मस्त कमसिन हसीना प्रिया

18 वर्ष की उम्र जीवन में बहुत सारे मोड़ लेके आती है. ये उम्र का ऐसा पड़ाव है जहाँ कैरियर, शारीरिक बदलाव व किस्मत सभी में परिवर्तन एक साथ आता है. ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ. जब मैं उम्र की इस दहलीज पे पहुंचा तो कुछ ऐसा घटित हुआ जिससे मैं जीवन के पहले अभूतपूर्व सुख का आनन्द उठा पाया…

हेलो दोस्तों! आप सभी को मेरा नमस्कार!

समझ में नहीं आता की कैसे लिखूं? क्योंकि ये मेरी पहली कहानी है, जो आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. यदि कोई गलती हो जाये तो माफ़ कीजियेगा.

मैं राहुल चक्रवर्ती! पटना, बिहार का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 26 साल है. मैं दिखने में स्मार्ट नहीं तो बुरा भी नहीं हूँ लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आती कि लड़कियां मुझसे पट कैसे जाती हैं? खैर कारण जो भी हो, मैं अपनी कहानी पे आता हूँ.

बात उन दिनों की है जब मैं 18 साल का था और सेक्स के बारे में कुछ भी पता नहीं था. फिर भी जवान तो हो ही चुका था. मेरी इन्टर की परीक्षाएं ख़त्म हो चुकी थीं और मैं घर पर यूँ ही टाइम पास कर रहा था. घर पर मन नहीं लग रहा था. सो मैंने सोचा कि नानी के गाँव घूम के आ जाऊं. मम्मी से पूछ कर मैं नानी के गाँव के लिए निकल पड़ा. मैं वहां लगभग 11 बजे दिन में पहुँच गया. वहां सभी हमें देखकर बहुत खुश हुए क्योंकि मैं बहुत दिनों के बाद गया था.

नानी के घर में लगभग 8- 10 लोग रहते हैं जिसमे मेरे मामा की लड़की प्रिया भी थी. प्रिया मुझसे मात्र 1 साल छोटी थी और दिखने में मस्त पटाखा थी. हम दोनों में खूब जमती थी. वो मुझे भैया कहा करती थी और मैं भी उसे छोटी बहन ही कहा करता था, लेकिन शायद किस्मत में कुछ और ही लिखा था.

नानी के घर पहुँचने के बाद सभी से खूब हंसी-मजाक हुआ, खाना-पीना हुआ और मैं कुछ देर के लिए आराम करने लगा. फिर जब शाम हुयी तो अपने ही हमउम्र एक दूसरे मामा के साथ घूमने निकल गया. लौटने पे देखा कि सभी बारामदे में बैठकर टी वी देख्र रहे थे जिसपे कोई फिल्म आ रही थी. मैं भी सबके साथ वहीँ बैठ गया.

थोड़ी देर बाद ही बिजली गुल हो गयी और काफी अँधेरा हो गया. मैं मोबाइल का टॉर्च जलाने के लिए उसे इधर-उधर ढूँढने लगा. इसी दौरान झटके से मैं प्रिया से टकरा गया…. क्या चूची थी यार? बस पूछो मत! लेकिन उस समय मुझे बुरा लगा. इस बीच मेरा मोबाइल भी मिल गया और मैंने टॉर्च जला दी. प्रिया भी दो लैंप जलाकर ले आई. एक हम लोगों के पास रख दिया और एक साथ लेकर अपने कमरे में पढाई करने चली गई. मैं बाकी लोगों से बातें करने में मशगूल हो गया तभी प्रिया ने आवाज दी – भैया! एक सवाल मुझसे हल नहीं हो रहा. जरा बता दीजिये!

मैंने प्रिया को सवाल हल करना बता दिया. इसके बाद हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे. लेकिन रह-रह कर मुझे प्रिया की चूचियों के साथ वो टक्कर याद आ रही थी. इस समय भी उसकी चूचियां मेरे सामने थीं और उन्हें देखकर शैतान मेरे दिमाग में घर कर रहा था. मैं तिरछी निगाहों से कभी कभी उसकी चूचियों के उभार को देखकर मन ही मन रोमांचित हो रहा था.

बातें करने के दौरान मेरा हाथ उसकी जांघों को छू रहा था. ये मुझे एक अजीब से आनंद का अनुभव करा रहा था इसलिए मैंने भी जान-बूझ कर हाथ नहीं हटाया. फिर मैंने उस टक्कर के लिए प्रिया को सॉरी बोला तो प्रिया बोली – कोई बात नहीं! अरे भाई, अँधेरा था इसलिए हो गया.

कुछ देर बाद मामी के आवाज देने के बाद हम सभी खाना खाने चले गए. खाना खाने के बाद प्रिया अपने कमरे में आराम करने चली गयी. अभी तक मामा के दोनों छोटे लड़कों के सिवाय कोई भी सोया नहीं था. मै भी घूमते- घूमते प्रिया के कमरे में चला गया, जहाँ प्रिया चारपाई पे आराम कर रही थी. मैं भी उसकी चारपाई पे उसके पेट से सट कर बैठ गया और उससे बातें करने लगा. बातें करते –करते जाने कब मेरा हाथ उसकी चूचियों से सटने लगा. लेकिन इसका एहसास मुझे कुछ देर के बाद हुआ. खैर, मैंने हाथ हटाया नहीं बल्कि धीरे- धीरे पूरी चूची पे हाथ रख दिया. प्रिया भी इसका विरोध नहीं कर रही थी, शायद उसे भी अच्छा लग रहा था. मैंने प्रिया से पूछा- तुम कहाँ सोती हो?

तो उसने बताया कि रोजाना तो वो कमरे में ही सोती है, लेकिन आज गर्मी ज्यादा है और बिजली भी नहीं है इसलिए बाहर बारामदे में सोऊंगी .
अब सभी सोने जा रहे थे इसलिए मैं भी प्रिया को गुड नाइट बोलकर सोने चला आया. मैं बारामदे में ही अपने हमउम्र मामा के साथ सोने चला गया. कुछ देर तक बातें करने के बाद मामा सो गया, लेकिन मेरी आखों में नींद कहाँ? लेकिन उस समय मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा जब प्रिया भी मेरे बिस्तर के सामने वाले बिस्तर पे सोने के लिए आ गयी. मेरे दिमाग में शैतानी कीड़ा फिर से चलने लगा.

अब तक सभी लोग सो चुके थे और मैं प्रिया के पास जाने को बेताब हो रहा था. लेकिन साथ में मेरी गांड भी फट रही थी कि अगर मामा जाग गया तो कहीं का नहीं रहूँगा. मैंने हिम्मत करके मैं चुपके से उठा और प्रिया को जगाने की कोशिश करने लगा लेकिन कुछ देर तक साली हिली भी नहीं. दोबारा कोशिश करने पे अचानक से प्रिया ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया. शायद वो पहले से ही जगी हुयी थी लेकिन नाटक कर रही थी. खैर हमदोनों ने एक दुसरे को बाँहों में कस लिया और चुम्मा चाटी शुरू हो गई.

थोड़ी देर तक एक दूसरे को चूमने के बाद हमने प्रिया से पूछा कि –क्या तुम मुझे पसन्द करती हो?

उसने हाँ कहा और फिर मुझसे भी वही सवाल दोहराया जिसका उत्तर मैंने भी हाँ में दिया.

गार्मि के कारण प्रिया शर्ट और स्कर्ट पहनी हुयी थी. मैंने धीरे धीरे करके प्रिया की शर्ट के बटन खोल दिए और उसकी दोनों चूचियां बाहर आ गयीं. मैं पागलों की तरह उन्हें चूसने लगा. अब प्रिया भी जोश में आ गयी और मेरा लंड पकड़ कर आगे पीछे करने लगी. मेरा भी हाथ अब तक्क उसकी पैंटी में पहुँच चुका था.
हम दोनों एक दूसरे में घुसे जा रहे थे. प्रिया ने भी मेरा पैन्ट खोल कर मेरा लंड अपने हाथ में लिया हुआ था. और जोरों से उसे आगे पीछे किये जा रही थी. मैं भी उसकी पैंटी को खोल ककर उसके बुर को अपनी उँगलियों से रगड़े जा रहा था. प्रिया की साँसे तेज हो रही थी और वो आहें भरे जा रही थी. बीच-बीच में वो मुझे गालियाँ भी बक रही थी जिससे मेरा जोश दुगुना हो रहा था. फिर उसने कहा – अपना लंड मेरी बुर में घुसाओ न. पता नहीं क्या हो रहा है?

मैंने उसे नीचे लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गया. कपड़े तो सारे उतर ही चुके थे. मैं अपना लंड उसकी बुर में घुसाने की कोशिश करने लगा. लेकिन बार- बार लंड फिसल जा रहा था. फिर मैंने उसकी बुर पे थोड़ा थूक लगाया और फिर से अपना लंड घुसाने लगा. लेकिन इस बार प्रिया चिल्लाने लगी. शायद अब मेरा लंड उसकी बुर में घुसने लगा था. मैंने और जोर लगाना शुरू किया और धीरे धीरे पूरा लंड उसकी बुर में पेल दिया. प्रिया रोने लगी और कहने लगी – प्लीज मेरी जान! अपना लंड निकालो न! वरना मैं मर जाउंगी.

लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था? पहली बार चुदाई के समय यदि एक बार मर्द अपना लंड बुर में घुसाने के बाद निकाल ले तो फिर लड़की दुबारा चुदाई नहीं करने देगी.

कुछ देर बाद जब प्रिया शांत हो गयी ततो हमने लंड को उसकी बुर में आगे पीछे करना शुरू किया. प्रिया को भी अब मजा आने लगा और उसने भी साथ देना शुरू कर दिया. मेरे होंठ उसके होठों पर, दोनों हाथ उसकी चूचियों पर और लंड उसकी बुर में, जन्नत इसको नहीं तो किसको कहेंगे.

गज़ब का चोदा-चोदी हो रहा था. हम दोनों तो बस एक दुसरे में समा जाना चाहते थे. उस समय कितनी ख़ुशी मिल रही थी सोच नहीं सकते. बस इतना समझ लीजिये कि इसके सामने दुनियां की साड़ी ख़ुशी फीकी थी. पेलम पेल का खेल अपने चरम पर पहुँच गया और मेरा बदन अकड़ने लगा. मेरे लंड से कुछ गर्म गर्म निकलने लगा, ये वीर्य था ….प्रिया ने भी मुझे कस के जकड़ा हुआ था.

इस तरह चुदाई का खेल ख़त्म हो गया. हां दोनों ने इक दूसरे को लम्बा किस किया और अलग हो गए. फिर मैं अपने बिस्तर पे आकर सो गया.

सुबह जब मैं उठा तो प्रिया से नजरें नहीं मिला पा रहा था. फिर समय के साथ-साथ सब ठीक हो गया. हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे और जब भी मौका मिलता, खूब चुदाई करते.

दोस्तों ! आप सभी को मेरी कहानी कैसी लगी? जरूर बताइयेगा. क्योंकि मैं फिर अपनी बहुत सारी कहानियाँ लेकर आऊंगा. वो भी सच्ची.

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