चलती ट्रेन में मेरे सामने चुदी मेरी बहन

मेरी बहन बहुत चुदक्कड़ है. जो कोई भी उसे पसंद आ जाता है वो उससे चुदवा लेती है. वो मुझे अपनी सारी बातें बताती है. कभी – कभी मैं भी चुदने में उसकी मदद करता हूं. एक बार हम ट्रेन में सफर कर रहे थे. चलती ट्रेन में किस तरह वह मेरे सामने चुदी यह आप मेरी इस कहानी में पढ़ेंगे…

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम कुणाल और मैं मुंबई का रहने वाला हूं. अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद करता हूं आप लोगों को पसंद आएगी. कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आप लोगों को अपने बारे में बता देना चाहता हूं. दोस्तों, मैं 23 का नौजवान और खूबसूरत लड़का हूं.

मेरी एक बड़ी बहन भी है. उसका नाम पूजा है. उसका रंग गोरा है और मेरी तरह ही वो भी दिखने में बहुत खूबसूरत है. हम दोनों एक – दूसरे से पूरी तरह खुले हुए हैं और अपनी लाइफ की हर पर्सनल बात शेयर करते हैं.

पूजा अपना बदन लोगों को दिखाना चाहती है इसलिए वो हमेशा एक दम टाइट कपड़े पहनती है और चुदने के लिए हमेशा तैयार रहती है. अगर कोई उसे छेड़ता है तो वो उसका विरोध नहीं करती बल्कि खुद भी मज़े लेती है. सीधे शब्दों में कहूं तो वो एक रंडी है. मकई भी कम नहीं था. जब भी कभी उसे चुदाई करवाने का मौका मिलता तो मैं उसकी मदद किया करता था और अपनी बहन को चुदते देख मस्त हो जाया करता था.

अब हम अपनी कहानी पर आते हैं. एक बार मुझे और मेरी बहन का मुंबई से नागपुर जाना था. हमने ट्रेन से जाने का प्लान बनाया लेकिन हमें रिजर्वेशन नहीं मिल पाया. लेकिन जाना बहुत जरूरी था. इसलिए हमने जनरल से ही जाने का निश्चय किया.

निर्धारित समय पर हम स्टेशन पहुंच गए. थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई. जनरल बोगी में भीड़ काफी थी. सारी सीट भारी हुई थीं. उस दिन दीदी ने रोज की तरह टाइट जीन्स और टॉप पहना हुआ था. जिसमें वो बहुत मस्त लग रही थी.

किसी तरह हम ट्रेन में चढ़ गए और सीट न मिलने की वजह से एक कोने में खड़े हो गए. हम जानते थे कि ये लोकल यात्रियों की भीड़ है और थोड़ी देर बाद जगह मिल जाएगी. खड़े होने के बाद फिर मैंने ध्यान दिया कि ट्रेन में बैठे मर्दों में हर कोई मेरी दीदी के बदन को निहार रहा था और उसके छूने की कोशिश कर रहा था. उनकी नज़रों में वासना साफ झलक रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे अगर वो पा जाएं तो मेरी बहन को मसल डालें.

खैर, हम बिना किसी से कुछ बोले खड़े रहे. तभी मेरी नज़र एक लड़के पर पड़ी. वो बहुत ही खूबसूरत लग रहा था. मेरी दीदी भी उसी को देख रही थी. वह भी मेरी दीदी को निहार रहा था. थोड़ी देर बाद उसने इधर – उधर खिसक के दीदी को बैठने के लिए जगह दे दी. फिर दीदी ने मुझे आंख मारी और उसके पास जाकर उससे सट कर बैठ गई. मैं समझ गया कि आज मेरी दीदी उस लड़के से चुदेगी जरूर. अब मैं भी अनजान बनने का नाटक करने लगा.

फिर उन्होंने बात करना शुरू कर दिया. दीदी उससे हंस – हंस कर बात कर रही थी. थोड़ी देर बाद उसने दीदी की जांघ पर हाथ रख दिया. लेकिन जैसा कि मैंने आपको बताया दीदी मेरी बहुत बड़ी रंडी थी, उस उसके इस छेड़छाड़ का मज़ा ले रही थी. उसने कुछ नहीं कहा.

जब दीदी ने उसे कुछ नहीं कहा तो उसने उनकी जांघ से हाथ उठाया और धीरे – धीरे दीदी की कमर में डाल दिया और उन्हें पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया और उनकी कमर पर हाथ चलाने लगा. दीदी भी उससे एक दम चिपक कर बैठ गई. यह सब देख के मैं मन ही हंस रहा था. तभी दीदी ने मेरी तरफ देखा और मेरी नज़रों से नज़र मिलने पर मुस्करा दीं.

अब तक भीड़ काफी कम होने लगी थी. मुझे भी दीदी के सामने वाली सीट मिल गई और मैं उस पर बैठ गया. अब मुझे दीदी के साथ हो रही छेड़छाड़ देखने के लिए अपनी नज़र इधर – उधर नहीं करनी पड़ रही थी.

वह लड़का लगातार दीदी की कमर सहला रहा था. इससे दीदी गर्म होने लगी थीं और उनकी सांसें भी गर्म हो चुकी थीं. अब उनके दिमाग में बस चुदाई ही चुदाई थी. लेकिन लोग अभी भी थे इसलिए वो आगे नहीं बढ़ पा रहे थे. थोड़ी देर भीड़ और कम हो गई. अब शाम भी ढलने लगी थी.

ठंड का मौसम था. इसलिए उस लड़के ने अपना कंबल निकाल लिया. फिर उसने मेरी दीदी को भी अपने उस कंबल में घुसा लिया. अब दोनों का बस चेहरा खुला था. इस मौके का उसने फायदा उठाया और अपना एक हाथ ले जाकर दीदी के मम्मों पर रख दिया. फिर वो मेरी दीदी के मम्मों को मसलने लगा. रात के 8 बज रहे थे और अब भीड़ एक दम कम हो गई थी. जिस कम्पार्टमेंट में हम बैठे थे उसमें उन दोनों के अलावा मैं और एक बूढ़ी औरत बैठी थी, जो विंडो वाली सिंगल सीट पर ऊंघ रही थी.

फिर थोड़ी देर बाद दोनों ने अपने को पूरी तरह कंबल से ढंक लिया. मैं बाहर से देख रहा था. अंदर जो कुछ भी हो रहा था अब समझ आ रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी झुकीं और उसकी गोद में अपना सिर रख दिया. मैं समझ गया कि वो उस लड़के का लंड चूसने लगी हैं. फिर कुछ समय बाद दीदी सीधी हुई और उस लड़के ने उनकी गोद में सिर रख दिया. यह देख मैं समझ गया कि अब वह मेरी दीदी की चूत चाट रहा है. बीच – बीच में मेरो दीदी मुझे सुनाने के लिए जो की सिसकियां भी ले रही थीं. मैं अपनी सीट पर बैठा ये सब देख के मज़ा ले रहा था.

फिर थोड़ी देर बाद मैं लेट गया. हालांकि मैं अपनी आंखें ख़ोला रखी थीं और उनकी सारी कार्यविधि देख रहा था. थोड़ी देर बाद दोनों फिर बैठ गए और एक – दूसरे को किस करने लगे. इधर मैं लेटा – लेटा मज़े ले रहा था. अब मेरा भी लंड खड़ा हो गया तो मैंने मसल का उसका पानी निकाल दिया था.

तभी अचानक उन्होंने अपने ऊपर से कंबल हटाया. यह देख मैंने झट से अपनी आंखें बंद कर लीं. उन्होंने इधर – उधर देकह और फिर दोनों ऊपर वाली सीट पर चले गए. ऊपर जाने के बाद दोनों ने फिर कंबल ओढ़ लिया और एक – दूसरे से चिपक के लेट गए और किस करने लगे. किस करने की आवाज नीचे तक आ रही थी.

फिर थोड़ी देर बाद उसने मेरी दीदी की जीन्स और उनकी पैंटी नीचे कर दी और साथ में अपनी पैंट भी ख़ोल ली. इसके बाद उसने एक ही झटके में मेरी दीदी की चूत में अपना लम्बा लौड़ा घुसेड़ दिया. उसका लंड दीदी की चूत में जाते ही उनके मुंह से एक आह सी निकली, जिससे मैं समझ गया कि उसका लंड काफी बड़ा है क्योंकि मेरी दीदी इतना चुद चुकी थी कि नॉर्मल लंड से उसकी आह नहीं निकलती थी.

अब वो आगे – पीछे हो कर मेरी दीदी की चूत चोदने लगा. साथ ही उनके मम्मों को भी दबा रहा था. मैं अपनी सीट से देख रहा था. दोस्तों, आप लोगों को पता ही है कि जनरल बोगी की ऊपर वाली सीट में पटरी लगी होती है और उनके बीच में दरार होती है. इसलिए नीचे से मुझे थोड़ा – बहुत दिख रहा था. यह देख कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

वो लगातार जोर – जोर से मेरे सामने मेरी दीदी को चोद रहा था. करीब आधे घण्टे बाद शायद वो झड़ गया था क्योंकि उसने कस कर मेरी दीदी को भींच लिया था. उसका सारा माल मेरी दीदी ने अपनी चूत में ले लिया.

थोड़ी देर बाद दीदी उठीं और उन्होंने फिर से उसका लंड चूसा. उसने भी दीदी की चूत चाटी. अब रात के 12 बज रहे थे. उसके बाद उन्होंने एक राउंड और चुदाई की. मेरी दीदी बिलकुल रंडी की तरह चुद रही थीं. दोबारा भी उसने दीदी की चूत में ही अपना माल निकाल दिया.

थोड़ी देर बाद फिर दीदी ने अपने कपड़े सही किए और नीचे आ गईं. अब हमारा स्टेशन आने वाला था. जबरदस्त चुदाई के कारण दीदी ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं. फिर हम उतर गए. बाहर निकलने पर मैंने दीदी से पूछा कि कैसी रही चुदाई? तो वो हंस पड़ीं और बोलीं, “बहुत अच्छी, अब जल्दी ही मैं तुमसे भी चुदवाऊंगी. मुझे चुदते देख तुम्हारा भी लंड खड़ा होने लगा है न”. यह सुन कर मैं हंस पड़ा और दीदी को कस के गले लगा लिया. फिर मैंने कहा, “हां दीदी, चुदवाओ न, मैं तो कब से सोच रहा हूं कि कब मुझे मेरी दीदी को चोदने का मौका मिलेगा.

फिर थोड़ी देर बाद हम अपने होटल चले गए. अपनी अगली कहानी में मैं आप सब को बताऊंगा कि कैसे मैंने मेरी दीदी को चोदा. तब तक के लिए नमस्कार! मेरी कहानी कैसी लगी? मेल करके मुझे जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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