मेरी और भाभी की अधूरी चुदाई

मैं सीढ़ियों पर जाकर छुप गया और उस आवाज़ को ध्यान से सुनने लगा. जब मैंने ध्यान से सुना तो पाया कि ये तो भाभी की आवाज़ थी. यह जान कर मैं और भी ज्यादा उत्सुक हो गया कि इतनी रात गए भाभी कहां और किससे बात कर सकती हैं. यही जानने के लिए मैंने उनकी बातों की ओर और ध्यान लगाया तो पाया की भाभी अजीब – अजीब बातें कर रही थी…

नमस्कार दोस्तों! मेरा नाम राहुल है और मैं कोटा से कोचिंग कर रहा हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच है. मैं ये तो नहीं कहूँगा कि मेरे लंड की लंबाई 9 इंच या 10 इंच है क्योंकि मैं ये नहीं मानता कि सेक्स में औरतों को संतुष्ट करने के लिए 10 इंच लम्बे लंड की ही जरुरत होती है. अगर आप अच्छे से फोर प्ले करो तो आप 4 इंच के लंड से भी किसी को संतुष्ट कर सकते हो. वैसे मेरे लंड की लंबाई 5.5 इंच होगी.

अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए सीधे अपनी स्टोरी पर आता हूँ. ये कहानी मेरे और मेरी मकान में रहने वाली एक भाभी के बीच घटी एक ऐसी घटना है जिसको मैं अपनी पूरी लाइफ में कभी नहीं भूल पाउँगा.

ये घटना पिछले दीवाली के दौरान घटी थी. दोस्तों चूँकि कोटा में दीपावली की छुट्टियां 10 दिनों की होती है. इस दौरान सभी छात्र अपने – अपने घर चले जाते हैं. लेकिन इस बार मैं कुछ दिन पहले ही घर से आया था तो इस बार मेरा मन घर जाने का नहीं किया. इसलिए मैं वहीं अपने रूम पर ही रहने वाला था.

कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपसे उस भाभी से परिचय करा दूँ जिसके साथ ये सब हुआ. उनका नाम प्रिय था और नाम के ही अनुसार वो थी भी बहुत प्यारी. भगवान ने उनके एक – एक अंग को बड़ी ही फुरसत से तराशा था. अगर कोई उन्हें देख ले तो एक बार उसकी आह निकल ही जाती थी.

वो थी ही इतनी खूबसूरत कि कोई भी उन्हें देखने के बाद ठोकने की जरूर सोचेगा. फिर मैंने तो अभी – अभी कुछ दिन पहले ही जिंदगी के 18 साल के महत्वपूर्ण पड़ाव को पार किया ही था. अब तो आप समझ ही सकते हैं कि मेरे अंदर क्या फीलिंग्स होती होगी.

वो मेरे रूम के एक दम सामने वाले रूम में रहती थी. वो वहां अपने पति और अपनी 3 साल की एक बेटी के साथ रहती थी. दोनों का स्वभाव बहुत ही अच्छा था. इसलिए हम लोग जल्दी ही आपस में घुल मिल गए थे. मैं उनकी बेटी के साथ हमेशा खेलता रहता था. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं उस हुस्न की मल्लिका को कभी चोद पाउँगा. लेकिन वो कहते हैं न कि नसीब जब हो मेहरबान तो गधा भी बन जाता है पहलवान.

दीवाली की छुट्टियां शुरू हो चुकी थी और सभी बच्चे अपने – अपने घर जा चुके थे. हमारे होस्टल में बस मैं और भाभी की फैमिली ही बच गए थे. शुरू के दो दिनों तक तो सब ठीक – ठाक ही रहा. मैं भी अपनी ज़िन्दगी में खूब मस्त था क्योंकि वैसे भी मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से उनकी प्राइवेसी भंग हो. इसलिए उन लोगों से मेरी उतनी बातचीत भी नहीं होती थी.

लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था. एक दिन रात के 1 बज रहे थे और मुझे नींद नहीं आ रही थी. तभी मेरा मन हुआ कि क्यों न छत पर टहल आऊं और फिर यहीं से शुरू हुई भाभी और मेरी कहानी.

हुआ कुछ यूं कि जैसे ही मैं गेट खोल कर बाहर निकला. बाहर मुझे किसी की हल्की – हल्की आवाज़ें सुनाई पड़ी. मैंने ध्यान से सुना तो पाया कि ये आवाज़ें छत पर से आ रही थी. यह सोच कर मैं चौंक गया कि इतनी रात गए छत पर कौन हो सकता है. मैं उत्सुकतावस दबे पांव छत की ओर बढ़ चला. मैं नहीं चाहता था कि उसे ये पता चले कि कोई और भी है जो उसे सुन रहा है.

मैं सीढ़ियों पर जाकर छुप गया और उस आवाज़ को ध्यान से सुनने लगा. जब मैंने ध्यान से सुना तो पाया कि ये तो भाभी की आवाज़ थी. यह जान कर मैं और भी ज्यादा उत्सुक हो गया कि इतनी रात गए भाभी कहां और किससे बात कर सकती हैं. यही जानने के लिए मैंने उनकी बातों की ओर और ध्यान लगाया तो पाया की भाभी अजीब – अजीब बातें कर रही थी.

खैर वो किससे बात कर रही थी ये तो पता नहीं चल पा रहा था लेकिन मैं इतना जरूर समझ गया था कि वो सेक्स की बातें ही कर रही थी. उनकी बातें को सुन कर मेरा भी लन्ड खड़ा हो गया था और अब मेरे विचार भी बदल रहे थे.

पहले कभी भी मेरे मन में भाभी के बारे में गंदे विचार नहीं आए थे, लेकिन आज लग रहा था कि छत पर जाकर अभी उनको पकड़ कर चोद दूँ. लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था. मैं करीब 10 मिनट तक वहां खड़ा रहा और उनकी बातों को सुनता रहा.

इतनी सेक्सी बातें सुन कर मेरा लन्ड तो पूरा टाइट हो गया था लेकिन भाभी की बातें अभी भी ख़त्म नहीं हो रही थी. इसलिए मैंने सोचा कि चलो भाभी न सही मेरा हाथ तो है ही. यही सोच कर मैं भाभी की बातें सुन कर उनके नाम की मुठ मारने लगा. उनकी बातें इतनी सेक्सी थी कि मेरा जल्दी ही गिर गया.

अब मुझे डर लग रहा था कि अगर अभी छत पर से भाभी नीचे आएंगी और अगर मेरा स्पर्म देख लेगी तो हो सकता है कि भैया को बोल कर मुझे डाँट भी सुनवाए. लेकिन फिर मेरा शैतानी दिमाग जागा और मैंने सोचा कि क्यों न एक ट्राई मारा जाये. अगर आईडिया चल गया तो ऐसी मस्त माल चोदने के लिए मिलेगी. यही सोच कर मैंने अपना गिरा हुआ स्पर्म ऐसे ही छोड़ दिया, ताकि भाभी उसको देखे और वो मेरे बारे में सोचे.

फिर मैं अपने रूम में आकर चुपचाप सो गया. सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं सबसे पहले ऊपर गया और उस जगह का निरीक्षण किया जहाँ रात में मैंने स्पर्म गिराया था. मुझे वो जगह बिल्कुल ही साफ़ सुथरी मिली. तो मैं चौंक गया, क्योंकि उस जगह को देख कर यही लग रहा था कि उसे अच्छे से साफ़ किया गया है तो मैं समझ गया कि भाभी नहीं चाहती हैं कि इन सब बातें के बारे में भैया को पता चले.

दूसरे दिन सुबह के करीब 8 बजे होंगे. मैं छत पर धूप सेंक रहा था. तभी भाभी कपड़ों को छत पर फैलाने आई. मैं ये सोच कर उनसे नजर नहीं मिला रहा था कि पता नहीं वह मेरे बारे में क्या सोचेंगी. लेकिन भाभी ने हसते हुए मुझे गुड मॉर्निंग विश किया तो मैंने भी रिप्लाई में विश कर दिया. इसके अलावा हमारे बीच कुछ और बातें नहीं हुई और भाभी भी कपड़ों को टांग कर चली गयी.

अब मैं भी नीचे जाने के लिए सीढ़ियों की ओर बढ़ा ही था कि अचानक मेरी नजर भाभी की ब्रा और पैंटी पर पड़ी. जो कि वही पर पड़ी हुई थी. ये पहली बार था जब भाभी ने अपनी ब्रा और पैंटी को ऐसे खुले में सूखने को डाल दिया था. मैं समझ गया कि ये इशारा है कि भाभी जल्द ही चुदने वाली हैं. मैं समझ गया था कि ये तो मेरे लिए खुला इनविटेशन है.

खैर मैं चुपचाप से उनकी पैंटी को वहां से उठाया और अपनी जेब में ड़ाल कर नीचे आ गया. नीचे आ कर मैंने उनकी पैंटी को अपने तकिये के नीचे छुपा दिया और फिर अपने कामों में लग गया. शाम को जब मैं छत पर गया तो भाभी वहीं पर थी और वो कुछ ढूंढ भी रही थी और थोड़ी परेशान सी लग रही थी. मैं तो समझ गया था कि भाभी क्या ढूंढ रही हैं लेकिन मैंने ऐसे दिखाया कि जैसे मुझे सच में कुछ पता नहीं था. मैंने भाभी से पूछा – भाभी, आखिर आप क्या ढूंढ रही हो.

तो उन्होंने थोड़ा सा हँसते हुए कहा – अरे, बहुत कीमती सामान खो गया है.

मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा – ऐसा क्या सामान है, मैं भी तो जानू जरा.

वो बोली – जानकर क्या करेगा, अरे पहनने वाला ही सामान था वो भी पर्सनल.

मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा – आप बताइये तो क्या था. मैं कल ही आपके लिए बाजार से नए ला दूंगा.

इतना सुनकर वो खिलखिला कर हँसने लगी और बोली – रहने दो तुम नहीं ला पाओगे.

फिर मैंने बहुत जोर दिया तो बोली – अरे मेरी पैंटी नहीं मिल रही है.

तो मैंने कहा – इसमें कौन सी बड़ी बात है. मैं कल ही आपके लिए नयी पैंटी ला दूंगा.

वो बोली – धत्त पागल नहीं तो.

मैंने कहा – जो भी समझ लो लेकिन मैंने पहले ही कह दिया था न कुछ भी होगा मैं कल आपके लिए जरूर ला दूंगा, तो अब तो लाना ही पड़ेगा.

उस समय हमारे बीच बस इतनी ही बातें हो सकी और फिर वो मुस्कुराते हुए नीचे चली गई. फिर रात के करीब 12 बजे मैं उठा और चुपचाप भाभी की पैंटी को तकिए के नीचे से निकाल और छत पर चला गया ताकि अकेले में भाभी की पेंटी को देख कर मुठ मार सकूँ. लेकिन एक तरफ डर भी था कि अगर भाभी ऊपर आ गयी तो दिक्कत हो जायेगी.

लेकिन दोस्तों खड़े लण्ड के आगे किसी की नहीं चलती फिर मेरी क्या औकात. मैं भी भाभी की पैंटी लेकर छत पर चला गया और अपने मोबाइल में ब्लू फ़िल्म चला कर भाभी की पेंटी को अपने लन्ड पर पहन कर जोरों से मुठ मरने लगा था.

जब मैं करीब 10 मिनट लन्ड हिला चुका था कि तभी मुझे अचानक लगा कि मेरे पीछे कोई खड़ा है. जब मैं पीछे मुड़ कर देखा तो डर से मेरी हालत ख़राब हो गयी. क्योंकि भाभी पीछे ही खड़ी थी. अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ क्या न करूं. तभी भाभी ने गुस्से में मुझसे पूछा – ये क्या कर रहे हो तुम मेरी पैंटी के साथ, रुको कल मैं भैया से बोल कर तुम्हारी छुट्टी करवाती हूँ.

मैं बहुत डर गया था कि अब क्या होगा. लेकिन मैंने पारी को सँभालते हुए कहा – ठीक है भाभी, बोल दो लेकिन आप रात में कहाँ बात करती हो मैं भी भैया को बता दूंगा.

ये सुनते ही भाभी हँसते हुए बोली – अरे वाह राहुल, तुम तो बहुत तेज़ निकले लेकिन एक बात जान लो तुम्हारे भैया को पता है कि मैं कहां बात करती हूँ.

तो मैंने डरते हुए कहा – भाभी, आपको भैया के रहते हुए इस सब की क्या जरुरत है कि आप दुसरों से सेक्स चैट करती हो. क्या भैया आपको चोदते नहीं.

मेरे मुंह से ऐसी बातें सुनकर वो गर्म होने लगी तो तभी मैंने एक और बाज़ी खेल दी कहा – अगर आपको सेक्स का इतना ही शौक है तो हम क्या मर गए हैं जो आप गैरों से ऐसी बातें करती हो?

तो वो खुश होते हुए बोली – क्या तुम मुझे वो सुख दे सकते हो जो तुम्हारे भैया नहीं दे पा रहे हैं.

मैंने हँसते हुए कहा – आप जैसी हुस्न की मल्लिका को कौन नहीं ठोकना चाहेगा.

इतना सुनना ही था कि वो मेरे होठों पर अपने हॉट एंड सेक्सी होठों को रख दिया और चूसने लगी. मेरा लन्ड तो कब से खड़ा था. मैंने भी उनका साथ देना शुरू कर दिया. कुछ ही देर के बाद मैंने कहा – भाभी, सब यहीं करना है या बेडरूम में चलें.

तो वो बोली – अच्छा फिर तो तुम्ही ले चलो.

तो मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा कर अपने बेडरूम में ले गया और उन पर टूट पड़ा. कुछ देर की चुम्मा – चाटी के बाद मैंने कहा – बस यही करना है या आगे भी कुछ करना है.

तो उन्होंने कहा – कैसी बात करते हो जान! मैं तो आज तुमको कच्चा ही चबाने वाली हूँ. इतना कह कर उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और फिर पैंट भी उतार दिया और फिर मेरी चड्डी भी उतार दी. अब मैं बिल्कुल ही नंगा हो गया था. मेरा लन्ड देख कर वो बोली – आज तो लग रहा है मैं दिल खोल कर चुदूँगी.

फिर इतना कह कर वो मेरा लण्ड चूसने लगी. मैं भी उसकी गांड में उंगली करता जा रहा था. उनके द्वारा कुछ देर तक मेरा लन्ड चूसने के बाद मेरा पानी निकल गया क्योंकि मैं पहले भी अपना लन्ड हिला चुका था. उसने कहा – इतनी जल्दी हो गया राजा.

मैंने कहा – ओये मेरी रानी, देखती जाओ मेरा कमाल.

इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और फिर उसकी पैंटी भी फाड़ डाली और उनकी चूत को चाटने लगा. करीब 10 मिनट की चूत चटाई के बाद उसकी चूत ने पानी का एक फव्वारा छोड़ दिया. जिसको मैं पूरा का पूरा पी गया.

अब वो मेरे लण्ड के साथ फिर से खेलने लगी. कुछ ही देर बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया. इस बार देर न करते हुए सीधा मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर सेट किया और एक जोर का धक्का दिया. मेरा लण्ड बिना किसी परेशानी के अंदर घुसता चला गया. मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं जन्नत में हूँ.

तभी हमें भाभी की बेटी के रोने की आवाज़ सुनाई दी, तो भाभी ने जल्दी से मुझे साइड में किया और अपने कपड़े ठीक करके अपनी बेटी के पास नीचे चली गयी और हमारी चुदाई अधूरी ही रह गई.

अगली बार फिर से दुबारा मौका मिलने पर मैंने भाभी जबरदस्त चुदाई की थी. लेकिन वो कहानी फिर कभी.

तो दोस्तों ये थी मेरी एक सच्ची कहानी. प्लीज आपलोग मुझे मेरे ईमेल [email protected] पर बताएं कि मेरी यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी.

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