दीदी के ननद की चुदाई

लड़ अन्दर जाते ही उसके मुँह से “उफ़” की आवाज़ आयी और वो मुझसे लिपट गई। ठंड बहुत थी। लेकिन हमारी बॉडी भी बहुत गर्म थी। कम से कम मेरा हथौड़ा और उसी भट्ठी पूरी तरह दहक रही थी। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथो से उसकी पीठ सहलाने लगा……

हेलो दोस्तों!! मै राजवीर, पटना का रहने वाला हूँ। मैं आपके लिए लाया हूँ अपनी एक नई और सच्ची कहानी। यह मेरी पहली कहानी है। कहानी मेरे और मेरे दीदी की ननद प्रीति के बारे मे है। मैं और प्रीती जब भी मौका मिलता है खूब सेक्स करते हैं।

यह बात दिसम्बर की है। दीदी की शादी भी पटना में ही हुयी है। इसलिए अक्सर मैं उनके घर मिलने चला जाता हूँ। एक बार प्रीति ने अपने जन्मदिन पर मुझे अपने घर बुलाया। मैं दोपहर में ही प्रीती के घर पहुँच गया। हम सभी ने उसकी फेमली और मैंने मिलकर जन्मदिन मनाया और रात का डिनर भी उनके घर ही किया। अब मुझे वहाँ पर रात बहुत हो चुकी थी। अब में जाने को तैयार हो गया था, लेकिन इस खास मौके पर ना प्रीति ने मुझे ना मैंने उसे कोई अनमोल गिफ्ट नही दिया था।

इसलिए हम दोनो मौका तलाश कर रहे थे, लेकिन हमे मौका नहीं मिला था, तभी प्रीति के पापा ने कहा कि आज तुम यही पर रुक जाओ ना हम सब रात को यहाँ पर बहुत मजे करेंगे और आंटी भी कहने लगी थी, तो मे भी रुक गया अब मुझे लगा रात मे तो मौका मिलेगा ही। अब रात के करीब 11 बज रहे थे और हम सभी एक साथ बैठ कर ताश का गेम खेलने लगे थे।

प्रीति मम्मी के पास जा कर बैठ गई और वो मेरे ठीक सामने थी। उसने उस दिन सूट पहन रखा था। उसमे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मेरे पास उसकी दीदी और पापा थे उसके पापा तो गेम के साथ साथ ड्रिंक का भी मजा ले रहे थे।

तभी मेरे मन मे एक प्लान आया कि क्यों ना सबको कुछ नशा करा दूँ। ताकि सब सो जाए और हम दोनो सेक्स कर सके।

मैंने अपना मोबाइल लिया और उसमे मैसेज टाइप किया कि “मेरा मन हो रहा कि कुछ स्पेशल हो हमारे बीच। लेकिन तुम्हारी फेमिली तो कुछ नहीं करने देगी। तो तुम चाय बनाने के बहाने जाओ और तुम्हारे घर मे जो नींद की गोलियाँ है, उन्हें सबकी चाय मे एक- एक गोली डाल दो।”मैंने मैसेज लिखकर प्रीती को मैसेज भेज दिया।

फिर मैंने आंटी से कहा- आंटी ठंड है। थोड़ा हॉट पी लिया जाए। मुझे चाय या कॉफी बहुत पसंद है।

आंटी मान गई थी। फिर वो चाय बनाने जाने लगी थी। तभी प्रीति ने कहा- तुम बैठो मम्मी! मैं बना लाती हूँ।

और वो चली गई। हम सब गेम खेलते रहे। थोड़ी देर मे प्रीति वहाँ पर चाय लाई और अपने हाथो से सबको दी। उसकी दीदी ने चाय ली और कहा- अब मैं सोऊंगी! नींद आ रही है।

वो अपने रूम पर चली गई थी। फिर हम सभी ने चाय पी। मेरी चाय में गोली नहीं डाली गयी थी। फिर चाय पीने के थोड़ी देर बाद मे आंटी को भी नींद आने लगी थी। वो अंकल और बेटे को लेकर सोने चल दी। ताश का गेम खत्म हो चुका था। सभी को नींद आ रही थी।

मुझको प्रीति के रूम के बगल वाला रूम दिया गया था, जो कि ऊपर था। प्रीति ने नीचे लाइट बंद की और हम ऊपर जाने लगे। मैंने उसके ऊपर जाते ही पकड़ कर ज़ोरदार किस किया और बूब्स दबाने लगा। वो भी ज़ोर से किस कर रही थी।

तभी प्रीति ने कहा- तुम अपना रूम खुला रखना! मै थोड़ी देर मे आती हूँ। दीदी को चेक कर लूँ कि वो सोई हैं कि नहीं।

मै अपने रूम मे जाकर सिर्फ़ अंडरवियर मे कंबल के अंदर लेट गया। सोचा कि थोड़ी देर मे तो मजे लूँगा ही तो ड्रेस क्यों चेंज करूं। फिर थोड़ी देर मे प्रीति आ गई। उसने भी लोवर और टी-शर्ट पहन रखा था। उसके बूब्स हिल रहे थे। उससे पता चल रहा था कि उसने ब्रा नहीं पहनी है। वो भी चुदने के लिये पूरी तरह तैयार थी।

अब मैंने भी देर ना करते हुए उसको अपने बिस्तर में खींचा और ज़ोर- ज़ोर से किस करते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा। मै टी-शर्ट के अंदर हाथ डालकर बूब्स को दबा रहा था और प्रीति भी अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर सहला रही थी। अब मैंने जल्दी से उसकी टी-शर्ट निकाल दी और लोवर को भी निकाल दिया।

हम दोनों अब पूरी तरह नंगे हो चुके थे। फिर मैने उसकी टांगे फैला कर अपना लंड उसकी चूत पर थोड़ी देर सहलाया। प्रीती के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसकी तड़प देखकर मैंने चूत के अंदर गच्च से अपना लंड डाल दिया।

लड़ अन्दर जाते ही उसके मुँह से “उफ़” की आवाज़ आयी और वो मुझसे लिपट गई। ठंड बहुत थी। लेकिन हमारी बॉडी भी बहुत गर्म थी। कम से कम मेरा हथौड़ा और उसी भट्ठी पूरी तरह दहक रही थी। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू किया और अपने हाथो से उसकी पीठ सहलाने लगा।

बीच- बीच मे मै उसके चूतडों को भी नोच रहा था। जिससे वो तड़प उठी। वो भी कभी मेरे सर पर हाथ फेरती तो कभी मेरे लंड को अपने एक हाथ से बाहर से सहलाती। और मेरे होंठो पर भी काटती।

लेकिन उसकी चूत से पानी बहुत निकल रहा था। अब वो बहुत कामुक हो चुकी थी और लंड भी उसकी चूत में फूच्छक् फूच्छक् कि आवाजें कर रहा था। अब हम दोनो बहुत जोश मे थे।

फिर मैंने उसको धीरे से कहा- जन्म दिन मुबारक हो।

प्रीती- जन्मदिन तो मेरा है। और केक तुम काट रहे हो!

मैं- आज मैं तुमको नये अंदाज मे चोदता हूँ।

फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल के लिए तैयार किया और पीछे से लंड डाल कर ज़ोर- ज़ोर से चोदने लगा। मै अपने हाथ से उसके बूब्स सहला रहा था। उसने मेरी एक ऊँगली अपने मुहं मे ले ली और ऐसे चूसने लगी, मानो वो मेरा लंड हो।

फिर मै एक उंगली उसकी गांड की छेद के ऊपर फिराने लगा। इस बीच वो दो बार झड़ भी चुकी थी। शायद नये स्टाइल से उसे ज्यादा मजा आ रहा था। फिर मैंने भी आज उसकी चूत की गहराईयो मे अपना सारा वीर्य छोड़ दिया।

उस रात मैंने उसे दो बार चोदा। चुदने के बाद उसने मुझे किस किया और चली गयी।

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