जी बी रोड की रंडीबाजी

चूत और लंड के खेल को खेलने के लिए मुझे कोठों की पनाह सबसे अच्छी लगती थी. न कोई रिश्तों का बंधन न ही चुदाई के पहले और बाद वाली मिन्नतें. हर बार चूत बदल सकने की छूट मिलती सो अलग. मेरी सेक्स की सारी ट्रेनिंग तो इन कोठों पे ही हुयी है. इन्ही कुछ पल की मुलाकातों वाली कई दस्तानों में से एक ………….

दोस्तों! मैं अनुराग, पंजाब का रहने वाला हूँ। ये कहानी तब की है जब मैं 24 साल का था। एक बार मैं अपने तीन दोस्तों के साथ दिल्ली घूमने गया था. हम तीनों की चुदास जगी तो हमारा जी.बी.रोड जाने का प्लान बना।

आप सब तो जानते ही हैं कि जी.बी. रोड दिल्ली का का रेड लाइट एरिया है। हम तीनों में से मैंने पहले भी कई बार अलग-अलग चूत चोद रखी थी पर ब।की दोनो के लिए ये पहली बार था। हमने रेलवे सटेशन से वहाँ का आटो किया। उसने हमें एक कोठे पे ले जाके छोड दिया। हम थोड़ा डरते-डरते कोठे के अन्दर गए। जैसे ही अन्दर पहुंचे तो वहाँ का माहौल देखते रह गए। सारी लडकियाँ एक से बढ़ कर एक। ज्यादातर लड़कियाँ नेपाली थी. बिल्कुल दूध जैसी गोरी। किसी ने साड़ी पहनी हुई थी तो किसी ने स्कर्ट। बहुत ही चुदास माहौल था।

सब अपने-अपने ग्राहक ढूंढ रही थीं। मुझे वहां एक साइड में लड़की दिखी। उसने काले रंग की सारी पहन रखी थी। मैंने उसका नाम पूछा तो उसने आपना नाम माया बताया।

उससे मैने पूछा – चलेगी क्या?

उसने कहा- चल! लेकिन 300 रुपए लगेंगे.

मैंने उसको रुपए दिए और उसके कहे अनुसार उसका कमरे में इंतज़ार करने लग गया। कमरा बहुत ही छोटा था। उसमे एक चारपाई बिछी हुयी थी और एक छोटा सा टेबल फैन चल रहा था। अब माया कमरे में आई। अब जरा  मैं उसके फिगर के बारे में आपको बता दूँ। उसकी उम्र कुछ 26-27 के करीब होगी। उस नेपालन का रंग बिलकुल गोरा था. उसके मम्मे 36 की साइज के होंगे. कमर 28 की और गांड भी 36 की। वो बला की खूबसूरत थी।

जैसे ही वो कमरे में आई मैंने उसे 100 रुपए और दे दिए और कहा – सब आराम- आराम से करियो जल्दी न करियो!

माया ने कहा- आराम से ही चोदेगा क्या? जोर से नहीं मारेगा क्या मेरी चूत? अब चल जल्दी आ मेरे पास।

और वो चारपाई पे लेट गई। मैने उसकी साड़ी निकाल दी. अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। मैंने उसके मम्मे दबाने शुरू किये। चाहे वो जितने से चुद चुकी हो लेकिन उसके मम्मे अभी भी बहुत सख्त थे. मेरी उसके मम्मों के प्रति बढती बेकरारी देखकर, अब उसने अपना ब्लाउज ऊपर कर दिया और उसके गोल- गोल गोरे-गोरे दूधिया मम्मे आज़ाद हो गए। मैंने उसके मम्मे को अब बड़ी बेदर्दी के साथ दबाना शुरू कर दिया. तो उसने मझे धीरे दबाने को कहा पर मैने उसकी एक न सुनी और तब तक उसे खूब जोर से दबाता रहा जब तक उस रंडी के मम्मे लाल नहीं हो गए। अब मैंने उसके एक मम्मे मुँह में ले लिया और जोर से काट दिया। उसकी सिसकारी निकल गयी- अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…

अब मैं उसके एक मम्मे को चूस रहा था और दूसरा दबा रहा था। बड़ा ही मीठा स्वाद आ रहा था उसके मम्मो में से। अब मैंने अपना एक हाथ उसके पेटीकोट के अंदर डाला तो पता चला, उसने अन्दर पैंटी नही पहनी हुई थी और मेरा हाथ सीधा उसकी चूत पे गया। बड़ी ही मुलायम कोमल चूत थी उसकी। अब मैं अपने हाथ की उँगलियों से उसकी चूत रगड़ने लगा।

माया ने कहा- जल्दी से कपड़े निकाल! मेरे पास इतना टाइम नहीं है।

मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए. बस अंडरवियर पहना हुआ था. मैंने उससे कहा- ये तू निकाल।

उसने अंडरवियर को निकाल दिया और कंडोम का पैकेट खोलनी लगी। मैने माया को कहा- पहले मेरा लौड़ा चूस.

उसने मना कर दिया। मैंने 100 रुपए निकाल के उसके पेटीकोट में डाल दिए और कहा- अब तो चूस ले।

उसने फिर मेरा लंड पकड़ा और अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। क्या चूस रही थी? मैंने उसके बाल को पकड़ा और उसके मुँह को चोदने लगा। अब मैंने उसके पेटीकोट भी उतार दिया । मेरा लंड भी अब तक काफी कड़क हो चुका था. उसने मेरे सख्त लंड पे कॉन्डोम चढ़ाया और अपनी दोनों टाँगे खोल के लेट गई। उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था और बिलकुल गोरी थी। ऐसा लग रहा था मानो कभी उसपे झांट आई ही नहीं हो?

मैंने उसे कहा- लौड़े के ऊपर चढ़कर बैठ जा!

उसने कहा – मैं थकी हुई हूँ ।

मैंने भी सोच लिया आज जल्दी नहीं झड़ना है। अब उसने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत पे सेट किया। एक ही झटके में पूरा लंड अंदर चला गया. अब मैं उसे जोर- जोर से चोदने लगा। एक हाथ से मैं उसके मम्मे को दबा रहा था और दूसरे हाथ को उसे चूतडों पे ले जाके उसकी गांड दबा रहा था। जैसे जैसे मुझे जोश चढ़ रहा था वैसे-वैसे मैं अपनी स्पीड बढ़ा रहा था। माया जैसी रंडी को भी इस चुदाई में मजा आ रहा था और उसकी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह निकलने लगी.
मैं उसे बीच –बीच में गाली भी बके जा रहा था – साली! बहन की लौड़ी! अपनी चूत टाइट कर. आज तेरी चूत की चटनी बनाऊंगा।
माया भी खूब चुदक्कड़ थी, बोली- आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्… अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्.. साले हरामी! तू दिखा आज तेरे लौड़े में कितना ज़ोर है। चोद मुझे! और तेज़ चोद. डाल अंदर तक अपना लौड़ा. ले करली अपनी चूत को और टाइट, भड़वे!
मैं माया की की गालियाँ और बातें सुन के और उत्साहित हो गया और उसे और तेज़ चोदने लगा. उसकी गांड पे ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ मारने लगा। उसकी गांड पे मारने के बाद जो पटाक की आवाज आती थी, उससे बहुत मज़ा आता था.
माया चिल्लाई- हरामी मेरी गांड छोड़। लाल कर दी साले तूने,और जल्दी कर.
पर मेरा कहाँ अभी होने वाला था मैंने तो सोच रखा था कि आज इसकी चूत अच्छे से चोद के जाऊँगा. अब मैंने उसे कहा की मेरे ऊपर आ वरना ऐसे मेरा नहीं निकलने वाला। माया ना-नुकर करने लगी तो मैंने एक और 100 का नोट उसे दिया और कहा- चल चढ़ जा बहन की लौड़ी! मेरे लंड के ऊपर।

माया अब मेरे लंड के ऊपर आ गयी और अपनी गांड हिला हिला के ऊपर नीचे होने लगी। क्या मस्त एहसास था। जब मेरा वीर्य निकलने वाला हुआ तो मैंने उसके मम्मों को जोर से दबाने लगा और फिर अपना वीर्य छोड़ दिया। उसने मेरा कंडोम उतार के फेक दिया और अपने कपड़े पहने।

नीचे उतरा तो बाकी दोनों दोस्त पहले से ही इन्तजार कर रहे थे. हम पैदल ही वहां से निकल पड़े, रास्ते में अपनी चुदाई की दास्तान साझा करते हुए. उन दोनों की दास्तान फिर कभी सुनाऊंगा.

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