घर पे ही हो गया चूत का मंथन

मैने भी वक़्त ना गवाते हुए थोड़ा और आगे की तरफ सरका. मेरा लंड अब विभा के चूतड़ो के बीचो-बीच सटा हुआ था. विभा ने अब एक कदम आगे आगे बढ़ाते हुए ज़मीन से उठ कर मेरे लंड पर बैठने की कोशिश की. मैने भी साथ देते हुए उसको अपने लंड पर पायजामे के ऊपर से ही सेट कर लिया……

दोस्तों मैं श्याम हूँ. उम्र 20 साल है और दिल्ली का रहने वाला हूँ. दिखने में एवरेज हूँ और अपने लंड और अपनी तारीफ़ ना करके मैं आप को एंटरटेन करने में विश्वाश करता हूँ. अन्तर्वासना की कहानियाँ तकरीबन 2 सालों से पढ़ता आ रहा हूँ. बहुत वक़्त से मेरी भी ये ख्वाइश थी कि अपने जीवन की कुछ दिलचस्प घटनाओं को लिखूं.

मेरी कहानी उसी उम्र से शुरू होती है जिस उम्र में अपने और दूसरे के गुप्त अंगो को जानने की जिज्ञासा सबसे ज़्यादा होती है. उस वक़्त मुझे हिन्दी अख़बारों में आने वाली अर्धनग्न हीरोइनों ख़ासकर हॉलीवुड हीरोइनों की तस्वीरों को काटकर रखने का बड़ा शौक था. फिर मस्त-राम की कहानियाँ पढ़ कर और इन तस्वीरों को देख कर मुठ मारने का मज़ा भी अलग ही था.

स्कूल में समर वेकेशन चल रही थी और मैं अपने पेरेंट्स के नौकरी पे जाने के बाद पूरा दिन अकेले घर में नंगी सुंदरियों की तस्वीरों के साथ अपनी कामाग्नी को हाथ से शांत करता.
एक दिन बाद पापा के एक फ़्रेंड की बेटी कुछ दिन हमारे यहाँ रहने के लिए आई. उसका नाम विभा था. उसके पेरेंट्स को किसी काम से शहर से बाहर जाना था. मम्मी-पापा डेली नसीहत देकर जाते कि उसका पूरा ध्यान रखना और पढ़ाई में हेल्प भी करना.

वो मुझसे 1 साल छोटी थी. दिखने में एक आम लड़की की तरह ही थी. और उम्र के हिसाब से उसके चूचे भी संतरे के जैसे ही थे. लेकिन उसका मासूम चेहरा और भरा शरीर किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने के लिए काफ़ी था. बाकी मेरे मन में भी उसके लिए कुछ ग़लत सोच नही थी. लेकिन मेरे लिए मेरी आज़ादी में वो खलल ज़रूर ही थी. इसलिए मैं हमेशा उस से चिढ़ कर बात करता.

उस वक़्त हम किराए के मकान,  जो कि 1 बड़े बेडरूम वाला था, में रहते थे. किसी एक एक्सट्रा पर्सन के लिए फोल्डिंग बिछाना ज़रूरी था. सो विभा के लिए भी फोल्डिंग बिछाया गया और उसकी दिशा कुछ ऐसी थी कि बेड पर सोए हुए मेरा मुह फोल्डिंग पर सोए बंदे के कमर की तरफ होता.

4-5 दिन ऐसे ही बेखयाली में बीते. एक रात को मुझे अपने हथेली पर किसी का हाथ रेंगता महसूस हुआ. मेरी नींद खुल गई. मैने कोई हरकत नही की. मुझे अंदाज़ा हो चला था कि वो विभा ही थी. लेकिन मैं जानना चाहता था कि आगे क्या होने वाला है. उसने अपने नाख़ून मेरी एक उंगली के नाख़ून के अंदर चुभाने की कोशिश की. शायद ये जानने के लिए कि मैं रिएक्ट करता हूँ कि नहीं. मैं ऐसे ही बेसुध लेटा रहा.

कोई हरकत ना होने पर उसने अपनी उंगलियाँ कुछ देर मेरे लिप्स पर फेरी. उसकी वो नाज़ुक उंगलियों को चूमने का मन कर रहा था. लेकिन मैं उसको किसी भी तरह का शक़ नही होने देना चाहता था. उसने फिर मेरा हाथ खींच कर अपनी जाँघो पर रख दिया. उसने नाइट सूट के नाम पर एक फ्राक ही पहनी हुई थी. मैं उसकी तेज़ चलती सांसो को महसूस कर सकता था. मैने अपने हाथ को उसकी जाँघो से हटाने की कोशिश नही की.

मैं जानना चाहता था कि वो किस हद तक जाना चाहती है. उसने 1-2 मिनट के बाद सरकाते हुए हाथ की एक उंगली उठा कर अपनी चूत में घुसा दी. जो की पूरी गीली हो चुकी थी. पहली बार किसी की चूत में उंगली घुसाने का अनुभव अच्छा नही लगा मुझे. उसने मेरी वही गीली उंगली मेरे होंठो पे लगा कर मुझे अपना पानी चखवाया. एक अजीब सी गंध के साथ वो नमकीन पानी. मुझे घिन आ रही थी कि कोई कैसे उस जगह से निकले पानी को चख सकता है जहाँ से कोई सू-सू करता है. उसने दोबारा कोशिश की मेरी उंगली को अपनी चूत में घुसाने की लेकिन मैं उस काम रस से अंजान था. इसलिए नींद में करवट के बहाने खुद को उस से छुड़ा लिया.

इस से पता चलता है कि पढ़ी हुई और करी हुई चीज़ो में कितना फ़र्क होता है. उस रात मस्तराम की कहानियाँ मेरे कुछ काम ना आई.

सुबह नींद तो वक़्त पर खुल गई लेकिन चादर तान के खड़े लंड के बैठने का वेट कर रहा था. उस कच्ची नींद में फिर एहसास हुआ कि किसी का हाथ मेरी चादर के अंदर था. और मेरे पायजामे को टटोल रहा था. ये विभा थी जो फोल्डिंग से उठ कर बेड पर आ चुकी थी और मुझे अभी भी सोता हुआ समझ कर मेरे लंड को सहला रही थी. इस अचानक से हुए हमले में मुझे करेंट सा लगा, और लंड वापस खड़ा हो गया. विभा ने भी मुझे जगा हुआ समझकर अपना हाथ पीछे सरका लिया.

पापा मम्मी जा चुके थे. मैं भी मौका देखकर बिस्तर से उठ गया. विभा अभी भी बेड पर सोई हुई थी, घर का दरवाज़ा भी अंदर से बंद था. और विभा नहाकर कपड़े भी चेंज कर चुकी थी. शायद सोने का नाटक कर रही थी. फ्रेश होकर मैं वापस रूम में आया तो देखा विभा मेरी पर्सनल स्केचबुक उठा कर बैठी है. बेबी पिंक कलर की शॉर्ट स्कर्ट और वाइट टॉप में विभा बहुत प्यारी लग रही थी.

विभा: ये तुमने बनाए हैं?

मैं अभी भी सपनो में ही था.

विभा: श्याम !

मैं: हां. क्या हुआ?

विभा: ये स्केचेज तुमने बनाए हैं?

मैं: हां. मेरी हॉबी है.

विभा: मुझे भी स्केच करना सीखना है. क्या तुम मुझे सिख़ाओगे?

मैं हमेशा की तरह उस से चिढ़ कर बोला : तुम छोटी बच्ची नही हो जो तुम्हे हाथ पकड़ कर सिखाऊँ.

विभा ने एक नशीली सी मुस्कान के साथ कहा: मैं भी तो वही कह रही हूँ. ये ऐसे ही थोड़े सिखाई जा सकती है. मैं पेन्सिल पकड़ लूँगी. तुम मेरे हाथ को अपने हाथ से डायरेक्शन दे देना.

मैने भी मौका ना गवाते हुए थोड़ा सा नाटक करते हुए हां बोल दी. विभा जल्दी से पेपर पेन्सिल और मेरी स्केचबुक सामने रख कर एक आज्ञाकारी शिष्या की तरह बैठ गई. मैं उसके बगल में बैठ गया. उसके गीले बालों की महक मुझे पागल कर रही थी. मैं उसका हाथ पकड़ कर पेपर पर स्केच बनाना सिखाने लगा. लेकिन ऐसे बैठे हुए मैं ठीक ढंग से ड्रॉ नही कर पा रहा था. और वो भी ये बात समझ रही थी.

तो वो खुद बोली- तुम अपने दोनो पैर खोल कर बैठ जाओ. मैं बीच में बैठ जाती हूँ. तुम्हे भी परेशानी नही होगी बैठने में.

सोचने में ज़रूर असहज थी ये बात लेकिन प्रॅक्टिकली वो सही थी. इसलिए मैने भी अपनी दोनो पैर खोल लिए और वो बीच में आकर बैठ गई. अब उसकी पीठ मेरे सीने के बिल्कुल करीब थी और एक मायने में मैं उसके पीछे से हग करके बैठा हुआ था. मैं ज़रूर कुछ दूरी बनाना की कोशिश में था, लेकिन उसको शायद ये अच्छा लग रहा था इसलिए वो छोटे से बच्चे की तरह मेरे पैरो के बीच बैठी थी, जैसे की गोदी में बैठी हो.

उसको समझाते हुए मेरी गरम साँसें उसको गर्दन पर फील हो रही थी. इसलिए उसकी भी साँसें तेज़ होने लगी. मैं भी कब तक अपने ऊपर कंट्रोल करता. मेरा लंड पायजामे में अकड़ने लगा था और वो उभार विभा को अपने पिछवाड़े पे फील होने लगा था. वो आगे ना जाकर पीछे मेरे लॅंड से सटने लगी. मुझे भी अच्छा लग रहा था.

मैने भी वक़्त ना गवाते हुए थोड़ा और आगे की तरफ सरका. मेरा लंड अब विभा के चूतड़ो के बीचो-बीच सटा हुआ था. विभा ने अब एक कदम आगे आगे बढ़ाते हुए ज़मीन से उठ कर मेरे लंड पर बैठने की कोशिश की. मैने भी साथ देते हुए उसको अपने लंड पर पायजामे के ऊपर से ही सेट कर लिया. हम अभी भी स्केच करने में ही लगे हुए थे. लेकिन ध्यान हमारा कहीं और ही था.

मैने अपने एक हाथ से विभा के हाथ को पकड़ा हुआ था. दूसरा हाथ मैने स्केचबुक से हटा कर विभा की नंगी जाँघ पर रख दिया. और धीरे धीरे सहलाने लगा. उसको अच्छा लगने लगा था. साथ ही मैं नीचे से अपने लंड को उसके गांड पे रगड़ भी रहा था. हम दोनो ही उत्तेजना की चरम सीमा पर थे. विभा ने अब अपना हाथ ढीला छोड़ दिया और उसके हाथ से पेन्सिल गिर गई.

मैने पूछा – क्या हुआ?

विभा ने कोई जवाब नही दिया. लेकिन उसने एक कदम आगे बढ़ते हुए पायजामे के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और बोली- छोड़ो न ये लुकाछिपी. अब डायरेक्ट एक्शन में आ जाओ.

मैं भी तब तक काफी गर्म हो चुका था. मैंने अपने होंठ उसके होठों से चिपका दिए. एक हाथ से मैं उसके बूब्स टटोल रहा था दूसरा हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर सरका रहा था.

फिर विभा ने कहा- बिस्तर पे चलो न.

मैंने उसे अपनी गॉड में उठा लिया और बेड पे लिटा दिया. विभा नी खुद अपनी टॉप उतार दी. ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी इसलिए उसके गोल चूचे यूँ नंगे देखकर मैं उन पर टूट पड़ा. उन्हें अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

विभा ने सीसीयाते हुए कहा- उफ्फ्फ….सीईएईईई… आह.. श्याम अब और मत तरसाओ. मेरी चूत को तुम्हारे लंड की जरूरत है.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपने लंड को उसके हाथों में दे दिया.

मैंने पूछा- कभी किसी लंड को हाथ में लिया है?

उसने कहा- जानू! इतनी भोली नहीं हूँ मैं. मैंने तो अपनी चूत में भी लिया है.

मैंने मन में सोचा की मैं तो यूँ ही समय गवां रहा था. अब तक तो इसको कई बार चोद चुका होता. खैर आगे मिले समय को मैं पूरा उपयोग में लाना चाहता था. मैंने उसकी स्कर्ट खींच दी और उसकी चूत पे अपना लौड़ा घिसने लगा.

विभा की चूत पूरी तरह से गीली होकर पानी छोड़ रही थी. उसने खुद से मेरे लंड को अपनी चूत के मुँह पे लगाया और मेरे चूतडों को अपने एक हाथ से अपनी ओर धक्का देने लगी. ये साफ़ इशारा था कि वो अब लंड को अपनी चूत में लेने को तड़प रही है.

मैंने भी देर न करते हुए एक करारा धक्का उसकी चूत में दिया. फक की आवाज के साथ लंड सरसराता हुआ उसकी चूत में घुस चुका था. विभा के मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी. मैंने लंड को पीछे करके फिर एक धक्का लगाया. इस बार उसकी चीख निकल गयी. फिर मैं हौले-हौले अपने लंड को उसकी पनियाई चूत में पेलने लगा.

हम दोनों ही सिस्कारियां भर रहे थे.

उफ्फ्फ….  आह्ह्ह…. इस्स्स्स… की आवाजें हमें और उत्साहित कर रही थीं. अचानक विभा अकड़ने लगी. उसकी चूत में कसाव बढ़ गया और गर्महात भी. नतीजा ये हुआ कि हां दोनों साथ में ही झड़ गए.

उस दिन के बाद से हर दिन जब तक विभा मेरे घर पे रही, लंड और चूत के मिलन का ये खेल चलता रहा.

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