मेरी क्लासमेट की चुदाई

उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसने मुझे “आइ लव यू” बोला। मुझे यकीन नहीं हो रहा था। मैंने भी उसको “आई लव यू” बोला और उसके होठों को चूसने लगा। हम दोनों के जिस्म अब एक दूसरे से चिपके हुए थे. हमारे अन्दर की आग भड़क गयी थी. हम दोनों एक दूसरे में समा जाना चाहते थे……….

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम मनीष है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 वर्ष है और मेरा लंड 8 इंच लम्बा है। आज मैं अपने जीवन की एक सच्ची घटना आप लोगों क साथ बाँटना चाहता हूँ। मुझे आशा है आपको मेरी ये कहानी जरुर पसंद आएगी।

मैं अपने गाँव से ग्रेजुएशन करने के लिए दिल्ली आया था। मेरा एडमिशन दिल्ली के एक कॉलेज में हुआ था। मैं इस शहर में नया था। इस लिए मैंने एक पी।जी लिया था। कॉलेज में मुझे एक लड़की पसंद आई थी जिसका नाम स्वाती था। उसका बदन मानो जैसे संगमरमर से तराशा गया था। उसके चूचे तो मानो खुले आमंत्रण दे रहे हों।

कॉलेज के पहले दिन से ही मैं उसका दीवाना हो गया था। उसका फिगर साइज़ 34-30-36 का होगा। वो मेरी ही क्लास में थी और इत्तेफाक से वो मेरी पी।जी के सामने वाले घर में ही रहती थी। मैं पढने में काफी तेज़ था इसलिए क्लास में सभी लोग धीरे धीरे मेरे दोस्त बन चुके थे।

हमारी हलकी- हलकी बातें होती थी। पर मैं उसे अन्दर ही अन्दर चाहने लगा था और उसको चोदने के लिए बहुत बेताब था। पर मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मैं अपने दिल की बात उसको कैसे बताऊं।

फिर वक्त निकलता गया और दो महीने तक बस देखा- देखी ही होती रही। क्यूँकि दिल्ली की लड़की से दोस्ती करने की हिम्मत तो नहीं थी मुझ में। पर भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। आखिर मुझे मौका मिल ही गया।

हमें अपने प्रोजेक्ट सबमिट करवाने थे और स्वाती का असाइनमेंट शायद अधूरा रह गया था तो उसने मुझसे मदद मांगी। मैं भी राज़ी हो गया। उसने मुझे रात 8 बजे अपने घर आने को कहा। मैं उसके बताये हुए समय पर उसके घर पहुंच गया। मैंने उसका डोर बेल बजाया तो उसने दरवाजा खोला।

जैसे ही दरवाजा खुला तो मैं उसको बिना पलक झपकाए देखता रहा। क्या माल लग रही थी वो? मानो आसमान से कोई परी उतर कर आई हो। आज तो वो जैसे कामसूत्र की कोई देवी लग रही थी। उसने काला टॉप और ब्लैक मिनी स्कर्ट पहन रखी थी। और उसके बूब्स बहुत सेक्सी लग रहे थे। मन तो कर रहा था की उसको अभी पटक कर चोद दूँ।

लेकिन मैंने खुद पर काबू रखा और मैंने पूछा- आंटी-अंकल कहा गए?

तो उसने जवाब दिया- मामा के यहाँ गए हैं। कल सुबह तक आयेंगे।

मैंने मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा किया। फिर वो अपने बेडरूम में लेकर गयी और हम वहाँ उसका बचा हुआ काम पूरा करने में लग गये। मैं चुपके से कभी- कभी टॉप में से झांकते हुए उसके चूचे चोर नजरों से देख लेता था, जो उसके टॉप में से थोडा नीचे झुके हुए थे और बाहर आने के लिए बेताब हो रहे थे। उसे शायद शक हो गया था की मेरी नज़र उसके चूचों पर है।
लगभग 9 बजे तक हमने अपना काम ख़तम कर लिया। फिर हम बातें करने लगे। अचानक से उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा तो मैंने अपना हाथ पीछे खींच लिया।

उसने कहा- क्या हुआ?

मैंने कहा- कुछ नहीं।

वो मेरे करीब आई और कहा- मुझे पता है कि तुम मुझे चाहते हो।

उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसने मुझे “आइ लव यू” बोला। मुझे यकीन नहीं हो रहा था। मैंने भी उसको “आई लव यू” बोला और उसके होठों को चूसने लगा। हम दोनों के जिस्म अब एक दूसरे से चिपके हुए थे। हमारे अन्दर की आग भड़क गयी थी। हम दोनों एक दूसरे में समा जाना चाहते थे।

हम दोनों इतने गरम हो गए थे कि हम एक दूसरे की जीभ और एक दूसरे का थूक भी पीने लगे थे। उसकी चुदास बढ़ने लगी थी। मैने उसको उठा कर बेड पर लिटा दिया और उसका टॉप उतार दिया उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी।

मैंने उसके बूब्स मसले और उसके चूचे को चूसने लगा। वो सिस्कारियां भर रही थी और मेरे सर को अपने चूचों में दबा रही थी। मैंने भी अपने कपडे उतारे। अब मैं बस अंडरवियर में था। फिर मैंने उसकी स्कर्ट भी खोल दी। उसने अन्दर पेंटी भी नही पहनी थी।

दोस्तों! उसकी चूत आअह्ह्ह्ह!!! क्या खुशबू थी? एक बाल तक नहीं था उसकी चूत पर। उसने शायद आज ही साफ़ किये होंगे। मैंने उसकी चूत पर अपनी उँगलियाँ फिराई। आह्ह्ह क्या गर्मी थी उसकी चूत में? मानो जैसे की लोहे की भट्टी गरम हो।

मैंने उसकी चूत पर अपना मुंह लगाया और उसकी चूत को चूसने लगा। और उसकी चूत में अपनी जीभ अन्दर तक डालकर चाटता। स्वाती तो मानो जैसे किसी जन्नत में पहुँच गयी हो। उसकी सिस्कारियों से पूरा कमरा भर गया था। थोड़ी ही देर में उसकी चूत से पानी निकल गया जिसे मैंने पी लिया।

आह्ह क्या पानी था उसकी चूत का? उसी की तरह नमकीन। अब उससे बिल्कुलरहा नहीं रहा जा रहा था। उसने कहा – अब जल्दी से चोदो!

मैंने अपना लंड निकाला और स्वाती को चूसने के लिए बोला। उसने फटाक से लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। मानो जैसे कोई आइसक्रीम चूस रही हो। थोड़ी देर बाद मैंने स्वाती को कुतिया बनाया और पीछे से ही लंड उसकी चूत में डाल दिया।

पहले झटके में ही स्वाती की चूत में मेरा आधा लंड घुस गया। उसके मुंह से “उई माँ” की जोर से चीख़ निकल गयी। वो मुझसे अपना लंड बाहर निकालने की विनती करने लगी। लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और झटके मारता चला गया।

उसकी चूत से थोड़ा सा खून निकल आया था। शायद ये उसकी पहली चुदाई थी। लगभग 10 मिनट बाद, वो कुछ सामान्य हुई और अपनी चूत को उचका- उचका कर मेरे लंड पर धक्का देने लगी। शायद उसको भी अब मज़ा आ रहा था। मैंने भी उसकी चूत पर अब ताबड़तोड़ हमले बोल दिए।

उसकी आअह्ह्ह्ह्ह्ह ऊईईइ की आवाज़ से मेरा जोश बढ़ता गया और मैं फिर उसकी चूत में जोर- जोर से झटके मारता गया। लगभग 1 घंटे की जबरदस्त चुदाई के बाद वो और मैं साथ साथ झड गये।

फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लिपटे रहे। उसने मुझे आज रात अपने घर पर ही रुकने को कहा। मैं मान गया और उस रात हमने पांच बार चुदाई की। पांचवी बार में मैंने उसकी गांड भी मारी।

तो दोस्तों ये थी मेरी पहली चुदाई। उसके बाद मैंने उसकी एक सहेली को भी चोदा पर वो कहानी अगली बार। तब तक के लिए अलविदा।

और हां मुझे बताइएगा जरुर कि आपको मेरी पहली चुदाई कैसी लगी। मैं आप सभी लोगों के मेल का इंतज़ार करूँगा।

मेरी मेल आईडी है- rahul।[email protected]

 

 

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