छा लग रहा था.

रश्मि – अच्छा क्या लगता? तुमने बहुत गलत किया.

मैं बोला – सॉरी यार अगर तुम्हे बुरा लगा तो! मैं दुबारा ऐसा नहीं करूँगा.

यह सुन कर रश्मि आँखे निकालते हुए बोली – दुबारा ऐसा बिलकुल मत करना. तुम्हें पता है दिन भर मेरी क्या हालत रही है. अधूरी प्यास कितना दर्द देती है. ऊपर से स्टेशन भी इतना जल्दी आ गया था.

इतना कहकर उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और मुंह पर हाथ रख कर हंसने लगी. मैं समझ गया कि वो मुझे ताना मार रही है. फिर क्या था! मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और बोला – ठीक है फिर सुबह का हर्जाना भर देता हूँ.

इतना कहकर मैं उसके गालों को चूमने लगा. वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी पर मैंने एक हाथ उसकी कमर में डालकर एक चूचे को कसकर पकड़ रखा था और दोसरे हाथ से उसका सर पकड़ रखा था.

ऐसा करते एक मिनट भी नहीं हुआ था कि तभी डोरबेल बजी. हम दोनों अलग हो गए और रश्मि जल्दी से निकल कर किचन में चली गयी. फिर मैं भी निकल कर हॉल में आ गया. तब आराधना ने दरवाजा खोला. सामने 35 साल की बहुत ही सुन्दर औरत थी. उन्हें देख आराधना बोली – मम्मी, आप तो कह रही थीं कि लेट हो जाउंगी! तब उन्होंने कहा कि काम हो गया था इसलिए जल्दी ही चली आई.

आंटी के अन्दर आते ही मैंने उनसे नमस्ते की तो वो मेरी तरफ देखने लगीं. फिर उन्होंने आराधना की तरफ देखा. आराधना समझ गई और बोली – मम्मी ये सूरज है. रश्मि के गाँव से. यहाँ कंप्यूटर कोर्स कर रहा है. दोनों साथ – साथ आते हैं. ट्रेन में टाइम था तो मैंने घर बुला लिया.

आंटी – अच्छा किया.

फिर मुझसे बोलीं – बेटा अपना ही घर समझाना. रश्मि तो हमारी बेटी जैसी है. सिर्फ रश्मि के साथ ही नहीं तुम अकेले भी आ सकते हो. ठीक है बेटा.

मैं – जी आंटी जी.

फिर आंटी अन्दर चली गईं और तभी आराधना चाय ले आयी. हम सब बैठ कर चाय पीने लगे. आराधना बार – बार मेरी तरफ देख रही थी. मैं समझ गया कि रश्मि ने आराधना को सब कुछ बता दिया है और आराधना भी चुदना चाहती है.

वैसे दोस्तों, देखने में वो रश्मि से भी खूबसूरत थी. हाईट रश्मि से थोड़ी ज्यादा थी. उसके बड़े – बड़े बूब्स और उभरी हुई गांड देखकर कोई भी चोदना चाहे. खैर मैं जानबूझ कर उसे नजर अंदाज कर रहा था क्योंकि अभी मेरा पूरा ध्यान रश्मि पर था और फिलहाल मैं उसे ही चोदना चाहता था.

थोड़ी देर बाद आंटी बाहर आ गईं. उन्होंने साड़ी निकाल कर मैक्सी पहन ली थी. फिर वो आकर मेरे सामने सोफे पर बैठ गईं. उन्होंने शायद ब्रा नहीं पहनी थी. इसलिए जब वो बैठीं तो उनके विशालकाय बूब्स मैक्सी से बाहर आने को बेताब दिखे. उनके दूध जैसे गोरे – गोरे बूब्स देख कर मेरा लंड अंगड़ाई लेने लगा.

तभी आंटी बोलीं – बेटा सूरज तुम्हारी क्लासेज का टाइम क्या रहता है?

मैंने बताया कि आंटी जी 11 बजे से 3 बजे तक मेरी क्लास चलती हैं. यह सुन कर आंटी बोलीं – फिर तो तुम जल्दी फ्री हो जाते होंगे. आराधना और रश्मि को तो कॉलेज और ट्यूशन के बाद घर आने में 4 बज जाते हैं. अब से ऐसा किया करो तुम सीधे घर आ जाया करना. फिर अपनी गाड़ी के टाइम पर दोनों साथ चले जाना. घर से तो स्टेशन पास में ही है.

मैंने कहा – ठीक है, आंटी जी, जाना तो रश्मि के साथ ही होता है. तो मैं यहीं आ जाया करूँगा और वैसे भी स्टेशन पर बैठना बहुत बोर लगता है.

कहानी का अगला भाग – भीड़ का फायदा उठा कच्ची कली को ट्रेन के बाथरूम में चोदा भाग – 3

कहानी कैसी लगी? कमेंट करके जरूर बताएं. कहानी के संबंध में आप लोगों के जो भी सुझाव हो वो भी मुझे जरूर बताएं.

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