मोहबब्त की कहानी चुदाई की जुबानी

रिलेशनशिप के कुछ महीने बाद ही हमारे बीच किस करना, दूधू दबाना और चुत सहलाना, उसके हाथों से मेरा लंड सहलाना आम हो गया था. हम मैसेज में सेक्स चैट भी करते थे तो और अब तो हमें सेक्स करने की इच्छा भी होने लगी थी…

नमस्कार दोस्तों, मैं दिल्ली से हूँ और फिलहाल कोलकाता में रह कर मैं पोस्ट ग्रेजुएशन की अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ. दोस्तों, मैं नाम बताना पसंद नहीं करता हूँ क्यूंकि लोग नाम से इंसान के बारे में बहुत कुछ सोच लेते हैं और उसकी इंसानियत के बारे में नहीं सोचते.

फिलहाल मैं 21 साल का एक साधारण लड़का हूँ और मुझे लिखने का शौक है. मुझे शायरी लिखना मुझे बहुत पसंद है. दोस्तों, मेरी कहानी तब शुरू हुई जब मैं 12 वीं क्लास में था और उस समय मेरी उम्र 17 साल थी और मेरी कहानी की नायिका है मेरी मोहब्बत, जो 8 वीं क्लास से बिल्कुल मेरी दुश्मन की तरह थी पर वक़्त और हालात ऐसे बदले कि वही मेरी मोहब्बत बन गई.

दोस्तों, नाम बताने से कुछ हासिल नहीं होगा बस यही बताना चाहूंगा कि वो उत्तराखंड की वादियों की हसीं और खूबसूरत लड़की थी जिसे अगर कहीं पर भी थोड़ा सा कस के पकड़ के लिया जाये तो वो जगह लाल हो जाये.

उसके दूध ज़्यादा बड़े तो नहीं थे पर उन पर प्यारे से भूरे रंग के निप्पल उसकी खूबसूरती की मिसाल थी और उसकी प्यारी सी गुलाबी चूत जिस पर घुंघराले बालों का एक छोटा सा गुच्छा उसकी नज़र उतारता था. दोस्तों, मैं उसकी गांड का दीवाना था. जब भी वो चलती थी तो लोग उसको देख कर आहें भरा करते थे.

दोस्तों, अगर बात करें तो मेरा लंड ज़्यादा बड़ा नहीं है. मेरा लन्ड केवल सिर्फ 6 इंच का है और लन्ड की जैसी मोटाई होनी चाहिए वह वैसा ही है. दोस्तों, मेरा बदन औसत दर्जे का है. मैं दिखने में भी ज़्यादा अच्छा नहीं था पर ये मोहब्बत ही थी जो ऐसी खूबसूरत लड़की का मैं आशिक़ था और उसके जिस्म पे मेरा हक़ था.

रिलेशनशिप के कुछ महीने बाद ही हमारे बीच किस करना दूधू दबाना और चुत सहलाना, उसके हाथों से मेरा लंड सहलाना आम हो गया था. हम मैसेज में सेक्स चैट भी करते थे तो और अब तो हमें सेक्स करने की इच्छा भी होने लगी थी.

फिर एक दिन वो आ ही गया. उसने सेक्स के लिए हां बोल दिया था. उस दिन दिल्ली में जून की गर्मी में भरी दोपहर को मैं अपनी पहले चुदाई के लिए बाइक पर उसके घर की तरफ भागा.

दोस्तों, मैं अक्सर उसके घर जाता रहता था क्योंकि हम काफी पुराने दोस्त थे. उस वक़्त उसके घर पर उसकी दादी, माँ उसकी 2 बहनें और उसका एक छोटा भाई था. चूँकि उस घर में सिर्फ एक ही कूलर था और वो भी पहली मंजिल पर एक कमरे में लगा था. इसलिए वे सब पहली मंज़िल पर रहते थे. अब सिर्फ मैं और मेरी मोहब्बत अकेले कमरे में नीचे थे.

आखिर उस दिन हमारी मोहब्बत की एक नयी दास्ताँ शुरू ही हो गई. हमारे लबों से लब मिल गए थे और फिर एक – एक करके हमारे सारे कपड़े भी उतर गए. उसके संगमरमर से बदन का नाज़ारा बहुत ही दिलकश था. उसके बदन पर दो उठी हुई घाटियों और उस पर लगे फूल, अहा, बहुत हसीन था ये सब. उसका जिस्म एक दम मक्खन सा मुलायम था.

अब हम दोनों एक – दूसरे के जिस्म को हर तरीके से चूम रहे थे. ऐसा लग रहा था कि वक़्त ठहर सा गया है और पूरी दुनिया में हमारे अलावा कुछ और नहीं है. मैं उसके लबों से होता हुआ उसकी सुराहीनुमा गर्दन को चूमने लगा तो वो बेसाख़्ता मचलने लगी और आहें भरती रही. फिर मैं उसके दूधू को अपने हाथों से मसलने लगा. जिससे उसके दूध अब धीरे – धीरे लाल होने लगे थे.

फिर मैं उसके निप्पल के इर्द – गिर्द चूमने लगा. जिससे वो बेचैन होने लगी और मुझे पकड़ कर ज़बरदस्ती अपने निप्पल चुसाने लगी. उसके निप्पल अकड़ कर 1 इंच तक खड़े हो गए थे जो एक अलग ही मज़ा दे रहे थे.

फिर बारी आयी मेरी मोहब्बत का मुझे मज़ा देने की. अब वो पलट कर मेरे ऊपर आ गई और कभी मेरे सीने पर चूमने लगी तो कभी मेरे छोटे – छोटे निप्पल कुरेदने लगी. इसके बाद फिर जब नीचे जाकर उसने मेरे लंड पर अपनी ज़ुबान फिराई तो कसम से मेरा जिस्म कांपने लगा और उसकी गर्मी से मैं पिघलने लगा.

फिर जब उसने मेरे लंड को चूसना शुरू किया तो मुझे जन्नत सा मज़ा आने लगा और यूँ ही कुछ 3 – 4 मिनट में मैं स्खलित हो गया और मेरी मोहब्बत ने मेरे लन्ड से निकला पूरा जाम ख़ुशी – ख़ुशी पी लिया.

अब उसे खुश करने की मेरी बारी थी. मेरा लंड तो जन्नत में जाने के लिए पहले से ही अकड़ कर तना हुआ था ( दोस्तों, मेरा लंड एक बार स्खलित होने के बाद भी खड़ा रहता है और बिन रुके मैं लगातार सेक्स कर सकता हूँ). फिर मैं उसकी टाँगो के बीच आया और उसकी टांगों को फैला कर देखने लगा.

चूँकि यह मेरा पहली बार था तो मुझे ठीक से लन्ड घुसामा नहीं आता था. इसलिए मेरी मोहब्बत ने खुद ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और धक्का देने का इशारा किया. उसका इशारा मिलते ही मैंने एक झटका दिया और मेरे लन्ड का टोपा उसकी चूत में घुस गया.

जिससे उसके मुंह से एक हल्की सी चीख निकल गई और फिर हमारे लबों से लब फिर मिल गए. फिर इसी बीच मैंने मौका देख कर एक और झटका दिया और मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. उसके चूत से खून की धार निकलने लगी और दर्द की वजह से उसकी आँखों से आंसू बहने लगे.

जो दर्द का फ़साना था वो जब ख़त्म हुआ तो मोहब्बत की गाड़ी चलने लगी और हर एक झटके पर आहे निकलने लगी. ऐसा लगने लगा कि अब जो भी है बस सेक्स ही है. पूरी दुनिया में इससे ज़्यादा मज़ा किसी और चीज़ में नहीं है.

फिर कुछ ही देर में वो हर झटके पर अपनी कमर उठा कर साथ देने लगी और उसके मुंह से लगातार आवाज निकल रही थी – ज़ोर से और ज़ोर से

कुछ 15 मिनट की हसीन चुदाई में उसका 2 बार पानी निकला और जब मेरी बारी आयी तो उन्होंने मेरा सारा माल अपने दूध पर निकलवाया फिर चूस – चूस के मेरे लंड को साफ कर दिया और फिर सहलाने लगी.

दोस्तों, इस तरह हमने मोहब्बत की नयी इबारत को लिखा. उस दिन बंद कमरे में ही हमें असली जन्नत का मज़ा आया. उसके बाद फिर मैंने उनकी गांड भी मारी थी. जिसमें वो बेहोश हो गई थी.

उसके बाद फिर तो हमने कई जगह सेक्स किया. मैंने उनको दिल्ली की बस में भी अपना लंड चुसाया और पानी पिला दिया था. हमने सिनेमा हॉल के गर्ल्स टॉयलेट में जाकर भी सेक्स किया था (एक बार पकडे भी गए थे). दोस्तों, हमारा सबसे मज़ेदार सेक्स एक मेट्रो स्टेशन के गर्ल्स टॉयलेट हुआ जहाँ हमने बहुत बार सेक्स किया था. उस दिन सीआईएसएफ की एक लेडी बगल के टॉयलेट में थी और बगल में हम सेक्स का मज़ा ले रहे थे.

तो दोस्तों, ये था मेरी ज़िंदगी का एक किस्सा. अब मैं तन्हा हूँ और किसी हसीना का इंतज़ार है. आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताएं. मेरी मेल आईडी है – [email protected]

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