गांव वाली भाभी की चुदास

तभी अचानक से भाभी उठ गईं और मुझसे बोली- अकेले-अकेले मज़ा ले रहे हो और मैं ये जो किराये का कमरा लेकर, तुम्हारे साथ रुकी हुई हूं, इसका क्या होगा?

हेलो दोस्तों! मेरा नाम सोनू है और मैं नागपुर में रहता हूं. मेरी उम्र 24 साल है. मेरा लण्ड खड़ा होने पर लोहे की राड की तरह हो जाता है.

दोस्तों अब मैं अपनी कहानी पर आता हूं. यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है. बात उन दिनों की है, जब मैं बारहवीं पास करके छुट्टियों में गांव गया था. गांव में मेरे चाचा-चाची रहते थे. मैं उनके घर पहुंच गया.

चार-पांच दिन तक तो सब ठीक ठाक रहा. एक दिन मैं शाम को सड़क पर घूम रहा था, तभी मुझे एक औरत दिखाई पड़ी. वह बहुत ही खूबसूरत थी. वो औरत हमारे घर की तरफ़ ही जा रही थी.

मैं उसका पीछा करने लगा. पीछा करते-करते मैं उसके घर पहुंचा तो देखा कि चाची उनके घर पर ही बैठी थीं. उन्होंने मुझे देखा और मुझे बुला लिया. फिर मेरा परिचय उन लोगों से कराने लगीं, तो मुझे पता चला कि वह दूर की मेरी भाभी लगती है. उस दिन से मेरा उनके घर आना जाना शुरू हो गया. बस यह समझिए कि मेरा सारा दिन उनके घर में ही गुजरता था.

एक दिन रोज की तरह ही मैं उनके यहां गया तो देखा कि भाभी बाथरूम से नहा कर सिर्फ टॉवेल लपेटे हुए बाहर आ गईं हैं, क्योंकि उस वक्त उनके घर में कोई भी नहीं था. तभी उनकी नज़र मुझपर पड़ी और वह वापस बाथरूम में चली गईं और बोली- सुमित तुम कब आए? तो मैंने कहा कि बस अभी-अभी आया हूँ. फिर वह पूरे कपड़े पहनकर बाथरूम से बाहर निकलीं.

जब वह बाहर निकलीं तो उनके हावभाव से ऐसा लग रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो. मैंने भी ऐसा ही नाटक किया. कुछ देर बाद भाभी चाय ले कर आ गई और टेबल पर चाय रख कर बोली- तुम कहीं पर घूमने नहीं गए! पूरी छुट्टियाँ यहीं घर में ही बिता दी. मैंने कहा- चलो न भाभी, हम सब कहीं घूमने चलते हैं. मैं जानता था कि उनके घर में कोई भी नहीं था. वह बोलीं- घर में कोई भी नहीं है. हम कल घूमने चलेगें.

मैं तो उनके साथ अकेले ही घूमना चाहता था. यह सुनकर मैं उदास हो गया. भाभी को शायद इसका अहसास हो गया था कि मैं नाखुश हूं. इसलिए कुछ देर बाद वह बोलीं- चलो अच्छा, हम दोनों ही घूमने चलते हैं.

फिर क्या था, हम निकल पड़े. सबसे पहले हम सिनेमा देखने गए. वहां ऐतराज मूवी लगी थी. हमने मूवी को पूरा एन्जॉय किया. जब भी फ़िल्म में सेक्सी सीन आता, मैं और भाभी एक दूसरे को देखने लगते थे.

मुझे यह महसूस हुआ कि भाभी के मन में कुछ न कुछ तो है. फ़िल्म खत्म होने के बाद हम लोग बाहर निकले ही थे कि बारिश शुरू हो गयी. हम लोग वहीं पर फंस गए. बारिश थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. शाम हो गई थी लेकिन बारिश अभी भी रुकी नहीं थी.

तभी भाभी के पास भैया का फ़ोन आ गया. भाभी ने बहाना बनाया कि वह अपनी सहेलियों के साथ हैं और अगर बारिश नहीं रुकी तो कल सुबह घर आयेंगी. भैया से इतना कहने के बाद भाभी मेरी तरफ देखकर हंसने लगीं.

अब मुझे ये समझते देर न लगी कि भाभी के मन में क्या चल रहा है. फिर हम दोनों ने किराये पर एक कमरा ले लिया. भाभी मुझसे बोली- तुम्हें मेरे साथ एक कमरे में सोने में कोई ऐतराज़ तो नहीं. मैं बोला- नहीं भाभी, कैसी बात करती हैं, मुझे भला क्या ऐतराज होगा. इस पर वह बोली तो ठीक है, जो खाना हो आर्डर कर दो, रात बहुत हो गयी है. हमें सोना भी है क्योंकि सुबह जल्दी घर पहुंचना है. हम दोनों ने साथ खाना खाया और भाभी सो गईं या सोने का नाटक करने लगीं.

सोते समय उन्होंने अपनी साड़ी घुटनों से ऊपर कर रखी थी और टांगें खोल रखी थी. यह देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया. दोस्तों भाभी के बारे में मैं आपको बताना ही भूल गया था. भाभी को देखकर अभी भी ऐसा लगता है जैसे उनकी अभी भी शादी नहीं हुई हो. उनका फिगर 36 26 38 का था और वह बहुत सेक्सी लग रही थीं.

जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैं उनको देखकर वहीं मुठ मारने लगा. तभी अचानक से भाभी उठ गईं और मुझसे बोली- अकेले-अकेले मज़ा ले रहे हो और मैं ये जो किराये का कमरा लेकर, तुम्हारे साथ रुकी हुई हूं, इसका क्या होगा?

मैंने भाभी से कहा- भाभी, मैं कुछ समझा नही. भाभी ने कहा- जब से मेरी शादी हुई है, मेरी वासना की आग अभी तक सिर्फ एक बार बुझी है और वो भी मेरे भाई ने बुझाई है. ये जो मेरा बच्चा है, वह भी मेरे भाई का ही है. मेरे पति का लण्ड तो खड़ा ही नहीं होता और किसी तरह खड़ा भी होता है तो झड़ता ही नहीं. वह तो सिर्फ नाम के ही मेरे पति हैं.

इतने कहते-कहते भाभी मुझसे चिपक कर रोने लगीं और कहने लगी- मैं अपनी आग को शान्त करना चाहती हूं. तुम जब मेरे घर आ रहे थे, तभी मैंने तुम्हें देख लिया था और मैंने नहाने का बहाना किया. जबकि मैं कब का नहा चुकी थी. मैंने यह सब प्लान बनाया और इत्तेफ़ाक से आज बारिश भी हो गयी. वह फ़िर कहने लगी की अब बाकी बातें बाद में करेंगे पहले अपने काम को अंजाम देते हैं.

भाभी ने मुझे बेड पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ कर मुझे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी पूरी नंगी हो गयी. भाभी मेरे ऊपर चढ़कर मेरा लण्ड सहलाने लगीं. फिर वह 69 की पोजीशन में लेट गईं और मेरा लन्ड अपने मुंह में लेकर घुटी आवाज में कहने लगीं- बुझा दो मेरी आग, एक साल से लगी आग आज बुझा दो. मैं भी जोश में आ गया और उन्हें बेतहाशा चूमने लगा. आधे घन्टे तक हम चूमा-चाटी करते रहे और फ़िर मैं झड़ गया.

भाभी बोली- जब तक मैं तुम्हें दोबारा तैयार करती हूं, तब तक तुम मेरी चूत का पानी अपने मुंह से निकालो. मैंने अपने जीभ से चूत चाटकर भाभी का पानी निकाल दिया. तब तक मेरा लण्ड फिर से तैयार हो चुका था. अब भाभी ने मुझसे कहा- सोनू! आहहहहह अब मुझसे सहा नहीं जाता, प्लीज अब मुझे चोद दो.

मैंने भाभी को पीठ के बल लिटाया और उनकी दोनों टांगें फ़ैलाकर, अपना लन्ड उनकी चूत पे रगड़ने लगा. तभी भाभी ने फिर कहा कि अब बर्दाशत नहीं होता, अब चोद दो, नहीं तो मैं मर जाऊंगी. मैंने एक जोर का झटका लगाया और पूरा लन्ड भाभी की चूत में डाल दिया.

भाभी को बड़े लण्ड की आदत नहीं थी. लन्ड उनकी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया. भाभी के मुंह से चीख निकल गयी और वह रोने लगी. मैंने पूछा तो भाभी कहने लगी- कुछ नहीं, तुम चोदते रहो. मैंने भाभी को करीब आधे घन्टे तक चोदा और फिर हम दोनों एक साथ ही झड़ गये. उस दिन मैंने भाभी की गांड भी मारी और पूरी छुट्टियों में जब भी मौका मिलता भाभी को जरूर चोदता.

अब जब भी छुट्टी होती है, तब मैं भाभी के पास जरूर जाता हूं. भाभी भी हमेशा बेसब्री से मेरा इन्तजार करती रहती हैं.

तो दोस्तों कैसी लगी आपको मेरी यह कहानी. मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी[email protected] है.

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