फेसबुक पर मिली भाभी ने होटल में चुदवाया

प्रिया के चेहरे की चमक अभी से उसके उतावलेपन को बता रही थी. अब वो 34-32-34 की मखमली गोरी और भरी -पूरी मस्त जवानी, लाल ब्रा और पेन्टी में मेरे सामने थी और मैं फ्रेंची में तंम्बू बनाए हुए उसके गले और बदन को चाट रहा था. प्रिया भी मेरे लंड को पकड़ कर मेरे सीने के बाल को सहला रही थी. वो कभी जोश में आकर मेरे सीने को नोच बैठती तो कभी दांत गड़ा देती. न तो वो एक पल रुकना चाहती थी और न ही मैं…

मेरा नाम मोहित है और उम्र 25 वर्ष है. ये मेरी एक सच्ची कहानी है. चूत की प्यास तो हमें 15-16 वर्ष की उम्र से ही सता रही थी किन्तु अब हमें मौका मिला वो भी फेशबुक के जरिये.

मुझे फेशबुक पर एक लड़की मिली. जिसका नाम प्रिया है. पूरे 15 महीने तक हमारे बीच नेट और फोन पर ही चुदायी चलती रही. नंगी तस्वीरें भेजना और फिर जोश में फोन पर ही रात -रात भर चोद देना बड़ा मजेदार होता है. किन्तु अब हम असली मजा लेने की योजना बना लिये थे. इसलिए इसके लिए एक दिन हमने प्लान बना ही लिया.

प्रिया भागलपुर की रहने वाली है. वह 30 वर्ष की शादी-शुदा और एक बच्चे की मां है. पति से उसका मनमुटाव रहता है इसलिए वो अपने मायके में ही रहती है. मगर वो चिंगारी है, आधी-अधूरी चुदी हुई चिंगारी. जिसकी प्यास को मैंने चोद-चोद के ठिकाने लगा दिया.

यूं तो उसके 34-32-34 की मस्त जवानी के रग-रग से मेरी पहचान थी, लेकिन जब मैंने ठीक से देखा तो मेरा होश खो गया. जिसे मैं चिंगारी समझता था, वो जवानी की आग ओढे़ थी. लाल साड़ी में क्या लग रही थी वो! तय प्लान के अनुसार हम एक होटल गये. रूम में जाते ही हम एक-दूसरे पर टूट पड़े. चुदाई की प्यास मुझे अधिक थी या प्रिया में तय करना मुश्किल था.

हम पागल कुत्तों की तरह एक-दूसरे को नोच रहें थे. मानों ऩोच कर खा जाना हो आज. बड़ी मसक्कत से मैंने उसकी भरी जवानी को संभाला जो अभी भड़की हुई थी. उसके होठों को अपने होठों से दबाकर, उसके 34 के साइज के दोनों चूचों को दोनों हांथों से दबाने लगा. प्रिया अब भी जोश में थी और वो बुदबुदा रही थी – चोद दो मुझे, ओहह नोच लो मेरी चूचियां और फाड़ दो मेरी गांड आहह् आहह्. ”

फिर जब मैंने उसे बिस्तर पर बिठाकर कर, उसके गालों को चूमा तो वो फफक कर रो पड़ी और चुदाई की कमी का दर्द बयां करने लगी. फिर मैंने उसे पुचकारा और उसके एक चूचे को जोर से दबा दिया, तो प्रिया खिल-खिला उठी और मुझे बाहों में भर कर बिस्तर पर लोट-पोट होने लगी.

प्रिया के भरे बदन से टकराने से मेरे रोम- रोम में 1000 वोल्ट की बिजली दौड़ने लगी, और मेरा लौड़ा गर्म लोहे का रॉड बन कर प्रिया के अंग-अंग से रगड़ खा रहा था. हम दोनों तो जन्नत में थे. फिर से चुमते -चाटते हम दोनों एक दूसरे को निर्वस्त्र करने लगे.

प्रिया के चेहरे की चमक अभी से उसके उतावलेपन को बता रही थी. अब वो 34-32-34 की मखमली गोरी और भरी -पूरी मस्त जवानी, लाल ब्रा और पेन्टी में मेरे सामने थी और मैं फ्रेंची में तंम्बू बनाए हुए उसके गले और बदन को चाट रहा था. प्रिया भी मेरे लंड को पकड़ कर मेरे सीने के बाल को सहला रही थी. वो कभी जोश में आकर मेरे सीने को नोच बैठती तो कभी दांत गड़ा देती. न तो वो एक पल रुकना चाहती थी और न ही मैं.

अब प्रिया की लाल पैंटी के ऊपर से ही पानी आना लगा था. उसकी चूत ने अब तक काफी पानी छोड़ दिया था. फिर अचानक से वो मेरे लौड़े को छोड़ कर अपने चूत को पैंटी के ऊपर से ही रगड़ने लगी और झिझक कर कहने लगी अब मत तड़पाओ. अब मुझसे नहीं रूका जा रहा. पर मैं उसे तड़पा कर और जोश में लाना चाहता था. पर उसके जिद के आगे मेरी एक न चली. वो बहुत तड़प रही थी.

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया और उसके गांड के नीचे तकिया रखा, जिससे उसकी गद्देदार चूत खुलकर सामने आ गयी. मुझे उसकी भीगी पेंटी के ऊपर से उसकी गद्देदार चूत का पूर्ण दर्शन हो रहा था. मैंने चूत पर हांथ फेरा तो प्रिया तड़प उठी. फिर मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से ही एक अंगुली उसकी चूत की दरार में डाल दिया, तो प्रिया चीख कर मुझे गालियां देने लगी – साले चोद न अब अंगुली क्यों कर रहा है. उसकी इस बात ने मुझे जोश में ला दिया. मैंने एक झटके में उसकी पेंटी खींच दिया, जिससे अब उसकी चूत मेरे सामने थी.

उसके गद्देदार, पाव रोटी सी पूर्ण विकसित जवानी में मलहार गाती चूत, रस में भीगी हुई अपनी पंखुरियों को समेटे, छोटे – छोटे झांट लिये प्रिया की श्यामली चूत को देख कर मैं फुला नहीं समा रहा था. मैंने झट से अपना 6′ लम्बा और 4′ मोटा – तगड़ा लंड निकाला तो प्रिया खुशी से देखने लगी. फोटो पर तो उसने इसे बहुत बार देखा था. आज अपने सामने पाकर वो बहुत खुश थी.

फिर मैं लौड़े को हिलाते हुए चूत के मुहाने पर रख कर रगड़ने लगा, प्रिया तड़प कर तेज सांसे लेने लगी. वह कभी चादर खींचती तो, कभी होठों को दांतों से दबाती तो कभी सिसकियां लेकर कहती – चोद साले, चोद मुझे, अब मत तड़पा.

लौड़े को चूत पर रगड़ते हुए मैंने जोऱ से एक धक्का लगाया और 5′ लौड़ा सीधा उसकी चूत में पेल दिया. प्रियॉ तड़प गई और उसने झट से उठ कर मुझे जकड़ लिया. कुछ पल मैं यूं ही रुका रहा फिर धीरे – धीरे धक्के लगाने लगा. अब प्रिया भी अपनी तगड़ी गांड उठा – उठा कर मुझे अपने जवानी का मजा देने लगी.

अब गाली – गलौज के बीच उसकी दोनों चूचियां मसल – मसल कर मैं धक्कम पेल चुदाई किए जा रहा था. अचानक मैं रूका और घोड़ी बना कर प्रिया की गांड में लौड़ा पेल दिया. उसकी गांड बहुत बड़ी थी पर वह मेरे लौड़े का ज्यादा दर्द ना झेल पायी.

फिर मैंने लौड़ा उसकी चूत में पेल कर मस्ती से घोड़ी बनाकर उसे चोदा. वो मुझे अपनी जवानी का खूब मजा दे रही थी. करीब 12-14 मिनट की नॉन – स्टॉप चुदाई के बाद हम दोनों साथ में ही झड़ गये. ये एक अजीब एहसास था. हम दोनों एक – दूसरे को चूमते हुए निढ़ाल हो गये. थोड़ी देर बाद प्रिया अपनी वही पेन्टी पहन कर फ्रेस होकर अपने घर चली गयी.

इस तरह अगले दो दिनों तक वो घर से अलग – अलग बहाने बना कर आती रही और अलग – अलग होटल में हम दोनों मस्त चुदाई करते रहे. अगली कहानी का इंतजार कीजिए साथ ही मुझे अपनी राय जरूर दें.

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