चूत नरम और लंड गरम

उसके बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में रगड़नी शुरू की जो पहले से ही थोड़ी गीली हो चुकी थी। मैंने अपना लोअर उतार दिया। धीरे से मैंने उसका लोअर भी उतार दिया। उसकी गोरी जांघे देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया…….

मेरा नाम आरव है. मेरी उम्र 26 साल है और मैं रायपुर छत्तीसगढ़ में रहता हूँ। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ. मेरी हाइट 5 फीट 8 इंच है. मैं एक शर्मीला टाईप का इन्सान हूँ. मुझे शुरू-शुरू में लड़कियों को पटाना तथा उनकी तरफ देखने में झिझक होती थी।

लेकिन कहते हैं ना कि वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है. मेरे साथ भी यही हुआ। निशा नाम था उसका. जो मेरी जिन्दगी में आई और मेरी पूरी जिन्दगी ही बदल डाली। निशा बहुत ही खूबसूरत थी. उसका फिगर 32-28-32 था।

यह बात कुछ साल पहले की है. एक बार मैं घरेलू काम से कोई सामान लेने के लिए पंडरी गया था. सामान लेने के बाद मैं वापस सिटी बस से घर आ रहा था. तभी वहीं पर मेरे बगल में एक खूबसूरत लड़की खड़ी थी. उसके पास में मैं भी खड़ा था.

सिटी बस में ज्यादा भीड़-भड़ाका होने के कारण मेरा शरीर और उसका शरीर आपस में छू रहे थे. उसकी गाण्ड मेरे लंड से स्पर्श होने से मेरा लन्ड खड़ा होने लगा और देखते ही देखते मेरा लन्ड लोहे के जैसा एकदम सख्त हो गया। मेरा लन्ड खड़ा होने के कारण उसकी गाण्ड में चुभने लगा तो वो मेरे सामने देखने लगी और फ़िर उसने हल्की सी मुस्कुराहट दी।

उसकी मुस्कुराहट ने तो जैसे मुझे नया जीवन ही दे दिया हो. मेरा जोश बढ़ गया और मैं धीरे-धीरे उसकी गान्ड में धक्का लगाने लगा। ज्यादा भीड़ होने के कारण मैं कुछ अधिक तो नहीं कर सका. पर तभी किसी ने मुझे पीछे से किसी ने धक्का दिया और अचानक निशा का पाँव फिसल गया और वो मेरे ऊपर आकर गिर गई।

नीचे गिरते समय वो हड़बड़ा गई और इसी वजह से उसके हाथ में मेरा सख्त लन्ड आ गया।

लन्ड हाथ में आते ही उसने हल्के से मेरे लन्ड को मसला. फिर वो थोड़ा सा मुस्कुराई।

मैंने उसे उठाया. तो उसने एकदम से मेरे लन्ड को अपने हाथ से हटा दिया और उसने मेरे हाथ में अपना हाथ दे दिया. तब जाकर मैंने उसे उठाया. बाद में वो मुझे बस में देखती रही. फिर 2-3 मिनट बाद में हम दोनों को बैठने के लिए सीट मिल गई और वो भी मेरे ही बगल में बैठ गई। उधर ही मुझे उसका नाम मालूम हुआ था।

उसके मेरे पास में बैठने के बाद मैंने अपना एक पैर का जूता उतार दिया और मैंने अपने पैर को उसके पैर के ऊपर ले जाकर उसके पैर को मसलना शुरू कर दिया।

मुझे ये बहुत अच्छा लग रहा था और शायद उसे भी मजा आ रहा था।

फिर मैंने लोगों की तरफ देखा और सबसे आँख बचा कर उसके बोबों को भी दबा दिया. वो कुछ नहीं बोली बस मजा लेती रही. मैं उसके साथ मजा लेता रहा।

तभी पचपेड़ी नाक आ गया और मुझे और उसे उतरना पड़ा. बस से उतरते ही मैं भी उसके पीछे-पीछे उसके घर तक गया।उसका घर आते ही वो घर में जाने से पहले मुड़ी और उसने मेरी तरफ हल्की सी मुस्कुराहट दी और वो अपने घर के अन्दर चली गई। फ़िर मैं भी अपने घर चला गया.

कुछ दिनों बाद में कोई काम से मुझे बाजार से जाना था. घर से बाजार जाते वक्त रास्ते में वो लड़की मुझे दिखाई दी।

वो मुझे देखती रही और मेरे सामने मुस्कुराने लगी… मैंने भी अब बस मन में उस लड़की को चोदने की ठान ली। अब रोज मैं उसके घर के आगे चक्कर लगाने लगा। ये सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा. फ़िर वो दिन आ ही गया और जिस दिन का मुझे बेसब्री से इन्तजार था।

मैं सुबह पांच बजे मॉर्निंग वॉक के लिए जाता था और निशा का घर भी उसी तरफ था।

उस दिन भी मैं सुबह की सैर पर जा रहा था. रास्ते मैं वो सुबह करीब पांच बजे मुझे दिखाई दी। उसके पास कोई नहीं था. वो अकेली थी. मैंने हिम्मत करके उसे अपने पास बुलाया और पास आते ही मैंने उसके होंठों पर एक जोरदार चुम्बन जड़ दिया।इस समय भोर का उजाला हो चुका था. क्योंकि गर्मी के समय में पांच अक्सर जल्दी बज जाते हैं. तो मैंने उसको अगले दिन सुबह चार बजे मिलने को कहा।

फिर मैं वॉक पर चला गया। वॉक से वापस आने के बाद जब मैं घर आया तो मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था।मैं तो बस कल सुबह चार बजने का इन्तजार करने लगा। मुझे पूरी रात नींद नहीं आई। मैं बिस्तर में निशा के बारे में सोचने लगा और सोचते-सोचते ही बिस्तर में ही मैंने उसके नाम की मुठ मार ली।

करीब साढ़े तीन बजे मैं बिस्तर से उठा और फ्रेश होकर 15-20 मिनट बाद मैं निशा के घर की तरफ निकल गया। दस मिनट बाद ही उसका घर आ ही गया।वो शायद मेरा ही इन्तजार कर रही थी क्योंकि जब मैं वहाँ पहुँचा. तो वो दरवाजे के बाहर ही मेरा ही इन्तजार कर रही थी।

मैं उसके पास गया. फिर पहले मैंने आसपास देखा. तो गली में एकदम अन्धेरा था। तो मैंने फटाफट उसको अपने पास बुलाया व निशा के पास आते ही मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया और उसके होंठों पर एक लम्बी सी पप्पी दी। फिर उसको गले से लगा कर बाँहों में उठा कर गर्ल्स स्कूल लेकर चला गया।

स्कूल के एक कमरे का दरवाजा खुला था. मैं उसे कमरे में ले गया. जाते ही उसे बेतहाशा चूमने लगा। उसने भी मेरा पूरा साथ दिया और अंदर जीभ डाल के मेरे होठो को चूसने लगी। फिर धीरे से मै उसके बूब्स दबाने लगा। वो और गर्म होने लगी और मेरे लौड़े के दबाने लगी।

मै उसके टॉप में हाथ अंदर डालते हुए उसकी ब्रा तक पहुच गया। उसके ब्रा के उपर से ही मै उसकी मुलायम चूचियां दबाने लगा। उसकी ब्रा का हुक मुझसे नहीं खुल रहा था. फिर मैंने उसके ब्रा को ऊपर खिसका दिया जिससे उसके बूब्स बाहर आ गए. मैंने उनको खूब चूसा। निशा बहुत ही गर्म हो चुकी थी और मेरा सर अपने बूब्स में दबाने लगी। वो शर्मा भी रही थी इसलिए उसने अपनी आँखे बंद कर रही थी। उसकी नंगी कमर देख कर लण्ड पूरे उफान में था।

मैंने अपनी शर्ट उतारी और उसे ऊपर से पूरा नंगा कर लेट गया। उसके 32” के दूध और मेरी छाती जब टकरा रही थी तब गजब का अनुभव था। आप लोग भी कर के देखिएगा।

उसके बाद मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत में रगड़नी शुरू की जो पहले से ही थोड़ी गीली हो चुकी थी। मैंने अपना लोअर उतार दिया। धीरे से मैंने उसका लोअर भी उतार दिया। उसकी गोरी जांघे देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया। अब मै सिर्फ अंडरवियर और वो सिर्फ पैंटी में थी. मै उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी चूत को अपने चड्डी के ऊपर से ही रगड़ने लगा। वो पागल होने लगी थी और मेरे पीठ में नाख़ून गाड़ने लगी। मुझे भी बहुत मजा आ रह था।

मैंने उसकी पैंटी खींची और अपनी भी चड्ढी उतार दी। उसकी चूत और मेरे लण्ड से पानी आ रहा था। उसकी चूत की खुशबू बहुत ही मादक थी। मैंने अपना होठ उसकी चूत में लगाया। शुरू में उसका टेस्ट थोडा अजीब लगा. फिर दो- तीन बार जीभ से चाटने के बाद मज़ा आने लगा। वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी- और चूसो! खा जाओ मेरी चूत को!!

मुझे लगा कोई सुन लेगा। फिर मैंने उसे अपने ऊपर किया और फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गये. उसने मेरे लण्ड को अपनी जीभ से चाटना चालू किया. मैं पागल हो रहा था। फिर पूरा लण्ड अपने मुँह के अंदर ले लिया। मै तो जन्नत में था और उसके मुह को चोद रहा था. धीरे- धीरे उसके चूत के दाने को चाटने लगा और निशा जोर से मेरे लण्ड को चूसने लगी मैं झड़ने वाला था । मैंने उसे नीचे वापस लिटा दिया और अपने हाथ से लंड हिलाकर बाहर ही  झड़ गया।

लेकिन उसकी चूत अभी भी गर्म थी। मै उसकी चूत को हाथ से सहलाने लगा और किस करने लगा। वो भी अपने हाथो से मेरे लण्ड को सहलने लगी और फिर उसे चूसने लगी. मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया. मैंने उसे नीचे लिटाया और उसकी टाँगे फैला के लेट गया अपने लण्ड को उसकी चूत के पास टिकाया और अंदर डालने की कोशिश करने लगा।

अभी मेरे लण्ड का सुपारा ही घुसा था कि वो जोर जोर से चिल्लाने लगी. मैंने लण्ड को वही रोक दिया और उसे किस करने लगा। जब वो थोड़ी शांत हुयी तो अपना हाथ उसके मुह में रखा और जोर से लण्ड को पूरा पेल दिया। उसकी गान्ड फट गयी थी दर्द के मारे। आंसू आने लग गए।

मुझे बार-बार हटने को बोलने लगी पर मैंने उसे समझाया की थोडा तो दर्द बर्दाश्त करना पड़ेगा। फिर मैंने धीरे- धीरे चोदना चालू किया।

अब उसे बहुत मज़ा आने लगा और वो फिर से चिल्लाने लगी- जोर से करो फाड़ डालो मेरी!!!

20 मिनट के बाद हम दोनों साथ में झड़ गए।

उसके बाद हम दोनों ने कपडे पहने और जाने के लिए तैयार हुए. मैंने बाहर निकलकर देखा कि आस पास कोई है तो नहीं। वहाँ कोई नहीं था।

मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था. मै निशा को खीचते हुये अंदर ले गया और किस करने लाया. मै जोर जोर से उसके दूध दबाने लगा। फिर उसे पीछे घुमाया और उसकी लोअर और पैंटी थोडा नीचे खीच दी.

उसकी गांड बहुत ही गोरी और चिकनी थी. मैंने उसकी गांड पे एक किस किया और अपना लोअर और चड्डी उतार के उसे घोड़ी बनाया. फिर अपना लौड़ा उसकी चूत पे टिका के एक ही झटके में डाल दिया और जोर- जोर से चोदने लगा। उसकी गांड की थप- थप की आवाज और मज़ा दे रही थी।

30 मिनट की चुदाई के बाद मैं उसके चूत में झड़ गया। इतनी बेहतरीन चुदाई के बाद हम दोनों बहुत थक गए थे। थोड़ी देर रुकने के बाद हम दोनों वहाँ से निकल के अपने अपने घर आ गए।

मैंने उसे 2 साल तक चोदा। उसके बाद उसकी शादी हो गई। आज भी वो जब भी रायपुर आती है, मुझसे जरूर चुदवाती है। फिर भी आज मैं उस चुदाई को बहुत मिस करता हूँ। उसके बाद मैंने अपने पड़ोस की एक आंटी को चोदा. वो अगली कहानी में बताऊंगा। अगर कोई आंटी या लड़की छत्तीसगढ़ में चुदवाना चाहे तो मेल करे और जरूर बताये ये कहानी कैसी लगी।

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