काम वाले की बेटी को घुमाने के बहाने चोदा

अब न तो मेरे पास कोई क्रीम थी और न ही कोई वैसलीन. मैंने उसके पैर को थोड़ा और फैलाया और चूत को फैलाकर लंड घुसेड़ दिया. बस लंड का टोपा ही घुसा था कि वह जोर से “साब, मार दिया आपने” चिल्ला उठी…

मैं चंदू मुंबई से हूँ. आज मैं जो आपको अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ. वो तीन साल पहले हुई चुदाई की कहानी है. यह अन्तर्वासना पर मेरी पहली कहानी है. अगर इसमें कोई भूल – चूक होती है तो क्षमा करें.

दोस्तों तीन साल पहले की बात है. जब मैंने अपनी पढ़ाई ख़त्म कर ली तो मुझे एक कंस्ट्रक्शन साइट पर जॉब मिला. मैं वहां नया – नया था और वहां मेरे दो सीनियर थे. शुरू में मुझसे कोई ठीक से बात नहीं करता था तो मैं ज्यादातर साइट पर ऑफिस के काग़जातों में बिजी रहता था.

शुरू – शुरू में ऑफिस में एक लेबर ऑफिस की साफ़-सफाई करने और पीने का पानी रखने आता था. मेरे आने के कुछ दिन बाद से उसकी जगह उसकी बेटी आने लगी. उसका नाम था वनिता और उसकी उम्र करीब 20 साल थी. मैं कभी उस पर ध्यान नहीं देता था.

वो बहुत ही ढ़ीले और अच्छे बदन ढ़ंके कपडे़ पहन कर आती थी तो मुझे कभी उसके फिगर का अंदाजा भी नहीं हो पाया और वो रही लेबर की बेटी तो ऐसा कोई दुर्विचार भी मन में नहीं आता था. वैसे भी मैं एक आंटी को पैसों के लिए हफ्ते में एक – दो बार खुश करता रहता था तो मुझमें हवस की भूख भी इतनी नहीं थी. पर वो हमेशा काम के बाद भी देर तक खड़ी रहकर मुझसे बातें करती रहती थी. समय के साथ हमारी अच्छी खासी जान – पहचान हो गई.

एक दिन उससे मैंने पूछा – कभी मुंबई घूमे हो?

तो उसने कहा – अभी तक तो नहीं बस कुछ मंदिर देखे हैं.

तो मैंने कहा – चलो कभी मैं ले चलता हूँ.

वो आने को तैयार थी पर उसे डर था कि घर वाले नहीं मानेंगें. कुछ दिनों बाद वनिता के माँ-बाप कुछ निजी काम से गांव चले गए. चूंकि साइट पर उनके और भी पहचान वाले थे तो लड़की को यही छोड़ गए थे. वो तीन चार दिन बाद आने वाले थे. तभी वनिता ने मुझे पूछा कि क्या हम कहीं घूमने चल सकते हैं? तो मैंने भी हामी भर दी और साइट से दो दिन की छुट्टी ले ली.

दूसरे दिन मैं साइट के कुछ दूर आया और उसे फोन करके बुला लिया. वह मेरे कहे अनुसार आज पंजाबी ड्रेस पहनकर आई थी. एकदम मस्त लग रही थी. आज उसका 36-30-38 का फिगर देख कर मेरे मन उसे छूने का कर रहा था और उसके बड़े – बड़े उरोज मेरा ध्यान भंग कर रहे थे.

हमने मुंबई के गेट वे ऑफ़ इंडिया और, कुछ और स्थल देखे. चलते – चलते जब कभी भी मैं उसका हांथ पकड़ता था, वह कुछ नहीं बोलती थी. उसके हांथ पकड़ने पर मेरे शरीर में एक बिजली की लहर सी दौड़ जाती थी. चलते वक्त उसके उछलते मम्मों पर मेरा ध्यान बार – बार जा रहा था और मेरे अंदर का हैवान इस नयी बला के जिस्म का स्वाद चखने को और उसके बड़े – बड़े मम्मों को चूसने को बेताब हो रहा था.

मैं अब उसे किसी भी तरह अपने आगोश में लेना चाहता था. इसलिए मैं बार – बार उसके साथ मजाक करते हुए उसे अपने करीब ला रहा था और उसके शरीर के अद्भुत स्पर्श को महसूस कर रहा था.

आखिर मैंने उससे पूछ ही लिया – कभी सेक्स किया है?

उसने शरमाते हुए कहा – नहीं.

(मैं मन ही मन सोच रहा था साली पक्का झूठ बोल रही है)

फिर मैंने उसके कान में कहा कि चलो कल फिर हम आपको सेक्स करना सिखा देते है. तो वह हंसते और शरमाते हुए ना कह रही थी और मुझे दूर ढ़केल रही थी. पर उसकी ना में भी हां छुपी थी. मैंने थोड़ी गुजारिश और किसी को ना बताने के बताना का वादा किया तो वह मान गयी.

उस रात मुझे उसके बारे में सोच – सोचकर रहा नहीं गया और फिर मैंने मुठ मार ली. अब मैं बस सुबह का इंतजार कर रहा था. अगले ही दिन मैं उसे स्टेशन पर मिला और मुंबई से दूर मेरे दोस्त के फ्लैट में ले गया. यह नया कंस्ट्रक्टेड खाली फ्लैट था और मैंने दोस्त से पहले ही बात कर ली थी. आज वो मेरी ख़रीदी हुई पंजाबी ड्रेस पहनी थी. क्या मस्त लग रही थी! बस उसके मम्मों पर से ओढ़नी हटाने की देरी थी. रास्ते में ही मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैं कभी उसके हांथ मसलता तो कभी उसे चूमता जा रहा था.

जैसे ही हम घर पंहुचें मैंने उसे बाहों में जोर से जकड़ लिया और उसे बस चूमता रहा. फिर मैं उसे चूमते हुए बेड रूम में ले गया और बेड पर उसे लेटा दिया. वो बस मेरा साथ दे रही थी और शरमाते हुए हंस रही थी. चूमते – चूमते कब मैंने उसके कपडे उतार दिए थे पता ही नहीं चला. वो अब पैंटी और ब्रा में ही थी. लेबर का काम करने की वजह से उसका शरीर सुडौल था और उसका बहुत हा बढ़िया फिगर था और वो किसी फिटनेस मॉडल से कम नहीं थी. अब मैं उसके गले से लेकर उसके मम्मों तक चूमता रहा और वो सिसकियों पे सिसकारियां लेती जा रही थी.

आह! उसका वो सांवला बदन और मोटे – मोटे मम्मे! बस उसमें से दूध निकालने के लिए मैं तरस रहा था. उन मम्मों को मै लगातार चूस – चूस कर दबा रहा था. वो मुझपर हँसे जा रही थी और जोर – जोर से सिसकियां लेकर तड़प रही थी. मैं उसके मम्मों को चूसते – चूसते अपना एक हांथ उसकी चूत पर रगड़ रहा था.

कुछ मिनट उसके मम्मे चूसने और दबाने के बाद मैं उसके सारे शरीर को अपनी जीभ से चाटने लगा. अब उसकी “आह! आह!” की आवाज पूरे रूम में गूंज रही थी. उसने अचानक मेरे बाल पकड़ लिए और खींचते हुए बोल पड़ी “छोड़ दो! छोड़ दो!” और फिर उसके बाद वह चैन की सांस ले रही थी.

मैं समझ गया कि वो झड़ चुकी है. पर मेरा अब तक उसके शरीर से खेलना पूरा नहीं हुआ था. मैं अभी भी उसके गालों और कानों के नीचे चूमे जा रहा था. मैंने उसके मम्मों को तो खूब चूसा अब बारी उसके पैरों की थी. यार क्या उसके पैर थे! किसी चाइनीज ड्रमस्टिक जैसे लग रहे थे. मन कर रहा था बस खा जाऊं उन्हें. अब मेरा लंड भी मैदान में अपनी पारी के लिए उछल रहा था.

मैंने उसके पैरो को चूमते – चूमते उसकी पैंटी को खींच लिया. मैं उसकी चूत को चूमने को बेताब था, पर साली का चूत पूरा जंगल जैसे बालों से घिरी हुई थी. मैं सोच रहा था कि एक बार उसकी चूत को चाट – चाट कर उसे झड़ने के लिए मजबूर कर दू. वैसे मैं चूसने में बहुत ही एक्सपर्ट हो चुका था. क्योंकि जिस आंटी को मैं पैसों के बदले अपनी सेवा देता था, उसने मुझे अच्छा ख़ासा चोदने का एक्सपर्ट बना दिया था.

अब चाटने को कुछ रहा नहीं. तो बस उसकी चूत पर धावा बोलना था. लंड पूरी तरह से खड़ा था और चूत भी झड़ने के कारण पूरी गीली थी. अब मैं उसके पैरों को फैलाकर उसकी चूत में मेरे कड़े लंड को डालने की कोशिश की तो फिसल रहा था. उसने बताया कि उसका सच में ये पहली बार है.

अब न तो मेरे पास कोई क्रीम थी और न ही कोई वैसलीन. मैंने उसके पैर को थोड़ा और फैलाया और चूत को फैलाकर लंड घुसेड़ दिया. बस लंड का टोपा ही घुसा था कि वह जोर से “साब, मार दिया आपने” चिल्ला उठी. मैं उसके मम्मों को दबाकर उसे शांत करने की कोशिश करने लगा और थोड़ी देर रूक कर मैंने एक और जोर का झटका मारा. अब मेरा लंड आधा अंदर जा चुका था, पर अब वो दर्द की वजह से और ज्यादा चिल्लाने लगी और बोली “साब, मुझे छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है.”

अब मैं जोश में था तो मैं थोड़ा झुका और उसे कहा “पगली बस थोड़ा और दर्द सह ले” और वो कुछ बोले इससे पहले ही मैंने उसके दोनों लिप्स को अपने लिप्स से लॉक कर लिया. अब उसकी आँखे मेरी आँखों के सामने थी और उसकी आँखों में दर्द के आंसू थे.

अब मैंने उसे जोर से जकड़ लिया और तीन चार धक्कों में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया और मैं अपनी रफ़्तार बढ़ाता गया. अब वो वापस सिसकियां लेने लगी और “आह! आह!” की आवाज और गीलेपन में झटके मारने से पूरे कमरे में पच-पच की आवाज गूंज रही थी.

अब वो गांड उठा – उठा कर मेरा भरपूर साथ दे रही थी. अब मैं जोश में उसे गाली दिए जा रहा था और बके जा रहा था.

मैं कहे जा रहा था – साली आज तेरी चूत तो मैं फाड़ दूंगा.

और वो भी कहे जा रही थी – फाड़ दो इसे, मेरे राजा, फाड़ दो इसे. अब ये चूत तुम्हारी है. और तेज धक्का दो. आह!

इसी तरह चिल्लाते – चिल्लाते कुछ देर बाद उसने मुझे जोर से जकड़ लिया और झड़ गयी. थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके शरीर पर पूरा वीर्य गिरा दिया.

अब खून से उसकी पूरी चूत सन चुकी थी. चूत पे खून धोने के कुछ देर बाद उससे मैंने अपना लंड मुंह में लेने को कहा. कुछ देर नखरे दिखाकर आखिरकार उसने मेरे लंड को मुंह ले लिया और मजे से चूसने लगी. थोड़ी देर में लंड वापस तन गया. साली क्या मस्त लंड चूस रही थी! बिलकुल किसी ब्लू फिल्म की एक्ट्रेस की तरह.

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था और मैंने फिर से चूत पर निशाना लगाकर जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी. अबकी बार मैं जैसे ही झड़ने वाला था, मैंने अपना लंड निकाल कर कुछ वीर्य उसके मुंह में और कुछ वीर्य उसके गद्देदार शरीर पर गिका दिया. फिर मैं कुछ देर तक स्थिर पड़ा रहा. अब दोनों थके हुए, निर्वस्त्र हालत में पड़े थे. उस दिन मैंने बाद में उसकी चूत की शेविंग कर खूब चूमा और चूत चुदाई की. दोस्तों, मुझे बाद में फिर कभी उसके सुन्दर से बदन को भोगने का मौका नहीं मिला.

उस दिन पता चला कि सील तोड़ कर चोदने में एक अलग ही मज़ा होता है. मैं हमेशा ही अपने आस-पास की अकेली और दुखी महिलाओं के अकेलेपन का सेवक रहा हूँ. आजतक मुंबई की कई आंटी और भाभियों को चोदा पर वो सुख निराला और जीवन के अनमोल पलो में से एक था.

आप सभी को मेरी कहानी कैसी लगी. मुझे ईमेल जरूर करें. मुझे आपके मेल का इन्तजार रहेगा.

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