मैं, भाभी और हमारी मोहब्बत

मेरे भैया काम के चलते भाभी को समय नहीं दे पा रहे थे. इस वजह से वो उदास रहती थीं. जब मुझे उनकी उदासी का कारण पता चला तो मैंने उसे खत्म करने की सोची. इसी क्रम में मैं उनसे प्यार कर बैठा, जिसका परिणाम चुदाई हुआ…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम यश है और मैं नासिक का रहने वाला हूँ. मैं इंजीनियरिंग का स्टूडेंट हूँ. मैं दिखने में काफ़ी हैंडसम हूँ और मेरा कलर भी काफ़ी फेयर है. मैं पिछले 3 साल से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ. इसकी कहानियां मुझे बहुत अच्छी लगती हैं. उन्हें पढ़ कर मैं वासना के वशीभूत हो जाता हूँ और फिर मुठ मारने या चोदने के बाद ही शांत होता हूँ.

अब मैं आप लोगों का ज्यादा समय न वेस्ट करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ. बात 2 साल पुरानी है. तब मैं इंजीनियरिंग के अपने पहले साल में था. दोस्तों, मेरा 1 बड़ा भाई है और वो भी इंजीनियर है. उसकी शादी हो चुकी है और उसकी बीवी का नाम नेहा है. मेरी यह कहानी मेरी और नेहा के साथ की कहानी है.

दोस्तों, नेहा दिखने में बहुत ही खूबसूरत है. वो एक दम गोरी महिला हैं. उसकी कमर पतली और सीना काफी उभार लिए हुए है. कुल मिला कर वह एक बेहद खूबसूरत गुड़िया सी लगती है.

नेहा ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. इस वजह से हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी थी. नेहा और मेरी आदतें भी काफ़ी हद तक मिलती थीं. मेरे भैया काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते थे. इस वजह से भाभी भी एक दम अकेली हो गयी थी और घर में रहते हुए बोर होकर उदास रहने लगी थीं.

एक दिन मैं भाभी के साथ बैठ कर बातें कर रहा था. उस समय घर पर हम दोनों के अलावा कोई और नहीं था. बातों ही बातों में मैंने भाभी से उनके उदास रहने के कारण के बारे में पूछ लिया. चूंकि हमारे बीच का व्यवहार एक दम दोस्ताना था इसलिए उन्होंने मुझसे सारी बातें बता दीं. उन्होंने कहा कि तुम्हारे भैया अपने काम में बिजी रहते हैं और इस वजह से मेरी जरूरतें पूरी नहीं करते. मेरे परेशान रहने की वजह यही है.

दोस्तों, एक औरत को कभी भी खुश रखना हो तो उसे वक़्त देना होता है. उसके जिस्म की ज़रूरत को भी पूरा करना होता है. उसे सिर्फ़ सेक्स नहीं चाहिए, उसे प्यार भी चाहिए होता है. मैं भाभी को अपना अच्छा दोस्त समझता था और हम दोनों मन ही मन एक – दूसरे को पसंद करते थे. लेकिन अपने रिश्ते की वजह से न ही जाहिर किया था और न ही और कुछ किया था.

उस दिन भाभी की बात सुन कर मैंने धीरे से भाभी के करीब गया और उनके सर को हाथ से पकड़ कर चूम लिया. मेरे ऐसा करने पर उन्होंने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और रोने लगीं.

फिर मैंने उन्हें शांत कराया और उनसे कहा कि भाभी आप रोया मत करो, मैं आप को रोते हुए नहीं देख सकता हूँ. फिर मैंने उनसे अपने प्यार का इज़हार कर दिया और कहा कि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. मेरी यह बात सुन कर वो मुस्कराने लगीं और फिर मेरे होंठों को चूम लिया. इसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि वो भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं लेकिन रिश्ते के चलते और घर वालों के डर की वजह से कभी जाहिर नहीं किया.

इसके बाद भाभी मुझसे रिक्वेस्ट करते हुए बोलीं – यश, तुम एक अच्छे दोस्त या प्रेमी जो भी चाहो बन कर मेरी शारीरिक ज़रूरत को पूरी कर दो. इस पर मैंने भाभी से प्रॉमिस लिया कि उनके साथ सेक्स करने के बाद भी वह मेरी और मैं उनकी इज़्ज़त वैसे ही करते रहेंगे.

मेरी यह बात सुन कर भाभी ने हां में सिर हिलाया और फिर मैंने भी भाभी के होंठों पर क़िस कर लिया. इस पर उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और कहा आज से हम प्रेमी हैं और अब तुम मुझे भाभी की बजाय मेरा नाम नेहा लेकर बुलाना. फिर मैंने नेहा को अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम मे लेकर गया.

बेडरूम में पहुंचने पर नेहा बोली – आज से मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ. तुम्हारा जैसे मन करे जिस तरह तुम चाहो करो लेकिन मुझे प्यार करो और मेरी जगी हुई वासना को शांत कर मुझे महिला होने का असली सुख दो.

नेहा के इतना बोलते ही मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसे होंठों पर किस करने लगा. दोस्तों, मुझे उसके होंठ शहद से भी ज्यादा मीठे लग रहे थे. मेरे ऐसा करने पर उसने अपनी आँखें बंद कर ली और मुझे कस कर पकड़ लिया.

दोस्तों, उसने ब्लैक कलर की कुर्ती और जीन्स पहन रखा था. उसके 34 के साइज़ के बूब्स तो एक दम क़यामत ढ़ा रहे थे. होंठों पर किस करने क बाद मैं उसकी गर्दन पर अपनी जुबान फेरने लगा. इससे नेहा आंखें बंद कर सिसकारियां भरने लगी थी.

फिर मैं नेहा के बूब्स पर आ गया और धीरे – धीरे कुर्ती के ऊपर से ही उसके दोनों मम्मों को पकड़ लिया और मज़े से दबाने लगा. इसी बीच नेहा ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और पैंट के ऊपर से ही उसे मसलने लगी.

नेहा चुदाई के लिए बहुत उतावली हो चुकी थी. फिर मैंने नेहा की कुर्ती को ऊपर किया और उसकी नाभि पर जुबान फेरने लगा. अब नेहा ने मेरे सर को पकड़ा और ज़ोर से दबाने लगी. उसकी सिसकियों की गति और तेज हो चुकी थी.

फिर नेहा ने उठ कर मस्ती वाले मूड में अपने हाथ ऊपर किए और एक बार फिर अपनी आंखें बंद कर ली. मैं उसका इशारा समझ गया. फिर मैंने धीरे से उसकी कुर्ती निकाल दी. अब वो मेरे सामने टॉपलेस होकर लेट गयी.

उसने ब्लैक कलर की ब्रा पहन रखा था. उसमे से झांकते उसके गोरे – गोरे बूब बहुत अच्छे लग रहे थे. वो भी इस रूप में बाला की खूबसूरत लग रही थी. फिर मैंने जल्दी से उसकी ब्रा को बदन से अलग किया. मेरे ऐसा करते ही उसके गोरे – गोरे खरबूज़े आज़ाद हो गये.

मैंने देखा कि उसके हल्के ब्राउन कलर के निप्पल्स इन उत्तेजक कामों की वजह से टाइट हो कर तन गये थे. यह देख मैं उन पर टूट पड़ा. जैसे ही मैंने उसके निप्पल चूसना शुरू किया, उसके मुंह से मादक सिसकारियां फिर से निकलने लगीं. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं उसकी एक चूची को मुंह में और एक को हाथ से मसल रहा था.

तभी नेहा बोली – यश, जल्दी करो, अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है, मैं बहुत दिनों से प्यासी हूँ. उसकी यह बात सुनते ही मैंने नेहा की जीन्स का बटन खोल नीचे कर दिया. अंदर उसने ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखा था. जैसे ही मैंने जीन्स को नीचे किया उसने शर्माते हुए अपने हाथों से अपना चेहरा ढक लिया.

फिर मैंने उसके हाथ को हटाकर उसे होंठों पर किस किया और नीचे आ गया. उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. अब जैसे ही मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया वो अकड़ गयी.

इसके बाद मैंने उसकी पैंटी खींच दी. वो तड़प रही थी. उसकी तड़प देख मैंने ज्यादा देर करना ठीक न समझा. फिर मैंने अपना पैंट और टी-शर्ट उतार दिया. इसके बाद मैं अपना लंड उसकी चूत पर टिकाया और धीरे – धीरे करके अंदर कर दिया.

वो काफी दिनों से चुदी नहीं थीं. इस वजह से उनकी चूत काफी टाइट थी. लेकिन लंड अंदर जाने के बाद दर्द हुआ कि नहीं ये बता नहीं सकता क्योंकि उन्होंने ऐसा कोई रिएक्शन नहीं दिया. फिर मैं धीरे – धीरे धक्के लगाने लगा तो कुछ देर बाद उन्होंने धक्कों की रफ्तार बढ़ाने को कहा. तब मैं तेजी से चोदने लगा.

अब उन्हें खूब मज़ा आ रहा था और वह मस्त होकर चुदाई का मज़ा ले रही थीं. चुदाई के दौरान मैंने अपने हाथों से उनके मम्मों को पकड़ रखा था. जब मैं धक्के लगाता तो मम्मे भी दबते थे. बहुत मज़ा आ रहा था. करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया. इसके बाद फिर मैं वहीं पड़ गया.

इसके बाद उन्होंने मेरे लंड को मुंह में लिया और चूसने लगीं. इस वजह से थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. इसके बाद मैंने फिर से उनकी चुदाई की. बाद में मैंने एन्टी प्रेग्नेंसी पिल लाकर उन्हें दी. उस दिन के बाद जब भी घर में हमें मौका मिलता है हम मजे से अपनी प्यास बुझाते हैं. न मुझे बाहर मुंह मारने की जरूरत है और न ही भाभी को भैया का उतना इंतज़ार रहता है.

मेरी कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected] 

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