मकान मालिक की लड़की रेशु की सील तोड़ी

मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर निकाली और जब उसमे से अपना लाल लाल लंड बाहर निकाला.
जैसे ही मैंने मेरे लंड को निकला तो वो मेरा बड़ा लंड देखकर डर गई और बोली – ये इतना बड़ा है. मेरी जांघों के बीच में कैसे जायेगा?

नमस्कार दोस्तों। मेरा नाम राज है और मैं महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ। दिखने मे मैं पतला-दुबला लेकिन गुड लुकिंग हूँ। बहुत लडकियाँ मरती हैं मुझपे. और मेरी कमज़ोरी भी लड़की है. कोई लड़की मुझे बुलाये तो भाग के जाता हूँ। चाहे वो लड़की कहीं की भी हो। दोस्तों मैं सात साल से अन्तर्वासना का पाठक हूँ। रोज कहानी पढ़ता था। पर मेरे लाइफ में ऐसा कुछ हुआ ही नहीं जो में कहानी भेजता। आज मैं मेरे जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ.

मेरी दीदी और जीजा पुणे में रहते हैं। मुझे मेरे एग्जाम के लिए पूना जाना था। मैंने दीदी को कॉल करके अपने आने की सूचना दे दी। अगले दिन में पुणे में पहुँच गया।

जैसे ही घर में गया तो देखा कि वहाँ देखा एक लड़की दीदी से बात कर रही थी। क्या लड़की थी दोस्तों? ऐसा लग रहा था जैसे कोई परी आसमान से धरती पे आ गयी हो। जैसे ही मैंने उसको देखा वैसे ही मेरे होश ही उड़ गए. क्या माल थी यारों? मैंने तो बस उसे देखे ही जा रहा था। मैंने अपने मन में ठान लिया कि अब तो इसको चोदके ही रहूँगा। चाहे जो हो, इसको एक बार तो चोद के ही दम लूंगा।

में रोज उसपे लाइन मारने लगा। वो भी अब लाइन देने लगी थी।

वो दीदी के मकानमालिक की लड़की थी. उसका नाम रेशू था. दीदी पहली मंजिल पे रहती थी और वो नीचे रहती थी. एक दिन वो जब नीचे अपने आँगन में खाड़ी थी तो मैंने एक कागज का प्लेन बनाया और उसपे मेरा नंबर लिख कर नीचे उसकी तरफ फेंक दिया. वो कागज उठा कर अन्दर चली गयी.

फिर मैंने दो दिन तक इन्तजार किया पर कुछ फायदा नहीं हुआ। उसका कोई फोन मेरे पास नहीं आया. मुझे लगा वो नाराज हो गयी है. मुझे डर भी था कि कहीं वो दीदी से कुछ कह न दे, इसलिए मैंने वहाँ से जाने का फैसला किया।

में अपने गाँव चला आया. फिर दो दिन बाद उसका कॉल आया.

वो बोली- कैसे हो?

एक बारगी तो मैं चौंक गया. मैंने कहा- ठीक हूँ.

उसने पूछा की मैं वहाँ से अचानक चला क्यों आया तो मैंने बताया कि मैं डर गया था. फिर मैंने उससे फ्रैंडशिप की और फिर हमारे प्यार का दौर शुरू हो गया.

हम मोबाइल पे बाते करने लगे. इसी तरह एक महीना बीत गया। अचानक एक दिन दीदी का कॉल आया. उन्हें किसी काम से कुछ दिनों के लिए गाँव आना था. मैंने बिना कुछ सोचे उनसे कहा कि लेकिन मैं तो जॉब ढूँढने के सिलसिले में पुणे आना चाहता था.

दीदी बोली – तो उसमे पूछने जैसा क्या है? मैं गाँव आकर तुम्हें घर की चाभी दे दूँगी तो तुम पुणे चले जाना.

दीदी के गाँव आने के दो दिन बाद में पुणे चला आया। रेशू बहुत खुश हुई मुझे देख के।
फिर क्या था? हम रोज एक दूसरे से कभी छत पे तो कभी अपने कमरे में मिलने लगे. मैंने तो एक-दो बार उसे किस भी किया और मम्मे भी दबाये।

एक दिन रेशु ने बताया कि कल उसके मम्मी-पापा तीन दिन के लिए बाहर जा रहे हैं.

मुझे तो अच्छा ही था। मैंने सोचा कि अब इसकी फ़ुद्दी को रगड़ रगड़ के चोदूंगा। उसी रात जीजा जी भी मेरे गांव यानि अपनी ससुराल को गए थे चार दिन के लिए। अब तो हर तरफ से बल्ले-बल्ले थी मेरी। अब सिर्फ रेशु और उसका छोटा भाई ही घर में थे. लगभग 12बजे रात को वो ऊपर आई. उस वक़्त वो क्या दिख रही थी दोस्तों?

जैसे ही वो अंदर आई मैंने दरवाजा अन्दर से बंद किया और उसको गोद में उठा के उसके होंठ चूसने लगा. वो मुझे कस के पकड़ रही थी। मैने भी मौका न गवाते हुए उसको अपने पास सुलाया और धीरे-धीरे उसके सारे कपडे निकाल दिए.

वो बोली- मुझे डर लग रहा है. प्लीज कुछ मत करो! किस करो सिर्फ.

मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर निकाली और जब उसमे से अपना लाल लाल लंड बाहर निकाला.
जैसे ही मैंने मेरे लंड को निकला तो वो मेरा बड़ा लंड देखकर डर गई और बोली – ये इतना बड़ा है. मेरी जांघों के बीच में कैसे जायेगा?
में भी उसकी चूत का छोटा सा छेद देखकर यही सोच रहा था. क्योंकी ये मेरी भी पहली चुदाई थी। मैंने उसे फिर भी सुलाया. जैसे ही मैंने अपने पप्पू उसकी चूत में डाला तो वो तड़प गई और रोने लगी.

वो कहने लगी- जान प्लीज़ छोड़ो!! मैं मर जाउंगी!

लेकिन अब मैं थोड़ी न रुकने वाला था। फिर मैंने जोर से अन्दर डाला,
वो वो जोर से चिखने लगी. उसकी फुद्दी से खून आने लगा था। मज़बूरी में मुझे लंड उसकी फ़ुद्दी से निकालना पड़ा। फिर अगले दिन जब उसका भाई स्कूल को गया था तो दोपहर का काम कर के वो ऊपर मेरे कमरे में आ गई. तब तक उसका दर्द भी ख़त्म हो गया था. मैंने उसको आते ही गले लगाया। और उसके छोटे छोटे मम्मे दबाने लगा।
फिर उसके मुह में मुह डाल कर उसके होठों को आधा घंटा तक चूसता रहा। अब वो पूरी तरह से मेरे काबू में थी। मैं उसकी गांड दबा रहा था। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए. यहाँ तक कि उसकी पैंटी भी निकाल दी मैंने. अब उसका गोरा नाजुक बदन मेरे सामने था। ऐसा लग रहा था कि उसको खा जाऊँ। वो इतनी गोरी थी वो क्या बोलू?

फिर मैंने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए. अब हम दोनों ही नंगे थे। मैंने उसको बेड पे सुलाया और उसकी टाँगे फैला दिए।

उसने कहा- जान आज धीरे करना वरना मैं मर जाउंगी.

मैंने कहा- चिंता मत करो! कल झिल्ली फट चुकी है अब ज्यादा दर्द नहीं होगा.

फिर मैंने अपना लंड धीरे धीरे रेशु की फ़ुद्दी में डालने लगा। अबकी बार रेशू ने भी हिम्मत करके अपने होठों को दबाते हुए सब सह लिया। मैंने धीरे- धीरे अपने लंड को आगे-पीछे करने लगा. अब उसे भी मज़ा आने लगा था। वो मुझे जोर से, कस के पकड़ रही थी। मेरे होंठ को अपने होठ से दबा रही थी। उसकी फुद्दी अब चिकनी हो चुकी थी और लंड भी सटासट उसके अन्दर फिसल रहा था.

अब उसकी मादक आवाज…. उफ्फ्फ….इस्स्स्स….आआहाअह्ह्ह…. मुझे और उत्तेजित कर रही थी. अचानक उसका बदन ऐंठने लगा. वो जोर –जोर से कहने लगी- जान….जाने मुझे क्या हो रहा है….मुझे संभालो…..  मुझे क्या हो रहा है…..अआह्ह्ह….और चोदो मुझे आआह्ह्ह्ह..

अब वो झड़ चुकी थी। पर मेरा अभी बाकी था। मैंने उसे काफी देर तक चोदा और फिर झड़ते समय अपना लंड बाहर निकाला. उस्क्की फुद्दी सूज गयी थी. उसे दर्द भी काफी हो रहा था.

दूसरे दिन वो बोली- जान मेरी फ़ुद्दी फाड़ दी आपने। बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- चलो मैं तुम्हारा दर्द ठीक करता हूँ.

उस दिन और अगले दिन मैंने और ज्यादा चोदा रेशु को। और अब जब हमे टाइम मिलता है।
तब हम चुदाई करते है। अब उसको मेरे लंड की आदत हो गयी है।

कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना। आप का चुदक्कड़ दोस्त राज।

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