मौसेरी बहन को घर में चोदा

मेरी मौसेरी बहन एक बार हमारे घर आई थी. रात को मैंने उसके बूब्स पर हाथ फेर दिया तो उसने घर में बता दिया और फिर मेरी खूब ठुकाई हुई. बाद में मैंने कैसे उसकी चुदाई की पढ़ें इस कहानी में…

आप सभी को मेरा नमस्कार! मेरा नाम अंकित शर्मा है और मैं यूपी का रहने वाला हूँ. अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली और रियल स्टोरी है. ये कहानी मेरे और मेरी मौसी की लड़की के साथ हुए सेक्स संबंध पर आधारित है. मैं 2007 से अन्तर्वासना की कहानी पढ़ रहा हूँ. मेरी यह कहानी करीब 1 साल पहले की है.

हुआ यूं कि मेरी मौसी और मौसा अपनी लड़की नेहा के साथ मेरे घर एक प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आये थे. नेहा 19 साल की थी. अगले दिन उन्हें जाना था तो उन्हें बाइक पर स्टेशन तक छोड़ने का जिम्मा मुझे दिया गया क्योंकि हमारे घर में और कोई बाइक नहीं चला पता.

जब वे तैयार हो गए तो मैंने बाइक निकाल कर स्टार्ट की. इसके बाद बीच नेहा दोनों तरफ पैर करके बैठ गई. उसके पीछे मौसी. दोस्तों, मेरे दिमाग में उस दिन से पहले नेहा के बारे में कोई गलत खयाल नहीं आया था.

फिर मैंने बाइक स्टार्ट की और चल दिया. रास्ते में ब्रेकर आया. उसे देखते ही मैंने अचानक ब्रेक लगाई. इससे नेहा झटके से मेरी ओर आ गई और उसके बूब्स मेरी पीठ से दब गए. यह महसूस होने के बाद मैं आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा था.

अब मेरा मूड ही बदल गया था. मैं नेहा के बूब्स दबाना चाह रहा था लेकिन मजबूर था. एक तो वो मेरी मौसेरी बहन थी, दूसरे मौसी भी हमारे साथ ही बैठी थीं. उन्हें स्टेशन पर छोड़ने के बाद मैं मौसा जी को लेने वापस घर आया.

तब मम्मी ने मौसा को मना लिया था कि नेहा को कुछ दिन हमारे घर पर ही छोड़ दें. फिर मैं उन्हें लेकर स्टेशन पहुंचा. मैंने मौसी से नेहा को छोड़ने वाली बात बताई.पहले तो वो तैयार नहीं हो रही थीं लेकिन फिर मौसा के कहने पर मान गईं.

इसके बाद मौसा – मौसी अपने घर चले गए और मैं नेहा को लेकर अपने घर वापस आ गया. दोस्तों, मैंने अभी आप सब को उसके बारे में नहीं बताया. वह दिल्ली में रहती थी और काफी मॉडर्न लड़की थी.

जब वह आई तो उसे सोने के लिए मेरा कमरा दिया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे कमरे में ही कंप्यूटर था और फ्री होने पर वो उस पर ऑनलाइन मूवी देखती थी. मैं भी उसी पर अपना काम करता था.

एक दिन जब वो सो गई तो मैं अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ने लगा. कहानी पढ़ते – पढ़ते मेरा मूड बदलने लगा. तभी मेरी नज़र सोती हुई नेहा की तरफ गई. मैंने देखा कि नेहा के बूब्स उसके कपड़ों से बाहर नज़र आ रहे थे.

यह देख कर मेरा दिमाग खराब होने लगा और नेहा के प्रति मेरे विचार भी बदलने लगे. इसके बाद मैंने तुरन्त लाइट बन्द कर दी थी और अपने बिस्तर पर लेट के मुठ मारने लगा.

अब मेरे दिमाग में नेहा को चोदने का भूत सवार होने लगा. फिर मैं चुपचाप नेहा के बगल में लेट गया. इसके बाद मैं धीरे – धीरे उसकी कमर पर हाथ रख कर घुमाने लगा. मेरा हाथ धीरे – धीरे उसके बदन पर ऊपर की तरफ बढ़ रहा था. इस दौरान वो कई बार करवट बदल चुकी थी.

अब मेरा हाथ उसकी ब्रा तक पहुंच गया था और मैं उसे खोलने लगा. मैं उसकी ब्रा का हुक खोल पाता उससे पहले ही वो उठ गई और बोली – ये क्या कह रहे हो? उसको जगा और मुझसे सवाल करता देख मेरे होश उड़ गए. मैं डर गया था कि अगर अब इसने मम्मी से बता दिया तो मेरी तो वॉट लग जाएगी.

अब मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था. फिर मैंने उसे सॉरी कहा और बोला कि मुझे तुम्हारे बूब्स अच्छे लगते हैं और मैं उन्हें दबाना चाहता हूँ. इस पर वो गुस्सा करते हुए बोली – बाहर जाओ नहीं तो मैं मौसी को बता दूंगी.

उसकी बात सुन कर मैं बहुत डर गया. फिर मैं बाहर आया और छत पर जाकर सो गया. सुबह जब मैं उठा और वो मेरे सामने से गुजरी तो मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था. मेरे नीचे आने से पहले ही उसने मम्मी को बता दिया था और मम्मी ने मेरी जब कर वॉट लगाई.

अगले दिन वो अपने घर चली गई. फिर वो 4 महीने बाद वापस हमारे यहां आई. वो हमारे यहां अपना पेपर देने आई थी. उसने हमारे यहां इंटरमीडिएट में एडमिशन ले लिया था और उसी का एग्जाम था जिसे वो देने आई थी.

तब भी मैं उससे नज़र नहीं मिला रहा था. कुछ दिन ऐसे ही बीत गए. फिर मैंने उससे सॉरी कहा. इस पर उसने मुझसे पूछा कि तुम्हें किसी ने कुछ नहीं कहा. तब मैंने उसे बता दिया कि मम्मी ने मेरी कितनी वॉट लगाई थी. उस दिन बात आई गई हो गई.

एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर नेट चला रहा था. फिर वो भी मेरे पास आ गई और बोली कि मुझे भी फेसबुक चलाना है. फिर मैंने अपना काम बन्द किया और कंप्यूटर को ऑफ कर दिया.

इसके बाद मैं उठ कर जाने लगा तो उसने कहा कि ये अच्छी बात नहीं है. इस पर मैंने कहा कि तुमने जो किया था वो अच्छा था? सॉरी बोलने के बाद भी शिकायत की और मुझे डांट खिलाई. तब उसने सॉरी बोला और कहा कि वो गलत भी तो था. उसने कहा कि उससे गलती हो गई उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था. लेकिन फिर भी मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की और सोने चला गया.

फिर सुबह उठा. उस दिन उसका पेपर था. मुझे उसे छोड़ने जाना था. अंदर कमरे में वो अपने पेपर की तैयारी कर रही थी. फिर मैं कमरे में गया और अनजान बनते हुए उसकी गांड को टच कर दिया. इस पर उसने कुछ नहीं कहा. जिससे मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई.

दूसरी टाइम उसका पेपर था और दोपहर के वक्त वो पेपर देने जाने के लिए तैयार हो रही थी. जब मैंने उसे देखा तो इशारा किया कि वो बहुत हॉट लग रही है. इस पर उसने कुछ नहीं कहा बस स्माइल पास कर दिया.

फिर मेरे साथ पेपर देने चली गई. शाम में पेपर देकर जब वो निकली तो कुछ बदली – बदली सी लग रही थी. वापस आते समय वह मुझे कुछ ज्यादा ही चिपक कर बैठी थी और उसके बूब्स लगातार मेरी पीठ पर दब रहे थे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वो जान बूझकर कर अपने बूब्स को मेरी पीठ से दबवा रही थी. घर आने के बाद उसने मम्मी से कहा कि मौसी बेसमेंट में परदा नहीं लगा है मैं लगा दूं? इस पर मम्मी ने कहा ठीक है लगा दो.

इसके बाद मैं और नेहा परदा लगाने बेसमेंट में गए. वहां जाने के बाद मैंने उसे पहले टांड पर चढ़ने को कहा. जब वह चढ़ रही थी तो मेरे सिर उसकी गांड के पास था. मैंने मौके का फायदा उठाया और चेहरा ऊपर कर दिया. जिससे मेरे होंठ उसकी गांड से टच हो गए. आप इसे किस करना भी समझ सकते हैं.

फिर मैं भी चढ़ गया. अब हम परदा लगाने लगे. अचानक मेरे हाथ उसके बूब्स पर लग गए. तब मैंने दबाव बनाकर दबा दिया. उसे महसूस जरूर हो गया था कि ये मैंने जान बूझकर किया है लेकिन इस पर उससे कुछ नहीं कहा. मुझे लगा कि अब ये तैयार है. फिर मैंने उसे सीधा किया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर लिप किस करने लगा.

मेरे ऐसा करने पर वो भी मेरा साथ देने लगी. चूंकि बेसमेंट में कोई आता जाता नहीं था इसलिए मैंने मौके का फायदा उठाया और उसके कपड़े उतारने लगा. अब वो बिल्कुल नंगी थी और मेरे सामने टांड पर पड़ी थी. वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी.

फिर उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. इस पर मैंने उसके बूब्स पर मुंह लगाया और चूसने लगा. इस पर वो मोन करने लगी. उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी. साथ ही वह कह रही थी कि भाई चोद दे अपनी बहन को. मिटा दे मेरी चूत की खुजली. बना ले मुझे अपनी रखैल.

अब मैंने देर न करते हुए उसकी चूत पर अपना लंड सेट किया और जोर से धक्का दिया. इससे मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया और वो चीख पड़ी. फिर मैंने तुरन्त ही उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया. इससे उसकी चीख बाहर नहीं जा पाई.

फिर मैंने एक जोरदार झटका दिया. इससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. अब हम धीरे – धीरे हिलने लगा. फिर जैसे ही उसका दर्द कुछ कम हुआ वो भी धीरे – धीरे अपनी गांड उठाने लगी. यह देख मैं जोर – जोर से धक्के लगाने लगा.

अब उसे बहुत मज़ा आने लगा था और वो सिसकारियां लेने लगी थी. उसके मुंह से ‘आह आह ओह ओह’ की आवाजें आ रही थीं. फिर करीब 20 मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और कुछ धक्कों के बाद उसके पेट पर अपना माल छोड़ दिया. इस दौरान वो 4 बार झड़ चुकी थी.

तभी मम्मी ने आवाज़ लगाई कि परदा लगा कि नहीं. तब नेहा ने कहा कि हां मौसी बस लग ही गया है. इसके बाद हमने कपड़े पहने और ऊपर आ गए. अब हम दोनों बहुत खुश थे. उस दिन के बाद जब भी हमें मौका मिलता या हमारा मन होता तो हम चुदाई कर लेते. एग्जाम खत्म होने के बाद वो अपने घर चली गई.

अपनी अगली कहानी में मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी सगी बहन को चोदा. तब तक इस कहानी का मज़ा लीजिए. कहानी कैसी लगी? मेल करके मुझे जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी – [email protected]

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