चूत चोदन का प्रथम अनुभव

शादी से पहले की गयी हर चुदाई,  ख़ास कर पहली चुदाई, डर के मारे गांड फटने का अनुभव भी करा जाती है. मेरी इस बात से तो महिला या पुरुष सभी सहमत होंगे. मेरे चोदन का प्रथम अनुभव भी कुछ ऐसा ही था. जब मुझे रोज मिलने वाली महिला ही मेरी पहली चुदाई का सामान साबित हुयी…..

दोस्तों! ये कहानी मेरे पहले सेक्स अनुभव की है, जब मैं 19 वर्ष का था. मैंने अभी-अभी अपना कॉलेज खत्म किया था. मेरे सारे दोस्तों के पास उनकी अपनी चुदाई के किस्से थे. किसी ने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मजे किये थे, किसी ने अपनी पड़ोसन की चूत पे अपना लंड साफ़ किया था तो किसी ने अपनी भाभी को ही चोद रखा था. सब अपने –अपने स्कोर काउंट कर रहे थे.

मेरा सबसे अच्छा दोस्त नमन तो सेन्चुरी मारने के करीब था. और इधर ये हाल था कि एक अदद गर्लफ्रेंड तक नहीं थी. कई सारी लड़कियों से दोस्ती तो थी लेकिन उनसे चुदाई की पहल के लिए सोचने का भी कॉन्फिडेंस नहीं था.

ऐसे में मैं और नमन एक दिन मेरे घर पे मेरे कमरे में बैठकर टीवी देख रहे थे. घर पे उस वक़्त कोई नहीं था, सभी लोग 3 दिनों के लिए बाहर गए थे.

मैंने नमन से कहा- यार! तू तो सेंचुरी मारने वाला है और इधर खाता भी नहीं खुला है,

नमन ने गहरी सांस लेते हुए कहा- यार विनय! देख सेक्स ऐसी चीज है, जिसका स्वाद अगर लेना है तो पहल भी खुद ही करनी होगी.

मैंने कहा- जानता हूँ भाई! लेकिन क्या करूँ कोई मौका ही नहीं मिलता. साला मूठ मारने में ही पीएचडी कर रहा हूँ.

नमन हँस पड़ा और मेरी और सुलग उठी. अचानक बेल बजी. मैंने दरवाजा खोला और फिर से बैठकर टीवी पे चैनल बदलने लगा.

नमन- कौन है?

मैं- कामवाली बाई, सुमित्रा!!

वो मेरे कमरे के खुले हुए दरवाजे से ही सुमित्रा को देखकर बोला- अबे गली में छोरा और शहर में ढिंढोरा?

मैं- मतलब?

नमन ने धीरे से मेरे कान में कहा- साले! इतनी मस्त माल घर में ही है और तू यहाँ-वहाँ भटक रहा है.

मैंने कहा- कौन…सुमित्रा?? नहीं यार मैंने उसे इस नजर से कभी नहीं देखा.

नमन- भाई मेरे! तो अब देख ले.. मेरी भी तो शुरुवात ऐसे ही हुयी थी.

सुमित्रा मेरी मेड थी. पिछले 3-4 साल से वही हमारे यहाँ झाडू पोछा करती थी. रूप-रंग उसका साँवला ही था लेकिन नाक-नक्शा ठीक था. उसकी उम्र उस वक़्त यही कोई 30-32 रही होगी. सुमित्रा शादीशुदा थी. उसके 2 बच्चे भी थे, जो स्कूल जाते थे. हालाँकि पहले मैंने कभी गौर नहीं किया लेकिन सुमित्रा का फिगर भी मस्त था. 36-32-36 की इस साइज पे मेरा ध्यान पहली बार उसी दिन गया था.

अचानक नमन ने चिकोटी काटी- अबे कहाँ खो गया?? वो देख उस छम्मक छल्लो की चूचियां कैसे बाहर आने को बेताब हैं.

मैंने देखा सुमित्रा इस वक़्त झुक कर झाडू लगा रही है और उसकी आधी चूचियाँ बाहर झाँक रही हैं. सच में मेरा लंड एकदम से सलामी देने लगा. मन तो किया कि अभी जाकर इन लटकते संतरों का जूस पी लूँ. मैंने नमन से कहा- अबे यार कोई जुगाड़ बना! इसे चोदने का.

नमन ने कहा- तू किसी तरह इसे अपना लंड दिखा दे… एक काम कर अभी जब ये बाथरूम साफ़ करने जाएगी तो तू इसे अपना खड़ा हुआ लंड दिखा देना. बल्कि ऐसा करना की ये तुझे मूठ मारता हुआ देख ले.

मुझे पता था की ड्राइंगरूम साफ़ करने के बाद सुमित्रा मेरा कमरा साफ़ करने आएगी और फिर बाथरूम साफ़ करेगी. मैं तुरंत ही बाथरूम में जाकर खड़ा हो गया, और उसके दरवाजा खोलने का इन्तजार करने लगा.मैंने अन्दर से कुण्डी नहीं लगायी थी और दरवाजे की तरफ ही मुँह करके खड़ा हो गया. नमन वहीँ बैठा टीवी देखता रहा. सुमित्रा मेरे कमरे में सफाई करने आ चुकी थी. उसकी आहट मुझे मिल रही थी. मैंने अपना लंड अपने हाथ में ले लिया और मूठ मारने लगा..

सुमित्रा के बारे में सोच कर मूठ मारने में बड़ा मजा आ रहा था. लेकिन मैं कुछ ज्यादा ही उत्तेजित था. मुझे तो लगने लगा था कि कहीं उसके दरवाजा खोलने से पहले ही मैं झड़ न जाऊं. अचानक मुझे लगा की मेरा छूट जायेगा….मेरा लंड फड़फड़ाने लगा और मेरी पिचकारी छूट पड़ी….लेकिन उसी वक़्त सुमित्रा ने दरवाजा एकदम से खोल दिया. अन्दर का नजारा देखकर वो सन्न रह गयी. मेरा तना हुआ पिचकारी छोड़ता लंड मेरे हाथ में था और पिचकारी इतनी तेज थी कि मेरा वीर्य सुमित्रा की साड़ी पे पड़ गया…..

उसने कहा- माफ़ कीजियेगा ! विनय बाबा. और घबरा कर दरवाजा बंद कर दिया… मैं भी घबरा गया और अन्दर ही खड़ा रहा. सुमित्रा ने भी तुरंत से एक अखबार से अपनी साडी साफ़ की और जल्दी-जल्दी घर से निकल गयी.

नमन ये सब देखता रहा और जब मैं बाथरूम से बाहर निकला तो मुझे देखकर जोर से हँसा. मुझे बड़ा बुरा लगा. मैंने कहा- साले! ये तेरा ही आइडिया था….और अब हँस रहा है? उसने किसी से कह दिया तो? उसकी ठुकाई भी नहीं कर पाया और फंस गया अलग से.

नमन ने कहा- घबरा मत!! ठुकाई तो होके रहेगी…यदि वो कल काम पे आ गयी तो उसकी और नहीं आई तो तेरे घर वालों के आने के बाद तेरी.

ये कहकर वो पेट पकड़ कर हसने लगा. मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उसे पकड़ कर उसकी पीठ पे दो घूंसे जड़ दिए…. वो खुद को बचाता हुआ बोला- अबे रुक…रुक न! मैं तुझे आइडिया देता हूँ न.

फिर उसने सीरियस होकर एक प्लान बताया. मुझे भरोसा तो नहीं था उसके प्लान पे लेकिन और कोई चारा भी नहीं था. लेकिन वो प्लान भी तब काम करता जब अगले दिन सुमित्रा काम पे आती. जैसे-तैसे दिन बीता और फिर रात भी बीत गयी. मैं सुबह जल्दी ही उठ गया. मुझे बस सुमित्रा का ही इन्तजार था. चुदाई हो या न हो, सुमित्रा के आने से एक बात तो साफ़ हो जाती कि वो मुझसे ज्यादा नाराज नहीं है.

सुमित्रा अपने तय समय से आधा घंटा लेट आई. जब बेल बजी तो मैंने डोर आई से देखा की सुमित्रा ही है. लेकिन दरवाजा खोलने से पहले मैंने नमन के बनाये प्लान के अनुसार एक 500 का नोट ड्राइंग रूम में टेबल के पास गिरा दिया और अपने मोबाइल का कैमरा ऑन करके सोफे पे ऐसे टिका दिया की अगर सुमित्रा उस नोट को उठाये तो उसकी ये हरकत रिकॉर्ड हो जाए. इतने में डोर बेल दो बार बज चुकी थी. सब कुछ सेट करके मैंने दरवाजा खोला.

सुमित्रा ने कहा- क्या विनय बाबा? कितना देर में दरवाजा खोला. आज फिर से बाथरूम में बिजी था क्या?

कह कर वो हँस दी और झाडू उठा कर अपना काम करने लगी. मैं जानबूझकर अपने कमरे में आ गया ताकि सुमित्रा उस नोट को उठा सके.

थोड़ी देर बाद जब वो मेरे कमरे में आई तो उसने कहा- विनय बाबा! लगता है आज मेरा दिन अच्छा है. अब देखो न आज मेरे मर्द ने मुझे पीटा नहीं और तुम भी आज बाथरूम में नहीं हो.

वो फिर से हंसी और अपना काम करने लगी. मैं ड्राइंग रूम में आ गया. मैंने देखा टेबल के नीचे से नोट गायब था. मैं खुश हो गया और अपना मोबाइल उठा के चेक करने लगा. बात बन गयी थी. हुआ ये कि सुमित्रा की नजर जैसे ही नोट पे पड़ी तो उसने इधर उधर देखा और नोट उठा कर अपने ब्लाउज में रख लिया. उसकी चोरी मोबाइल में रिकॉर्ड हो गयी थी.

मैं जोर से चिल्लाया- सुमित्रा!!

सुमित्रा भागते हुए आई और बोली – क्या हुआ बाबा??

मैंने मोबाइल पे वही विडियो चालू कर दिया. सुमित्रा ये देखकर रोने लगी और अपने ब्लाउज से नोट निकाल कर देते हुए बोली- मुझे माफ़ कर दो! अब दुबारा ऐसी गलती नहीं होगी.

मैंने सुमित्रा का हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं सिर्फ एक शर्त पे ही तुम्हें माफ़ कर सकता हूँ!

मैंने अपना हाफ पैन्ट नीचे कर दिया और लंड आपने हाथ में लेकर उसे दिखाते हुए बोला- अगर तुम इसे खुश कर दो तो!! और चाहो तो ये नोट भी रख सकती हो!

सुमित्रा ने कहा- विनय बाबा! अगर तुम्हारा मन था तो कल ही कह देते. एक साथ मुझे दो लंड का स्वाद मिल जाता.

मैं अवाक् रह गया, सुमित्रा की बात सुनकर. उसने आगे कहा- मेरा बेवड़ा मर्द मेरी चूत को प्यासा ही छोड़ देता है. लेकिन जबसे मैंने तेरा लंड और उसकी तेज धार देखी तो मैंने सोच लिया था कि आज अपनी प्यास बुझा कर ही जाउंगी.

ये कह कर उसने तुरंत अपने सारे कपड़े उतार दिए और मुझे सोफे पे धकेल कर मेरा लंड चूसने लगी. उसकी चूचियां वास्तव में मेरी कल्पना से ज्यादा बड़ी थी. मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को मसलने लगा. फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसे कमरे में चलने का इशारा किया. वो मुझसे चिपट गयी. मैंने सुमित्रा को अपनी गोद में उठा लिया. उसकी भारी गांड लटक रही थी. मैंने कमरे में ले जाकर उसे बिस्तर पे पटक दिया. मैं भी सारे कपड़े उतार कर बिलकुल नंगा हो गया. मैंने उसकी टांगों को खोला. उसकी झांटों वाली चूत मेरे सामने थी. मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया तो वो सिसकारियाँ लेने लगी. इस्स्स्स….सीईईई…..

फिर मैंने अपनी दो उँगलियाँ एक साथ उसकी गीली हो चुकी चूत में डाल दिया. कुछ देर तक मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया. साफ़ लग रहा था की ये छिनाल बहुत सारे लंडों को निगल चुकी है. मैंने उसको जोरदार झटके देने शुरू किये. 10 मिनट तक मैंने उसको लगातार चोदा. फिर वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लंड को अपनी चूत में डालकर कूदने लगी. गजब की चुदक्कड़ थी वो.

मैंने अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया. वो अब भी कूदे जा रही थी, शायद उसका झड़ा नहीं था. मैंने उसे फिर से उसे अपनी उँगलियों से चोदना शुरू किया. और जल्दी ही उसका भी पानी निकाल दिया.

अगले दिन फिर मैंने काफी देर तक उसकी चुदाई की. इस बार मैंने उसकी गांड भी मारी. अब जब भी मौका मिलता मैं सुमित्रा की चूत से अपनी प्यास बुझा लेता. जिस भी महिला को सुमित्रा की चूत चुदाई से अर्जित मेरे अनुभव का इस्तेमाल करना हो मुझे मेल करे.

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