इस प्यार को क्या नाम दूं भाग – 2

वरुण और अंश एक रेस्टोरेंट में मिलते हैं. उनके बीच आपस में कई तरह की बातें होतीं हैं. इसी बीच वरुण एक झूठ बोल जाता है, जिसे सुन कर अंश को संतोष होता है कि वरुण अकेला नहीं है…

इस कहानी का पिछला भाग – इस प्यार को क्या नाम दूं भाग – 1

अब आगे…

थोड़ी देर बाद टेबल पर कोल्ड ड्रिंक और खाना आता है. अंश पिछले 6 घंटों से ट्रेन में सफर कर रहा था इसलिए उसे जोर की भूख लगी थी. फिर वो तसल्ली से खाना खाने लगा. साथ में वह वरुण को देख रहा था. फिर जैसे ही अंश का खाना खत्म हुआ वो वरुण से बोला – वरुण, क्या हुआ? तुमने तो कुछ खाया ही नहीं.

फिर वह हंसते हुए बोला – और मुझे देखो, खाना दिखा तो मैं टूट पड़ा ये भी नहीं देखा कि तुम खा रहे हो या नहीं. वैसे क्या हुआ वरुण कुछ परेशान से लग रहे हो?

वरुण – अरे नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. सुबह ब्रेकफास्ट कर लिया था, इसलिए कुछ खाने को इच्छा नहीं हुई. तुम्हारे लिए कुछ और मंगवाऊं?

अंश – नहीं, बस इतना काफी है.

थोड़ी देर बाद अंश अपना फ़ोन देखने लगा. तभी वरुण ने कहा – कितने बजे की ट्रेन है तुम्हारी?

अंश – क्यों दोस्त, भेजने की जल्दी है क्या?

वरुण – अरे नहीं, कैसी बात करते हो? बस यूं ही पूछा.

अंश – अभी वक्त है, शायद 1 बजे की है.

तभी अंश का फ़ोन बजा. नम्बर देख कर अंश थोड़ा झेंप गया. यह वरुण समझ गया कि अंश के बॉयफ्रेंड का फ़ोन है और वह उसके सामने बात करने में कतरा रहा है. इसलिए वरुण हाथ धोने के बहाने वहां से उठ गया.

जब वरुण वापस आया तो उसे लगा कि अंश को ये जानकर अच्छा नहीं लगेगा कि वह अभी सिंगल है. फिर वरुण ने टेबल के नीचे फ़ोन करके उसे साइलेंट में किया और फिर फ़ोन आने का बहाना करके उसे कान में लगाकर अपने बॉयफ्रेंड से बात करने का दिखावा करने लगा.

उस पूरी फेक कॉल के दौरान अंश अपने फ़ोन में कुछ करता रहा. फिर उसके फ़ोन नीचे रखते ही दोनों की नज़रें मिलीं और उन्होंने स्माइल पास कर दी.

फिर अंश ने कहा – बॉयफ्रेंड?

तो वरुण शरमाते हुए बोला – हां, बॉयफ्रेंड ही है.

अंश (खुश होते हुए) : वाह क्या बात है! फाइनली हमारे मिस्टर लोनली भी रिलेशनशिप में आ ही गए. खैर, ये जानकर मैं खुश हूँ।

तब वरुण एक फेक मुस्कान के साथ बोला – थैंक्यू, अब क्या है न पूरे दिन ये पूछना कि खाना खाया या नहीं, दवाई ली या नहीं ये सब तो रिलेशनशिप में जैसे सबसे जरूरी हो गया है. अगर एकमिनट की भी अपडेट न दो तो समझ लो कि एक लम्बा – चौड़ा मुद्दा खड़ा हो जाता है. फिर एक्सप्लेनेशन देने के लिए तैयार रहो.

इसी बात पर दोनों हंस पड़े. वरुण को अपनी झूठा स्टेटस दिखाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था. उसे लगा था जैसे अंश के चेहरे पर थोड़ी तो शिकन आएगी, जब उसे पता चलेगा कि मैं रिलेशनशिप में हूँ. लेकिन ये क्या अंश तो खुश दिख रहा था.

वरुण उम्मीद कर रहा था कि जितना प्यार वो अंश से करता है, उस प्यार की परछाई, उन जज्बातों का आईना उसे अंश के रवैये में दिखे. लेकिन अंश तो जैसे अंश था ही नहीं. ये टीस वरुण के दिल तक चुभी. पर वो कुछ कर भी तो नहीं सकता था.

वहीं दूसरी तरफ अंश को इस बात का सुकून है कि वरुण जिसके भी साथ है पर खुश तो है. अंश का वरुण से मिलना सिर्फ ट्रेन इंटरचेंज की वजह से नहीं था. इसका एक खास मकसद भी था. वह मकसद अब उसे पूरा होता दिख रहा है.

वरुण ने अपनी इस मुलाकात के बारे में इस तरह नहीं सोचा था. हालांकि वह संतुष्ट नहीं था. लेकिन फिर भी जो भी था वो अंश से मिल कर खुश था.

अब वरुण ने अपना फोन देखा तो साढ़े 11 बज चुके थे. एक बार तो उसके मन में आया कि काश ये पल यहीं रुक जाए. वरुण इसी पल में पूरी ज़िंदगी जी लेना चाहता था.

हर बार की तरह इस बार भी वरुण खुद को रोक नहीं पाया और अंश से कह बैठा – अंश, तुम इतने दिनों बाद मुझसे मिले हो, क्या हम कुछ देर के लिए बाहर चलें? यहीं कुछ दूर पर एक बोट क्लब है.

अंश – पर वरुण..

अंश पूरी बात कह पाता उससे पहले ही वरुण बोल पड़ता है – प्लीज, मना मत करना, जाने फिर मुलाकात हो न हो. तुम समझ रहे हो न अंश. प्लीज चलो.

अब अंश ने बिल्कुल भी विरोध नहीं किया. एक स्माइल दी और फिर वरुण के साथ चल दिया. कुछ ही देर मेब वे दोनों एक शांत सी झील में बोट पर बैठे थे. अंश को यह अहसास बहुत अच्छा लग रहा था. उसे एक दोस्त की जरूरत थी और उसकी वो जरूरत भी अब पूरी होती दिख रही थी.

पिछले 4 सालों में पहली बार अब अंश को वरुण अच्छा लगने लगा था. हंसी और खिलखिलाहट तो कॉमेडी सीरियल्स देख कर भी आ जाती है पर ये मुस्कुराहट जो वरुण के चेहरे पर कई अरसे से गायब हो चली थी आज वह बहुत दिनों बाद वापस दिखी थी. आज अंश भी वरुण के साथ कंफर्टेबल फील कर रहा था. अंश वरुण की ओर देख कर मुस्कुरा रहा था. आज उसे वरुण के चेहरे पर अपनापन दिख रहा था.

तभी अंश का ध्या टूटा. इसी बीच अचानक एक दूसरी वोट उनके पास से गुजर गई. उस बोट पर बैठे कुछ युवा लोग मस्ती करते और झील का पानी उछाल रहे थे. जिसमें से कुछ छींटें अंश के के चेहरे पर आ गिरीं थीं.

वरुण से ये बर्दाश्त नहीं हुआ और वह वहीं पर उन लोंगों को रोक कर उनसे झगड़ा करने लगा. इस पर किसी तरह अंश ने जल्दी से मामला रफा – दफा करवाया और वरुण को शांत होने के लिए कहा. इस पर वरुण शांत हुआ और

फिर उसने अपनी जेब से रुमाल निकाली और उससे वरुण के चेहरे को साफ किया. फिर उसे वापस पॉकेट में रख लिया. ये सब अंश को बहुत अच्छा लग रहा था. वह मुस्कुरा कर वरुण की तरफ देख रहा था. लेकिन वरुण तो अपने में ही खोया हुआ था और अपनी ही धुन में मस्त था.

इस कहानी का अगला भाग – इस प्यार को क्या नाम दूं भाग – 3

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