कहानी मेरे पहले लेस्बियन सेक्स की

उसने हाँ कहा और फिर वो अपनी चुदवाने की कहानी सुनती गयी. उसकी गर्म कर देने वाली मस्त कहानी सुन कर मैं धीरे – धीरे गर्म हो रही थी. तभी अचानक से उसने अपना एक हाथ मेरे एक बूब्स पर रख दिया. जिससे मैं कंट्रोल नहीं कर पायी और सिसक उठी और मेरे मुंह से हल्की सी एक आह्ह निकल गई…

अन्तर्वासना के मदमस्त पाठकों और पाठिकाओं को मेरा रस भरा नमस्कार! मेरा नाम पल्लवी महंती है और मैं ओडिशा की रहने वाली हूँ. मैंने अभी – अभी बारहवीं क्लास पास की है. दोस्तों, मैं सात साल से हॉस्टल में ही रहती थी. मेरे घर में मेरे मम्मी – पापा के अलावा मेरा एक छोटा भाई था. मेरा भाई अभी नवीं क्लास में पढता था

अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं आप सब को अपने बारे में कुछ बता देना चाहती हूँ. दोस्तों, मैं दिखने में काफी सुन्दर और गोरे रंग की हूँ. मेरा 32-28-34 का फिगर देख कर सारे लड़कों के पैंट गीले हो जाते थे. बचपन से ही मुझे हॉलीवुड फ़िल्में देखने का बहत शौक था. इसलिए मैं हमेशा हॉलीवुड फिल्मों की ही बातें करती रहती थी.

हॉस्टल में लड़कियों को हफ्ते में बस एक बार ही टीवी देखने का चांस मिलता था और वो भी सिर्फ सन्डे को. इसलिए हॉस्टल लाइफ पर मुझे बहत गुस्सा आता था. वैसे जब मेरे कॉलेज के लड़के मुझे देख कर मेरे ऊपर कमेंट्स करते थे तो मुझे बहत अच्छा लगता था.

दोस्तों, सात साल पहले मैं भी एक लड़के से प्यार कर बैठी थी. वह लड़का पढ़ने वाला था लेकिन वह मस्त भी काफी था और तो और जितनी भी लड़कियां उसे देखती वो भी सारी की सारी मस्त हो जाती थीं. उससे प्यार कर बैठने के बाद मेरा हाल बेहाल था. दिन भर इधर – उधर की बातों में सारा समय निकल जाता लेकिन रात को मैं बेचारी उसके ख्याल में खो जाती और फिर अपनी प्यारी चूत को सहालती हुई सो जाती थी.

सच कहूं तो मेरी चूत चुदाई की आग में जलने लगी थी लेकिन जुगाड़ न हो पाने पर मैं अपनी चूत में कुछ देर ऊँगली कर लेती उसके बाद मेरी आग कुछ ठंडी पड़ जाती थी. फिर एक दिन मैंने सोच लिया कि अब मैं किसी न किसी से जरूर चुदूंगी.

बात उस दिन की है जब मैं अपने रूम में बैठी थी और अपना असाइनमेंट कर रही थी. बारहवीं क्लास होने के कारण मुझे बिल्कुल भी फुर्सत नहीं थी. मेरे बगल के कमरे में ही मेरी एक सहेली रहती थी जिसका नाम जूली था. उसके बूब्स लड़कों को तो अच्छे लगते ही थे साथ ही मुझे बहुत प्यारे लगते थे और वो भी हमेशा पढ़ती रहती थी. लेकिन उसकी और मेरी खूब पटती थी.

सन्डे का दिन था तो सब टीवी देखने गए थे. मैं और जूली अपने – अपने रूम में अकेली रह गए थे. आज मुझे उसके बूब्स देखने का मन कर रहा था. क्यूंकि आज उसने एक काली कलर की सलवार पहनी हुई थी जिसमे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. आज तो मेरी नजर उस पर से हट ही नहीं रही थी. मैं बेड पर लेटी हुई थी इसलिए कोशिश करने बाद भी मैं उसको ठीक से नहीं देख पा रही थी.

तभी उसने मुझे देखा और कहा – क्या बात है पल्लवी, आज कल मेरी तरफ बहुत ताक – झांक रही हो.

फिर इतना कह कर वो जोर से हंसने लगी और फिर मैं भी उसके साथ ही हंसने लगी. जब हमने हंसना बन्द किया तो फिर मैंने उससे कहा – यार, आज तो तू बड़ी मस्त लग रही है, सारे लड़के आज तुझे देखते ही रह जाएंगे.

फिर धीरे – धीरे हम दोनों में बातें होने लगी और कुछ मिनट बाद वह मुझसे बोली -ब्लू फिल्में देखती है?

तो मैंने भी मौका देख कर हाँ कह दिया. फिर वह धीरे से आ कर मेरे बेड पर बैठ गयी और फिर थोड़ी देर उसने धीरे से मुझे छुआ तो मुझे कुछ महसूस हुआ तो मैंने उसे कहा – और पास आ ना, दूर क्यों बैठी है?

तो वो आकर मेरे बेड पर मेरे साथ ही लेट गयी. अब हम दोनों लेट कर आमने – सामने आपस में बात कर रहे थे. धीरे – धीरे हमारी बातें बढ़ती गयी और अब वो भी मिरर सामने खुलने लगी थी. अब मुझे महसूस हुआ कि वो भी मेरे जैसे ही लण्ड की प्यासी है तो मैंने उससे कहा – जूली, एक बात पूछू.

तो उसने कहा – हां, बोल क्या पूछना है?

तब मैंने कहा – अच्छा ये बता तू कभी किसी से चुदी है या नहीं?

तो उसने हाँ कहा और फिर वो अपनी चुदवाने की कहानी सुनती गयी. उसकी गर्म कर देने वाली मस्त कहानी सुन कर मैं धीरे – धीरे गर्म हो रही थी. तभी अचानक से उसने अपना एक हाथ मेरे एक बूब्स पर रख दिया. जिससे मैं कंट्रोल नहीं कर पायी और सिसक उठी और मेरे मुंह से हल्की सी एक आह्ह निकल गई.

अब मेरे हाथ नीचे जाते देख उसने अपना दूसरा हाथ मेरी चूत पर रख दिया. मेरी तड़प देख कर वो समझ गयी थी कि अब मैं चुदासी हो चुकी हूँ और मुझे अब हर हाल में चुदना है. खैर, फिर उसने मेरे होठों पर अपना गर्म होंठ रख दिया और अब हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे.

उधर एक हाथ से उसने मेरा बूब्स भी दबाना स्टार्ट कर दिया था. थोड़ी देर बाद फिर वो उठ गयी और बाहर की तरफ आगे बढ़ी तो मुझे लगा कि अब शायद बाहर जाकर ये सबको जाकर बता देगी. लेकिन वह दरवाजे तक गई और रूम लॉक करके वापस आ गई और फिर से मुझसे लिपट गयी.

अब मैंने उसके बूब्स को चूसना स्टार्ट कर दिया. फिर वो बोली – अब चल तू मेरी चूत चाट और मैं तेरी चूत चाटूंगी.

इस पर मैं राजी हो गयी और मैंने तुरन्त ही उसकी सलवार को खोल दिया और साथ ही साथ मैंने उसकी पैंटी भी खींच दी. उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था. यह देख अब मैं तो एक दम मस्त हो गई और फिर उसकी चूत चाटने लगी. जिससे वो लागतार ‘आह्ह आह उफ्फ्फ’ की सिसकियाँ भरने लगी और फिर कुछ देर बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया. जिसे सारा का सारा मैं पी गयी.

फिर उसने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को चूसना स्टार्ट कर दिया. जिस वजह से अब मैं भी ‘आह आआह उफ़ उफ’ की आवाज़ें निकालने लगी और कुछ देर तक मेरी चूत चाटने के बाद उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में ड़ाल दी. जिससे मुझे बहुत दर्द हुआ. उस दर्द की वजह से मैं चिल्ला उठी. लेकिन फिर धीरे – धीरे मजा भी आने लगा.

फिर हम दोनों ऐसे ही एक – दूसरे को चूमते और एक – दूसरे की चूत को चूसते रहे और फिर उस दिन से हम मौका मिलने पर हमेशा ओरल सेक्स करने लगे.

तो दोस्तों, आपको मेरे पहले ओरल सेक्स की कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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