दोस्त की शादी में मजे किये

अक्सर हमें जिन्दगी से वो नहीं मिलता जो हम चाहते हैं. कुछ लोग जो मिल गया उसी के साथ जिन्दगी काटना शुरू कर देते हैं लेकिन मेरे जैसे कुछ लोग मिले मौके का फायदा उठाते हुए जिन्दगी का लुत्फ़ उठाते हैं…… एक ऐसे ही वाकये का जिक्र……..

मैं शालिनी शर्मा है. सभी कामुक लोगों को मेरा नमस्कार. मैं दिल्ली  की रहने वाली हूँ. शादी-शुदा हूँ पर पति मुझे बिलकुल खुश नहीं कर पाते. क्योंकि मुझे वाइल्ड सेक्स अच्छा लगता है और मेरे पति ठहरे रसिक मिजाज कोमल ह्रदय पतले लंड धारी हिंदी के कवि. इसी वजह से मुझे किसी ऐसे की तलाश थी जो मुझे खुश कर सके. फिर एक दिन मेरी वो तलाश पूरी हुई.

बात तब की है जब मैं अपने दोस्त के शादी में गयी थी. शादी की तैयारियाँ जोरो पे थी. सभी अपने-अपने काम में व्यस्त थे. मैं भी सभी का हाथ बटाने में लग गयी. शादी का दिन आया. जब बारात आयी तब सभी के बीच मैं भी दूल्हे का स्वागत करने के लिए खड़ी थी. जब दूल्हे का स्वागत हो रहा था तभी मेरी नजर दूल्हे के साथ आये एक बाराती पे पड़ी. वो भी मुझे घूर-घूर के देख रहा था.

थोड़ी देर हम एक दूसरे को चोर निगाहों से देखते रहे. फिर मैंने अपनी नज़र हटाली. सभी अंदर जाने लगे. मैं भी उनके साथ अंदर आ गयी. थोड़ी ही देर में शादी के रस्मों की शुरुवात हो गयी. मैं एक कोने में खड़ी रह कर सब देख रही थी और उस बाराती को भी ढूंढ रही थी. तभी मेरे सामने किसी ने कोल्डड्रिंक लाया. देखा तो वही बाराती था.

“शायद इससे ढूंढ रही है आप”- वो बोला.
मैं- “अअ.. हाँ!. यही ढूंढ रही थी. थैंक यू.” और उसे स्माइल दी.
वो- मेरा नाम तरुन है.
मैं-हाय! मैं शालिनी हूँ.
तरुण – आप कमाल की खूबसूरत हैं.
मैं- थैंक यू.
तरुण- आपके शानदार हुस्न का राज क्या है??
मैं- शायद आप गलत नंबर डायल कर रहे है.
तरुण – तो आप ही दीजिये अपना सही नंबर.
मैं- मैं शादीशुदा हूँ.
तरुण – तो क्या? शादी शुदा लोग क्या मोबाइल नहीं इस्तेमाल करते?
ये कह कर उसने मुझे आँख मारी और मेरे करीब आया. थोड़ी देर हम वैसे ही खड़े रहे और फिर अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे घर के एक कमरे में ले गया.
मैं- क्या कर रहे हो?
वो कुछ नहीं बोला.
मैं- अरे क्या??..कहाँ ले जा रहे हो??
लेकिन वो मुझे कमरे में ले गया और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और मुझे दीवार से सटा कर खड़ा कर दिया.
मैं- करना क्या चाहते हो तुम?
वो बिना कुछ बोले मेरे होठों को चूमने लगा. मैने पहले पहल थोड़ा विरोध किया पर बाद में उसका साथ देने लगी. आखिर मुझे भी यही सब चाहिए था.

अब वो आगे बढ़ने लगा. उसने मेरी साड़ी का पल्लू हटाया और मेरे ब्लाउज के हुक खोल कर ब्रा के ऊपर से ही मम्मों को दबाने लगा. फिर उसने ब्रा को ऊपर सरकाया और मेरी चुचियो को चूसने और काटने लगा.
मैं- अह्ह्ह्ह्ह्ह…. आआह्ह्ह्ह्ह्ह्…. आराम से कर ना.
ये सुनकर वो और जोश में आ गया और उसने एक चूची को जोर से काटा.
मैं- अईईईई…अबे काट मत..आआआह्हह्हह्हह्ह.
मैं उसे धकेलने लगी.
तभी किसी ने दरवाजा खट-खटाया. हम दोनों एकदम से सुन्न हो गए.
तरुन- तुम इतनी जोर से चिल्लाई कि कोई आ गया.
मैं-  तूने काटा ना होता तो चिल्लाती थोड़ी मैं!

तभी बाहर से कोई बोला- अरे अंदर कौन है?? किसने बंद किया है दरवाजा? अरे दरवाजा खोलो मुझे बरतन लेने हैं.

कोई बरतन लेने आया था.

तभी तरुन बोला- तुम एक काम करो. परदे के पीछे छुप जाओ.

मैं छुप गयी और उसने जाके दरवाजा खोला. जो बरतन लेने आया था वो तरुन को भी साथ ले गया. 5 मिनट बाद मैं भी वहां से भाग निकली और बाहर जाके सब में घुल मिल गयी. शादी की रस्म पूरी हो गयी. खाना-वाना भी हो गया. लेकिन अब रात बहुत हो चुकी थी सो लड़के वाले सभी यही रुक गए क्योंकी बिदाई भी दूसरे दिन होने वाली थी.

अब सब सोने जा रहे थे. तभी तरुण मेरे पास आया और बोला- 12 बजे पीछे वाले खेत के बाहर मिलना. फिर वो चला गया.
मैं भी 12 बजने का इंतज़ार कर रही थी. जैसे ही 12 बजे, मैं खेत के वहां चली गयी. वो वहां पहले से मौजूद था.

तरुण ने जाते ही बोला- जल्दी आ. अब कंट्रोल नहीं हो रहा.
मैं- देख तरुन मैं तुझे ये बताने आयी हूँ….

मेरी बात पूरी होने से पहले ही उसने मेरे होठ चूसने शुरू किये. उम्म्म्म्म्म… उम्म्म्म्म… म्मम्मम्मम…. ऊऊऊम्म्म्म्म…
और वो मुझे उठा के खेतो में ले गया.
मैं- क्या कर रहे हो?  उतारो मुझे!!
तरुन- यार पहले भी एक बार तुम्हारे चिल्लाने की वजह से गड़बड़ हो चुकी है. अब फिर से खेल ख़राब मत करो.

मैंने फिर कुछ नहीं बोला. अब वो मुझे खेतो के बीचो-बिच ले आया. उसने मुझे उतारा और नीचे गिराया. बिना समय गवांये वो अपने कपडे उतारने लगा. मैंने भी अब अपना ब्लाउज उतार फेका. फिर एक के बाद एक सारे कपड़े उतार फेके और झटपट नंगी हो गयी. अंधेरा बहुत था, तो उसने टॉर्च चालू की और दो मिनट तक मेरा नंगा जिस्म देखता ही रह गया.
तरुन- ओये तेरी!! साली तू तो अंदर से भी एकदम मस्त माल है रे.

उसके मुँह से इस वक़्त ये गाली अच्छी लगी मुझे.

मैं- तो साले हरामी! बस देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी??

तरुन- तू देख बस. कैसे तेरी फाड़ता हूँ?

और वो मुझ पर झपटा. पहले वो मेरे ऊपर आया और मुझे चूमने चाटने लगा. फिर वो मेरी चुचियों को चूसने लगा और फिर जोर-जोर से काटने लगा.
“अह्ह्ह्ह काट मत हरामी…अह्ह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है…

मैं चिल्ला रही थी, पर मेरी चीख शायद उसे और जोशीला बना रही थी. वहाँ सुनने वाला कोई नहीं था. थोड़ी देर बाद वो चूचियों से नीचे  गया. मैं उसके बालो में हाथ फेर रही थी. उसने निचे जाके मेरी टांगें फैलाई और मेरी चूत को सहलाने और चाटने लगा. थोड़ी देर बाद वो फिरसे अपनी औकात पे आया और मेरी चूत के दाने को काटा.
“आह्ह्ह्ह साले काट मत- मैं चिल्लाते हुए बोली.
अब वो मेरे ऊपर आया और मुझे अपना लौड़ा चूसने को बोला. मैंने उसे मना किया पर वो ना माना. आखिर मैं भी मान गयी. पहले पहले मैंने थोडा सा मुँह में लिया. फिर उसने मेरे बाल पकड़कर अपना मोटा लौड़ा मेरे मुँह में घुसाया. 5-10 मिनट उसने मेरे मुँह को चोदा. जब उसने लौड़ा बाहर निकाला तो मुझे उबकाई सी आ रही थी. मैंने जैसे तैसे खुद को संभाला.

अब उसने नीचे लेटाया और मेरी टांगे फैला के बीच में आया. मेरी चूत पे थोड़ी थूक लगायी और अपना लौडा चूत पे रख के जोर से धक्का लगाया. उसका लौड़ा मेरी चूत के छेद के लिए कुछ ज्यादा ही मोटा था. मैं एकदम से छटपटाने लगी.
तरुण साले!! निकाल अपने लौड़े को बाहर.आह्ह्ह्ह्ह् दर्द हो रहा है कमीने- मैं चीखी.

पर वो रुकने के बजाय और धक्के लगाने लगा. अब मैं लगातार चिल्ला रही थी. तो वो मेरे ऊपर आया और अपने होठो से मेरे होठो को बंद किया.

उम्म्म्म्म….उम्म्म्म्म्म… उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्….उम्ह्ह्ह्ह्ह्हा…उम्म्म.उम्म्म..उम्म्म ऐसी आवाजे आने लगी. थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा.
“ह्म्म्म्म….स्सस्सस्स…अह्ह्ह्ह…उम्म्म… अब ऐसी आवाजे मैं निकाल रही थी. जैसे उसे ये एहसास हुआ की मुझे भी मजा आने लगा है वैसे ही उसने मेरे होठो को आजाद कर दिया.
होंठ छूटते ही मैंने कहा- अह्ह्ह्ह्ह्ह… तरुन कम ऑन! ..जोर से चोद मुझे…अह्ह्ह..

मैं बड़बड़ाने लगी. अब वो मुझे जबरदस्त तरीके से चोदने लगा. थोड़ी देर बाद मैं अकड़ने लगी और सब कुछ भूल कर उससे लिपट गयी. मैं झड़ रही थी और वो भी मेरे साथ झड़ गया. जैसे ही हम शांत हुए वो मेरे ऊपर गिर गया और मुझे किस करने लगा. मैं भी उसके साथ मजे में किस करते पड़ी रही. थोड़ी देर बाद वो ऊपर से हट कर बाजु में लेट गया.

थोड़ी देर बाद हमने वही सब दुबारा किया. रात काफी हो चुकी थी तो हमने वापस जाना ठीक समझा. दूसरे दिन विदाई की सारी रस्में पूरी हो गयी और दूल्हे वाले जाने लगे. तभी तरुन मेरे पास आया और मुझे किस किया. मैंने उसे अपना नंबर दिया और उसका नंबर लिया. जाते-जाते फिरसे उसने मुझे किस किया और जल्दी ही मिलने का वादा किया.
मैं बहुत खुश थी क्योंकि मुझे जो चाहिए था वो मिल गया था.

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