गांव की भाभी को शहर में चोदा

उनकी मादक सिसकियां सुन कर मैं समझ गया था भाभी बहुत चुदक्कड़ हैं. फिर अपने पति के जाने के बाद जब पहली बार भाभी मुझसे मिलतीं तो मुस्करा देती थीं. जवाब में मैं भी मुस्कुराने लगता…

हेलो दोस्तों, मैं आपका दोस्त तरुण आज एक नई कहानी लेकर आपके सामने प्रस्तुत हुआ हूं. आशा करता हूं कि मेरी यह कहानी भी आप लोगों को पसंद आएगी. अब आपका ज्यादा समय ख़राब ना करते हुए सीधे मुद्दे पर आता हूं.

बात उन दिनों की है, जब मैं अपनी स्कूल की पढ़ाई कर रहा था और घर वालों से अलग शहर में रहता था. मेरे बाजू में मेरे गांव की ही एक भाभी भी रहने आ गईं, क्योंकि वो भी अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती थीं. उन्होंने मुझसे पूछ कर ही कमरा किराये पर लिया था. वहां मैं भी उनकी मदद कर देता था.

माफ़ करना मैं भाभी के बारे में बताना तो भूल ही गया. भाभी की उम्र लगभग 30 साल होंगी. उफ्फ उनका ध्यान करते ही लंड खड़ा होकर बाहर निकलने को तड़पने लगता है. उनकी गांड बहुत बड़ी फूली और गदराई हुई है, जिसको देख कर किसी का भी लंड सलामी देने लगे. उनके दूध देख कर ऐसा लगता है कि वो ब्लाउज और ब्रा को फाड़ कर निकलने को आतुर हैं.

भाभी अब मेरे बगल में शहर में रहती थीं और उनके पति गांव में रह कर अपनी खेती – बाड़ी करते थे. वो कभी – कभी महीने में एक – दो बार ही शहर आते थे और भाभी की चुदाई करते थे. जब वे लोग चुदाई करते तो मेरे कमरे तक आवाज आती थी. चुदाई के दौरान भाभी लगातार मादक आवाजें “उम्म्म्म अअअअअ उम्मम्मम आआआह फाड़ दो मेरी चूत को, बहुत दिनों बाद इसमें लंड गया है…” और भी ऐसे ही पता नहीं क्या – क्या बोलती रहती थीं.

उनकी मादक सिसकियां सुन कर मैं समझ गया था भाभी बहुत चुदक्कड़ हैं. फिर अपने पति के जाने के बाद जब पहली बार भाभी मुझसे मिलतीं तो मुस्करा देती थीं. जवाब में मैं भी मुस्कुराने लगता.

ऐसे ही वक्त बीतता गया. फसलों की कटाई का सीजन आ गया. इसलिए भैया यानी कि भाभी के पति बहुत दिनों से आये नहीं थे तो भाभी उदास रहने लगीं. एक दिन जब मैं बाजार जाने के लिए तैयार होकर घर से निकल रहा था तो भाभी को कुछ चाहिए तो नहीं यह पूछने के लिए उनके कमरे में चला गया. दरवाजा खुला तो सीधा अंदर घुस गया.

अंदर का नज़ारा देखते ही मेरी गांड फट गई. भाभी नंगी बेड पर बैठी थीं और अपनी चूत में उंगली डाल के उसको फाड़े डाल रही थीं. मैं स्तब्ध सा वहीं खड़ा रह गया. तभी भाभी की नजर मेरे ऊपर पड़ी और मैं घबरा वहां से वापस आकर अपने रूम में लेट गया। लेकिन नींद कहां आने वाली थी. भाभी की गुलाबी चूत बार – बार मेरी नज़रों के सामने आ रही थी. उफ्फ्फ उनकी चूत से निकलता हुआ पानी, जिसे मात्र महसूस करके ही मैं पागल सा हुआ जा रहा था.

मैं उनके खयालों में डूबा ही था कि तभी भाभी की आबाज आई, “क्या मैं अंदर आ सकती हूं?” मैंने कहा, “आइये, आपका ही तो रूम है.” फिर वो आकर मेरे पास बैठ गईं और कहने लगी कि कहीं मेरे सामने भी वही सीन न बन जाए जो तुम अभी मेरे कमरे में देख के आये हो.

यह सुन कर मैं हक्का – बक्का रह गया और भाभी से कहने लगा, “भाभी, वो सॉरी वो तो…” तभी भाभी मुझे डांटते हुए बोल पड़ीं, “चुप हो जाओ, मैं सब समझती हूं”. फिर थोड़ा रुक कर उन्होंने कहा, “मेरी चूत तो देखी ली तुमने, अब तुम्हें भी अपना लंड मुझे दिखना होगा”. फिर यह कहते हुए वो मेरे ऊपर चढ़ गईं.

दोस्तों, उस टाइम मैंने निक्कर बस पहना हुआ था. उन्होंने एक ही झटके में उसको निकाल कर फेंक दिया और मेरे लंड, जो अब तक खड़ा होकर तन गया था उसको लॉलीपॉप की तरह चाटने लगीं. वह मेरा पूरा लंड अंदर तक लेकर चूस रही थीं. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पता मेरा माल भाभी के मुंह में निकल गया. उनका पूरा मुंह मेरे माल से भर गया, जिसे पीते हुए वो मेरे लंड चाट रही थीं. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर थोड़ी देर बाद भाभी ने अपनी साड़ी उतार दी और अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी. फिर वो मुझे अपनी चूत चाटने के लिए बोलते हुए गाली देने लगीं और कहने लगीं, “मादरचोद, मुझे पता है कि तू कब से मेरी चूत चोदने की फ़िराक़ में है, रोज तू मेरे नाम की मुठ मारता है ये भी मुझे पता है, चल पहले अब मेरी चूत चाट कर गीली कर तभी चोदने का मौका मिलेगा.

फिर मैं भाभी की चूत चाटने लगा. उनकी चूत से कसैला और नमकीन सा पानी निकल रहा था, जो मुझे भी अच्छा लग रहा था. भाभी लगातार मुझे गलियां देती जा रही थीं. फिर थोड़ी देर बाद गालियां देते – देते ही उन्होंने अपना पानी मेरे मुंह में ही छोड़ दिया. जिसे चाट कर मैंने उनकी चूत साफ कर दी.

थोड़ी देर बाद भाभी फिर से गर्म होने लगीं और अब मेरा लंड भी दोबारा सलामी देना लगा था. फिर मैंने भाभी को अपनी सिंगल बेड पलंग पर लेटाया और उनके पैरों को ऊपर करके अपने कंधे पर रख लिया. इसके बाद मैंने अपना लंड भाभी की रसीली चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का मारा. भाभी चिल्ला उठीं, “आह मादरचोद! फाड़ दी मेरी चूत, हटो मेरे ऊपर से मुझे नहीं चुदना तुझसे, मेरी उंगली ही ठीक है. निकाल भोसड़ी के अपना लंड…. फाड़ दी रे बहनचोद ने मेरी प्यारी चूत…” और भी पता नहीं क्या – क्या कह रही थीं.

उनकी आवाज सुन कर पहले तो मैं ठिठका लेकिन फिर जब मुझे समझ आ गया तो मैंने एक और झटका मारा और पूरा लंड भाभी की चूत में समा गया. भाभी की आंखों में आंसू आ गए. यह देख मैं भी थोड़ा रुक गया.

फिर थोड़ी देर बाद वो खुद ही अपने चूतड़ उठाने लगीं. यह देख मैं समझ गया कि भाभी तैयार हो गई हैं. तब मैंने पूरा लंड बाहर निकाल कर फिर से अंदर डाल दिया. अब भाभी का छेद बंद नहीं हो रहा था. मैं हर बार लंड बाहर निकाल कर पूरा अंदर तक डाल देता. भाभी को भी अब खूब मज़ा आ रहा था और वह मादक आवाजें निकाल रही थीं. उनकी आवाजों से पूरा कमरा गूंज रहा था.

फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों शांत हो गए. मैंने अपना पूरा माल भाभी की चूत में निकाल दिया. फिर जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कि भाभी की गुलाबी चूत से मेरा माल रिस रहा था. इस कारण चूत के नीचे पूरा बिस्तर गीला हो गया था.

थोड़ी देर आराम करने के बाद भाभी उठीं. अब उनसे चलते नहीं बन रहा था. फिर उन्होंने किसी तरह साड़ी बंधी और मुझे किस करते हुए बोलीं, “आज से मैं तुम्हारी हूं, जब चाहो मुझे चोद सकते हो, और हां अभी चूत लेकिन अगली बार गांड की बारी.” इतना कह कर फिर वो अपने रूम चली गईं.

दोस्तों, अगली कहनी में मैं आप सब को बताऊंगा कि कैसे मैंने भाभी की गांड फाड़ी और भाभी की बहन मेरे बच्चे की मां कैसे बनीं? कहानी कैसी लगी? मेल करके बताना मत भूलिएगा. मेरी मेल आईडी – [email protected] 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *