दोस्त की मकान मालकिन की प्यास बुझाई

अब मैं सातवें असमान पर था. पूरे कमरे में मदहोशी का माहौल था और आंटी पूरे तेजी से ऊपर – नीचे कूद रही थी. फिर कुछ देर बाद आंटी ने मुझे ऊपर आने का इशारा किया तो मैं आंटी के ऊपर आ ग्या और जोर – जोर से धक्के लगाने लगा…

हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम गोलू सिंह है और मैं भोपाल से हूँ. अन्तर्वासना पढ़ने वाली सभी आंटियों और भाभियों को मेरा नमस्कार! आज मैं आपके सामने अपनी पहली सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और इस वजह से मेरा भी मन हुआ कि क्यों न भी अपनी कहानी आप लोगों के साथ शेयर करूं. मैं बहुत ही हिम्मत जुटाने के बाद यह कहानी आप लोगों के सामने पेश करने जा रहा हूँ इसमें अगर मुझसे कोई गलती हो तो माफ़ कीजियेगा.

दोस्तों बात कुछ महीने पहले की है जब मई इंजीनियरिंग डिग्री पूरा करके भोपाल में रूम लेकर रहने लगा था. मेरे रूम से कुछ ही दूर मेरे एक दोस्त का रूम है. मैं अक्सर अपने दोस्त के रूम पर ही रहता था. मेरे दोस्त की मकान मालकिन अपनी एक लड़की और पति के साथ रहती थी.

उसकी लड़की एमबीए कर चुकी है और उसके मकान मलकिन के पति गवर्नमेंट जॉब करते है. दोस्तों, मेरे दोस्त की मकान मालकिन वैसे तो 45 की हैं पर लगती नहीं है. उनका फिगर तो पूछो ही मत! ऐसा है कि एक बार कोई भी देख ले तो पागल हो जाए.

उसके होंठ एक दम लाल और रसीले गुल के रंग जैसे थे और हल्के फूले हुए गाल और काली आंख गजब की थीं. कुल मिलाकर वह एक सुन्दर सी पारी की तरह थीं.

दोस्तों, मैं तो उसको पहली बार में देखते ही पागल हो गया था, क्योंकि मुझे कमसिन लड़की से ज्यादा आंटी और भाभी पसंद हैं. इन्हें देखते ही मेरा लन्ड खड़ा हो जाता है.

दोस्तों, उन्हें देखने के बाद फिर मैं दोस्त से मिलने के बहाने आंटी के घर हमेशा जाता हूँ. आंटी के घर में दो गेट हैं, एक गेट मेरे दोस्त के रूम में खुलता है और एक मेन गेट है. लेकिन अन्दर से दोनों गेट जुड़े हुए हैं यानि की दोस्त के रूम तरफ से भी आंटी के पूरे घर में घूमा जा सकता है.

दोस्तों, अब आपका ज्यादा समय न वेस्ट करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आते हैं. एक बार हुआ ये कि एक दिन जब मैं दोस्त के रूम पर गया तो वो वहां नहीं था और आंटी के घर का दरवाजा अन्दर से बंद था.

यह देख कर मैंने आवाज लगाई तो मुझे कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला तो मुझे लगा कुछ समस्या है. फिर मैं दोस्त के रूम की चाभी निकाली, जिसे वो हमेशा अपने रूम के आगे एक जगह छुपा कर रखता था.

चाभी निकाल कर फिर मैंने दोस्त के रूम का दरवाजा खोला और अन्दर चला गया तो देखा अंदर भी कोई नहीं है. फिर मैंने चारों तरफ नज़र दौड़ा कर आंटी को देखा तो वो नहीं मिली.

फिर मैंने बाथरूम की तरफ गया तो मुझे हल्की – हल्की सिसकारी सुनाई दी. उसे सुन कर मेरा माथा ठनका तो मैंने बाथरूम के पास जाकर एक होल से अन्दर की तरफ देखा तो आश्चर्य चाकित रह गया.

अंदर आंटी पूरी नंगी थी और एक हाथ से अपने बूब्स दबा रही थी. इसके अलावा दूसरे हाथ की दो ऊँगली उन्होंने अपनी चूत के अन्दर डाल रखी थी और “आह.. आह.. ऊह.. ऊह..” करके सिसकारी भर रही थी. इसके साथ ही वो बोले जा भी रही थी. उनके मुंह से “या हां हां फ़क मी डार्लिंग कम फ़ास्ट आह आह” की आवाजें निकल रही थी.

मतलब साफ था अंदर आंटी किसी को इमेजिन कर रही थी और अपनी चूत को ठंडा करने की कोशिश कर रही थी. यह देख कर मैंने निश्चित कर लिया कि आज तो इसे चोदना ही है.

यही सोच कर मैंने धीरे से दरवाजा खोला और बाथरूम के अन्दर चला गया. आंटी अभी भी अपने में ही मस्त थी. फिर मैंने अपना लन्ड बाहर निकला और पीछे से जाकर आंटी को पकड़ लिया और आंटी का चुम्बन लेना शुरू कर दिया.

दोस्तों, आंटी तो पहले से ही गर्म थी, इसलिए उन्होंने कोई विरोध नहीं किया और चुम्बन का जबाब देने लगी. अब मैं आंटी के उपरी होंठ को अपने होंठों के बीच फंसा कर चूस रहा रहा और आंटी मस्त होकर मेरे निचले होंठ को चूस रही थी.

कुछ देर बाद आंटी ने अपनी जीभ को मेरे मुंह में डाल दिया. अब मैं आंटी की जीभ को चूसने और एक हाथ से उनके बूब्स को दबाने लगा. फिर मैं जैसे ही अपने दूसरे हाथ को उनकी चूत के पास ले गया आंटी की आह निकल गई. इसके बाद तो फिर आंटी ने मेरे पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया. वो मुझे ऐसे चूम रही थीं जैसे कि कई सालों से भूखी हो.

फिर मैं आंटी के कानों और गर्दन को चूमते हुए उनके बूब्स पर आया. करीब पांच मिनट तक उनके बूब्स को चूसने के बाद फिर मैं उनकी बगलों को चूमते हुए फिर से उनके बूब्स पर पहुंच गया और अपने होंठों को फिसलाते हुए मैं आंटी की नाभि तक पहुंच गया.

दोस्तों, जैसे ही मैं आंटी की नाभि के पास गया आंटी की तो सीत्कारें ही निकल गई. फिर उन्होंने मुझे रोका और बेडरूम की ओर चल दी. मैं भी आंटी के पीछे – पीछे चला गया.

अब तक मेरा दोस्त अपने रूम पर वापस आ चुका था लेकिन उसे पता नहीं था कि मैं आंटी के साथ हूँ. फिर आंटी ने मुझसे कहा कि एक मिनट रुको मैं रामन (मेरा दोस्त) को कुछ कम से भेज दूं ताकि वो उधर चला जाए और हमें भी पूरा एन्जॉय करने का टाइम मिल जाये.

इधर आंटी उसके रूम गईं और पीछे से मैं कुछ देर के लिए बाहर निकल आया. बाहर आकर मैं दो आइसक्रीम लेकर आया और साथ में ही दो गुलाब के फूल भी ले आया. जिन्हें देख कर आंटी ने पूछा कि ये सब किसलिए तो मैंने बोला कि बस आप देखते जाइये.

फिर मैंने आंटी को बेड पर सुला दिया और किस करना शुरू किया. इसके बाद फिर मैंने एक गुलाब उठाया और दांतों तले दबा लिया और फिर आंटी के पूरे शरीर पर घुमाने लगा. मेरे इस प्रहार से आंटी ने अपना आपा खो दिया और जोर से सिस्कारियां भरने लगी और बोलने लगी कि जल्दी कुछ करो गोलू, नहीं तो मैं मर जाउंगी, मुझसे अब बर्दास्त नहीं हो रहा है.

फिर मैंने जैसे ही गुलाब को मुंह में लेकर आंटी की चूत पर पहुंचा तो आंटी की चीख निकल गयी और आंटी ने मेरा सर अपने चूत पर दोनों जांघों से दबा लिया और उछलने लगी. थोड़ी ही देर बाद वह झड़ गयी. आंटी की चूत के पानी से गुलाब तो पूरा भीग ही गया था लेकिन उसके साथ ही मेरा पूरा मुंह भी उनके चूत के पानी से सन गया.

फिर मैं उनसे अलग हुआ और गुलाब पर लगे पानी को चाट कर उसे साइड में रख दिया. इसके बाद फिर मैंने आंटी की चूत को चूमा तो आंटी ने 69 की पोजिशन में आने का इशारा किया. फिर आंटी ने मेरा चड्ढी को निकाल फेंका और हम 69 की पोजिशन में आ गये.

अब आंटी ने मेरा लन्ड चूसना शुरू कर दिया. दोस्तों, आंटी क्या मस्त लन्ड चूस रही थी. कुछ देर तक चूत चटवाने के बाद आंटी फिर से गरम हो गयी थी और फिर वो एक दम से उठ कर मेरे लन्ड पर बैठ गयी और मुझे चोदने लगीं.

अब मैं सातवें असमान पर था. पूरे कमरे में मदहोशी का माहौल था और आंटी पूरे तेजी से ऊपर – नीचे कूद रही थी. फिर कुछ देर बाद आंटी ने मुझे ऊपर आने का इशारा किया तो मैं आंटी के ऊपर आ ग्या और जोर – जोर से धक्के लगाने लगा.

आंटी लगातार आहें भर रही थी और चिल्ला रही थी, “यस डार्लिंग कम ऑन, फ़क मी हार्ड आह आह”. अब मैं भी जोश में था और धक्के पर धक्के दिए जा रहा था.

फिर करीब 5 मिनट बाद आंटी एक दम से अकड़ गयी और लन्ड को चूत से भींच लिया. जिसके कारण मैं भी उनकी चूत में ही झड़ गया.

फिर हम दोनों ने एक – दूसरे को किस किया. फिर मैंने आंटी की चूत को चूमा और आंटी ने मेरे लन्ड को चूम लिया. जैसे ही आंटी ने लन्ड को हाथ में पकड़ के चूमा वैसे ही मेरा लन्ड फिर से खड़ा होने लगा.

फिर मैंने आइसक्रीम का एक डिब्बा लिया और आंटी की चूत पर लगा दिया. यह देख आंटी ने दूसरा डिब्बा लिया लिया और मेरे लन्ड पर लगा के चूसने लगी. फिर मैंने भी आंटी की चूत को चटना शुरू किया.

कुछ देर तक हम एक – दूसरे की चूत और लन्ड को चाटते रहे और उसके बाद फिर से एक बार चुदाई शुरू कर दी. इस बार की चुदाई करीब 30 मिनट तक चली और हम दोनों साथ ही झड़ गए.

फिर हमने साथ ही बाथरूम में जाकर एक – दूसरे को साफ किया और कपड़े पहने. इसके बाद फिर मैं रूम आ गया. तब से अब जब भी हमें मौका मिलता है तब हम साथ में मजा लेते हैं. बाद में आंटी ने मुझसे अपनी तीन फ्रेंड को भी चुदवाया.

दोस्तों, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताइयेगा. मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा. मेरी मेल आईडी – singhji[email protected]