ड्राइंग टीचर ने गांड फाड़ दी

एक बार बरसात के मौसम में मैं अपने ड्राइंग टीचर के यहां क्लास करने गई थी. उस दिन और कोई नहीं आया था. इस कहानी में मैं आप सब को बताऊंगी कि किस तरह मेरे टीचर ने पहली बार मेरी गांड का उद्घाटन किया…

मेरा नाम नेहा (बदला हुआ) है और यह मेरी सच्ची कहानी है. जो बड़ी ही सेक्सी है लेकिन उतनी ही दर्दनाक भी है. मैं क्लास टेंथ में थी. एक दिन जोर की बारिश हो रही थी. दोस्तों, हमारे ड्रॉइंग टीचर हरीश बड़े ही चालू किस्म के थे. वो साला ‘दिखी लड़की की दूर हुई कड़की’ टाइप का इंसान था.

मुझे चुदने की आदत आठवीं क्लास से ही लग गई थी. मेरे मां के मुंह बोले भाई ने मेरी चूत का ढक्कन खोल दिया था. ये तो मैंने आप लोगों को बताया ही नहीं था. उस बारिश वाले दिन ड्रॉइंग क्लास के लिए सिर्फ मैं ही आयी थी.

मैंने दरवाजा बंद देखा तो यूं ही धकेल कर खोल दिया. फिर मेरे सामने जो पिक्चर आयी उसे देख मेरे छक्के छूट गए. हरीश सर पूरे नंगे थे और उनका आठ इंची लंड उनके हाथ में था. यही नहीं सामने कामवाली बाई रेखा अपने कपड़े उतार रही थी.

रेखा साली देखने में बड़ी मस्त थी. नजर हटी दुर्घटना घटी टाइप की लड़की! उसकी उम्र पच्चीस – छब्बीस, गांड छत्तीस, गोले अड़तीस और कमर अठ्ठाइस की थी.

वो साली हरीश सर को दिखा – दिखा कर अपने कपड़े खोल रही थी. पहले तो साली ने अपना ब्लाउज खोला. उसके मम्मे देख कर मैं हैरान हो गई. क्या मस्त मम्मे थे साली के! दोनों निप्पल तन कर जैसे तोप बने हुए थे.

बस फिर क्या था रेखा मादरचोद के उस रूप को देख कर मेरी चुनमुनिया भी पनिया गई थी. अब उसे भी लंड का धक्का चाहिए था. यही नहीं मेरी गांड भी साली परपरा रही थी.

अब मैं दरवाजा खोल कर भड़ाक से अंदर घुस गई. दरवाजा खुलने की आवाज सुन कर हरीश मेरी तरफ देखने लगा था और रेखा अपनी चूत एक हाथ से छुपाते हुए दूसरे हाथ से मम्मों को ढक रही थी.

घुसते ही पहले तो मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया और फिर गालियां देते हुए रेखा की तरफ बढ़ी. तभी हरीश बीच में आ गया. उसका साढ़े सात इंच का लंड उछल – कूद मचा रहा था. उसका तन्नाया हुआ लंड ऊपर – नीचे नाच रहा था.

यह देख गालियां देते हुए भी मुझे हंसी आ रही थी. उनके डर का फायदा उठाते हुए मैंने रेखा की चूत पर से उसका हाथ हटाया और बोला – मादरचोद, साली अकेली – अकेली चूत में लंड लेती है, क्या हम मर गए क्या मां की लौड़ी?

रेखा को पहले तो कुछ भी समझ नहीं आया लेकिन फिर जैसे ही मेरे लफ्ज उसकी समझ में आए वैसे ही वो आत्म विभोर होते हुए बोली – हाय, क्या तुम भी? तुमने तो डरा ही दिया था. हां रे मेरी चोदू, इस लंड पर मेरा ही नहीं तेरा भी अधिकार है और ये मैं भी जानती हूं. इसीलिए तो मैंने और हरीश सर ने मिल कर तुम्हें चोदने का ऐसा प्लान बनाया है.

फिर तो जैसे वहां गालियों की बरसात होने लगी. फिर थोड़ा रुक कर रेखा ने कहा – मेरी मादर चोद रंडी कितना डराया मुझे? ऐसे लगा जैसे मेरे जिस्म से जान ही निकल गई है.

तब मैंने कहा – साली रंडी चुदना भी चाहती है और डरती भी है ?

इस पर रेखा ने कहा – अरे क्या करूं? साली चूत में खुजली हो रही थी और मेरे हबी का लंड केवल साढ़े तीन इंच का है. एक दिन हरीश का लंड देखा तो मेरे मुंह में पानी आ गया.

यह सुनते ही हरीश ने रेखा पकड़ लिया और कहा – तो मादरचोद छुड़वा ना अपना पानी इस लंड से! इतना कहते ही हरीश अपना लंड रेखा की चूत पर रगड़ने लगा.

तब रेखा बोली – आह आह मर जाऊंगी तुम्हारे इस लंबे लंड से! धीरे – धीरे पेलना जानू.

तभी हरीश ने कहा – एक बात कहूं रेखा जान, लड़की को पहले धीरे – धीरे पेलना और फिर जंगली (वाइल्ड) चुदाई करना मेरा शगल है. हरीश की यह बात रेखा की समझ में नहीं आई तो उसने कहा – कैसे?

हरीश बोला – अभी तो मैं तेरे चुत को सिर्फ लंड से सहला रहा हूं क्योंकि तेरी चूत अभी पनियाई नहीं है. चूत पनियाने के बाद फिर जब मेरे लंड से धक्के पड़ेंगे तो तू फिर से अपनी मां की चूत में घुस जाएगी.

रेखा बोली – आय हाय, बोल तो ऐसे रहे हो जैसे मेरी चूत का भुरता बनाने वाले हो!

हरीश बोला – हां मेरी जान, देखना चाहती हो? हरीश के इस सवाल पर रेखा बोले उससे पहले ही मैं बोल पड़ी – हां, देखना चाहती हूँ. मेरी बात सुन कर हरीश ने रेखा से कहा – चल अब तैयार हो जा मेरी रानी. छिनाल देख अब कैसे मैं आज इसके और तेरे छेदों का भुरता बनता हूँ.

इसके बाद हरीश ने रेखा की चूत में अपना लंड पेल दिया. रेखा चिहुंक उठी. अब हरीश धक्के देने लगा. हरीश के धक्कों की स्पीड लगातार बढ़ती जा रही थी. उसने करीब 10 मिनट तक रेखा की चूत चोदी. इस चुदाई से रेखा की बैंड बज गई. मेरे खयाल से इस दौरान वो दो बार झड़ी थी.

दूसरी तरफ मैं खड़े – खड़े उनकी चुदाई देख रही थी. सिर्फ देख ही नहीं बल्कि अब तक मैंने अपने सारे कपड़े बभी उतार दिए थे. अब मैं अपनी चूत और मम्मों को भी मसल रही थी. इसी बीच हरीश ने अपना लंड बाहर निकाला और मेरी तरफ देखते हुए बोला – मां की लौड़ी अब लंड कौन चूसेगा तेरी मम्मी?

उसकी बात सुनते ही मैं लपकी और रेखा के चूत रस और वीर्य से भीगे हरीश के लंड को मुंह में भर लिया. मुझे उसका टेस्ट अजीब सा लगा. लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था. इस दौरान हरीश ने मेरे मम्मों पर हाथ रखा और उन्हें मसलने लगा. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

अब रेखा पीछे से हरीश के बदन को सहला रही थी. थोड़ी देर बाद हरीश का लंड फिर से खड़ा हो गया. अब लंड चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. कुछ देर बाद हरीश ने अपना लंड मेरे मुंह से बाहर निकाला और कहा – चल मादरचोद, अब तेरी फाड़ता हूँ.

अब तक मेरी चूत पूरी तरह अपने काम रस से भीग गई थी. मैं सोच रही थी कि हरीश आज मेरी चूत फडेगा लेकिन ये क्या, उसने कहा – चल रंडी उल्टी हो जा. यह सुन कर मैं चौंक गई. फिर जब समझ आया तो कहा – पहले तेल तो लगा साले नहीं तो गांड फट जायेगी.

इस पर उसने कहा – अब तेरी थूक से लंड गीला हो ही गया फिर तेल की क्या जरूरत?

मैंने कहा – तेरा सुपाड़ा बहुत बड़ा है मादरचोद? गांड फाड़ डालेगा मेरी.

लेकिन उसने मेरी एक न सुनी और लंड सेट करने के बाद बोला – ले मादरचोद मेरा लंड तेरी गांड में गया. इतना कह कर उसने एक जोरदार धक्का लगाया और उसका लंड मेरी गांड में घुस गया. इससे मेरी चीख निकल गई और मैं बोली – हाय फाड़ डाला रे मेरी गांड को साले भड़वे की चूत के लंड धीरे – धीरे मार ना गांड? 

अब धीरे – धीरे हरीश मेरी गांड में धक्के लगाने लगा. कुछ देर बाद उसका लंड मेरी गांड में एक दम फिट हो गया. अब मुझे मज़ा आ रहा था.दूसरी तरफ रेखा मेरे बगल में लेट कर मेरे मम्मों को मसल रही थी.

हरीश लगातार मेरी गांड में धक्के लगाता रहा. करीब 10 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद उसने मेरी गांड में ही अपना पानी छोड़ दिया. इसके बाद वह मेरे ऊपर गिर गया. अब मैं भी थक चुकी थी. इस वजह से लेती रही. थोड़ी देर बाद मैं उठी और रेखा के साथ बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया और वापस घर चली आई. उस दिन के बाद हरीश अक्सर मुझे चोदने लगा.

कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं.

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