दोस्त की पत्नी ने घर बुलाकर चुदवाया

मुम्बई में मेरा एक खास दोस्त था. हम दोनों ऑटो रिक्शा चलाते थे. वह शादीशुदा था और उसकी पत्नी बहुत ही खूबसूरत थी. मैं हमेशा से उसे चोदने के सपने देखा करता था. मेरा ये सपना कैसे पूरा हुआ ये आपको मेरी इस कहानी में जानने को मिलेगा…

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, मेरा नाम अक्षय है और मैं मुम्बई का रहने वाला हूं. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं और यहां पर प्रकाशित होने वाली सभी कहानियों को पढ़ कर जिंदगी का मज़ा लेता हूं.

इधर – उधर की बातों में ज्यादा टाइम न वेस्ट करते हुए मैं सीधा अपनी कहानी पर आता हूं. दोस्तों, मेरी उम्र 27 साल है और कद – काठी सामान्य है. मेरा रंग गेहुंआ है. मुम्बई में मैं एक ऑटो रिक्शा चलता हूं. मैं अकेले ही नहीं, मेरे साथ मेरे और कई दोस्त भी ऑटो रिक्शा ही चलते हैं.

इन्हीं दोस्तों में एक खास दोस्त है शैलेश. शैलेश की शादी हो चुकी है और वह मुम्बई में अपनी बीवी के साथ रहता है. शैलेश की बीवी का नाम सुनैना है. उसका रंग गोरा है और वह दिखाने में थोड़ी दुबली – पतली है. लेकिन है बहुत ही सुंदर. मैंने जब उसे पहली बार देखा था तो देखता ही रह गया था. उसे एक 3 साल का बेटा भी है, जिसका नाम कार्तिक है.

दोस्तों, ये बात करीब 2 साल पहले की है. तब मैं और शैलेश सुबह से ऑटो रिक्शा चलाने के बाद दोपहर में थोड़ी देर के लिए रिक्शा बन्द कर देते थे और आराम करने के उसके घर चले जाते थे. इसी दौरान मेरी पहचान उसकी बीवी सुनैना से हुई.

शुरू – शुरू तो वो मुझे बहुत पतिव्रता औरत लगती थी. वो तो बाद में धीरे – धीरे मुझसे खुलती गई और बहुत उसकी सारी पतिव्रता वाली पहचान धरी की धरी रह गई. मेरे ऐसे ही शैलेश के घर आते – जाते रहने से सुनैना से मेरी अच्छी खासी पहचान हो गई थी.

ऐसे ही करते – करते उसने मेरा मोबाइल नम्बर ले लिया था और मुझे भी अपना नम्बर दे दिया था. शुरू – शुरू में तो सुनैना मुझे दोस्ती वाले नॉर्मल मैसेज भेजा करती थी. मैं भी उसे वैसे ही मैसेज भेज दिया करता था.

फिर कुछ दिनों बाद उसने मुझे मैसेज भेज कर कहा कि मैं भी तुमसे प्यार करने लगी हूं और मुझे पता है कि तुम भी मुझसे प्यार करने हो, इसीलिए बार – बार मेर घर आते हो. दोस्तों, मैं तो पहले से ही उस पर नज़र रखता था. मेरे लिए ये घर आए एक मौके के जैसा था और मैं भी उसे गंवाना नहीं चाहता था. इसलिए मैंने हां कह दिया.

फिर ऐसे ही अब हमारे बीच प्यार भरी बातें होने लगीं. वो मुझे प्यार भरी शायरी भेजती और मौका मिलने पर कॉल करके भी बात करती. इसके साथ ही उस दिन के बाद जब मैं उसके घर जाता तो वह मुझे देख के मुस्कुराने लगती. मैं भी मुस्कुरा देता.

ऐसे ही कुछ दिन बीतने के बाद एक दिन जब मैं फ़ोन पर सुनैना से बात कर रहा था तो मुझसे बोली कि अक्षय, मुझे तुमसे एक बच्चा चाहिए. क्या तुम मुझे ये दे सकते हो?

उनके मुंह से ये सुन कर मैं अंदर ही अंदर तो बहुत खुश हुआ लेकिन फिर भाव खाते हुए मैंने कहा कि नहीं भाभी, ये गलत है, तुम्हारा पति मेरा सबसे खास दोस्त है और मैं दोस्त को धोखा नहीं दे सकता.

लेकिन वो नहीं मानीं और मेरे पीछे ही पड़ गईं. अब वो जब तब मुझे सेक्स के लिए आमंत्रित करतीं लेकिन मैं जाता नहीं था. मुझे डर लग रहा था कि कहीं अगर किसी तरह शैलेश को पता चल गया तो सब गड़बड़ हो जाएगा. क्योंकि तब शैलेश शहर में ही होता था और कभी भी घर आ सकता था.

आखिर एक दिन शैलेश के किसी रिश्तेदार की मौत हो गई. इसलिए वह गांव चला गया था. तब सुनैना ने फ़ोन करके मुझे अपने घर बुलाया. मई का महीना था और दोपहर का समय, इस दौरान घर में रहने वाले आस – पड़ोस के लोग सो जाते थे. मैंने इसी स्थिति का फायदा उठाया और सुनैना के पास पहुंच गया.

जैसे ही मैं उसके घर पहुंचा. वैसे ही उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और मुझे पकड़ के कस के मेरे गले लग गई. करीब – करीब 10 मिनट तक लगातार उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़े रखा और यहां – वहां हर जगह किस करती रही. मैं भी अब सब कुछ भूल कर उसे किस करने लगा था.

फिर धीरे – धीरे मैंने अपना एक हाथ उसकी छाती पर रख दिया और धीरे – धीरे उसके छोटे – छोटे मौसमी से थोड़े बड़े साइज वाले मम्मे दबाने लगा. मेरे ऐसा करने पर वो सिसकियां लेने लगी और साथ ही साथ ‘आह आह उह उह ओह्ह ओह्ह’ की आवाज भी करने लगी.

कब उसकी सांसें गर्म होने लगी थीं. थोड़ी देर बाद फिर मैंने झटके से उसका गाउन ऊपर किया और खींच कर बाहर निकाल दिया. अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. फिर मैंने उसकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी. इसके बाद उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए.

अब हम दोनों एक – दूसरे के सामने एक दम नंगे खड़े थे. फिर मैंने उसे नीचे फर्श पर लेटाने को कहा. वह झट से फर्श पर लेट गई और नीचे लेटते ही ज़ोर – जोर से आहें भरने लगी. फिर उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए मेरे होंठों को काटने लगी.

दोस्तों, मेरा लन्ड अब तक खड़ा होकर पूरे फॉर्म में आ चुका था. इसलिए अब मैंने भी देर ना करते हुए अपना लन्ड उसकी चूत पर रखा और एक जोर का झटका दे कर लंड उसकी चूत में घुसा दिया.

अचानक लगाए गए इस झटके को वह सह न पाई और जोर से चिल्लाई. लेकिन उसकी आवाज बाहर नहीं जाने पाई क्योंकि तब तक मैंने अपने होंठ से उसके होंठों को जकड़ लिया था. इसलिए उसकी आवाज उसके मुंह में ही घुट के रह गई.

अब मैं जोर – जोर से धक्के लगाने लगा. थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा. मेरे हर धक्के के साथ उसकी सिसकारियां बढ़ने लगीं. वो लगातार ‘ओह्ह आह हम्म हां, चोदो मुझे और चोदो, फाड़ दो मेरी चूत को और बना लो मुझे अपनी लौड़ी’ के अलावा और भी पता नहीं क्या – क्या बोल रही थी. अब मेरे धक्कों की रफ्तार भी बढ़ने लगी थी. करीब 20 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए. मेरा सारा माल उसकी चूत में ही छूट गया.

फिर थोड़ी देर बाद हमने एक बार और चुदाई की और उसके बाद मैं अपने घर चला आया. उस दिन के बाद हमें जब भी मौका मिलता हम इसी तरह मिलते हैं और सुनैना जम कर मुझसे चुदती है.

दोस्तों, आप को मेरी यह कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताएं. अपनी अगली कहानी में मैं आप सब को बताऊंगा कि सुनैना मेरे बच्चे की मां बनी या नहीं. मेरी ईमेल आईडी – [email protected]

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