लोहार का हथौड़ा और गर्मागर्म लौड़ा

लेकिन इन कपड़ों में मैं बाहर नहीं जा सकती थी। लेकिन मेरे पास इसका भी एक तरीका था। मैंने इस सबके ऊपर से ढीला-ढाला ट्रैक सूट पहन लिया। हाई हील को निकाल कर मैंने अपनी स्कूटी की डिग्गी में रख लिया। अब मुझे किसी ऐसे अजनबी इंसान को खोजना था जो मेरी इस जवानी से खेल सके और अपना गरमा-गरम चिपचिपा पानी मेरे अन्दर डाल दे…..

 

हाय दोस्तों ! मेरा नाम मोहित केसरवानी है। लेकिन मेरा शरीर एकदम लड़कियों जैसा नाजुक है। आज मैं आप लोगों के सामने एक आप बीती बयान करने जा रहा हूँ। बात बस कुछ ही हप्ते पुरानी है।

शाम को जोरों की बारिश हो रही थी। आकाश में बादल इतने गहरे हो चुके थे लगता था जैसे अन्धेरा ही हो जाएगा। ऐसा मौसम होते ही न जाने क्यों मेरे भीतर एक लड़की की भावनायें सिर उठाने लगती हैं। मैं तुरंत ही महिला स्टोर पर गया और शरीर के बाल निकलाने वाला वैक्स लेकर आया।

हालाँकि मेरा गोरा बदन एक लड़की की तरह ही नाजुक और भरा-भरा है। खासकर मेरी चिकनी जाघें काफी पुष्ट और मांसल हैं बिलकुल एक गदराई हुई लड़की की तरह। मेरे सीने का आकार भी काफी हद तक लड़कियों जैसा लगता है। लेकिन थोड़े बहुत रोये पैरों और सीने पर आ गए थे। इसलिए जब कभी मेरा मन बहकता तो मेरे भीतर की लड़की मोहिनी मेरे ऊपर हावी हो जाती।

न चाहते हुए भी वो मुझसे वो सब करवाती जो मैं लड़का होते हुए नही करना चाहता था। वैक्स लेकर मैंने खुद को अपने कमरे में बंद कर लिया। मैं लखनऊ में बाराबंकी के पास एक किराए का कमरा लेकर पढ़ाई कर रहा हूँ। जिस जगह मैंने कमरा लिया वो एकदम एकांत में है। यहाँ अभी नई-नई बस्ती बसनी शुरू हुई है। इसलिए जल्दी कोई इधर आता नहीं।

सबसे पहले मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए। फिर वैक्स की बनी-बनाई स्ट्रिप लेकर अपने शरीर के बालों को वैक्स करने लगा। हालाँकि इसमें काफी दर्द भी हो रहा था लेकिन इस वक्त लड़की बनने की इच्छा दिल में हिलोरें मार रही थी।

मैंने शरीर का कोई भी हिस्सा नहीं छोड़ा। काँख, सीना, पेट, चूतड़, जाघें और पैर हर जगह का बाल मैंने जड़ से निकाल दिया। ऐसा करने से मेरा पूरा शरीर एकदम लाल पड़ गया था। लग रहा था जैसे किसी ने मेरे साथ जबरदस्ती की है। फिर मैंने अपने पूरे शरीर पर बेबी आयल लगाया ताकि मेरा शरीर और भी नाजुक हो जाय।

बाथरूम में घुस कर मैंने गांड में पतली वाली पाइप अन्दर तक डालकर पानी की टोटी खोल दी ताकि पानी मेरी गांड में अन्दर तक भर जाय। जब काफी पानी अन्दर भर गया तब मैंने पाइप बाहर निकला और पूरे प्रेशर से पानी को जोर लगाकर बाहर निकालने लगा। ऐसा मैं बार-बार तब तक करने लगा जब तक की मेरी गाड़ से सिर्फ साफ पानी नहीं निकलने लगा। यानी अब मेरी गांड अन्दर तक साफ़ हो गई थी।

फिर मैंने काफी सारा बेबी ऑइल अपने गांड में डाला। ताकि अन्दर तक चिकनी हो जाय और कोई भी बड़े आराम से मेरी गांड ले सके। फिर मैं वापस कमरे में लौटा और पूरे शरीर पर पोंड्स का पाउडर लगाया। फिर मैंने लेडिज के तीन तरह के सेंट अपने शरीर पर लगाया। बाजू में मैंने जैस्मिन, सीने और पेट पर गुलाब का सेंट और चूतड़, जांघ और पूरी चिकनी गदराई टांगो में लेवेंडर का सेंट।

इसके बाद मैंने सबसे पहले गुलाबी रंग की लड़कियों वाला पैंटी पहनी जिसमें कई सारे फूल बने हुए थे। फिर उसी से मैच करती हुआ ब्रा पहनी इसके बाद पैरों में रेड कलर की स्टॉकिंग पहनी ताकि कोई भी मेरी टाँगे देखकर गश खा जाए। स्टॉकिंग उसे बोलते हैं जिसे पोर्न फ़िल्म की हीरोइने अपने पैरों में पहन कर चुदवाती है। इसके बाद मैंने लाल और पीले रंग की एक घेरे वाली फ्राक पहनी जो मेरे उभरे हुए लड़की जैसे भारी चूतरों से बस थोड़ा ही नीचे तक आ रही थी। उसके बाद मैने हल्की से लिपस्टिक लगाई।

मेरे बाल पहले से ही काफी लम्बे थे। इसलिए जब मैंने खुद को शीशे में देखा तो मैं शरमा गई। जी हाँ! “शरमा गई”। खुद को आईने में देखने के बाद मैं अब “शरमा गया“ शब्द नहीं प्रयोग कर सकता था। बस एक कमी रह गई थी हाई हील की। जो की मेरे पास थी उसे पहनने के बाद तो सच में लगा की कहीं कोई मेरा रेप न कर दे।

लेकिन इन कपड़ों में मैं बाहर नहीं जा सकती थी। लेकिन मेरे पास इसका भी एक तरीका था। मैंने इस सबके ऊपर से ढीला-ढाला ट्रैक सूट पहन लिया। हाई हील को निकाल कर मैंने अपनी स्कूटी की डिग्गी में रख लिया। अब मुझे किसी ऐसे अजनबी इंसान को खोजना था जो मेरी इस जवानी से खेल सके और अपना गरमा-गरम चिपचिपा पानी मेरे अन्दर डाल दे।

मुझे अपनी बीबी या रखैल समझ कर चोदे। इस वक्त मैं जितनी खूबसूरत लग रही थी उतना ही मेरे मन में बदसूरत, गवार, पसीन में सना हुआ, गंदा सा ऐसे किसी आदमी या अधेड से चुदने का मन हो रहा था। जो मेरे खूबसूरत बदन को रगड़-रगड़ कर अपनी तरह गंदा कर दे। अपने खुरदुरे लंड का पानी मेरी गाड़ में इतने अन्दर तक डाल दे की मुझे बच्चा हो जाए।

मैंने मुंह एक स्टाल से बाँध लिया और कमरे में ताला लगाकर निकल पडी। इस तरह के काम के लिए मुझे शहर से ज्यादा गाँव पसंद था। इसलिए मैं स्कूटी चलाते हुए फैजाबाद वाले हाइवे पर आ गया। मेरी नजरी सड़क के इधर उधर भटक रही थी। मैं शहर से काफी दूर निकल आया था। दूर-दूर तक खेत ही खेत नजर आ रहे थे। तभी मुझे एक पुरानी फैक्ट्री के पास एक टूटा फूटा घर नजर आया जिसमें कोई ४५-५० साल का अधेड़ लोहे को पीट रहा था। शायद ये कोई लोहार था।

यहाँ आस-पास और कोई भी नजर नहीं आ रहा था तभी एकाएक जोरों की बारिश होने लगी। मैंने स्कूटी उसी तरफ मोड़ दी लेकिन फिर भी मैं काफी भींग चुका था। उस बूढ़े ने मेरी तरफ देखा सर से पाँव तक काफी गौर से, जैसे मुझे जांच रहा हो लेकिन ढीले-ढाले ट्रैक सूट और ढके हुए मुंह के कारण उसे कोई भी संकेत नहीं मिला। वह फिर से अपने काम में लग गया।

उसके शरीर पर एक मैली से बनियान थी। कमर के नीचे उसने एक गंदा सा गमछा बाँध रखा था। लेकिन वो जिस तेजी से हथौड़ा चला रहा था उससे मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ जा रही थी। मैंने मन ही मन सोचा की अगर ये अभी मुझे लडकी वाले कपड़ो में देख ले तो पागल हो जाएगा। क्या पता मेरा रेप ही कर डाले। इस वक्त मेरे बदन पर कोई रोया नहीं था, नहीं तो रोमांच के मारे तन के खडा हो गया होता।

जहां पर वो लोहा पीट रहा था वहां थोड़ी और जगह थी लेकिन वो थोड़ा ओट में थी। वहां पर एक खटिया भी रखी हुई थी। शायद बूढा रात को यही सोता था। ये जगह कुछ इस तरह थी कि जहां पर वो बूढ़ा बैठा था वो जगह सड़क से नजर आती थे लेकिन जहां पर वो चारपाई थी वहां काफी हल्की सी रोशनी थी और काफी अन्दर बना हुआ था। इस जगह को सड़क से जाता हुआ कोई आदमी नहीं देख सकता था लेकिन वो बूढ़ा देख सकता था।

सच कहूँ तो मेरा दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था समझ में नहीं आ रहा था कि शुरुआत कैसे करूं? तभी बारिस और भी तेज हो गई। इसी के साथ जहां मैं खड़ा था बैछार वहां तक आने लगी। इसी के साथ माहौल में पहले से ज्यादा अन्धेरा छा गया था।

‘लगता है बारिस काफी देर तक चलेगी ?’

मेरी बात सुनकर बूढ़े ने मेरी तरफ देखा फिर बाहर होने वाले बारिस को

‘ठंड लग रही हो तो ताप लो’

बूढ़े का इशारा जलती हुई भट्ठी की तरफ था। जिसमें लोहा लाल होकर दहक रहा था।

‘मेरा कपड़ा गीला हो गया है। क्या सूख जाएगा?’

‘उतार के भट्ठी के पास फैला दो जल्दी सूख जाएगा’

बूढ़े की ये बात सुनकर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। लेकिन मुझे जिस मौके की तलाश थी वो मिल गया था।  मैं धीरे से उस चारपाई के पास जाकर बैठा गया लेकिन यहाँ काफी अन्धेरा था।

मैंने कहा- यहाँ काफी अन्धेरा है।
वो बोला- बगल में लालटेन होगी जला लो।

मैंने ध्यान से देखा तो पाया कि एक तरफ एक लालटेन रखी हुई थी। उसके बगल में माचिस भी थी। मैंने माचिस से लालटेन जलाई। अब यहाँ पर इतनी रोशनी थी की बूढा मुझे आसानी से देख सकता था। सबसे पहले मैंने अपना स्टाल खोला।

अब वो बूढा मेरा चेहरा देख सकता था। मेरे होठों की लाली देखकर उसे थोड़ा बहुत इशारा मिल जाएगा। लेकिन उसका ध्यान अभी लोहा पीटने में था। फिर मैंने धड़कते दिल के साथ अपना ट्रैक सूट निकाला और वहां जल रही दूसरी भट्ठी के पास फैला दिया। जो एकदम चारपाई के पास धधक रही थी।

अब मैं सर से लेकर पाँव तक लाल वाली फ्राक में था। बूढ़े का ध्यान अपनी तरफ खीचने के लिए मैं बोला – ‘पीने के लिए पानी होगा क्या?’

मैं दोनों जांघें आपस में चिपका कर बहुत ही सेक्सी पोज में खड़ी थी। तब बूढ़े ने मेरी ओर देखा। सर से पाँव तक बेहद ध्यान से। शायद वहां से उसे ठीक से नजर नहीं आ रहा था।
इसलिए उठकर मेरे पास आया। उसे इतने करीब देखकर मेरी साँसे बेहद भारी हो गई।
इसलिए मैं चुपचाप खटिया पर लेट गया। एक तरफ करवट लेकर।

मेरा चेहरा दीवार की तरफ था और पीठ और गांड बूढ़े की तरफ। मैं धड़कते दिल से इन्तजार कर रहा था की अब बूढा क्या करेगा?

फिर मेरे कानों में दरवाजा बंद करने की आवाज आई। इसके बाद लगा जैसे बूढा अपने कपडे उतार रहा हो। मेरे अन्दर इतनी हिम्मत नहीं थी की मैं पलट कर देखूं। फिर वो ठीक मेरे पीछे आकर लेट गया। उसके कठोर हाथ मेरे चूतडों को फ्राक के ऊपर से सहलाने लगे। फिर उसने मेरी फ्राक को ऊपर उठा दिया और उठकर गौर से मेरे गोर बदन को देखने लगा।

उसने फ्राक को एकदम उपर सरका दिया और मेरे चूतरों को चीर कर देखने लगा। उसकी इस हरकत से मेरे शरीर में सनसनी सी दौड़ गई। फिर नाक वहां ले जाकर किसी कुत्ते की तरह सूघने लगा। लेवेंडर की खुशबू से बूढा एकदम पागल हो गया और ढेर साढ़ा थूक गांड की छेद पर थूक दिया।

इसके बाद कसके अपनी एक मोटी उंगली बेरहमी से घुसेड दी।
मेरी चीख निकल गयी- उई मम्मी!! मर गई!!

लोहार गरजा- साली छिनाल! लड़की बनेगी? आज तुझे पूरी लड़की बना दूंगा!

बूढा बड़ी बेरहमी से अपना खडा लंड मेरे भीतर घुसाने लगा। जैसे ही मेरी गांड में उसका लौडा घुसा मेरी चीख निकल गई। बूढा बहुत जालिम था काफी कसकर घुसाने के बाद पेलमपेल धक्के मारने लगा। मेरी गांड कलकलाने लगी।

फ्री का माल पाने के बाद आदमी ऐसे ही कसाई की तरह चोदता है। लेकिन मेरी गांड भी इतनी खुजला रही थी कि सीसीयाते हुए बोलने लगी- प्लीज झड़ जाइए न! बहुत कल्ला रही है।

बूढ़ा हांफते हुए बोला- ले साली गया मेरा माल! तेरी चिकनी गांड में!!  आह-आहह्ह्ह

और सच में बूढ़ा झड गया।  झड़ने के बाद बूढ़ा एक तरफ पसर कर गहरी-गहरी साँसे लेने लगा मैं समझ गया कि अब वो काफी थक गया है। इसलिए बिना कुछ बोले मैं उठा अपने कपडे पहने और बिना बारिस की परवाह किये बिना मैं वापस अपने घर लौट आया।

गांड में उठने वाला ये मीठा दर्द अब कई दिनों तक मेरे भीतर की लड़की को सुलाने के लिए काफी था।

उम्मीद है आपको मेरी ये आप बीती पसंद आई होगी आगे फिर मैं एक नई आप बीती घटना के साथ आप लोगों के सामने प्रस्तुत होउंगा। तब तक के लिए बाय-बाय।

 

[email protected]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *