दोस्त की बहन की सील तोड़ी

अब मेरे होंठ उसके होंठ पर थे और मेरा बायां हाथ उसकी बायीं चूची पर था और मेरा दायां हाथ उसकी चूत पर फिसल रहा था. जिस कारण उत्तेजना वश उसके मुंह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं. अब मैं उसकी चूची को चूसते हुए नीचे की तरफ गया और उसकी नाभि में अपनी जीभ घुमाने लगा…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम पप्पू हैं और मैं बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला हूँ. आज मैं आपके साथ मेरे जीवन में घटी एक सच्ची घटना शेयर करने जा रहा हूँ. उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को जरूर पसंद आएगी.

बात उन दिनों की है जब मैं 12वीं का एग्जाम दे चुका था और रिजल्ट का इंतजार कर रहा था. चूंकि मेरे पापा की पोस्टिंग दूसरे शहर में थी इस कारण घर पर अकेला मैं
रहता था. मेरे पड़ोस में राघव नाम का एक लड़का था. धीरे – धीरे उससे मेरी दोस्ती हो गयी और फिर मैं अक्सर उसके घर आने – जाने लगा. धीरे – धीरे करके हमारी दोस्ती गहरी होती गई. चूंकि घर पर मैं अकेला ही रहता था इस कारण कभी – कभी उसकी माँ मुझे खाना खिला देती थी.

एक दिन उसके घर का बिजली का मीटर ख़राब हो गया तो
राघव उसे ठीक करने के लिए मुझे बुलाया ले गया. चूंकि मुझे इस बारे में थोड़ी – बहुत जानकारी थी तो मैंने वो मीटर ठीक कर दिया. उसी समय एक लड़की जिसकी उम्र 16 साल के करीब रही होगी, अपने सीने को किताब के पुलिंदे से ढके हुए राघव के घर में घुसी. उसके सीने पर किताब चिपके होने के कारण मैं उसकी चूची का ठीक ढंग से अंदाजा नहीं लगा पाया लेकिन उसकी बिल्लौरी
आँखों ने मेरे लन्ड को खनखना दिया.

अब मैंने राघव से और दोस्ती बढ़ाई और उसके घर अपना आना – जाना भी बढ़ा दिया तो पता चला कि वो उसकी बहन मोनिका हैं. अब मैं उसकी बहन को चोदने के सपने देखने लगा. फिर धीरे – धीरे मैं उसके करीब आने लगा. अब जब भी वो मुझे देखती तो मुझे उसकी आँखों में प्यास नज़र आती थी.

एक दिन मैं अपने घर पर पड़ा था कि तभी उसने मेरे मोबाइल पर मिस कॉल कर दिया. जब मैंने वापस फ़ोन किया तो उधर से कोई आवाज़ नहीं आई. लेकिन चूंकि उसका वो नंबर मेरे फ़ोन में सेव था इसलिए मैं समझ गया कि आग उधर भी लगी हुई है.

बाद में राघव से छिपा कर मैं मोबाइल पर उससे बात करने लगा. वो बेहद गरम किस्म की लड़की थी. बात – बात में ही वो मुझे रात को अपने घर पर आने के लिए कहती रहती थी. एक दिन उसके घर के सभी लोग गाँव चले गए तो वो मोबाइल मांगने के बहाने मेरे घर पर आई और मुझसे कहने लगी, “जान, आज अगर तुम नहीं आये तो मैं डर से मर जाउंगी”.

उसकी बात सुन कर मैं समझ गया कि आज यह चुदना चाहती है. फिर मैंने उससे रात में उसके घर आने का वादा किया और फिर वो चली गयी. उसके जाने के बाद मैंने बाथरूम में जाकर एक बार मुठ मारी और रात के 10 बजने का इन्तजार करने लगा.

रात के दस बजे मैं चारों तरफ देखता हुए उसके घर पर पहुंचा तो मैंने पाया कि वो घर के मुख्य दरवाजे पर ही खड़ी मेरा इंतजार कर रही थी. मेरे वहां पहुंचते ही उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और उचक कर मेरे होंठ चूम लिए और फिर मेरा हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गयी.

अब मेरे लंड का फड़फड़ाना शुरू हो चुका था. कमरे में जाने बाद उसने दरवाजा भी बंद नहीं किया और मुझे किस करने लगी. अब मैं उसके किस का जवाब देने लगा साथ ही साथ मैं उसके गांड पर अपना हाथ भी फेरने लगा.

फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और मेरे सुपाड़े पर चिकोटी काट ली. जिससे मेरा पूरा जिस्म सनसना सा गया. फिर मैंने उसे पूरी तरह नंगा किया और बिस्तर पर लिटा दिया.

अब मेरे होंठ उसके होंठ पर थे और मेरा बायां हाथ उसकी बायीं चूची पर था और मेरा दायां हाथ उसकी चूत पर फिसल रहा था. जिस कारण उत्तेजना वश उसके मुंह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं. अब मैं उसकी चूची को चूसते हुए नीचे की तरफ गया और उसकी नाभि में अपनी जीभ घुमाने लगा.

अब मोनिका अपने जिस्म को बार – बार आड़ा – तिरछा करने लगी थी. फिर मैंने धीरे से अपनी जीभ को उसकी चूत में रगड़ने लगा जिससे उसकी बेचैनी और बढ़ने लगी थी.

फिर मैंने लगभग 5 मिनट तक उसकी चूत चाटी. तभी उसके चूत से उसका रज बहने लगा तो मैं उसको चाटा गया. मुझे उसका स्वाद खारा और थोडा सा खट्टा लगा.

अब मेरी बारी थी. लेकिन उसने मेरा लंड चूसने से मना कर दिया. तो मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया और फिर मैंने उसे सीधा लिटाया और अपने सुपाड़े को उसकी चूत के छेद पर सेट किया और हल्का सा धक्का लगा दिया. उसकी चूत काफी टाइट थी. जिस वजह से मोनिका के मुंह से चीख निकल गई. मैं समझ गया कि आज मुझे अनचुदी चूत चोदने का मौका मिला है.

फिर मैंने उससे कहा, “बस जान, थोडा सा दर्द सहन कर लो फिर तो मज़ा ही मज़ा है”. इस पर उसने हां में गर्दन हिलाई. अब मैंने दुबारा उसकी चूत के छेद पर सुपाड़ा लगाया और एक तेज़ झटका दिया. उसके मुंह से ‘उई माँ, निकालो इसे’ की आवाज आई और फिर वह छटपटाने लगी.

अब मैंने उसकी कमर को कस कर दबा लिया था. जिसकी वजह से वह अपनी चूत से मेरा लंड नहीं निकल पाई. अब मैं उसी अवस्था में उसकी चूची के निप्पल को चूसने लगा और उसके बदन को सहलाने लगा.

थोड़ी देर के बाद उसे अच्छा लगने लगा तो वो अपनी कमर को उचकाने लगी. मैं समझ गया कि अब उसका दर्द कम हो रहा है. फिर मैंने एक करारा धक्का लगा दिया. उस धक्के की वजह से मोनिका एक दम से चिंगुड़ गयी और मेरा लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा घुस गया. अब मैं जन्नत का मज़ा लेते हुए धक्के मरने लगा.

थोड़ी देर बाद मोनिका अपने दर्द को भूल कर अपनी कमर को उचका – उचका कर मेरा साथ देने लगी थी. फिर करीब 50 – 55 करारे धक्के के बाद मेरे लंड से वीर्य का फव्वारा फूट पड़ा. मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालना चाहा लेकिन मोनिका ने ऐसा नहीं करने दिया तो मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.

फिर दो मिनट तक हम लोग ऐसे ही चिपके रहे. जब हम दोनों के ठंडे हो गए तो मैंने देखा कि मोनिका की चूत से खून के साथ वीर्य भी निकल रहा है. जिसे उसने अपने दुपट्टे से साफ कर लिया.

उस रात हम दोनों ने कुल 7 बार चुदाई की और आज तक जब भी मुझे मौका मिलता है मैं उसको चोद आता हूँ.

दोस्तों, ये मेरी पहली कहानी है. उम्मीद है कि आप सबको जरूर पसंद आई होगी. कहानी से संबंधी सलाह और सुझाव के लिए मुझे मेल कीजिएगा. मेरी मेल आईडी –
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