बुआ की सहेली को चोदकर अपना उद्घाटन किया

तभी अचानक बाथरूम का दरवाजा पूरा खुल गया और मैं आंटी के सामने एक दम से निर्वस्त्र हो गया. अब आंटी मेरे लन्ड को बड़े ध्यान से देखने लगी और फिर उन्होंने मुझसे कहा, “वरुण, तूने कभी सेक्स किया है”. तो मैंने नहीं में जवाब दिया. यह सुन कर वो मुझसे बोलीं, “तो चल फिर आज अपनी आंटी को चोद कर अपनी जवानी का उदघाटन कर ले”…

हेलो फ्रेंड्स! मैं वरुण, अपने खड़े लन्ड से अन्तर्वासना के आप सब पाठकों का अपनी पहली कहानी में स्वागत करता हूँ. मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियां पढ़ी और इन कहानियों को पढ़ कर मुठ भी मारा है. पर आज मैं आपको अपनी पहली और सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ उम्मीद हौ आप सबको जरूर पसंद आएगी.

मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और देखने में भी ठीक ठाक हूँ। मेरी हाइट 5 फिट और 7 इंच है और मेरे लन्ड का साईज करीब 6 इंच है. यह कहानी जनवरी की है तब मैं इलाहाबाद अपनी बुआ के घर गया था. मैं अक्सर ही वहां जाता रहता हूं.

मेरी बुआ की एक दोस्त हैं जिनका नाम सारिका है. वो बहुत ही मस्त माल है. जब वह चलती हैं तो उस समय उसकी मटकती गांड देख कर लगता है कि बस अभी उसको पटक कर उसकी गांड में अपना लंड डाल दूँ. उसकी उम्र यही कोई 35 साल के आस पास की होगी. उनके पति दुबई में रहते हैं.

इस बार जब मैं बुआ के घर पर था तो सारिका ने बुआ को फोन किया और बोला कि आज तुम उनके घर चली जाएं क्योंकि उनके घर पर लाइट नहीं थी. तो बुआ ने उनसे कहा कि उनको कुछ काम से बाहर जाना है तो मैं वरुण को तुम्हारे घर भेज देती हूं, आज वो वहीं रह लेगा.

तो सारिका ने हामी भर दी. फिर बुआ ने मुझसे बोला कि मैं उनके घर चला जाऊं. कुछ देर वाद मैं तैयार होकर उनके घर के लिए निकल गया.

जब मैं उनके घर पहुंचा तो देखा कि दरवाज़ा खुला हुआ है और घर पर लाइट ना होने के कारण मोमबत्ती जल रही है. तो जब मैंने दरवाजा नॉक किया तो आंटी एक लाल नाईटी में बाहर आईं और मुझसे बोली, “वरुण, आ जा अंदर”.

नाईटी में तो मैं तो बस उनको देखता ही रहा. मेरी नज़र उनकी चूचियों पर थी. मेरा मन कर रहा था कि उनकी चूचियों को अभी पकड़ के चूस लूं. तब तक आंटी ने एक बार फिर अंदर आने को बोला. अब मैं अंदर चला गया.

अंदर जाकर मैं सोफे पर बैठ गया. आंटी भी सोफे पर बैठी थी और टेबल पर व्हिस्की की बोतल रखी थी. अब वो व्हिस्की की गिलास मेरी तरफ करते हुए मुझसे बोलीं, “वरुण, ले तू भी पी ले”. लेकिन मैं मना करने लगा. तो उन्होंने कहा कि चिंता मत कर मैं बुआ को नहीं बताऊँगी. यह सुन कर मैंने भी एक पेग मार लिए.

तब तक लाइट भी आ गयी तो आंटी ने मुझसे कहा कि बाथरूम में जा कर नहा ले. तो मैं नहाने चला गया. जब मैं अपने सारे कपड़े उतार कर नहा रहा था तो गलती से मेरे कपड़े भीग गए.

फिर मैंने आंटी को आवाज़ दी और उन्हें बताया कि मेरे सारे कपड़े भीग गए हैं तो वो अंकल के कपड़े अलमारी से निकाल लाईं और मैं बाथरूम का हल्का सा दरवाजा खोल कर उन कपड़ों को लेने लगा.

तभी अचानक बाथरूम का दरवाजा पूरा खुल गया और मैं आंटी के सामने एक दम से निर्वस्त्र हो गया. अब आंटी मेरे लन्ड को बड़े ध्यान से देखने लगी और फिर उन्होंने मुझसे कहा, “वरुण, तूने कभी सेक्स किया है”. तो मैंने नहीं में जवाब दिया. यह सुन कर वो मुझसे बोलीं, “तो चल फिर आज अपनी आंटी को चोद कर अपनी जवानी का उदघाटन कर ले”.

फिर मैं उनके साथ बैडरूम में चला गया. और वहां जाकर बैठा ही था कि आंटी ने अपने गुलाब जैसे होंठ मेरे होंठों पर चिपका दिए और 10 मिनट तक मुझे खूब चूमा चाटा. फिर मैंने उनकी नाईटी निकाल दी. अब वो मेरे सामने लाल ब्रा और पैंटी में थी.

उनको इस रूप में देख कर अब मेरा लन्ड शॉर्ट्स के अंदर ही खड़ा होकर उसे टेंट बनाने लगा था. तो आंटी ने मेरा लन्ड बाहर निकाला और उसे मुंह में लेकर चूसने लगी. करीब 5 मिनट के बाद मैं उनके मुंह में ही झड़ गया.

अब मेरी बारी थी. मैंने उनको किस करना शुरू कर दिया और फिर उनकी ब्रा को खींच कर खोल दिया. अब वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी. तो उसने खुद ही अपनी पैंटी भी निकाल दी. अब हम दोनों एक दम जन्मजात नंगे एक – दूसरे के सामने थे.

फिर मैं उसकी चूचियों को चूसने लगा. बिल्कुल उसी तरह जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है. अब वो गर्म हो रही थी और इधर मैं अपना लन्ड उसकी चूत पर रगड़ रहा था और उसके पेट को अपनी मस्त जीभ से चाट रहा था और उसकी नाभि पर जीभ फिरा रहा था.

इससे अब वो एक दम गर्म हो चुकी थी और चिल्ला रही थी, “वरुण मादरचोद, लन्ड डाल दे और मुझे अपनी रांड बना ले, कब तक यूं ही तड़पायेगा”. फिर मैं उसकी चूत पर पहुंच गया और उसकी चूत को चूसने लगा. अब वो वासना के एक दम वसीभूत हो चुकी थी और मेरा सर अपने चूत में दबा रही थी. कुछ देर बाद वो अचानक से मेरे मुंह मे झड़ गयी.

फिर मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर से हटाया और लन्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा. जिससे वो एक बार फिर से गर्म हो गयी एयर उत्तेजित होकर चिल्ला रही थी, “डाल दे मादरचोद, क्यों तरसा रहा है? डाल दे अपना लन्ड मेरी चूत में और फाड़ डाल मेरी इस चूत को और बना ले मुझे अपनी रंडी मादरचोद’.

यह सुन कर मैं भी उत्तेजित हो गया और मैंने उससे कहा, “बहन की लौड़ी आज तो तू गयी”. इतना कह कर अब मैंने उसकी चूत में अपना लन्ड डाल दिया और फिर जोर से धक्का लगाने लगा. पहली बार में तो अभी मेरा आधा ही लन्ड गया था लेकिन वो इतने में ही दर्द की वजह से तड़पने लगी और लन्ड बाहर निकालने को बोलने लगी.

लेकिन मैंने नहीं निकाला. और फिर उससे बोला, “मादरचोद, आज तो मैं तेरी इस चूत का भोसड़ा बना दूंगा मेरी रंडी”. और फिर जब उसका दर्द कम हुआ तो मैंने फिर से धक्का लगा दिया. इस धक्के से मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में घुस गया लेकिन वो जोर से चिल्ला.

अब कुछ देर रुक के मैंने फिर से उसे चोदना चालू किया. अब उसे भी अच्छा लग रहा था और वो लगातार चिल्ला रही थी, “और तेज भोसड़ी के और तेज, रंडी हूँ मैं तेरी मादरचोद और तेज चोद मुझे”.

अब मैं झड़ने वाला था लेकिन मैं झड़ता उससे पहले ही वो दुबारा झड़ गयी. फिर मैंने भी उसकी चूत में अपना वीर्य रस छोड़ दिया.

उस पूरी रात हमने चुदाई का गेम खेल और सो गए. फिर सुबह होते ही मैंने नहाया और वहां से जाने लगा तो आंटी ने कहा, “रुको लंच कर के जाना”. तो मैं भी बैठ कर टीवी देखने लगा. फिर आंटी ने मुझे चाय बनाकर अपने हाथों से पिलाई.

इसके बाद वो किचन में जाकर खाने की तैयारी करने लगीं तो मैं किचन में गया और उनकी पेटीकोट के अंदर अपना मुंह डाल कर उनकी चूत चाटने लगा. जिससे वो अब फिर से गर्म होने लगी और सब्जी काटना छोड़ कर अपने कपड़े ऊपर कर के वहीं लेट गयी और मेरे लन्ड को मुंह में लेकर चूसने लगी. फिर थोड़ी देर में मेरे लन्ड के ऊपर उछल कर बैठ गईं.

इस बार भी मैंने उन्हें खूब चोदा और फिर से उसकी चूत में झड़ गया. अब तो वो मेरी ही वजह से प्रेग्नेंट भी हैं. बाद में मैंने उनकी गांड भी मारी लेकिन वो कहानी फिर कभी.

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई हो तो मुझे ईमेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *