मुंह में लंड लेकर पहली बार गांड मरवाई

अभी मैं अपने इन्हीं खयालों में खोया था कि उसने मुझे झुकाया और मेरे मुंह में अपना लंड डाल दिया. अब उसका सुपाड़ा मेरे मुंह में था, जो हल्की महक के साथ हल्का – हल्का द्रव भी छोड़ रहा था. उसकी वो महक और टेस्ट मुझे आज भी याद है…

हाय दोस्तों, मेरा नाम जय है. मेरी उम्र 24 साल है और मैं गुजरात के एक छोटे शहर का रहने वाला हूं. दोस्तों, मैं काफी समय से अन्तर्वासना की कहानियों को पढ़ रहा हूं तो आज मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी आप लोगों के लिए अपनी सच्ची कहानी लिखूं. अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली कहनी है. उम्मीद करता हूं आप लोगों को पसंद आएगी.

ये बात तब की है जब मैं 20 साल का था. दोस्तों, कहानी में आगे बढ़ने से पहले ही मैं आपको अपनी एक आदत के बारे में बता देना चाहता हूं. मुझे पहले से ही लड़कों के लौड़े देखना अच्छा लगता है.

एक दिन की बात है. रात को मैं घर जा रहा था. बारिश का मौसम था. रास्ते में मिट्टी में मैं फिसल कर गिर गया. तभी वहां एक आदमी आया और पहले तो उसने मुझे उठाया, फिर उसे मेरे कपड़ों पर मिट्टी लगी दिखी. उसे साफ करने के बहाने जैसे ही उसने मुझे छुआ, वैसे ही मेरे बदन में तो जैसे 440 वोल्ट का करंट लग गया हो. खैर, मैंने उसे जाहिर नहीं होने दिया.

फिर वो मुझसे बोला, “तुम्हें चोट लगी है, थोड़ी देर बैठ जाओ, यहीं बाजू में मेरा घर है, आराम होने पर मैं घर से बाइक लेकर तुम्हें छोड़ आउंगा. इस पर मैंने सोचा, चलो ये भी ठीक ही है, थोड़ा रेस्ट हो जाएगा.

फिर मैं उसके साथ उसके घर चला गया. वहां पर वो अकेला था. यह देख कर एक बार तो मेरे मन में खयाल आया कि कहीं मुझे अकेला पाकर ये कुछ कर ना ले. लेकिन फिर अगले ही पल खयाल आया कि सब के मन में सेक्स ही थोड़ी होता है.

इसी बीच उसने मुझे बैठने को कहा और खुद चाय बनाने चला गया. मेरे कई बार मना करने के बाद भी वो नहीं माना और चाय बना लाया. फिर हम चाय पीने लगे और चाय पीते – पीते बातें भी करने लगे.

चाय पीने के बाद वो वो बोला कि दिखाओ देखूं जरा कहां लगा है? इतना कहने के बाद उसने मुझे खड़ा होने के लिए कहा और पहले कपड़ों के ऊपर से मेरी गांड को सहलाया, बाद में उसने धीरे से मेरे पैंट को नीचे किया और मेरे चूतड़ को यहां – वहां छूने लगा.

फिर धीरे – धीरे उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया, मैं खिंचता चला जा रहा था. पता नहीं मुझे क्या हो गया था! मैं कुछ बोल ही नहीं पा रहा था. अपनी ओर खींचने के बाद उसने मुझे अपनी गोद में बिठाया और मेरा लौड़ा पकड़ के हिलाने लगा.

थोड़ी देर बाद मुझे उसका खड़ा लौड़ा उसके पैंट के अंदर से ही मुझे महसूस होने लगा था. वह लगातार मेरा लंड हिलाता जा रहा था. दोस्तों, उसके ऐसा करने से मैं बिल्कुल पागल सा हो गया था. उस दिन पहली बार किसी मर्द ने मुझे छुआ था.

कुछ देर ऐसा करने के बाद उसने मुझे उठाया और मेरी गांड में हल्के से एक उंगली डाल दी. मुझे थोडा दर्द हुआ और इस वजह से मेरी चीख निकल गई. अब वह अपनी उंगली मेरी गांड में डाले हुए ही धीरे – धीरे उसे हिलाने लगा, उसके ऐसा करने से थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हो गया और मुझे भी मज़ा आने लगा.

फिर उसने अपने पैंट की चेन ख़ोला और अपना हलब्बी लौड़ा निकल कर मेरे हाथ में थमा दिया. कसम से दोस्तों, उसका लौड़ा कम से कम 8 इंच लम्बा तो रहा ही होगा. उसे देख कर मेरी तो आंखें खुली की खुली रह गईं. मैं सोचने लगा कि उसका सफेद रंग का वो मोटा लौड़ा अगर मेरी गांड में चला जाए तो मेरी गांड ही फट जाए.

अभी मैं अपने इन्हीं खयालों में खोया था कि उसने मुझे झुकाया और मेरे मुंह में अपना लंड डाल दिया. अब उसका सुपाड़ा मेरे मुंह में था, जो हल्की महक के साथ हल्का – हल्का द्रव भी छोड़ रहा था. उसकी वो महक और टेस्ट मुझे आज भी याद है.

अब मैं धीरे – धीरे उसका लौड़ा चुस्की ले के मजे से चूस रहा था. पूरे कमरे में एक दम शन्ति थी, सिर्फ मेरी चुस्की की आवजें ही आ रही थीं. तकरीबन 5 से 10 मिनट के बाद उसका गरम लावा मेरे मुंह में भर गया. इस दौरान उसने मेरे मुंह को ऐसे पकड़ रखा था कि मैं चाहूं भी तो उसका लौड़ा मुंह से निकाल नहीं सकता था. उसने तब तक मेरा सिर नहीं छोड़ा जब तक उसके लंड से वीर्य की एक – एक बूंद रिस कर मेरे मुंह में नहीं चली गई.

मैं उसका पूरा माल गटक गया. मैं भी नहीं चाहता था कि वो मेरा सिर छोड़े क्योंकि मैं काफी दिनों से खुद किसी का लंड मुंह में लेने के लिए बेताब था. लेकिन मुझे क्या पता था कि अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है, आगे तो बहुत कुछ होना बाकी है.

फिर थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम गया. वहां मैंने अपना मुंह धोया और खुद को फ्रेश किया. इसके बाद मैं वहां से निकला और जैसे ही पैंट पहनने जा रहा था, वैसे ही उसने कहा कि अभी मत पहनो, पहले थोड़ी देर के लिए इधर तो आओ. मैंने सोचा कि शायद फिर से मुंह में देगा, और लंड चूसने में मुझे कोई ऐतराज नहीं था, इसलिए मैं उसके पास चला गया.

लेकिन ये क्या! मैंने देखा कि इस बार उसने अपने लौड़े पर ट्यूब जेली जैसा कुछ लगा रखा है. मुझे अपनी ओर आता देख उसने मुझसे कहा, “आओ मेरी जान, आकर मेरी गोद में बैठ जाओ”. दोस्तों, मैं आपको बता देना चाहता हूं कि इससे पहले मैंने कभी भी गांड नहीं मरवाई थी. इसलिए मैं डरता हुआ उसके पास गया.

पास पहुंचने पर उसने मेरी गांड में वो ट्यूब लगाई और फिर अपना सुपाड़ा मेरी गांड में डालने लगा. मेरी गांड कुंवारी थी, इसलिए मुझे तेज दर्द हुआ और मैं उसे ऐसा करने से मना करने लगा. वो रुक गया. उसे रुका देख मैंने सोचा कि चलो, अच्छा हुआ, बच गया लेकिन मैं गलत था. उसने मुझे उल्टा सुलाया और फिर मेरे ऊपर चढ़ कर एक ही झटके में सीधा आधा लंड मेरी कुंवारी गांड में डाल दिया.

मुझे बहुत तेज दर्द हुआ और मेरी आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया. मेरी आंखें भर आईं. मैं रोता और चिल्लाता रहा लेकिन उसने कोई रहम नहीं दिखाई. बस धक्के लगाता रहा. थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा. हालांकि, पहली बार होने के कारण मुझे दर्द भी हो रहा था. लेकिन अब मैं कुछ नहीं बोल रहा था.

धीरे – धीरे उसके धक्कों की रफ्तार भी बढ़ती गई. करीब 15 मिनट तक वह तेजी से धक्के लगा कर मुझे चोदता रहा. फिर अचानक ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ और उसका लावा मेरी गांड में भर गया. फिर वह मेरे ऊपर ही लेट गया. थोड़ी देर बाद मैं उठा, मैंने अपने कपड़े पहने और वह मुझे मेरे घर तक छोड़ आया. इसके बाद मैंने कई और लड़को से भी अपनी गांड चुदवाई है. कहानी कैसी लगी? मुझे मेरी मेल आईडी – [email protected] पर मेल करके बता सकते हैं.

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