एक पल की भूल

दोस्तों! अकेलापन इस दुनिया की सबसे बड़ी सजा है. जिन्होंने ये सजा भुगती होगी वो मुझसे इत्तेफाक रखेंगे. ऐसे ही इन लम्हों में मेरे जीवन में रवि आया और उसके साथ वो पल भी आया जो मेरे लिए सुनहरी यादें थी तो उसके लिए मात्र एक भूल…..

शॉपिंग मॉल में आज जैसे ही मेरी नजर रवि पे पड़ी तो अतीत की यादें एक साथ मेरे मन-मस्तिष्क के चारों ओर घूमने लगीं. तकरीबन एक साल पहले बिताया गया रवि के साथ वो एक दिन याद करके मैं आज भी गीली हुयी जा रही थी. तभी रवि की नजर भी मुझसे मिली उसने मुझे एक कैजुअल सा हाय कहा और फिर अपनी शॉपिंग कार्ट लेकर सब्जियों वाले सेक्शन की ओर बढ़ने लगा. सच कहूँ तो मुझे बड़ा बुरा लगा. लेकिन फिर भी मैं उसके आकर्षण से बंधी उसके पीछे-पीछे चल पड़ी.

जब वो केले चुन रहा था तो मैंने टोका – रवि! तुम्हें नहीं लगता कि तुमसे ज्यादा इसकी जरूरत मुझे है.

उसने चौंकने का नाटक करते हुए लगभग जबरदस्ती मुस्कुराते हुए कहा- यहाँ केले पर्याप्त मात्रा में हैं. आपको कमी नहीं होगी मिसेज सेन!!

मैंने कहा- नाटक मत करो. तुम्हें पता है मैं क्या कहना चाह रही हूँ. तुम मेरे साथ घर चल सकते हो?

रवि- नहीं मिसेज सेन! मुझे जरा जल्दी घर जाना है. मेरी पत्नी मेरा इन्तजार कर रही होगी. इसलिए अभी के लिए बाय!! हम फिर कभी मिलते हैं.

कहकर वो चला गया और मैं वहीँ खड़ीं कुछ देर तक उसे दूर जाता हुआ देखने लगी. तबतक जब तक कि वो मेरी आखों से ओझल नहीं हो गया. घर आकर भी मेरा ध्यान उस पर से हटा नहीं. मैं अतीत की यादों में खो गयी.

मैं सरला माहेश्वरी हूँ. उम्र 35 वर्ष है और ये वास्तविक है. मेरी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं. मेरे पति सुयश एक पी डब्लू डी इंजीनयर हैं. अक्सर महीनो तक किसी न किसी प्रोजेक्ट की वजह से बाहर रहते हैं. ऐसे में समय काटना मुश्किल हो जाता था. अभी तक कोई बच्चे भी नहीं थे, न ही सास-ससुर. और समय काटने के लिए किसी जॉब को करने की मेरी कोई इक्षा भी नहीं थी. अक्सर शाम को मै थोड़ा ड्रिंक करती और सो जाती थी. रहने वाली मैं दिल्ली की थी लेकिन शादी के बाद पति के साथ लखनऊ आकर फंस गयी थी. हमारा घर काफी बड़ा था. अक्सर लोग किराए पे कमरा लेने के लिए आते रहते थे. लेकिन मैं मना कर देती.

ऐसे में सर्दियों की एक सुबह जब मैं लॉन में अपना गाउन पहन कर बैठी चाय पी रही थी कि देखा, गेट पे चौकीदार एक शख्स को अन्दर आने से मना कर रहा था. मैंने चौकीदार से कहा कि उसे अन्दर आने दे. ये रवि था. सुन्दर हैण्डसम नौजवान. किराए पे कमरे के लिए आया था. जाने क्यों उसे लौटाने का मन न हुआ. मैंने उपरी माले पे उसे एक कमरा दे दिया.

रवि सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था. इसलिए अक्सर घर पे ही होता था. धीरे-धीरे हममे बातें होने लगी. बातों से दोस्ती हुयी और शाम के एक-दो घंटे जब मैं एक पैग ड्रिंक ले रही होती तो वो एक कप चाय के साथ मेरा साथ देता. मैंने कई बार उससे एक पैग ट्राई करनी को कहा. पर हर बार उसने मन कर दिया. उसकी बातें काफी दिलचस्प होतीं थी. सच कहूँ तो अब तो मुझे सुबह से ही उस शाम वाले 1-2 घंटे का इन्तजार होता था.

एक दोपहर मैं बाथरूम में नहाने गयी हुयी थी. जब मैंने सारे कपड़े उतार लिए तो अचानक मुझे ध्यान आया कि मैं तौलिया भूल आई हूँ. इस वक़्त घर में कोई नहीं होता था तो मैं थोड़ी बेपरवाह सी नंगे ही बाथरूम से बहार निकलकर बेडरूम के ड्रावर से तौलिया निकालने के लिए बाहर आ गयी. मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि बाहर का दरवाजा भी खुला ही हुआ है और उसी वक़्त जाने कहाँ से रवि भी अन्दर आ गया था. जब हम दोनों ने एक दूसरे को देखा तो मैं उसके सामने बिलकुल नंगी खड़ीं थी. उसकी आखें मेरा दूधिया जिस्म देखकर फटी की फटी रह गयीं थीं.

जब उसे होश आया तो उसने कहा- स…सॉरी .. मिसेज सेन! मैं तो बाहर पड़ा ये लैटर देने आ गया था…सॉरी!

वो चला गया. मैं शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन साथ ही साथ मेरे बदन में एक अजीब सी सिहरन भी हो रही थी. जाने क्यों उसकी नजरों से मेरे जिस्म का देखा जाना मुझे रोमांचित कर रहा था. बाथरूम में आकर मैं शावर के नीचे नहाने लगी. इस वक़्त मेरे हाथ मुझे रवि के हाथ लग रही थे. मैं अपने उरोजों को सहला रही थी. फिर एक हाथ से उन्हें मसलने लगी और दूसरा हाथ अपने आप मेरी गुलाबी चूत की ओर बढ़ गया. उँगलियाँ चूत के अन्दर अपना खेल दिखाने लगीं. कई दिनों के बाद मैंने हस्तमैथुन द्वारा खुद को शांत किया.

उस शाम तय समय तक रवि नीचे मेरे साथ चाय पीने नहीं आया तो मैं व्यग्र हो उठी. मैं उसे मोबाइल उठा कर कैल्ल करने ही वाली थी की वो आ गया. मैंने कहा- आज काफी देर कर दी?

रवि- ह्ह…हाँ! एक चैप्टर ख़त्म कर रहा था.

उसकी बातों में लडखडाहट थी और वो मुझसे नाज्रें भी नहीं मिला पा रहा था. मैंने अपना पैग बनाया उसकी चाय उसे ऑफर की तो उसने कहा- आज मैं भी एक ड्रिंक लूँगा.

मैंने मुस्कुराते हुए उसे देखा और एक पैग बनाकर उसे दिया. उसके चेहरे के भाव देखकर लग रहा था कि उसके ये कड़वा लग रहा है. मैंने कहा- आज तुम कहीं और लग रहे हो?

उसने कोई जवाब नहीं दिया. मैंने फिर कहा- आज दोपहर में तुमने मुझे जिस अवस्था में देखा, क्या कभी अपनी गर्लफ्रेंड को भी देखा है ऐसे?

रवि- नहीं. मेरी गर्लफ्रेंड नहीं है. और किसी और को भी पहले कभी ऐसे नहीं देखा…

मैं- क्या बात कर रहे हो? इतने हैण्डसम हो और तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है? मुझे तो यकीन नहीं होता.

रवि- आप भी तो इतने खूबसूरत जिस्म ककी मालिका हैं, लेकिन फिर भी अक्सर अकेले ही रहती हैं…..

उसने झटके से कह तो दिया पर शायद उसे तुरंत से एहसास हुआ की वो कुछ गलत कह गया.

फिर उसने तुरंत कहा- सॉरी मिसेज सेन! लेकिन दोपहर वाली घटना के बाद से जाने मुझे क्या हुआ है. मेरा खुद के ऊपर नियंत्रण नहीं रहा. इसलिए शायद बोल गया.. सॉरी…. अब मुझे चलना चाहिए.

मैंने हाथ पकड़कर उसे बैठ लिया और कहा- तुमने कुछ गलत नहीं कहा. और नियंत्रण तो मेरा भी मेरी उँगलियों पे नहीं रहा था दोपहर में जब ऐसा हुआ था. इन उँगलियों ने ही फिर मेरी प्यास बुझाई थी.

मैंने अपनी उँगलियाँ दिखाते हुए उससे कहा. वो चौंक कर मेरी ओर देखने लगा. मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे अपने बेडरूम में  ले गयी. उसके सामने ही मैंने अपना सूट उतार दिया और पायजामा भी. अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में उसके सामने खड़ी थी.

मैंने कहा- चाहो तो दोपहर वाला दृश्य तुम फिर से देख सकते हो. लेकिन ये प्रयास तुम्हें खुद ही करना होगा और बदले में अपने कपड़े उतार कर इसकी कीमत भी चुकानी होगी.

अब तक रवि की या तो शर्म जा चुकी थी या वो पैग अप्पना असर दिखा रहा था. उसने अपनी कमीज और पैन्ट उतार दी और सिर्फ अंडरवियर में हो गया. उसके अंडरवियर से उसके उत्थित लंड का उभार साफ़ दिख रहा था. मैंने घुटनों के बल बैठकर उसका अंडरवियर नीचे कर दिया. और उसका लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.

वाकई ये रवि का पहला सेक्स अनुभव था क्योंकि 2 मिनट में ही वो मेरे मुँह में झड़ गया. उसका सारा प्रोटीन मेरे हलक में उतर गया. वो शर्मिंदा हो रहा था.

मैंने उसे बेड पे लिटाते हुए कहा- घबराओ नहीं! पहली-पहली बार में ऐसा हो जाता है.

फिर मैं उसके बगल में लेट गयी और उसे मेरी ब्रा और पैंटी उतारने को कहा. वो यंत्रवत मेरे आदेश मान रहा था. तभी मैंने उसे अपनी चिकनी की हुयी चूत को चूसने को कहा तो बिना किसी झीझक के मेरी चूत चुसाई करने लगा. सुयश ने भी कभी मेरी चूत को होठों से नहीं लगाया था इसलिए मेरे लिए भी ये पहला अवसर था.

हम दोनों का शरीर अब काफी गर्म हो चुका था. मैंने रवि का लंड अपने हाथों में लेकर देखा. जो अब मेरे शरीर के सबसे नर्म हिस्से में घुसने के लिए तैयार हो चुका था.

मैंने अपनी टांगों को फैला दिया और रवि के लंड को अपने गुलाबी छेद पे टिका कर उसे धक्का लगाने को कहा. एक जोरदार धक्के के साथ उसका लंड मेरी चूत में जगह बनाता हुआ घुस गया.

मैं चीख पड़ी- आआईईइ… रवि ! आहिस्ता…. काफी दिनों से ये सिकुड़ी हुयी है… आराम से.

अब रवि अपनी कमर को धीरे-धीरे आगे पीछे करने लगा. मुझे भी मजा आने लगा.  बीच-बीच में मैं उसे धक्कों की रफ्तार बढानी को कहती. काफी दिओनो के बाद मुझे स्वर्ग जैसी अनुभूति हो राही थी.

फिर व्वो समय भी आया जाब हम दोनों साथ-साथ झड़ गए.

उस रात हम साथ ही सोये लेकिन नशे की वजह से हमने रात में एक दूसरे से लिपटे होने के अतिरिक्त कुछ नहीं किया.

सुबह उठी तो रवि जा चुका था. मैं भी अपने कामों में लग गयी. दोपहर में जब रवी आया तो उसके हाथों में एक लेटर था जो उस दिन सुबह ही आया था. उसकी नौकरी लग गयी थी और वो आज ही घर छोड़ कर जाने वाला था. उस दिन के बाद हममे कोई सम्पर्क नहीं हुआ.

अचानक मोबाइल की घंटी बजी तो मैं अतीत की उस सुनहरी याद से बाहर आ गयी. लेकिन मोबाइल पे दूसरी तरफ की आवाज रवि की थी.

उसने मुझसे आज के अपने व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी और दुहराया की उस दिन जो हुआ वो एक पल की भूल थी.

अब मुझे क्या करना चाहिए इसपे मुझे आप लोगों की राय चाहिए.

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