जनरल डिब्बे में मिली लड़की रूम में चुदी

कब उसने मेरे कपड़े उतार दिए मुझे पता ही नहीं चला. फिर उसने मेरा सख्त लंड मुँह में ले लिया और उसको चूसना चालू कर दिया. उसे वो पागलों की तरह चूसे जा रही थी. मेरा भी मन उसकी गर्मा-गर्म चूत चूसने का कर रहा था. फिर बड़ी मुश्किल से मैंने उसको पोजीशन बदलने के लिए तैयार किया…

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम पंकज हैं और मैं गोरखपुर से हूँ. आज मैं जो कहानी लिखने जा रहा हूँ। वह एकदम सही है. इस कहानी को पढ़ने के बाद आज आप सब तैयार हो जाएं, जो कुँवारी लडकियां हैं वो अपनी चूत में उंगली करने के लिए तैयार रहें. ऐसी भाभियां और चाचियां जो बड़े – बड़े और मोटे – मोटे लंड डकार जाती हैं और इसके बाद भी उन्हें पता नहीं चलता, आज उनको भी उंगली करे बिना नहीं रहा जायेगा और वो भी अपनी चूत में उंगली

ये कहानी कुछ दिन पहले की हैं जब मैं एग्जाम देने के लिए ट्रेन से लखनऊ जा रहा था. रिज़र्वेशन न हो पाने के कारण मैं चालू टिकट से ही जा रहा था. रात हो गई थी. तभी एक स्टेशन पर एक लड़की चढ़ी. वो लखनऊ में रहती थी. चूंकि मेरे बाजू की शीट खाली थी तो वो आ कर उस पर बैठ गयी.

मैं उस समय साइज – वाइस के बारे में कुछ ज्यादा नहीं जनता था पर वो मुझे एक मस्त माल लग रही थी. वो उसकी बड़ी – बड़ी आँखें और उसके मोटे – मोटे होंठ! क्या बताऊं! उसका रंग तो सांवला जरूर था पर उसकी बनावट ऐसी थी, जो किसी भी लड़के को आकर्षित कर सकती थी.

उसके वो चूचे, वो कमर और पीछे की तरफ उठी हुए उसके वो चूतड़ देख कर बूढ़े के भी लंड से पानी निकल आये, लेकिन नसीब तो मेरे साथ था. अब ट्रेन को चले कुछ समय हो गया था. अब तक हमारी दोस्ती हो चुकी थी. हम बात करते रहे, जिससे टाइम भी ठीक से कट रहा था.

अब हम आपस में खुल कर बात कर रहे थे और हमें इसमें कोई परेशानी नहीं हो रही थी. जब उसे नींद आने लगी तो वो अपना सर मेरे पैर पर रख कर सोने लगी, जिससे उसके चूचे मुझे साफ दिखाई देने लगे थे.

इसी वजह से मेरे लौड़े ने भी उसके सर के नीचे अपने फन को फैला रहा था. शायद उसे भी पता चल रहा था. वो अब अपने सर को अनजाने बनते हुए रगड़ने लगी. जिससे मुझे अजीब सा हो रहा था. ठीक उसी तरह जैसा आप लोगों को होता है.

अब मुझसे रहा नहीं गया तो मेरे भी हाथ भी हरकत में आ गये. अब मैं उसके हाथ को टच करके सहलाने लगा. फिर धीरे – धीरे मेरे हाथ उसके चूचों तक चला गया था. लेकिन उसकी कोई प्रतक्रिया नहीं हुई तो मैं उसके चूचे दबाता रहा.

जिससे वो एक दम तिल मिला गयी. अब हम एक – दूसरे को सहलाते हुए एक – दूसरे के लंड और चूत का मज़ा ले रहे थे लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण हम आगे नहीं बढ़ पा रहे थे.

तब तक हम अपनी मंजिल तक आ चुके थे. फिर उसने मुझसे मेरे रहने के लिए जगह पूछी तो मैंने बोल दिया कि एग्जाम देने आया हूँ और रहने के लिए होटल में रहूंगा, तो उसने मुझे अपने साथ चलने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया. वह ज्यादा जोर देने लगी. जिस पर मैं उसके साथ जाने को राजी हो गया.

उसके साथ जाने को हमने एक ऑटो किया और चल दिए. ऑटो में हमारे सिवा और कोई नहीं था तो मैं फिर से उसके चूचे दबाने लगा था और साथ में उसके होंठों का रस पान भी कर रहा था. क्या मस्त अहसास था! वो एक दम पागलों की तरह मेरे लन्ड पर हाथ रखे उसे दबा रही थी. लन्ड को दबा – दबा कर उसने मेरी हालत खराब कर दी थी.

तब तक हम उसके रूम पर आ चुके थे. अब हम उसके रूम पर गये. वहां वो अपने दोस्तों के साथ रहती थी. उसकी बाकी की सहेलियां अपने घर गई हुई थी. वो तो जाते ही बेड पर अपनी आँखे बंद कर के लेट गई. यह देख मैं समझ गया कि रास्ता पूरी तरह से साफ़ है.

फिर मैं भी देर न करते हुए भी उसके ऊपर लेट गया और उसकी टी-शर्ट में हाथ डाल कर उसके बूब्स हाथ में लेकर उन्हें मसलने लग गया. इससे वो सिसकारियाँ भरने लग गई. अब उसने मुझे अपनी बाहों में कस के पकड़ लिया था. इस वजह से उसके सख्त स्तन मुझे चुभने लगे थे.

कसम खा कर कहता हूँ कि इतने सख्त स्तन मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार देखे थे उसके और चूचूक तो इतने गुलाबी थे कि पूछो हु मत! मैंने जैसे ही उन्हें मुंह में लेकर चूसना शुरू किया. वो पागलों की तरह मुझे चूमने लग गई.

कब उसने मेरे कपड़े उतार दिए मुझे पता ही नहीं चला. फिर उसने मेरा सख्त लंड मुँह में ले लिया और उसको चूसना चालू कर दिया. उसे वो पागलों की तरह चूसे जा रही थी. मेरा भी मन उसकी गर्मा-गर्म चूत चूसने का कर रहा था. फिर बड़ी मुश्किल से मैंने उसको पोजीशन बदलने के लिए तैयार किया.

अब हम 69 की पोजीशन में जी जान लगा के चुसाई कर रहे थे. उसकी चूत का रस निकलने के बाद मैंने जैसे ही मुँह में लिया, वैसे ही तुरन्त वो अपनी चूत को मेरे लंड के पास ले आई और मेरा तना हुआ गर्मा-गर्म लंड अपनी चूत के मुँह पर लगा लिया. जब मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत में घुसाना चाहा तो उसकी चूत इतनी कसी हुई कि लंड छिलने जैसा हो गया और वो तड़पने लगी.

फिर मैंने भी एक झटका तेजी से मार दिया. इससे लंड का आगे का भाग उसके बुर में घुस गया. उसके साथ मुझे भी काफी दर्द हुआ. अब मैंने देर न करते हुए अगले एक झटके में पूरा लौड़ा उसकी चूत की गहराई में उतारता चला गया.

उसको दर्द हुआ फिर वो शांति से चुदाई का मज़ा लेने लगी थी. जब उसे मज़ा आने लगा तो वो लगातार “और जोर से, और जोर से, और जोर से” बोले जा रही थी. फिर हमने पोजीशन बदली और मैंने उसको घोड़ी बना दिया. क्या बताऊं दोस्तों कि घोड़ी बना कर चुदाई करने में कितना मज़ा आता हैं. फिर मैंने उसको खूब दिल लगा के चोदा. अब हम पसीने से तर हो चुके थे.

इस बीच मैंने महसूस किया कि वो मेरे लंड को पकड़ के अपनी गांड में डालने की कोशिश कर रही थी. तो मैंने उसकी मदद की और जोर – जोर से धक्के मारना शुरू कर दिया. अब वो हाथ लगाकर मेरे लंड को एक बार आगे चूत में डाल रही थी तो एक बार पीछे गांड के छेद में घुसा रही थी.

ऐसा करते – करते वो दो बार झड़ चुकी थी. अब वो मुझे तृप्त लग रही थी. फिर हमने साथ – साथ फ़व्वारे के नीचे जाकर स्नान किया और उसके बाद हमने एक बार और चुदाई की. और फिर मैं वहां से अपने एग्जाम सेंटर को चला गया.

एग्जाम देने के बाद फिर वापस आकर मैं उसके पास गया और हमने फिर चुदाई की. अब शाम हो चुकी थी और मुझे वापस आना था तो वो मुझे वापस स्टेशन तक छोड़ने आई और फिर हम कभी नहीं मिले.

तो मेरे प्रिय पाठकों आप अपने विचार और प्रतक्रिया हमें मेल करके जरूर बताएं. हम आप के मेल का इन्तजार करेंगे. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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