दोस्त के गेस्टहाउस में पड़ोसन संग मस्ती

मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी के पति बाहर गए थे.केके दिन भाभी मार्केट जा रही थीं. रास्ते में मुझे मिलीं. मैंने उन्हें लिफ्ट दी और फिर दोस्त के गेस्ट हाउस में ले जाकर उनकी चूत का बाजा बजाया…

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम मोहित है और मैं कानपुर का रहने वाला हूं. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और इसकी हर एक कहानी को पढ़ता हूँ. यहाँ पर यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद है आप लोगों को पसन्द आएगी.

बात आज से दो महीने पहले की है. तब मैं अपनी बाईक से बाज़ार जा रहा था. तभी मैंने रास्ते में देखा कि मेरे घर के बाजू में रहने वाली संध्या भाभी कहीं जा रही थीं. उन्हें देख कर मैंने उससे कहा – संध्या भाभी! चलो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा, मैं भी बाज़ार ही जा रहा हूँ.

वो भी बाज़ार जा रही थी तो मेरे ऐसा कहने पर तैयार हो गईं और फिर मेरे पीछे बाइक पर बैठ गई. बाज़ार में हमने काफी कपड़े और कुछ दूसरे समान खरीदे. शॉपिंग करने के बाद मैंने उसे कहा – भाभी, चलो कहीं जूस या काफ़ी पीते हैं तो उसने कहा कि हां चलो.

फिर हम वहीं पास के ही कॉफी हाउस में हम पहुंच गए. इसके बाद मैंने कॉफी का आर्डर दिया और फिर उनसे पूछा कि तुम्हें घर जाने की जल्दी तो नहीं है. इस पर तो वो बोलीं – वो तो पन्द्रह दिन के लिए बाहर गए हुए हैं, इसलिए कोई जल्दी नहीं है.

यह सुनते ही मैंने संध्या भाभी से कहा – तो चलो आज खाना मेरे दोस्त के गेस्ट हाउस पर चलते हैं और वहीं खाना खाते हैं. इस पर वो तैयार हो गईं. अब हम चल पड़े.

रास्ते में अब धीरे – धीरे हमारी बातें खुल कर होने लगीं और हम एक – दूसरे के साथ निजी बात शेयर करने लगे. बातों ही बातों में उसने बताया मेरे पति मुझे कभी संतुष्ट नहीं कर पाते हैं. यह सुन कर मुझे समझ में आ गया कि आज तो मेरा काम बनने वाला है. कुछ ही देर में हम मेरे दोस्त के गेस्ट हाऊस पर पहुंच गए और कॉफ़ी के लिए बोल दिया.

काफी पीते – पीते मैंने अपने दोस्त से कमरे के लिए बात कर ली. बात को समझ कर मेरे दोस्त ने मुझे एक बहुत अच्छा एसी कमरा दे दिया. वहाँ पहुंच कर हमने खाना खाया. खाने के बाद हम आराम से कमरे में बैठे थे.

उस समय संध्या बहुत खूबसूरत लग रही थी. फिर मैंने संध्या से कहा कि भाभी, अब हम दोनों भी कुछ मज़ा ले लें? इस पर वो बोली – किसी को इसके बारे पता चल गया तो? तब मैंने उससे कहा कि आप परेशान न हों, कुछ नहीं होगा, यह मेरे दोस्त का होटल है. हम इस पर पूरा विश्वास कर सकते हैं.

थोड़ी न – नुकुर के बाद वो तैयार हो गयी. फिर मैंने दरवाजा बन्द कर लिया और धीरे – धीरे उसके बदन को सहलाना शुरू किया. फिर उसके गले को चूमते – चूमते मैंने उसके बोबे को दबा दिया. जिससे वो सिसक उठी. अब उसके मुंह से ‘ऊह ऊह आह आह’ की आवाज आने लगी.

फ़िर मैंने प्यार से धीरे – धीरे उसकी साड़ी को उसके बदन से अलग कर दिया. अब उसके बड़े – बड़े बूब्स उसके हाफ ब्लाउज़ से अलग ही नजारा दिखा रहे थे और पेटिकोट में खूब फब रही थी. फिर मैंने अपना टी – शर्ट और जींस दोनों उतार दिए और सिर्फ़ अन्डर वियर में आ गया.

अब मैंने अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया और चूमन शुरू कर दिया. इसके बाद फ़िर मैंने उसके गाल पर होते हुए चेहरे पर पहुंचा और फिर गले तक किस किया.

फ़िर मैंने उसके पेटिकोट को उतार दिया और हाथ नीचे ले गया और नीचे से हाथ डाल कर उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा. इसकी वजह वो सीत्कार करने लगी. उसके मुंह से ‘आह्ह आह ऊह ऊह ऐह आह’ की आवाजें निकलने लगीं.

फिर मैंने अपने दूसरे हाथ से उसकी पैंटी को खींच कर निकाल दिया और इसके साथ ही उसके ब्लाऊज़ के बटन खोल कर उसे उतार दिया. जिससे वो ब्रा में आ गयी. अब मैंने देर ना करते हुए उसकी ब्रा भी उतार दी.

वाह, क्या बूब्स थे उसके! दोस्तों, उसके बूब्स बड़े और सख्त थे. उन्हें देखते ही मैंने झपट्टा मार कर पकड़ा और मसलने लगा. तभी मैंने उसके एक निप्पल को अपनी उंगलियों में लेकर दबाया. जिससे वो चिहुंक उठी और जोर – जोर से सिसकने लगी और ‘ऊह ऊह आह आह मेरी जान आज मुझे पूरी तरह से चुदाई का मज़ा दो’ कहने लगी.

अब मैंने अपना भी अन्डर वियर निकाल दिया और अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया. वो मेरे लण्ड को पकड़ने के बाद अपने हाथों से रगड़ने लगी. जिससे मेरी भी आहें निकलने लगी और मैंने उससे लन्ड मुंह में लेकर चूसने को बोला.

मेरा इतना कहते ही उसने लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. अब मैं 69 की पोजिशन में हो गए. जिससे मैं उसकी चूत के समीप पहुंच गया और फ़िर मैं उसकी चूत जीभ से चाटने लगा.

मेरी जीभ मज़े से उसकी चूत में इधर – उधर हो रही थी और वो मेरा पूरा लण्ड चूस रही थी. थोड़ी देर बाद वो बोली, “अब देर न करो, मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है. मेरी चूत को अपने मस्त लन्ड से चोद दो ! चोदो मुझे! चोदो.

उसकी यह बातें सुन कर मैंने भी देर करना उचित न समझा और फिर सीधा हो गया. फिर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के ऊपर लगाया और लन्ड से ही उसकी चूत को रगड़ने और सहलाने लगा. जिससे वह लन्ड अंदर लेने के लिए और उतावली हो उठी.

कुछ देर रगड़ने के बाद उसकी टाईट चूत को चोदने के लिए मैंने पहला झटका ही जोर से दे दिया. जिससे वो जोर से चीख पड़ी, ‘ओह्ह! मर गई मैं! दर्द हो रहा है मुझे! आराम से करो!’ अभी मेरा आधा लण्ड ही उसकी चूत में गया था. काफ़ी टाईट चूत थी. इसके बाद मैंने फ़िर एक बार जोर का झटका दिया और अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया.

अब वो आह आह करके धीरे – धीरे सिसकने लगी. फ़िर मैं धीरे – धीरे अपने लण्ड को आगे – पीछे करने लगा. कुछ देर बाद वो अपना दर्द भूल गई और मजे लेने लगी. लेकिन जैसे ही इधर मैंने अपने झटकों की ताकत बढ़ाई तो वो फिर से तेजी – तेजी सीत्कारने लगी, ‘ओहो! ह्म्म! आह! जोर से! और जोर से धक्के दो!

अब मैं और जोर – जोर से उसे चोदने लगा. फिर थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गई और उसकी चूत का रस टपकने लगा. उसकी चूत बहते महसूस होने पर मुझे और मज़ा आने लगा. अब उसे भी काफ़ी मज़ा आ रहा था.

उसके झड़ने से पूरे कमरे में फ़च – फ़च की आवाज़ गूंज़ने लगी. थोड़ी देर बाद मुझे लगने लगा कि अब मैं भी डिस्चार्ज होने वाला हूं तो मैंने उसको बेड पर उल्टा कर के कुतिया बना दिया और पीछे से उसकी चूत में अपना लण्ड पेल दिया और धक्के देने लगा

इस पोजीशन में करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा. उधर कस तरह करने से वो, ‘आह ! ओ! ह्ह’ करके सिसकने लगी. फ़िर मैंने पीछे से जोर – जोर से धक्के लगाने शुरू किए. मेरे साथ उसको भी बहुत मज़ा आ रहा था.

अब मुझे लगा कि मेरा लौड़ा नहीं रुकेगा तो मैंने उससे कहा कि मैं अब झड़ने वाला हूं। इस पर वो जोर से बोली – मेरी चूत में ही डालना. अब मैं अपनी पूरी ताकत से उसकी टाईट चूत में झटके लगाने लगा और 8-10 झटके के बाद ही मैंने अपना पूरा माल उसकी चूत में छोड़ दिया.

अब उसने मुझे कस कर जकड़ लिया. अब हम थक गए थे सो नंगे ही बेड पे पड़े रहे. फ़िर एक घंटे बाद हमने अपने कपड़े पहने और गेस्ट हाउस से घर के लिए निकल गए. वापसी में मैंने उसको उसके घर पर छोड़ दिया. अब हमें जब भी मौका मिलता ऐसी ही धमाकेदार चुदाई करते हैं.

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