खड़े लण्ड को कुछ नहीं सूझता

बाहर की ठण्ड और उसकी गाँड़ की गरमी की वजह से मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था. अब उसकी गाँड़ में लंड बहुत आसानी से अंदर बाहर हो रहा था. उसे भी मज़ा आने लगा था…

हेलो दोस्तों! मेरा नाम करन है और मैं गुजरात के बड़ौदा का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र करीब 27 साल है. मैं दिखने में बहुत ही स्मार्ट लड़का हूँ और मैं एक दम गोरे रंग का हूँ. मेरी लंबाई लगभग साढ़े पाँच फ़िट है. ये मैं अपनी तारीफ में नहीं कह रहा हूँ, ऐसा लड़कियाँ कहा करती हैं.

आज मैं आपको ये जो कहानी बताने जा रहा हूँ, यह आज से करीब दो साल पहले की है. मैं बड़ौदा में रह कर नौकरी करता हूँ लेकिन मूल रूप से मैं बड़ौदा के पास एक गांव का रहने वाला हूँ. एक दिन मैं बड़ौदा से अपने गाँव जा रहा था. पास होने की वजह से मैं गांव जाने के लिये बस मैं हमेशा बस का ही प्रयोग करता था.

उस दिन जब मैं बस में बैठा था. बस चलने वाली ही थी कि तभी तीस- बत्तीस साल का एक आदमी मेरे बग़ल वाली सीट पर आकर बैठ गया. उसका पूरा ध्यान मेरी तरफ था. पहले तो मैंने उस पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया. उस समय क़रीब सात बजे थे और ठंड का मौसम था.

अब बस चल चुकी थी. बस जैसे ही चली ठंडी हवा अन्दर आने लगी. वो मुझसे चिपक कर बैठ गया. पहले उसने मेरे हांथ पर अपना हांथ रख दिया और धीरे- धीरे सहलाने लगा. मैंने कोई प्रतिरोध नहीं किया तो धीरे- धीरे वो मेरे पैर तक पहुंच गया और पैर पर हाथ फिराने लगा. ठंड की वजह से मुझे भी अच्छा लग रहा था. इसलिए मैंने भी कोई आपत्ति नहीं जतायी.

इससे उसकी हिम्मत बढ़ गयी और उसने सीधे मेरे लंड पर हाथ रख दिया. जिस वजह से मेरा लंड पूरा अकड़ गया. मैंने उसका काम आसान कर दिया. बस में अंधेरा था, उसका फ़ायदा उठाकर मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया. उसने लंड को सहलाना शुरू कर दिया. अब मेरा स्टैंड आने वाला था लेकिन उसे आगे जाना था.

मैंने उससे बोला मैं उतरने वाला हूँ अगले स्टैंड पर. इसपर वह बोला मैं भी उतर जाता हूँ. अब लंड खड़ा था तो मैंने भी हाँ कह दिया. वहीं पास में एक खेत था. मैं उसे खेत में ले गया. वो मुझसे ज़्यादा उतावला हो रहा था.

हम जैसे ही खेत में पहुंचे उसने तुरंत ही मेरा पैंट उतार दिया और मेरा सात इंच का लंड निकाल कर पूरा मुँह में ले लिया. मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था. वह बहुत अच्छे तरीके से मेरे लण्ड को चूस रहा था. ठंड के मौसम में उसके मुँह की गरमी मुझे इतनी अच्छी लग रही थी कि मन कर रहा था कि उसके मुँह से लंड निकालू ही नहीं. जब मैं अपना लण्ड उसके गले तक गुसेड़ देता, तब मुझे बहुत मज़ा आता था.

करीब 10 मिनट तक उसने मेरा लण्ड चूसा. उसके चूसने से मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल खत्म हो गया और मैंने उसके बाल छोटे- छोटे बालों को पकड़ कर जोर से खींच लिया और उसके मुंह में ही झड़ गया गया. उसने बड़े मजे से मेरा सारा वीर्य पी गया और मेरे लण्ड को चाट कर साफ कर दिया. अब मेरा लण्ड सिकुड़ गया. उसने उसे फिर से चूस- चूस कर खड़ा कर दिया.

इसके बाद उसने तुरंत अपनी पेंट को खोल दिया और अपनी गांड़ पर थूक लगाने लगा. यह देखकर मैंने उससे पूछा तुम्हारे पास कंडोम है. उसने अपनी जेब से तुरंत कंडोम निकाला और उसे मेरे लण्ड पर चढ़ा दिया. सड़क पर जाने वाली गाड़ी की लाइट में मुझे उसका चेहरा थोड़ा धुंधला- धुंधला सा दिख रहा था. वो डोगी स्टाइल में खड़ा हो गया और मुझे अपनी गांड मारने के लिए आमंत्रित करने लगा.

मैं उसके पीछे खड़ा था. तभी उसने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और फिर मेरे लण्ड को अपनी गांड़ के छेद पर रख दिया. अब काम, मुझे करना था. मैंने थोड़ा सा ज़ोर लगाया मेरा सुपाड़ा उसकी गांड के अंदर चला गया. उसे काफी दर्द हो रहा था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा. उसने दर्द सहने की पूरी कोशिश की. उसकी गांड़ बहुत ही गरम थी और धुंधली रोशनी में मुझे उसके चेहरे से उसके दर्द का पता चल रहा था.

उसकी कराहने की आवाज मुझे और भी जोश दिला रहा था. मैंने लंड का सुपाड़ा थोड़ा बाहर खींचा और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया. इसबार आधा लंड उसकी गांड में घुस गया. मैंने उसकी कमर ज़ोर से पकड़ लिया, वरना वो आगे जा कर लंड निकाल ही देता. उसे बहुत दर्द हो रहा था. वह जोर- जोर से कराहने लगा.

तभी मैंने एक और ज़ोरदार धक्का लगा दिया. वो सीधा खड़ा हो गया, लेकिन मैंने उसे छूटने नहीं दिया. वो बोलने लगा छोड़ दो मुझे, बहुत दर्द हो रहा है. मैंने उसे समझाया और थोड़ी देर रुककर फिर से उसकी गांड बजाना शुरू कर दिया. पहले मैं धीरे- धीरे फिर ज़ोर- ज़ोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया.

बाहर की ठण्ड और उसकी गाँड़ की गरमी की वजह से मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था. अब उसकी गाँड़ में लंड बहुत आसानी से अंदर बाहर हो रहा था. उसे भी मज़ा आने लगा था. जब मैं लंड अंदर पेलता तो वह अपनी गांड़ ढीली छोड़ देता था और जब बाहर खींचता तो सिकोड़ लेता.

अब तो वो भी लंड को गांड़ में से निकलने नहीं देना चाहता था. वो ज़ोर- जोर से सिसकारियाँ लेने लगा. मुझे उसकी गांड़ मारते हुए करीब दस मिनट से ज़्यादा हो गया था. अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. वो ज़ोर- ज़ोर सिसकियाँ ले रहा था. उसके सिसकियां लेने की वजह से जोश में मेंरा पानी निकल गया. इसके बाद उसने लण्ड से कंडोम को उतारा और चाट कर मेरे लंड को साफ़ कर दिया. फिर वह बस स्टैंड की ओर चल पड़ा.कुछ देर बाद वह मेरी आँखों से ओझल हो गया. फिर पता नहीं कहाँ चला गया.

तो दोस्तों ये थी मेरी सच्ची कहनी अनजान व्यक्ति से मिलने की और उसकी गांड मारने की.आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी अपने विचार ज़रूर भेजिए,मुझे आपके विचारों का इंतजार रहेगा. मेरी अगली कहानी का इंतज़ार करें. आपके विचार
[email protected] पर भेजें.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *