इस प्यार को क्या नाम दूं भाग -1

रात के 1 बजे हैं. वरुण अभी भी अपने छज्जे पर टहल रहा है. उसे अगली सुबह बेसब्री से इंतजार गई. लेकिन ये रात कटने का नाम ही नहीं ले रही है. कल पूरे 4 साल बाद वो अंश से मिलने वाला है. इससे पहले सिर्फ फ़ोन पर ही बात होती थी…

वरुण जानता है कि न जाने कितनी बार उसने अपने प्यार का इज़हार किया. हर बार अलग – अलग तरीके से. हर बार उसकी कोशिश रहती थी कि जो कुछ भी हो उसके दिल में सब अंश को बता दिया जाए.

वरुण अंश के सामने एक दम खुली किताब के जैसे बन चुका है. सब कुछ तो जानता है अंश वरुण के बारे में. अब ये उस पर है कि वह वरुण के प्यार को किस तरह ले. एक समय वो भी था जब वरुण का नाम सुनते ही अंश को झुंझलाहट सी होने लगती थी. प्यार का नाम सुनते ही वो खीझ उठता था. वह वरुण का चेहरा तक देखना पसन्द नहीं करता था.

पिछली बार जब होली पर वरुण ने सब क्लियर कर दिया था. उसने ये भी बता दिया था कि उसके मन में ऐसा – वैसा कुछ नहीं है. अब वो सिर्फ उसका दोस्त बन कर रहना चाहता है.

ज़ुबान पर तो दोनों के ही दोस्ती है. पर अंदर कि अंदर दोनों इस बात से वाकिफ हैं कि ये दोस्ती है ही नहीं. दोस्ती भला ऐसी होती है!

2011 का अगस्त का महीना था जब वरुण अंश से पहली दफा फ़ेसबुक के जरिए मिला था. जिसका वरुण ने कभी चेहरा तक नहीं देखा था, तस्वीर में भी नहीं. उससे इतनी मोहब्बत हो जाना कोई आसान नहीं था. लेकिन ये कोई ऐसा काम भी तो नहीं था जिसमें आसान या मुश्किल देखी जाए. मोहब्बत चीज ही ऐसी है जो बादशाह को भी घुटनों पर ला देती है.

उस वक्त तो वरुण की जैसे ज़िंदगी ही खत्म हो गई थी, जब उसे यकीन हो चला था कि अंश के दिल में उसके लिए ज़रा सी भी मोहब्बत नहीं बची है. अंश को अब एक बहुत ही चाहने वाला लड़का मिला था. अंश पूरी तरह से बदल चुका था. यही बात वरुण को रह – रह कर सताती थी.

खैर, 3 साल की एकतरफा प्यार की आग में जलने के बाद दुनिया नज़र में वरुण और अंश अच्छे दोस्त हैं. लगभग 1 साल से चली आ रही इस दोस्ती के रिश्ते में दोनों यही समझते हैं कि पहले जो कुछ था वो सिर्फ एक सपना था. उन दोनों के लिए अब इस रिश्ते का मतलब बहुत बदल चुका था.

खैर, अब अंश वरुण का दोस्त है और कल पहली बार दिल्ली किसी काम के सिलसिले में आ रहा है.

अगली सुभ ठीक 10:30 बजे वरुण रेलवे स्टेशन के पास बने रेस्टोरेंट पर पहुंच गया. अंश ने वहीं उससे मिलने के लिए कहा था. वास्तव में अंश को दिल्ली में कोई काम नहीं था. उसे तो दिल्ली से होते हुए अपने घर उज्जैन जाना था. ट्रेन की टाइमिंग ऐसी थी कि उसे दिल्ली स्टेशन पर 3 घंटे गुजारने ही पड़ने थे. इस उसने सोचा कि क्यों न पहली बार वरुण से भी मिल लिया जाए.

जो भी हो. वरुण उस दिन बहुत खुश था. कारण वो पहली बार अंश से मिलने वाला था. उस दिन उसके मन में बहुत सी बातें चल रही थीं. जैसे – नाश कैसा दिखता होगा, उसकी हाइट कितनी होगी, उसका रंग कैसा होगा और भी न जाने क्या – क्या?

फ़ेसबुक पर वरुण हमेशा अपनी फ़ोटो एडिट करके लगाता था. इस लिए उस दिन उसके दिमाग में ये भी चल रहा था कि कहीं उस दिन वरुण ने उसे पहचाना ही नहीं तो! वहां बैठे – बैठे कभी वह टेबल के सामने लगे शीशे में खुद को देखता तो कभी अपने कपड़ों को. वह कभी अपने बैठने के तरीके को बदलता तो कभी अपने बाल सही करने लगता.

आज उसने अपने नाखून भी कुछ ज्यादा ही गहराई तक काट लिए थे. इस वजह से अभी तक उसकी उंगलियों की नोक में दर्द हो रहा था. खुशी और चिंता के सारे भाव वरुण के चेहरे पर और उसकी बॉडी लैंग्वेज से साफ समझ आ रहे थे.

आंख बंद करके अभी वरुण ने अपने मन को शांत करना ही चाहा था कि अचानक एक हाथ उसे उसके कंधे पर महसूस हुआ. साथ ही एक आवाज आई, “वरुण…” आवाज सुनते ही वरुण अचानक से पीछे मुड़ा. एक दुबला – पतला लड़का उसके सामने खड़ा था. उसकी आवाज में थोड़ा बदलाव जरूर था लेकिन फिर भी वरुण को ये समझते देर न लगी कि यह लड़का अंश ही है.

उसे देख कर वो अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया. वास्तव में वरुण एक दम से सकपका सा गया था. न तो उसके मुंह से कुछ निकल रहा था और न ही उसे समझ आ रहा था कि वह कैसा रिएक्शन दे. वह सब कुछ भूल सा गया था.

तभी सामने वाला लड़का बोला – वरुण, क्या हुआ? मैं अंश हूँ, तुम्हारा दोस्त अंश…

अब वरुण को जैसे होश आया और वह बोला – ओह्ह हां, अंश कैसे हो तुम?

फिर अंश सामने वाली सीट पर बैठते हुए बोला – क्या हुआ? कहाँ खो गए थे तुम? क्या मैं तुम्हारी कल्पनाओं जैसा नहीं हूँ?

तब वरुण बोला – नहीं, वो बात नहीं है, वो तो बस ऐसे ही.

जब अंश ने वरुण के कंधे पर हाथ रखा तो वरुण के लिए जैसे वो पल ठहर सा गया था. एक वक्त था जब वरुण अंश से बात तक नहीं करना चाहता था. वरुण सोचता था कि पता नहीं अंश से इस जन्म में मुलाकात होगी भी या नहीं. लेकिन आज अंश उसके सामने बैठा है. उसके इतना करीब.

यह सब देख कर वरुण का दिल पसीज गया. वरुण की आंखों से आंसू से छलक पड़े. लेकिन उसने बार – बार पलकों को झपका कर अपने आंसू आखों में ही समेट लिया था. उस दिन वरुण को पक्का यकीन हो गया था कि प्यार में कुछ शक्ति तो है.

वरुण के लिए बेशक यह रिश्ता केवल दोस्ती भर का नहीं था जो अंश उससे उम्मीद रखता था. लेकिन फिर भी वरुण खुश था. वरुण की खुशी का कारण था कि अंश अपने बॉयफ्रेंड के साथ है और खुश है. इससे ज्यादा और उसे चाहिए भी क्या! उसने तो हमेशा हो अंश की खुशी चाही है.

इस कहानी का अगला भाग – इस प्यार को क्या नाम दूं भाग – 2

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