जलती चूत, सुलगता लंड!

चूत और लंड का रिश्ता (+ )और (-) की तरह होता है. संपर्क में आये नहीं कि….. घर्षण चालू. ….. और फिर एक हो जाते हैं. महक भाभी और मेरे बीच का रिश्ता भी कुछ-कुछ इसी तरह का है. इस रिश्ते के बनने की कहानी है ये………

हेलो दोस्तों मैं मोहसिन!  नासिक- महाराष्ट्र से आपकी खिदमत में  मेरी एक सच्ची कहानी लेकर हाजिर हुआ हूँ. यह कहानी मेरे और मेरे पड़ोस मैं रहने वाली महक भाभी की है. जो बिलकुल मेरे बगल वाले घर में ही रहती है.

पहले मैं अपने बारे मैं बता दूं. मेरा कद 5’ 10” है और बॉडी वेल मेन्टेन है. मेरे लन्ड का आकार 6” है. अब कहानी पर आते हैं. यह कहानी लगभग 2 साल पुरानी है. महक भाभी अक्सर मुझे देखा करती थी. मगर मैंने कभी उन पर ध्यान नहीं दिया. लेकिन कभी- कभी जब मैं उसकी तरफ देखता तो वो नजरें चुरा कर चली जाती थी.

फिर एक दिन मुझे वो अकेले में दिखी तो मैं ने उसे वही पर पकड़ लिया और कहा- भाभी आप मुझे ऐसे क्यू देखती हो?

तो उसने कहा- क्यों? आप को अच्छा नहीं लगता, मेरा आपको ऐसे देखना!!

मैने कहा- नहीं ऐसी बात नहीं है. आप तो हैं ही इतनी सुन्दर. भला आपको कौन देखना नहीं चाहेगा? मगर डर लगता है कि किसी ने हमें देख लिया तो?

वो कहने लगी- मोहसिन! मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ. तुम्हे देखे बिना रह नहीं पाती.

मैं- इतना प्यार करती हो मुझसे?

भाभी- हाँ मोहसिन। और तुम नहीं करते न?

मैं- नहीं भाभी ऐसा नहीं कि नहीं करता. तुम तो बनी ही हो प्यार करने के लिये. भला कौन आपको प्यार नहीं करेगा?

मैने झट से अपना मोबाइल नंबर उसे दिया और उसे फ़ोन करने को कहा. शाम में महक भाभी का फोन आया।

महक-  कैसे हो मोहसिन?
में- अच्छा हूँ भाभी.
महक- बहुत टाइम लगा लिया, हमसे बात करने के लिए.
मै- डर लगता था भाभी! मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है?
महक- क्यू? मैं तुम्हे खा जाने वाली थी क्या?
मै- औरतो का कुछ समझ नहीं आता है. कब उनको प्यार है तो कब नहीं है.
महक- तो भी एक बार बात करके देख लेते.
मै – आप भी तो कर सकती थी न? फिर क्यू नहीं की बात आपने?
महक –  मैं कैसे तुम्हे क्या बोलूँ?
मै- हाँ! यह भी सही बात है. चलो देर सही! दुरूस्त आये. फिर कब मिलने का इरादा है?
महक- बहुत जल्दी! दो दिन बाद हमारे रिश्तेदार के यहाँ शादी है. हम सब वहाँ जाने वाले है.
मै- तो क्या तुम भी जार ही हो?

महक- नहीं अब नहीं जाउंगी. कुछ भी बहाना बता कर रुक जाती हूँ.

मै – ओके! यह ठीक रहेगा. तो दो दिन बाद मिलते हैं तुम्हारे घर.
महक- ओके पक्का!!

और फिर दो दिन बाद जैसे ही महक भाभी के घर वाले चले गए, तब महक का फोन आया कि रास्ता साफ है जल्दी आ जाओ. मैं भी उस दिन ऑफिस से छुट्टी ले रखा था. मै झट से घर पहुँच गया. जाते ही महक भाभी ने दरवाज़ा खोला. मैं उनसे लिपट गया.

उन्होंने कहा- अरे! अरे! रुको ज़रा. मै कहाँ भागी जा रही हूँ. यह तन-मन सब तुम्हारा है जानू!

महक भाभी ने पहले मुझे पलंग पर बैठने को कहा और फिर मेरे लिया चाय नाश्ता लेकर आई. हमने चाय नाश्ता साथ- साथ ही किया फिर बाद में मै  भाभी को धीरे धीरे अपने पास खीचने लगा और चूमने लगा. पहले उनके गालो को चूमा और फिर धीरे से चूमते हुए उनकी गुलाब की पंखुड़ी जैसे होठों को चूमने लगा.

अब भाभी गरम होने लगी थी और वो भी मेरा साथ देने लगी. मैं चूमते-चूमते भाभी के बोबे मसलने लगा और भाभी के मुह से कामुक आवाज़े निकल रही थी. आहहह.. हाहाआआःह्ह्. मैं भी पुरे जोश में भाभी के बोबे दबाये जा रहा था और देखते ही देखते हम कब नंगे हो गए कुछ पता ही नहीं चला. जैसे ही मैंने भाभी की पैंटी उतारी उनकी सफाचट चिकनी चूत देखता ही रह गया. बिलकुल एक पपीते जैसे. जिसे मानो मेरे सामने किसी ने उसे काट कर रखा हो.

मै सरकता हुआ सीधा उनकी चूत को चूसने लगा. (दोस्तों! मैं एक बात बता दूं कि मै चूत बहुत अच्छी तरह चूसता हूँ. कई लडकियाँ तो ऐसे ही फारिग हो जाती हैं.) तो मै उनकी चूत चूसने में मगन हो गया और हम 69 की अवस्था में आ गये. भाभी मेरा लन्ड चूसे जा रही और मै उनकी चूत. इस चुसाई के खेल में हम दोनों एक साथ एक दूसरे के मुह में झड़ गए.

फिर थोड़ी देर रुकने के बाद भाभी फिर से मेरे लन्ड के साथ खेलने लगी और मेरा पप्पू फिर से खड़ा हो गया. अब महक भाभी कहने लगी-  अब मत तड़पाओ मोहसिन! जल्दी से तेरा लन्ड मेरी चूत में डाल दे. कब से मै इस केले को मेरे पपीते में लेने को तरस रही थी. अब संगम कर दो इन दोनों का.

मैंने भी और देर न करते हुए लन्ड का सुपाड़ा भाभी की चूत में दे मारा. जैसे ही थोडा सा लन्ड अंदर गया भाभी चीख उठी- अरे धीरे डाल ज़रा!!  तेरे भाईजान से बहुत दिनों से नहीं चुदी आराम से कर ना।

लेकिन मै कहाँ मानने वाला था? मै ज़ोरो से अपना लंड भाभी की चूत में डाल दिया. पहले भाभी को दर्द हुआ लेकिन फिर बाद में मज़ा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगी.

महक भाभी  आआह्हह्हह्ह अह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह् की मादक आवाजों में आह भरने लगी और जोश में बड़बड़ाने लगी-  फाड़ दे मेरी चूत को!

भोसड़ा बना दे इस पपीते का! बहुत दिनों से आग जल रही थी इस चूत में.

तेरे लौड़े के पानी से इस चूत की प्यास बुझा दे मोहसिन!

आआह.. अहहहः. और ज़ोर से साले चोद…….चोद.

चोदे जा बस ऐसे ही पेल दे लंड को मेरी चूत में तेरा लौड़ा.

बुझा दे जन्मों की प्यास. आज करदे पूरी मेरी हसरत।

भाभी की इस कामुक आवाज़ से मेरा जोश और बढ़ रहा था. इसी बीच भाभी भी 3 बार झड़ चुकी थी. मेरा भी पानी छूटने वाला था.

मैने कहा- भाभी कहाँ झाड़ू?

तो उसने कहा- मेरी चूत में ही छोड़ दो मुझे तेरे रस से भर दो।

फिर मै भाभी की चूत में ही अपना पूरा माल छोड़ दिया और वही पर निढाल होकर उनकी बगल में लेट गया। थोड़ी देर ऐसे ही लेटने के बाद भाभी फिरसे मेरे लन्ड के साथ खेलने लगी और मेरा पप्पू फिर से दूसरे मैच के लिए तैयार हो गया.

इस बार मैंने कहा- भाभी मुझे तुम्हारी गांड मारनी है.

तो भाभी ने बहुत ही प्यारे अंदाज़ में कहा- यह गांड क्या जानू! जो मारना है मार लो. यह सब तुम्हारा ही है.

और मैंने तेल की शीशी ली और थोडा तेल भाभी की गांड पर और थोडा सा मेरे लन्ड पर लगा लिया. अब मै भाभी के मम्मो को मसलने लगा. ताकी भाभी को मज़ा आये और जब लन्ड गांड में जाये तो भाभी को ज्यादा दर्द का अहसास ना हो. बोबे मसलते हुए मैंने लन्ड का सुपाड़ा भाभी की गाँड पर लगा कर अंदर पेल दिया.

ज्यों ही लन्ड अंदर गया भाभी तिलमिला उठी – निकालो इसे बहुत दर्द हो रहा है जानू! प्लीज् निकालो.

लेकिन मैंने बराबर अपनी चुदाई जारी रखी और धीरे- धीरे पूरा लन्ड भाभी की चूत में उतार दिया. अब भाभी को भी मज़ा आने लगा और वो आआह्ह्ह्हब्बभ आआह्ह्ह्ह्ह्ह् की आवाजें निकालने लगी. इस बार चुदाई का दौर पूरा 30 मिनट चला.

जब मेरा छूटने वाला था तो मैंने कहा – भाभी कहाँ झाडूं?

भाभी बोली- मेरे मुह में झड़ना.

मै तुम्हारा रस पीना चाहती हूँ. मैंने गांड से लन्ड निकल कर भाभी के मुह में पूरा माल निकाल डाला और भाभी ने पूरा का पूरा उसे गटक लिया. उन्होंने अच्छी तरह से चाट- चाट के मेरे लन्ड को साफ किया.

फिर हम बाथरूम में साथ साथ नहाये. वहाँ भी बाथरूम में शावर के नीचे मैंने भाभी की ख़ूब ठुकाई की. इसके बाद मै वहाँ से घर आ गया. अब भाभी को जब भी चुदने को होता है तो भाभी मुझे फ़ोन करके बुला लेती है. आज इस बात को 2 साल हो गए है लेकिन आज भी मै भाभी की चुदाई करता हूँ.

तो दोस्तों और भाभियों! मेरी यह सच्ची स्टोरी कैसी लगी आपको? मुझे ज़रूर बताना और जब भी किसी महिला को मेरी ज़रूरत लगे तो मुझे प्लीज् याद कीजियेगा.

आपका और सिर्फ आपका………मोहसिन
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