चूत चुदाई की शुरुआत एक रंडी के साथ

मैंने भी ज्यादा जिद न करते हुए उसके गर्दन पर चूमना चालू कर दिया. वो जोर – जोर से सिसकारियाँ लेने लगी थी और उसकी गरम – गरम सांसें मुझे मदहोश करती जा रहीं थी. मैं धीरे – धीरे नीचे बढ़ा और उसके पेट पर आकर उसको बेतहाशा चूमने लगा. फिर मैंने उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल दी और जीभ को वहीं घुमाने लगा. उस बेस्वाद सी जगह में चुदाई के समय पता नहीं कहां से इतना स्वाद आ जाता है…

नमस्कार अन्तर्वासना के मेरे प्यारे पाठकों. मैं राहुल ग़ाज़ियाबाद से हूँ. मैं अन्तर्वासना का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और इसका नियमित पाठक भी हूँ.

पहले मैं आपको अपने बारे में बता दूं. मैं 23 साल का हूँ. मेरा शरीर सामान्य है और देखने में भी ठीक हूँ पर थोड़ा सांवला हूँ. मेरे लण्ड की लम्बाई लगभग 6 इंच है. यह लम्बाई इतनी तो है ही कि यह किसी भी चूत की प्यास बुझा सके.

मैं अपने परिवार के साथ किराये पर रहता हूँ. हमारे मकान मालिक बूढ़े दंपत्ति हैं, जिन्हें सुनने में थोड़ी परेशानी होती है. मेरे पिता जी का अपना छोटा सा बिज़नेस है और माताजी टेक्सटाइल कंपनी में काम करती हैं. मेरी छोटी बहन बी. टेक कर रही है और मैं घर पर ही रह कर एसएससी की तैयारी कर रहा हूँ. इसीलिए मैं ज्यादातर घर पर अकेला ही रहता हूँ.

मुझे चूतों का बहुत शौक है, खासकर शादीशुदा औरतें मुझे बहुत पसंद हैं. मुझे उनका भरा हुआ शरीर, बड़े – बड़े चूचे और गोल – गोल मस्त गाण्ड बहुत ही मादक लगती है. औरतों को तो देखते ही मेरे लण्ड में खुजली होने लगती है. अब मैं कहानी पर आता हूँ, क्योंकि अगर मैं अपनी वासना के बारे में बताता रहूँगा तो एक भाग ऐसे ही बन जायेगा.

यह कहानी आज से लगभग एक महीने पहले की है. मेरा एक दोस्त है जिसका नाम दुर्गेश है. उसके जितना लड़कियों के बारे में मैं माहिर नहीं हूं. लेकिन उसे भी चूतों का उतना ही शौक है जितना मुझे. फिर भी मैंने अभी तक चुदाई नहीं की थी. दुर्गेश बहुत दिनों से मेरे कमरे पर किसी रण्डी को लाना चाहता था, लेकिन मैं बुड्ढों की वजह से मना कर देता था. लेकिन चूत की खुराक तो मुझे भी चाहिए थी. इसलिए एक दिन मैं मान ही गया.

उस दिन दुर्गेश ने मुझे फोन किया और बोला – ओये सुन, मैं आज एक जुगाड़ को लेकर आ रहा हूँ. कमरे पर कोई है तो नहीं?

मैं – भाई यहाँ तो दोनों बुढ्ढे – बुढ़िया हैं. यार आज नहीं हो पायेगा.

दुर्गेश – यार, रोज ऐसे टालेगा तो कभी चूत का मजा नहीं ले पायेगा.

मैं – यार बात तो सही है. चल ठीक है तू आजा, जो होगा देख लेंगे.

दुर्गेश – ठीक है, मैं लगभग आधे घंटे में आ जाऊंगा.

वो लगभग आधे घंटे बाद आ गया और वो अपने साथ एक मस्त सा माल भी लेकर आया था. देखने में तो वो सांवली थी पर फिर भी क़यामत थी. उसने पजामी वाला सूट पहन रखा था. उसके चूचे लगभग 36 के थे और मुझे तो लाजवाब लग रहे थे. उसकी कमर 30 और गाण्ड के तो क्या कहने, वो भी 36 की ही थी. एकदम मदहोश कर देने वाला फिगर था उसका. मेरे तो लण्ड में हलचल होने लगी थी. मेरी नज़र उसकी मोटी दूध की थैलियों की ओर ही टिक गयी थी.

फिर हम तीनों कमरे में आके बैठ गए. दुर्गेश और वो औरत पलंग पर थे और मैं कुर्सी पर बैठा था और टीवी चल रही थी. लेकिन मेरी नजर टीवी पर न होकर उसके बदन को उसके सूट के ऊपर से ही स्कैन करने में व्यस्त थी. उसका बदन ऐसा था कि किसी का भी मन उसे चोदने को तड़प जाये.

मैं उसे घूर ही रहा था कि दुर्गेश बोला – भाई, बाहर जा हम दोनों को थोड़ी बात करनी है.

थोड़ी न नुकर करने के बाद मैं चला गया. उसने बाहर से दरवाजा बंद करने को बोला तो मैंने बहार से कुण्डी जड़ दी. अंकल आंटी दोनों अपने काम में व्यस्त थे, उन्हें कुछ पता ही नहीं लगा. मैं आराम से बाहर घूम रहा था. मुझे लगा कि वो बातें कर रहें हैं, लेकिन उन्हें कुछ ज्यादा ही देर हो गयी थी तो मैंने अपने कान दरवाजे पर लगाये तो पता चला कि कमीना दुर्गेश उसकी चुदाई कर रहा था. अंदर से गर्म गर्म सिसकारियों की आवाज़ आ रही थी. जिसे सुन कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया.

करीब 20-25 मिनट बाद दुर्गेश ने दरवाजा खुलवाया. मैंने उसे खूब गालियां सुनाईं.

मैं बोला – भोसड़ी के ये तेरा तो घर है नहीं और न ही मेरा है. इन बुड्ढों को थोड़ा भी शक हुआ तो मेरी गांड के टोटे लग जायेंगे.

वो बोला- अबे यार लण्ड पर काबू ही नहीं हुआ. वैसे तू चिंता मत कर उन्हें कुछ पता नहीं लगेगा. जा अब तू भी मजे ले ले.

मैं अंदर कमरे में घुस गया. वो अपने कपडे़ पहन चुकी थी. मैंने अंदर से कमरे की कुण्डी लगायी और उस रंडी के बगल में जाकर बैठ गया. मेरी तो फट रही थी, एक तो बाहर की वजह से और दूसरी उस रंडी की वजह से. मैंने उससे शुरुआत करने को कहा तो उसने झट से बिना कुछ बोले ही अपनी कुर्ती उतार दी. अंदर का नजारा देख कर तो मैं मदहोश हो गया और मेरे अंदर अब हिम्मत भी आ गयी थी.

उसने मुझसे कहा – तुम्हारी उमर क्या है?

मैं – आप ही अंदाजा लगा लो.

तो वो बोली – 19 या 20 साल होगी.

मैं – अच्छा, मैं इतना छोटा लगता हूँ! वैसे मेरी उम्र 23 साल है.

वो बोली – पहले कभी किया है?

मैं – क्या?

वो – चुदाई.

उसके मुँह से चुदाई शब्द सुनकर मेरे अंदर करंट दौड़ गया और मैंने कहा – नहीं ये मेरा पहली बार है.

वो बोली – लगता तो नहीं है.

फिर मैंने उसे लेटने को कहा और वो बिस्तर पर लेट गयी. वो अभी ऊपर से सिर्फ ब्रा में ही थी. काली रंग की ब्रा में उसके चूचे क्या मस्त लग रहे थे दोस्तों मैं बता नहीं सकता. कमर के नीचे उसने हरे रंग की इलास्टिक वाली पजामी पहनी हुई थी. अब मैं उसके ऊपर चढ़ गया. मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसके एक गुब्बारे को हांथ में लेकर दबाने लगा, जबकि उसके दूसरे गुब्बारे को मुँह में लेकर चूसने लगा. ऐसा करने से मुझे तो जैसे जन्नत ही मिल गयी थी. मुझे उसके चूचे चूसने में बड़ा मजा आ रहा था. एक – एक करके मैं दोनों चूचों का मजा ले रहा था.

फिर मैं थोड़ा ऊपर गया और उसके होठों की तरफ अपने होंठ ले जाने लगा तो उसने अपने होंठ हटा लिये.

मैंने पूछा – ऐसा क्यों किया?

तो वो बोली- किस नहीं कर सकते.

मैंने पूछा – क्यों?

उसने कहा – बस ऐसे ही.

मैंने भी ज्यादा जिद न करते हुए उसके गर्दन पर चूमना चालू कर दिया. वो जोर – जोर से सिसकारियाँ लेने लगी थी और उसकी गरम – गरम सांसें मुझे मदहोश करती जा रहीं थी. मैं धीरे – धीरे नीचे बढ़ा और उसके पेट पर आकर उसको बेतहाशा चूमने लगा. फिर मैंने उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल दी और जीभ को वहीं घुमाने लगा. उस बेस्वाद सी जगह में चुदाई के समय पता नहीं कहां से इतना स्वाद आ जाता है.

फिर मैंने देर न करते हुए उसकी पजामी को खींच कर उतार दिया. अब वो लाल कच्छी में थी. मैं उसकी कच्छी के ऊपर से ही उसकी चूत की महक लेने लगा. जिससे मैं तो जैसे पागल हो गया था. अब मैंने उसकी कच्छी भी उतार कर उसकी चूत को देखा. दोस्तों मैंने पहली बार किसी चूत का साक्षात् दर्शन किया.

मैंने उसकी चूत को अपनी अंगुलियों से रगड़ दिया तो वो गांड उठा – उठा कर उछालने लगी. उसकी इस हरकत से मेरी अंगुलियां उसकी चूत में घुसकर उसे चोदने लगीं. वो आह्ह् आह्ह् आह आह की आवाजें निकाल रही थी और बोल रही थी तेज ओओ…र तेज करो यार. फिर अचानक उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. मेरी अंगुलियाँ गीली हो गयीं. मैंने वो अंगुलियाँ उसके मुँह में दे दी. जिन्हें उसने चाट कर साफ़ कर दिया.

अब वो मेरे कच्छे के ऊपर से ही लण्ड को दबाने लगी. मैंने बिना देर किए झट से अपना कच्छा उतार दिया और उसने मेरा लण्ड अपने हांथ में लिया और हिलाने और दबाने लगी जिससे मेरा लण्ड और भी सख्त हो गया.

अब मेरे से रहा नहीं गया तो मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर टिकाया और एक जोर का धक्का दिया. मेरा लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में घुस गया. उसकी एक हल्की सी आह निकल गयी. जिसे सुनकर मुझे और जोश आ गया. जिससे मैंने और तेज धक्के लगाना शुरू कर दिया. आहा! मैं तो जन्नत की सैर पर निकल पड़ा था. मुझे कमरे से बाहर का कुछ होश ही नहीं था.

उसके मुँह से अजीब – अजीब आवाज़ें आ रहीं थी. जो मुझे दीवाना बना रहीं थी और धक्कों को तेज करने पे मजबूर कर रही थीं. मैंने लगभग 10 मिनट तक उसकी धकापेल चुदाई की होगी. उसके बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए और मैं उसके ऊपर ही लेट गया.

थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और अपने कपडे पहन लिए. मैंने उसे थैंक्स बोला तो वो मुस्कुरा दी और वेलकम बोली. मैं उसका इशारा समझ गया और मैं भी मुस्कुरा दिया. फिर मैं बाहर आ गया और दुर्गेश एक बार फिर अंदर घुस गया और फिर वह एक और राउंड लेकर ही बाहर निकला. इसके बाद वो दोनों चले गए.

दोस्तों ये चुदाई मैंने फ्री में की थी. सारा हिसाब दुर्गेश ने किया था. बाद में मुझे पता चला कि वो रण्डी नहीं थी, हालात ने उसे ये काम करने पर मजबूर कर दिया था. क्योंकि उसका पति पियक्कड़ है और कुछ काम नहीं करता है तो वो लोगों के घर काम करके और अपना काम करवा के अपना और अपने बच्चों का पेट पालती है.

बस इतनी सी है, मेरी पहली चुदाई की कहानी. कैसी लगी अपने सुझाव जरूर बताएं. कहीं गलती हो गयी हो तो भी अवगत कराएं. मुझे आपके संदेशों का इंतजार रहेगा.

मेरी ईमेल आईडी – [email protected]

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