मना करते – करते खुद ही चुदवा गई

मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती है. वह बहुत खूबसूरत है. हम एक – दूसरे को प्यार करते थे लेकिन वो चुदाई करवाना नहीं चाहती थी. आखिर मैंने क्या तरीका अपनाया कि वो खुद ही मुझे चोदने के लिए कहने लगी, जानने के लिए मेरी यह कहानी पढ़ें…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम मान है और मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं. मैं यहां प्रकाशित होने वाली लगभग हर कहानी को उसका फील लेकर पढ़ता हूं. ये कहानियां बहुत ही उत्तेजक होती हैं और पढ़ने के बाद मैं मदमस्त हो जाता हूं. दोस्तों, मेरी उम्र 21 साल है और मैं 6 फुट की लम्बाई वाला मस्त जवान लौंडा हूं.

ये मेरी सच्ची कहानी है जो मेरे और मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की की है. उसकी उम्र 19 साल है और वह देखने में बहुत ही खूबसूरत है. उसका फिगर 30 28 32 का है. पड़ोसी होने की वजह से उसका हमारे घर आना – जाना लगा रहता था. वह जब भी हमारे घर आती मेरा सारा ध्यान उसी पर लगा रहता था.

मैं काफी टाइम से उसे पाना चाहता था लेकिन डरता था कि कहीं किसी को पता चल गया या उसने बता दिया तो मेरे लिए मुश्किल हो जाएगी. इसलिए फिर मैं उसे पटाने का प्लान बनाने लगा. अब जब भी वह मेरे घर आती, मैं किसी न किसी बहाने उससे बात करने लगा. इस तरह धीरे – धीरे हमारी दोस्ती हो गई जो कुछ दिन बाद प्यार में बदल गई. यानी वो मुझसे पट गई थी.

अब जब भी हम साथ होते तो केवल प्यार की ही बातें करते थे. धीरे – धीरे हम फिजिकल होने लगे. जब कभी वह मेरे पास अकेले में बात करने आती तो मैं उसे पकड़ के किस कर लेता. कभी – कभी मैं उसके दूध भी दबा देता था. तब वह मुझे अपने से दूर करने लगती. इस तरह धीरे – धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं. लेकिन हमारे घर वाले हम बस अच्छा दोस्त ही समझते थे इसलिए वो कुछ बोलते भी नहीं थे.

अब हम काफी खुल गए थे. अब जब भी मेरे घर पर कोई न होता तो मैं उसे बुला लेता और हम एक – दूसरे को बाहों में भर कर खूब प्यार करते. मैं उसके होंठ पर अपने होंठ रख देता और हम लिप लॉक किस करते रहते. एक – दो बार तो मैंने उसे अपना लन्ड भी पकड़ा दिया था लेकिन पता चलते ही उसने तुरंत उसे छोड़ दिया था. लेकिन हम ज्यादा कुछ कर नहीं पाते थे क्योंकि घर वाले जल्दी ही आ जाते थे.

एक बार मेरे मम्मी – पापा ने शहर से बाहर जाने का प्लान बनाया. वो 4 दिन बाद लौटने वाले थे. यह मेरे लिए मौका था. फिर उस दिन जब मैं उसके घर गया तो उससे बात करने के दौरान बातों ही बातों में मैंने उसे बताया कि मम्मी – पापा बाहर जाने वाले हैं और हम इस मौके का फायदा उठा कर सेक्स कर सकते हैं. लेकिन उसने तो सेक्स के लिए साफ मना कर दिया. इससे मैं दुखी हो गया. फिर आखिर में वो कुछ न करने की शर्त पर मेरे घर आने के लिए तैयार हो गई.

इसके बाद मैं अपने घर आ गया और नियत समय पर मम्मी – पापा को स्टेशन छोड़ आया. इसके बाद घर आते ही मैंने उसे बुला लिया. वो थोड़ी ही देर में आ गई. उस दिन उसने लाल रंग का टॉप और व्हाइट कलर का घुटने तक आने वाले शॉर्ट्स पहन रहा था. जैसे ही वह आई मैंने उसे अंदर खींच लिया और दरवाजा लॉक करके उसे देखने लगा.

थोड़ी देर तक उसे देखते रहने के बाद मैंने पीछे से पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा. साथ ही मैं उसके 30 के साइज के बूब्स भी दबा रहा था. पहले तो वो थोड़ा पीछे हटी लेकिन फिर मेरा साथ देने लगी.

थोड़ी देर बाद मैंने उसे उठाया और अपने रूम में ले गया. जब मैं उसे ले जा रहा था तो वह प्यार से मेरे सीने पर मुक्के मारने लगी और बोलने लगी कि जान प्लीज कुछ उल्टा – सीधा मत करो! लेकिन अब मैं कहां मानने वाला था. लेकिन उसे सांत्वना देते हुए बोला – जान, चिंता न करो, कुछ नहीं करूंगा.

फिर ले जाकर मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया और किस करने लगा. मेरे किस करने से वो धीरे – धीरे गर्म होने लगी और आहें भरने लगी. थोड़ी देर बाद वह काफी उत्तेजित हो गई और सब भूल कर उसने मेरा टी – शर्ट उतार दिया. फिर मैंने भी उसका टॉप उतार दिया और उसे अपने ऊपर लिटा लिया. इसके बाद फिर मैंने अपना लोअर भी उतार दिया और उसे किस करने लगा.

मेरे ऐसा करने से वो बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी और अब मुझे बेहिसाब चूमे जा रही थी. फिर उसने अपना नीचे ले जाकर मेरे लन्ड को पकड़ लिया और मसलने लगी. उसका हाथ लगते ही लन्ड और भी ज्यादा कड़क हो गया.

ये सब करीब 30 मिनट तक चलता रहा. फिर मैंने उसका लोअर भी उतारने लगा. इस पर वो मना करने लगी लेकिन मैं नहीं माना और उसे नीचे खिसका दिया. अब वह केवल और केवल ब्रा – पैंटी में थी. फिर मैंने पहले उसकी ब्रा और उसके बाद उसकी पैंटी भी उतार दी. अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी.

फिर मैं भी अपनी अंडर वियर और बनियान उतार के पूरा नंगा हो गया. इसके बाद नीचे जाकर मैंने उसकी छोटी – छोटी झांटों वाली अनछुई चूत पर अपनी जीभ लगा दी और चाटने लगा. उसे बहुत मज़ा आ रहा था और अब वह ‘आह आह’ करके सिसकियां ले रही थी.

फिर मैंने अपना मुंह हटा कर 2 उंगलियां उसकी चूत में डाल दी और तेजी के साथ अंदर – बाहर करने लगा. ऐसा करने से वो काफी उत्तेजित हो गई और फिर थोड़ी देर बाद मुझे कस के पकड़ लिया और झड़ गई.

इसके बाद उसने मुझे ऊपर खींच लिया और सब कुछ भूल के बोली – अब और कितना तड़पाओगे, जल्दी डालो न अंदर.

दोस्तों, चाहता तो मैंभी यहीथालेकिन उससे चुदाई न करने की बात कही थी तो मैं पहल नहीं करना चाहता था. लेकिन जब उसने अंदर डालने को कहा तो मैंने एक बार उससे फिर पूछा. फिर जब उसने दोबारा हां किया तो मैंने बिना देर किए उसकी टांगें फैलाई और अपना लन्ड पकड़ के उसकी चूत पर सेट किया और धीरे – धीरे अंदर करने लगा.

पहली बार उसकी चूत में इतना मोटा सामान अंदर गया था इसलिए उसे दर्द होने लगा और दर्द की वजह से वह चिल्लाने लगी और लन्ड बाहर निकालने को कहने लगी. लेकिन उसकी बात पर ध्यान दिए बिना ही मैंने 2-3 झटकों में अपना पूरा लन्ड उसकी चूत के अंदर डाल दिया. दर्द की वजह से चीख उठी और उसकी आंखों से आंसू आने लगे.

फिर मैं धीरे – धीरे लन्ड अंदर – बाहर करने लगा. अब उसे भी मज़ा आने लगा था और वह जोर – जोर से चिल्ला रही थी. साथ में अपनी गांड उठा – उठा के चुद भी रही थी. धीरे – धीरे मेरी स्पीड बढ़ती गई. करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल किया और मुठ मारते हुए अपना सारा माल उसके पेट पर निकाल दिया.

फिर उसने बड़े प्यार से मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी. इसके बाद उसने अपने कपड़े पहने और निकल गई. दोस्तों, इस तरह हम अगले दो सालों तक साथ रहे और चुदाई का खूब मज़ा लिया. एक बार तो मुझसे प्रेग्नेंट भी हो गई थी लेकिन किसी को पता नहीं चलने पाया.

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