मुंह बोली बहन को उसके घर में चोदा

मेरे बगल में एक आंटी रहती थीं. वो मुझे अपने बेटे जैसे मानती थीं. लेकिन मैंने उनकी अनुपस्थिति में उनके ही घर में जाकर उनकी बेटी और अपनी मुंह बोली बहन को चोद दिया…

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम विकास है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. मेरा लन्ड 9 इंच लम्बा है और मैं अभी 24 साल का नौजवान युवक हूँ. मैं दिखने में भी अच्छा – खासा हूँ और मेरा बदन भी मस्त है.

अब मैं आप लोगों का ज्यादा टाइम न वेस्ट करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आता हूँ. मेरी ये कहानी पिछली सर्दी की है. तब मैं बाहर एक रूम ले कर बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था. मेरे घर के बगल में ही एक आंटी भी रहती थीं. उनकी उम्र 40 साल के आसपास थी.

आंटी के एक लड़की थी. जिसका नाम सिमरन है. हालांकि, घर वाले उसे सिमी कह कर बुलाते थे. वो बहुत ही खूबसूरत थी. जब भी मैं उसे देखता था तो मेरा लन्ड 90 डिग्री पर खड़ा हो जाता था. दोस्तों, मैं अक्सर आंटी के यहां जाता था. उनके कोई लड़का नहीं था तो वो मुझे अपने लड़के जैसा प्यार करती थी. इस नाते सिमरन मेरी बहन थी और मैं सबके सामने उसे बहन जैसी ही मानता था.

एक दिन की बात है. उस दिन मैं शाम को कॉलेज से वापस ही आया था कि तभी सिमी मुझे अपने ऊपर वाली टैरेस पर खड़ी दिखाई दी. वो इधर – उधर कुछ देख रही थी. उस दिन वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. उसे देखते ही मैं घर न जाकर सीधा उसके पास चला. वहां जाकर मैंने उससे कहा – क्या बात है! मेरी बात सुन कर वह मुस्कुरा दी और फिर चुपचाप नीचे चली गई.

उसका यह व्यवहार मुझे कुछ अजीब सा लगा लेकिन मैं समझ नहीं पाया. खैर, फिर मैं अपने घर चला आया. दोस्तों, आंटी एक स्कूल में टीचर थीं. अगले दिन जब वो स्कूल चली गईं तो सिमी मेरे घर आई. आते ही उसने मुझ पर सीधा सवाल दाग दिया.

सिमी – तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? उसके इस सवाल पर मैंने कहा कि नहीं, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है. यह सुन कर वो हंसने लगी और बोली – अच्छा, इतनी अच्छी पर्सनैलिटी होने के बावजूद कोई गर्लफ्रेंड नहीं बना पाया.

इस पर मैंने कहा – ऐसी बात नहीं है.

वह बोली – तो फिर कैसी बात है?

मैंने कहा – अभी तक मुझे तुम्हारे जैसी कोई लड़की मिली ही नहीं.

मेरे इतना कहते ही वो शांत हो गई. फिर कुछ देर तक ऐसे ही बिना हिले – डुले खड़ी रही. थोड़ी देर बाद उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरी आंख से आंख मिलकर बोली – अब तो मिल गई न! इतना कह के वो मुस्कुराने लगी. उसकी आंखों में मुझे एक कसक सी नज़र आ रही थी.

उसे देख मैं समझ गया कि आखिर आज दाल काली हो ही गई है. चूंकि मेरा रूम काफी खुला हुआ था और अंदर का सब कुछ बाहर तक दिखता था. इसलिए उसने मुझे कुछ देर बाद अपने घर आने को कहा और खुद निकल गई.

थोड़ी देर बाद मैं उसके घर पहुंच गया. वहां पहुंच कर मैंने देखा कि वो लाल कलर के गाऊन में मेरे सामने खड़ी है. फिर मैं अंदर चला गया. मेरे अंदर जाते ही उसने गेट बन्द कर लिया और आकर मेरे गले लग गई. थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा कि आज मुझे खुश कर दो.

फिर इतना कह कर वो मेरे होंठों पर किस करने लगी. अब मैं भी पूरी तरह से गर्म हो चुका था. फिर मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया. हम दोनों की ही के पहली चुदाई थी. इसलिए एक बार हमें घबराहट सी होने लगी. हालांकि, फिर हमने मैनेज कर लिया.

अभी मैं उसके बूब्स पर हाथ रख के उन्हें हल्के – हल्के मसल ही रहा था कि उसने कहा – इनको और जोरसे दबाओ न! फिर क्या था. अब मैंने उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके मम्मों को जोर – जोर से मसलना शुरू कर दिया.

इसी बीच उसने मेरे पैंट की ज़िप खोल दी और मेरे लन्ड को हाथ में लेकर उसकी मुठ मारने लगी. फिर मैंने एक ही झटके में उसका गाउन उतार दिया. अब वह केवल ब्रा और पैंटी में मेरे सामने रह गई थी. उसे इस रूम में देख कर मैं काफी उत्तेजित हो गया था.

फिर मैंने उसकी ब्रा को इतनी जोर से खींचा कि वह फट के मेरे हाथ में आ गई. इसके बाद मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और एक ही झटके में उसकी पैंटी की कैद से उसकी चूत को आजाद कर दिया. अब वह मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी.

इसके बाद मैंने अपनी पैंट और टी-शर्ट को उतार फेंका. अब मेरा लन्ड मेरी अंडर वियर को फाड़ कर बाहर आने को उतावला ही रहा था. यह देख कर वो हंसने लगी और फिर नीचे बैठ कर मेरे लन्ड को आजाद कर दिया और उसे मुंह में लेकर जोर – जोर से चूसने लगी.

वह बहुत अच्छे से लन्ड चूस रही थी. उसके लन्ड चूसने से मुझे गुदगुदी सी हो रही थी और साथ में उत्तेजना वश ऊह आह उह की आवाज भी निकल रही थी. थोड़ी देर बाद मेरे स्पर्म से उसका मुंह भर गया था. जिसे उसने थूक दिया.

इसके बाद उसने मुझसे अपनी चूत चाटने को कहा. दोस्तों, मुझे ऐसा करने में घिन आ रही थी, इसलिए मैंने मना कर दिया. इस पर वो थोड़ी देर के लिए नाराज़ हो गई.

झड़ने की वजह से मेरा लन्ड भी सुस्त पड़ा था. करीब 15 बाद वो फिर से तन गया. उसे खड़ा देख उससे रहा नहीं गया और फिर वह अपनी चूत को आगे करके बोली – अज मेरी इस चूत को फाड़ डालो.

तब मैंने पहली बार उसकी चूत को देखा. दोस्तों, उसकी चूत बहुत कसी हुई थी. फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूत के ऊपर लन्ड रख कर सहलाने लगा. इससे उसकी उत्तेजना अपने चरम पर पहुंच गई और वह बोली – अब ज्यादा मत तड़पाओ, जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो नहीं तो मैं प्यासी ही मर जाऊंगी.

फिर मैंने अपना लन्ड उसकी चूत के अंदर डाल दिया. उसकी चूत काफी टाइट थी इसलिए मेरा लन्ड अंदर जाने में काफी मुश्किल हुई और उसे दर्द भी बहुत हुआ. अभी मेरा आधा ही लन्ड अंदर गया था. वो जोर – जोर से चिल्लाने लगी और बाहर निकलने को कहने लगी.

लेकिन मैंने उसकी बात को अनसुना कर दिया. फिर उसने कहा कि निकालो इसे जल्दी से नहीं तो मैं मम्मी को बोल दूंगी. उसकी दोनों आंखों में आंसू थे और बेड सीट पूरी भीग चुकी थी. उसकी यह बात सुन कर तो एक बार मैं डर गया लेकिन फिर दूसरे ही पल मैंने सोचा कि अगर आज मैंने निकाल लिया तो फिर यह काफी हाथ न आएगी.

यही सोच कर मैंने एक और झटका लगा दिया. अब मेरा लन्ड पूरी तरह उसकी चूत में घुस गया. फिर मैं लन्ड को अंदर – बाहर करने लगा. थोड़ी देर में लन्ड ने अपनी जगह बना ली थी. अब तो वह बड़ी ही आसानी से सरक रहा था. कुछ देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी.

अब वह खुद अपनी चूत को आगे – पीछे करके लन्ड पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी. अब वह कहने लगी कि जान आज तुम मेरी चूत की आग बुझा कर मेरी वासना को शांत कर दो. आह जान आज मेरी चूत को फाड़ डालो. वो लगातार सिसकारियां ले रही थी.

उसकी सिसकारियां सुन कर मैं और भी ज्यादा एक्साइटेड हो गया और कुछ देर बाद जोर से चीखता हुआ उसकी चूत में झड़ गया. मेरे साथ ही उसकी चूत ने भी अपना पानी छोड़ दिया. जिसमें मेरा लन्ड गीला हो गया.

कुछ दिन के बाद फिर मैं आंटी के रूम में ही शिफ्ट हो गया. अब जब भी हमारा मन करता हम चुदाई कर लेते. हमें रोकने – टोकने वाला कोई नहीं था. क्योंकि उसके पापा दूसरे शहर में नौकरों करते थे और 6 महीने में एक ही बार घर आते थे.

दोस्तों, ये मेरी सच्ची कहानी थी. अगर आप लोगों को अच्छी लगी हो मुझे कमेंट करके जरूर बताएं.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *