मेरी प्यारी पड़ोसन

मेरे पड़ोस में एक आंटी रहती थीं. एक बार किसी कारणवश उनके पति ने उनकी चुदाई करना बन्द कर दिया तो उन्होंने मुझे अपना सहारा बनाया. मैंने जम कर उनकी चूत बजाई और उनके भरे बदन का खूब मजा लिया…

अन्तर्वासना के मेरे प्यारे दोस्तों, खूबसूरत लड़कियों और सेक्सी आंटियों को मेरा नमस्कार! मेरा नाम वंश है और मैं नागपुर का रहने वाला हूं. मैं भी आप लोगों की ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं और आज मैं आप लोगों के सामने अपनी जिंदगी के उन हसीन पलों को साझा करने जा रहा हूं, जिन्हें आम तौर पर लोग दूसरों को नहीं बताते.

अब ज्यादा टाइम वेस्ट न करते हुए मैं सीधा अपनी कहानी पर आता हूं. बात कुछ महीने पहले की है. हाल ही में मेरे डिप्लोमा के आखरी वर्ष के एग्जाम खत्म हुए थे और मै रिजल्ट का इंतज़ार कर रहा था.

दोस्तों, मेरे घर के पास ही एक परिवार रहता था. उस परिवार में अंकल, आंटी, उनका लड़का और उनकी लड़की थी. आंटी का नाम मोनिका था और उनकी मेरी मां के साथ बहुत बनती थी. इसलिए वो अक्सर हमारे यहां आती – जाती रहती थीं. घर आने पर कभी – कभी मैं भी आन्टी से बात कर लेता था और बीच – बीच में मैं उनके घर भी चला जाता था.

अंकल की पान की दुकान थी तो वह सुबह – सुबह वहां चले जाते थे और फिर रात में ही वापस आते थे. एक दिन दोपहर को मैं उनके घर गया. मैंने देखा कि आंटी की आंखों में आंसू थे और वो रो रही थीं. मुझे देख कर उन्होंने झट से अपने आंसू पोछ लिए लेकिन मैंने तो देख लिया था.

फिर वो गईं और किचन से पानी लाकर मुझे दिया. पानी पीने के बाद मैंने उनसे पूछा – क्या हुआ आंटी? आप रो क्यों रही हैं? आंटी बात टालने की कोशिश करने लगीं. लेकिन मैं नहीं माना और बार – बार पूछता रहा. मेरे जोर देने पर वो बताने लगीं कि अंकल के कमर की हड्डियों में फ्रैक्चर हो गया है. इसलिए डॉक्टर ने उन्हें कहा है कि अब वे कभी सेक्स नहीं कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि उसी का इलाज करवाने वे दिल्ली गये हैं.

उनकी बातें सुन कर मैंने कहा – अच्छा, तो ये बात है.

आंटी – हूं.

मैं – आप बुरा न मानो तो मैं आपकी मदद कर सकता हूं.

आंटी – तू क्यों और क्या मदद करेगा मेरी?

मैंने कहा – क्योंकि आंटी मैं आपसे प्यार करता हूं लेकिन डर की वजह से आज तक आपसे बताया नहीं.

मेरी बात सुन कर आंटी मुझे देखती ही रह गईं. फिर थोड़ी देर बाद बोलीं – ठीक है कल दोपहर में आ जाना, अभी तो बच्चे आते ही होंगे.

उनका जवाब सुन कर मैं खुश हो गया. फिर मैंने आंटी को एक लंबा किस किया और वापस घर चला आया. किस करने के दौरान आंटी ने भी मेरा पूरा साथ दिया था.

उस रात मैं आंटी के बारे में ही सोचता रहा और इस वजह से मुझे सारी रात नींद नहीं आयी. फिर जब मैं दूसरे दिन उनके यहां गया तो उस टाइम वो किचन में थीं. घर में औए कोई नहीं था. वहां पहुंच कर मैंने पीछे से उनकी कमर पकड़ ली और गले पर चूमने लगा. मुझे देख वो बोलीं – बड़ी जल्दी आ गया. मैंने कहा क्या करूं रहा ही नहीं गया.

फिर उन्होंने कुछ नहीं बोला. इसके बाद मैंने उन्हें गोद में उठाया और बेड पर ले जाकर पटक दिया. उनकी आंखें बंद थीं और सांस भी बहुत तेज हो गई थी. उनके साथ – साथ मेरी भी सांस की गति भी बढ़ने लगी थी. तभी मेरा एक हाथ उनके कान को छू गया. मैंने महसूस किया कि उनके कान लोहे की तरह तप रहे थे.

फिर मैंने अपना हाथ वहां से हटाया और उनके मम्मों को पकड़ कर साड़ी के ऊपर से मसलने लगा. मेरे ऐसा करने से आंटी ‘आहें’ भरने लगीं. फिर मैंने अपने दूसरे हाथ से उनकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर करने लगा. दोस्तों, उन्होंने काला पेटीकोट और नीली पैंटी पहन रखी थी.

साड़ी और पेटीकोट ऊपर करके मैं उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाने लगा. तभी आंटी ने एक बड़ी ‘आह’ भरी और मैंने अपनी एक उंगली उनकी चूत में पैंटी के ऊपर से ही डाल दी. उनकी चूत अंदर से चिपचपी और चिकनी हो चुकी थी. इसलिए उंगली के साथ पैंटी भी बिना किसी दिक्कत के अंदर चली गई.

अब मैं अपनी उंगली को हल्के – हल्के से अंदर – बाहर करने लगा था. उनकी चूत से लगातार काम रस बह रहा था, इस वजह से उनकी पूरी पैंटी गीली हो गई थी. उनके मुंह से ‘आह – आह’ अलावा और कोई आवाज नहीं निकल रही थी.

काफी देर तक मैं उंगली को अंदर – बाहर करता रहा. फिर जब उनसे कंट्रोल नहीं हुआ तो कहने लगीं – आहहह हहहह.. अब और मत तड़पा.. इसे निकाल और अपना लन्ड मेरे अंदर डाल जिसकी मुझे प्यास है.

तब मैंने अपनी उंगली बाहर निकाल ली और उनकी पैंटी को नीचे खींचने लगा. आंटी ने अपने चूतड़ ऊपर उठा दिए, इससे पैंटी निकालने में आसानी हो गई. फ़िर उन्होंने खुद ही अपनी साड़ी का पल्लू ब्लाउज के नीचे कमर तक उतार दिया और अपनी साड़ी भी कमर तक उठा ली.

अब मैंने अपने दोनों हाथों से उनके मम्मों को पकड़ा और मसलने लगा. साथ में उनके होंठों को भी चूस रहा था. बहुत मज़ा आ रहा था दोस्तों. क्या रस भरे होंठ थे यार. वो भी इन कामुक क्रियाओं में बहुत अच्छे से साथ दे रही थीं. हम एक – दूसरे को चूस रहे थे. काफी देर तक हम ऐसे ही चूमा – चाटी करते रहे.

फिर उनके गाल को चूमते हुए मैं उनके गले और नीचे मम्मों तक आकर ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें चूमने लगा. आंटी बहुत बुरी तरह से तड़प रही थीं. फिर मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए और साथ में उनकी लाल रंग की ब्रा को भी खींच कर निकाल दिया.

अब उनके नंगे मम्मे मेरे सामने थे. मैं उनके मम्मों को देख कर दंग रह गया. क्या गोरे और कड़क मम्मे थे! उन्हें देख कर मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने एक को मुंह में भरा और चूसने लगा. दूसरे को मैं अपने हाथों से मसलन रहा था.

ये खेल करीब 20 मिनट तक चलता रहा. कई बार मैंने उनके मम्मों को काटा भी लेकिन उत्तेजनावश वह कुछ नहीं बोल रही थीं बस सिसकारियां ही ले रही थीं.

फिर मैं नीचे आया और उनकी नंगी चूत पर मुंह लगा कर उसको चूसने लगा. उनकी चूत से लगातार निकल रहे काम रस का टेस्ट थोड़ा कसैला सा था लेकिन मज़ा खूब आ रहा था. दूसरी तरफ आंटी वासना की आग में झुलसी जा रही थीं.

उनको इस तरह तड़पता देख मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपने तने हए लंड को उनकी चूत के मुंह पर रख कर आंटी के ऊपर लेट गया. फिर मैंने उनके कान के पास मुंह ले जाकर हल्की आवाज में कहा – आंटी, अंदर डाल दूं? तो वे ज्यादा कुछ नहीं बोलीं बस ‘हूं हूं’ में जवाब दे दिया.

इतना सुनते ही मैंने एक धक्का लगाया तो मेरा आधा लंड उनकी चूत के अंदर घुस गया. लन्ड घुसते ही आंटी ज़ोर से चीख पड़ीं – आआआईई ईईईईईई… मार डाला. और फिर उन्होंने कस के मेरी पीठ को पकड़ा और मझे दबोच लिया. अब मैं और जोर – जोर से धक्के लगाने लगा.

करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद मैं नीचे आ गया और आंटी को ऊपर कर दिया. अब आंटी मेरे लन्ड के ऊपर अपनी चूत सेट करके बैठ गईं और ऊपर – नीचे उछलते हुए धक्के मारने लगीं.

अब मैं झड़ने वाला था तो फिर से मैंने उन्हें नीचे किया और खुद ऊपर आ गया. इसके बाद मैंने अपना पूरा दम लगा कर ज़ोर – ज़ोर से चोदना शुरू किया. उन्हें भी अब खूब मज़ा आ रहा था और वह भी अपनी गांड उठा – उठा कर मेरा साथ दे रही थीं. इसी बीच वह बोल पड़ीं – मेरे राजा, आज तक मुझे इतना मज़ा कभी नहीं आया.

तभी मुझे लगा कि मेरा होने वाला है तो मैंने अपने रफ्तार कम कर दी और मन को कहीं और ले गया. इससे मुझे कुछ समय और मिल गया. इतनी देर में वो दो बार झड़ चुकी थीं. फिर कुछ देर बाद मेरी गति अपने आप बढ़ती चली गई. वह समझ गईं कि मैं झड़ने वाला हूं तो वह बोलीं – मेरी चूत में ही झड़ना. इससे मुझे ठंडक पहुंचेगी.

फिर 4-5 झटकों के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया. इसके बाद कुछ देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे. उन्होंने मुझसे कहा कि तुमने आज पूरी कसर निकाल दी और मुझे संतुष्ट करके खुश कर दिया. यह सुन कर मैं मुस्कुराने लगा.

फिर थोड़ी देर बाद मैं उठा और उन्हें किस करके घर चला आया. तभी से मुझे आंटियां बहुत प्यारी लगने लगीं. कहानी में अगर कहीं कोई गलती हुई हो तो माफ करना. कहानी के संबंध में आप मुझे अपने सुझाव मेल कर सकते हैं. मेरी ईमेल आईडी – [email protected]

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