मौसी ने चुदक्कड़ बना दिया

अपनी गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने मामा के यहां गया था. उस टाइम मेरी मौसी भी वहीं थीं. मौसी की हाल ही में शादी हुई थी. शाम को जब हम बैठे बात कर रहे थे तो कुछ ऐसा हुआ कि हमारा रिलेशन बदल गया और हम एक – दूसरे की वासना को शांत करने का जरिया बन गए…

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार! मेरा नाम मोनू है और मैं हरियाणा के भिवानी जिले से आज आपके सामने मेरी पहली कहानी लेकर हाजिर हुआ हूं, उम्मीद है आप सब को मेरी यह कहानी जरूर पसंद आएगी.

बात उस समय की है, जब मैंने 12वीं में था. जब मेरे बोर्ड के एग्जाम खत्म हो गए और छुट्टियां शुरू हो गईं तो छुट्टी बिताने के लिए मैं अपने मामा के यहां चला गया. वहां पर मेरी एक मौसी भी आई थीं. उनका नाम मनीषा था.

मनीषा मौसी शादीशुदा थीं और उनकी शादी हुए अभी एक ही साल हुआ था. वो बहुत खूबसूरत दिखती थीं, इतनी कि कोई भी एक बार देख ले तो अपने लंड पर काबू नहीं रख पाएगा. और तब तक उसका लंड शांत नहीं होगा जब तक कि मुठ मार कर उसका पानी बाहर न निकाल दे.

अब आप लोगों का समय खराब ना करते हुए मैं सीधा अपनी कहानी पर आता हूं. जब मामा के घर पहुंचा तो देखा कि मौसी भी वहां आयीं हुईं हैं. उन्हें देख कर मैं खुश हो गया. हालांकि, तब तक मेरे मन में उनके बारे में कुछ भी गलत नहीं चल रहा था.

फिर जैसे ही शाम हुई वो मेरे पास आ कर बैठ गईं और बातें करनी लगीं. इसी बीच बातों ही बातों में उन्होंने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया. मैं तो बिल्कुल डर गया कि आखिर ये क्या हुआ और कैसे हुआ? हालांकि, मैंने उन्हें कुछ कहा नहीं. अब वह मेरे लंड को सहलाने लगीं. उनका यह सब करना मुझे अच्छा लग रहा था. लेकिन उन्होंने मुझसे कुछ कहा नहीं.

थोड़ी देर बात करने के बाद हम चले गए. फिर शाम को हमने खाना खाया और सोने के जुगाड़ में लग गए. मैंने एक कमरे में अपनी खाट बिछा ली और सोने लगे. थोड़ी देर बाद मौसी ने भी अपनी खाट मेरे पास ही डाल ली.

फिर जब सब सो गए तो वह मेरे और करीब आईं और उन्होंने मेरे हाथों को पकड़ लिया. अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई और फिर मैंने उनका साथ देना शुरू कर दिया.

हम अलग – अलग खाट पर थे. इसलिए मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उनके बूब्स को पकड़ लिया और फिर धीरे – धीरे दबाना शुरू कर दिया. अब तक उनका भी हाथ मेरी पैंट तक आ चुका था. मैंने पैंट की ज़िप खोल कर अपना लंड उनके हाथ में पकड़ा दिया. अब वो मेरे लंड से खेल एहि थीं और मैं उनके बूब्स दबा रहा था. कभी – कभी मैं तेजी से उनके बूब्स को मसल देता तो वो चिहुंक उठतीं.

मैं उन्हें चोदना चाहता था लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उनकी खाट पर जाऊं और अगला स्टेप उठाऊं. हम काफी देर तक एक – दूसरे के अंगों को मसलते ही रहे और उस रात हमें सिर्फ इसी से संतोष करना पड़ा. हमारे बीच और कुछ नहीं हो पाया.

फिर कुछ देर बाद हम सो गए. ऐसे ही रात कट गई. सुबह हुई. अब मेरे मामा और मामी को काम के लिए खेत में जाना था. और उनके जाने के बाद घर पर मैं और मेरी मौसी ही रहने वाले थे. यह जान कर मैं बहुत खुश हुआ. अब मुझे लगने लगा कि आज पहली बार मुझे चूत मिलेगी.

फिर हमने नाश्ता किया और उसके बाद मेरे मामा और मामी खेत चले गये. मामा – नामी के जाने के बाद मैंने घर के सारे दरवाजे बंद कर दिए और फिर मैंने जाकर मनीषा मौसी अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसे किस करने लगा.

वो भी मेरा साथ दे रही थी. मैं पागलों की तरह उसे चूमे जा रहा था. करीब 15 मिनट किस करने के बाद वो बोली – बस किस ही करता रहेगा या कुछ और भी करेगा!

उनके मुंह से यह सुन कर मैंने कहा – मेरी जान तू चिंता मत कर, आज मैं तेरी हर मुराद पूरी कर दूंगा. इतना कह के मैंने उनका सूट और सलवार उतार दिया. अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में ही थीं. इन छोटे कपडों में बिल्कुल अप्सरा लग रही थीं.

उन्हें देख के जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो फिर मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए. बूब्स दबाते – दबाते थोड़ी देर में मैंने उनकी ब्रा भी निकाल दी. अब वो ऊपर से पूरी नंगी हो गई थीं. उनके सफेद बूब्स के ऊपर मटर के दाने जैसे निप्पल और उसके अगल – बगल 1 रुपये के सिक्के जैसे भूरे रंग का घेरा देख के मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैं उनके बूब्स पर टूट पड़ा और उनके बूब्स चूसने लगा.

दूसरी तरफ मौसी भी अब मेरे लंड तक पहुंच चुकी थीं और उसे पकड़ के हिलाने लगीं. उनके हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड और कड़क हो गया. अब मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में पहुंच गया हूं. फिर उन्होंने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मैंने भी खींच के उनकी पैंटी निकाल दी.

अब हम दोनों एक दम नंगे हो चुके थे और हमारी उत्तेजना अपने चरम पर थी. फिर जब उनसे कंट्रोल नहीं हुआ तो वो बोलने लगीं कि अब रुका नहीं जाता, बस एक बार जल्दी से लंड चूत में डाल दे. लेकिन दोस्तों, मैं जल्दबाजी नहीं करना चाहता था.

फिर मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया. उनकी चूत बहुत ही मस्त थी. चूत सहलाते हुए मैंने उनको कहा कि मेरा लंड मुंह में लो तो वो मना करने लगी. तब मैंने कहा कि अगर मुंह में लोगी तो फिर मैं भी आपकी चूत चाटूंगा

फिर उन्होंने मेरा लंड मुंह में ले लिया और लॉलीपाप की तरह चूसने लगीं. अब देर न करते हुए मैं 69 की पोजीशन में आ गया और उनकी चूत को चाटने लगा. मैं पहली बार चूत चाट रहा था इसलिए शुरू में थोड़ा अजीब लगा पर थोड़ी देर बाद मजा आने लगा.

करीब 15 मिनट तक उन्होंने मेरा लंड चूसा और मैं उनकी चूत चाटता रहा. फिर उसने कहा कि अब तो डाल दे कितना तड़पायेगा? अब मैंने भी देर करना ठीक न समझा और उनको नीचे लेटा कर खुद ऊपर आ गया. इसके बाद मैंने उनकी चूत पर अपना लंड रख दिया और फिर उसे प्यार से चूत पर घिसने लगा.

मेरे ऐसा करने से मनीषा मौसी और तड़पने लगीं. तब मैंने आराम – आराम से उनकी चूत में अपना सुपाड़ा घुसा दिया और फिर धीरे – धीरे करके पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया. मेरा पूरा लंड चूत के अंदर जाते ही उनकी चीख निकल गयी.

चूंकि घर में कोई था नहीं इसलिए मैंने उनके चीख की परवाह न करते हुए धीरे – धीरे लंड को आगे – पीछे करना शुरू कर दिया. अब उनको भी मजा आने लगा था. अब हम दोनों इस चरम सुख का आंनद ले रहे थे.

फिर थोड़ी देर बाद वो झड़ गईं और मुझे रुकने के लिए बोलने लगीं. मैं कुछ देर के लिए रुक गया. थोड़ी देर बाद मैंने फिर से उनको चोदना शुरू किया. करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद अब मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने उनसे बोला कि मैं झड़ने वाला हूं कहां निकलूं? तो उन्होंने कहा कि मेरे अंदर ही छोड़ दो. फिर मैंने उनके अंदर ही अपना माल छोड़ दिया.

इसके बाद मैं उनके ऊपर ही पड़ गया और 10 मिनट तक हम ऐसे ही पड़े रहे. फिर उस दिन हमने दो बार और सेक्स किया. आज तक हमें जब भी मौका मिलता है मैं उनकी चूत को अपने लंड का स्वाद चखा देता हूं. उन्होंने अब मुझे पूरा खिलाड़ी बना दिया है और अपने साथ – साथ कुछ दूसरी कुंवारी और शादीशुदा लड़कियों की भी चूत मुझे दिलाई.

दोस्तों ये मेरी पहली कहानी थी. आप लोगों को कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताना. मेरी मेल आईडी – [email protected]

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *