चाची को देखकर मूतने के बहाने मारा मुठ

मैं छत पर सोता था और सुबह उठने के बाद वहीं मूतता भी था. छत खुली थी लेकिन कोई देख नहीं पता था. मेरी इस कहानी में पढ़ें कि कैसे चाची को लन्ड दिखाकर मैंने मुठ मेरी…

सभी चूतों को मेरे लंड का सलाम! मैं दूसरे लोगों की तरह इंच, सेंटीमीटर या बॉडी बताना नहीं चाहता लेकिन अगर फिर भी किसी को उत्सुकता होगी तो ईमेल आईडी पर पूछ सकते हैं. यहाँ समय बर्बाद करने से कोई मतलब नहीं है.

दोस्तों, मैं पिछले 3 साल से लगातार जिम जा रहा था लेकिन अभी एक साल से किसी कारण से जाना थोड़ा कम जाना होता है. दोस्तों, मैं खुद अपने लंड से संतुष्ट हूँ और दूसरों को संतुष्ट करने का माद्दा रखता हूँ. और हाँ मैं सेक्स के मामले में बहुत गन्दा हूँ. नई पोजीशन और नई फंतासी मेरा शौक है.

मैं वेस्ट यूपी के गाँव से हूँ और अपना नाम, पता नहीं बताना चाहता. मेरी उम्र 22 साल और मेरी चाची यही कोई 40 के आस पास की होंगी. गर्मियों में मैं अपनी दो मंजिला छत पर सोता हूँ.

एक सुबह को खाट पर से उठ कर पेशाब करने चला गया. दोस्तों, मैं अक्सर वहीं छत पर ही पेशाब करता हूँ. चूंकि पीछे और दायें – बाएं दीवार है तो किसी को दिखाई नहीं देता हूँ. हालांकि, सामनेे बस 15 -20 मीटर दूर चाची के 2 मंजिला मकान से कुछ दिख सकता है लेकिन बाकी के मकानों से किसी भी कुछ दिखने की संभावना ही नहीं है.

फिर मैंने अपने कच्छे से लंड निकाला और मूतने लगा. तभी अचानक से मेरी नजर सामने चाची पर गयी जो अपनी छत पर खड़ी हुई थी और अपने सलवार का नाड़ा बांध रही थीं. वो भी शायद छत पर बैठ कर मूत ही रही थीं और बाउन्ड्री होने की वजह से मुझे नहीं दिखाई पड़ीं.

फिर जैसे ही मैंने उनको सलवार पकड़े और नाड़ा बांधते हुए देखा वैसे ही मेरे मन में ख्याल आया कि अगर चाची ने मुझे मुड़ कर देख लिया तो! यही सोचने मात्र से ही मेरा आधा खड़ा लंड अपनी पूरी औकात पर आ गया और अकड़ने लगा.

दोस्तों, चाची भी अक्सर छत पर ही सोती थीं पर उस टाइम तक वो रोज़ नीचे चली जाती थी. लेकिन उस दिन शायद देर तक सोती रह गई थीं.

खैर, फिर मैंने मूतना चालू रखा और मूतने के बाद उधर तिरछी निगाह से देखा तो चाची हड़बड़ा कर नीचे बैठ गयी. मतलब उन्होंने मुझे देख लिया था. यह जान कर मेरे लंड में अलग सी जान आ गयी और मन खुश हो गया.

जब मैंने वापस तिरछी निगाह से देखा तो वो मुझे नहीं दिखी. फिर मैंने सोचा कि अब शायद वो जल्दी उठेंगी भी नहीं. इसके बाद मैं तुरंत 5-6 कदम दूर बिछी खाट के पास गया और वहां से मोबाइल उठा लाया. वापस आने के बाद मैं फिर से मूतने के स्टाइल में बैठ गया.

मुझे किसी और का डर नहीं था क्यूंकि इस समय उनके घर पर वो अकेली ही होती थीं. बच्चे उठ कर अपना स्कूल चले जाते थे और चाचा खेत में चले जाते. घर पर भी होते थे तो छत पर शायद ही आते हों क्योंकि आज तक मैंने बमुश्किल ही उन्हें छत पर देखा है और इस टाइम तो कभी भी नहीं देखा.

अब मैंने लंड को जड़ से पकड़ कर दबा लिया. इससे आगे की सारी चमड़ी सुपाड़े पर से खिसक कर पीछे आ गयी. इस वजह से लंड की नसों में खून भरने लगा और वह विकराल रूप धारण करने लगा.

फिर मैंने धीरे से फ़ोन को अपने हाथ में इस तरह से एडजस्ट किया कि चाची को लगे कि मैं अपना चेहरा देख रहा हूँ पर फ़ोन की लॉक्ड काली स्क्रीन पर मैं उनकी छत को ही देख रहा था. दोस्तों, चाची मेरे बिलकुल सीध में नहीं थीं वो हल्की सी मेरी बायीं तरफ थी या यूँ कहो की 45° कोण पर थी और मुझसे 15-20 मीटर की दूरी पर थीं.

थोड़ी देर बाद अचानक से मुझे चाची का आधा सिर दिखा. जिससे मुझे यह समझते देर न लगी मुझे देख रही थीं और यह समझते ही मेरे लंड का सुपाडा फूल कर पूरे जोश में आ गया. साथ ही लंड की नसें और फूल गयी. अब मैंने अपनी उँगलियों से लंड की जड़ को और मजबूती से पकड़ लिया. मुझे लग रहा था जैसे कि लंड फटने वाला हो.

चाची अभी भी मुझे देख रही थी शायद उन्होंने छत से जाने की भी सोची हो पर उन्हें डर था कि उनके ऊपर उठने पर मैं इस अवस्था में बैठा हुआ अगर उन्हें देख लूँ तो कहीं मुझे ये ना लगे कि उन्होंने मुझे देख लिया.

मुझे भी किसी का डर नहीं था. फिर मैंने लंड को जड़ से ही पकड़ कर ऊपर – नीचे करने लगा. मैं ये कुछ इस तरह से कर रहा था कि लंड की चमड़ी वापस सुपाडे पर ना चढ़े. वैसे भी मेरे लंड के इस तरह विकराल होने पर केवल थोड़ी सी चमड़ी ही सुपाड़े के ऊपर रूकती थी और अगर थूक या तेल लगा दूँ तो वो भी फिसल कर नीचे आ जाये.

अब मैंने लंड को बहुत धीरे से 4-5 बार आगे – पीछे किया. इतना करने के बाद जब मैंने दोबारा फोन की स्क्रीन से देखा तो चाची अभी भी वहीं थी. मेरा मन पहली बार इस अलग से घटनाक्रम के कारण आनंद से हिलोरें मार रहा था.

अब मैंने फिर से लंड पर हाथ चलाया और एक बार फोन को तिरछा करके देखा तो चाची ऊपर उठ गयी थीं और उनका चेहरा मेरी तरफ ही था. यह देख कर भी मैं भी यूँ ही बैठा रहा और चाची 5-10 सेकंड रुकने के बाद कुछ कदम तेज़ी से रखते हुए सीढ़ियों की तरफ गयी और मेरी नजरों से ओझल हो गयी.

फिर मैंने भी फोन को साइड में रख दिया और अपने घुटनों को नीचे टिका कर पंजों के बल पर बैठा रहा और बैठे – बैठे ही मुठ मारने लगा.

आज मुठ मारने का मजा ही अद्भुत था. मेरे मन में अभी भी वही दृश्य आ रहे थे. मैं लगातार चाची को सोच रहा था. उनको मेरा लंड साइड से कैसा दिख रहा होगा, वो अपना नाड़ा किस तरह से बांध रही थीं, उनको मेरा लंड कैसा लगा होगा, उनको भी जवान जिस्म और लंड का मजा आया होगा या नहीं, उनके मन में जरूर कुछ तो उत्सुकता आई होगी यही सब सोचता रहा.

ये सब सोचते – सोचते आज थोड़ा जल्द ही मैं चरम पर पहुँच गया और अपनी टांग और चौड़ा करके थोड़ा घूम कर पीछे दीवार से कमर लगा दी और नीचे चूतड़ टेकते हुए मुठ मारने लगा. इस वक्त मेरा लंड बिलकुल सीधा अकड़ कर खड़ा था.

फिर मैंने अपने चूतड़ को ऊपर उठा कर लंड को और भी आगे की तरफ उठा दिया और मन ही मन सोच रहा था कि इस पोजीशन में चाची तो क्या अगर किसी को भी लंड दिख जाये तो उसकी चूत जरूर पानी छोड़ देगी.

वहीं पास ही मेरे पेशाब की महक मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी. फिर मैं जानबूझ कर पेशाब की तरफ थोड़ा और खिसक गया और पेशाब में मेरा एक चूतड़ हल्का सा भीग गया.

फिर मैंने थोड़ा साइड में घूम कर एक कोहनी के सहारे तिरछा हो गया. जिस कोहनी से मैंने अपने चूतड़ को तिरछा करके ऊपर उठा रखा था उससे दूसरी साइड के पैर को घुटने से मोड़ लिया. इस अवस्था में मुझे अपना लंड सबसे बड़ा और आकर्षक लगता है. फिर मैं पूरा जोर लगाते हुए झड़ने लगा. लंड को सुपाडा भी अब फुल फॉर्म में आ गया था और लंड का छेद भी खुल कर मेरे वीर्य को गोली की तरह दागने लगा था.

मुझे अपने हाथ में लंड ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई लकडी का मूसल हो. लन्ड की सारी नसें मुझे साफ़ – साफ़ महसूस हो रही थीं. 4-5 पिचकारी निकलने के बाद बाकी का वीर्य लावा की तरह लंड के टोपे और लंड पर बहने लगा. जितना माल नार्मल निकलता था आज उससे काफी ज्यादा निकला था.

इसके बाद मैं उठा और लन्ड अंदर करके वापस आकर अपनी खाट पर बैठ गया. आप लोगों को कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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